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मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को नापने...

मेरी नर्म हथेली पर अपने गर्म होंठों के अहसास छोड़ता चल पड़ता है वोऔर मै अन्यमनस्क सीदेखती हूँ अपनी हथेलीकाश वक्त रूक जाये,बस जरा सा ठहर जायेलेकिन तुम्हारे साथ चलते घड़ी की सुईयां भी दौड़ती सी लगती है धीरे से मेरा हाथ मेरी गोद में रखकर,हौले से पीठ थपथपाता है वोअ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  December 25, 2015, 10:53 am
बहुत दिन हुए नहीं लिख पाईलिखती तो तुम भी जान पातेवो हजारों अनकही बातेंजो रात दिन बुनती हैं ख्वाबख्वाब जिसमें होते हो तुम और तुम्हारा खयालजब हम मिले थे पिछली दफ़ामेरे खयालों की पोटली सिमट गई थीतुम्हारे इर्द-गिर्दचुपचाप खामोशी के साथलेकिन मैमै नहीं रह पाई थी खामोशबति...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  December 24, 2015, 12:27 pm
दिन बहुत हुये...दिन नहीं साल हुये हैंहाँ सालों की ही बातें हैजाने कितनी मुलाक़ातें हैगिन सकते हैं हम उँगलियों पर लेकिनदिन...महिने...साल...गिन लेने के बाद भीगिनकर बता सकोगे!बाल से भी बारीक उन लम्हों को जो बिताये है तुम्हारे साथ और साथ बिताने के इंतज़ार में ढुलकते आँसु...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  November 3, 2015, 12:16 am
दोस्तों फ़ेसबुक पर विचित्र- विचित्र लोग बैठे हैंं, इधर उधर से कुछ भी उठाते हैं और लाइक शेयर बटोरते हैं, अभी एक महाशय  ने कहा कि क्या मै आपके अल्फ़ाज़ से बनी कविता मेरे नाम से पोस्ट कर सकता हूँ तो एक बार मैने सोचा क्या हर्ज़ है करने में, लेकिन मेरे ये अल्फ़ाज़ किसी खास के लिये थ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  June 23, 2014, 7:54 am
बनिये की बीवी बनियाईनपंडित की बीवी पंडिताईनया कहें किपति पर पत्नी का अधिकारया फिर पत्नी को विरासत मे प्राप्तऎसी कुर्सीजो मिल गई ब्याहता बनते हीकुछ भी कहेंगें...लेकिन खुद कोडॉक्टर की बीवी डॉक्टरनीमास्टर की बीवी मास्टरनीकहलाने वाली पत्नियाँउतारी जा सकती हैंकभी भ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  March 14, 2014, 9:03 pm
ये ज़िंदगी किताब हैबस इक हसीन  ख्वाब हैपढ़ी गई, कि छोड़ दी,आधी पढी ऒ मोड़ दीजो जान के अंजान हैकहे कि दिल  नादान हैपल-पल यही खिताब हैगलतियाँ बेहिसाब हैखाई कसम ओ तोड़ दीरंगत भी सब निचोड़ दीये छाँव है वो धूप हैये प्रीत है वो भूख हैचेहरे पे इक नकाब हैफिर भी ये लाजवाब हैये ज़िंदगी ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  March 5, 2014, 12:33 pm
जब से सिमट गया हैसारा घर मोबाइल मेंइमोशन खो गये हैं व्वाट्स अप की स्माइल मेंबच्चे सामने आने से कतराते हैंअब बस मोबाइल पर हीबतियाते हैंपहले यदा-कदाप्यार भरे दो बोल कह दिया करते थेडाल गले में बाहेंझूल लिया करते थेअब तो मोबाइल पर हीमुस्कुराते हैंटाटा बाय-बायहाथ ह...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  March 2, 2014, 8:43 am
कितनी बार कहा हैदीवार से चिपकी मत सुना कर लोगों की बातेंमगर वो न मानी थी, आखिरकार गुस्से मे आ हाथ की पँखी सेकाट डाली थी पूँछ आम्गुरी लोहारिन नेकुछ देर बिलबिलाती रहीऔर शाँत हो गई, मगर वो जिद्दी पूँछ कटी होकर भी सुनती रही लोगों की बातें, कितनी बार कहा है धीरे ब...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  January 10, 2014, 2:31 pm
नही पड़ता फर्क तेरे कुछ न कहने सेतेरे दूर होने या पास होकर भी न होने सेकिन्तु होती है बेचैनीभर जाती हूँ एक अज़ीब सी चुप्पी सेया चहकती हूँ बेवजह मैकैसी कशमकश है मुझे खुद से जुदा किये हैफिर भी नही कह पातीये खुदकुशी है...शानू...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  January 8, 2014, 12:55 pm
कसमकसम खाई थी दोनों ने,एक ने अल्लाह की-एक ने भगवान की-दोनों ही डरते थे,अल्लाह से भगवान सेमगर...उससे भी अधिक डर था उन्हेंखुद के झूठे हो जाने का,उस पाक परवर दिगार से-मुआफ़ी माँग ली जायेगीकभी भीअकेले में॥...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  December 30, 2013, 5:24 pm
कल बड़े दिन की खुशी में हम भूल गये उन सड़क किनारे के बच्चों को जिनके आगे से न जाने कितने सांता गाड़ियों में आये और रेड लाईट से होकर गुजर गये। उसी एक वाकये पर यह कविता लिखी है...देखिये जरा...तेरी किस्मत बाबूथोड़ा सा दे दो..मेरी क्रिसमस...नही… तेरी किस्मतनही बच्ची कहो मेरी क्रिसमस...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  December 26, 2013, 7:48 am
आज बहुत तेज़ बारीश आई बस यूँही लिख डाला एक पैगाम  उस आवारा बादल के नाम जो एक हवा के झोंके से कहीं भी बरस जाता है...गुगल से साभारबहुत दिनों से घुटन सी घिर आई थी कली-कली भीकुम्हलाई थीप्यास कोई एकभटक रही थीधरती सीबिन पानी के तड़प  रही थीरुकी-रुकी सी सांसों नेआधी-अधूरी बातों ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  September 26, 2013, 10:26 pm
ये वो कविता है जिसे हिन्दी के अक्षरों में लिखने में बहुत समय लग गया था। मै देवनागरी से परीचित नही थी और बहुत मुश्किल से सुषा फोंट्स का जुगाड़ कर लिख पाई थी। इसके बाद कृति देव और अब बराहा देवनागरी :) बहुत ही आसान हो गया है हिन्दी लिखना...Ref :-102_sunita         DATE_05.08.2006   uk tku...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  September 21, 2013, 6:49 pm
दोस्तों एक कहानी लिखी है "एक अकेली" कहानी के भीतर की कविता यहाँ प्रस्तुत है ये खत कहानी की नायिका सौम्या ने अपने प्रेमी शेखर को लिखा था उसी खत का थोड़ा सा अंश प्रस्तुत है...आज पहली बार चली हूँ दो कदमतुम्हारे बिनआज पहली बार कुछ किया है मैनेतुमसे कहे बिन तुम्हारी नार...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  September 10, 2013, 5:57 pm
मन पखेरु का विमोचन न हुआ बीरबल की खिचड़ी बन गई जिसे सुनीता जी पकाये जा रही हैं...पकाये जा रही हैं। क्यों यही सोच रहे थे न आप?  :)  देखा आखिर मैने आपके मन की बात भी पढ़ ही ली है। खैर खाने को तो तैयार हैं न खिचड़ी... तो दोस्तों बात शुरु होती है तब से जब मेरे दिल में कविताओं को ए...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  July 8, 2013, 4:41 pm
“मन पखेरु उड़ चला फिर” मेरी इकलौती पुस्तक का एक बार नही दो बार विमोचन हुआ। बहुत ही निराली बात है दोस्तों लेकिन मुझ जैसे निराले लोगों से आप उम्मीद कर ही क्या सकते थे? अब बात आती है बहुत सारी बातों की कि रिपोर्ट छप गई समीक्षाऎं हो गई। यानि की जो होना था हो चुका अब खबर बासी हु...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  May 26, 2013, 10:29 pm
ऊँ नमः शिवाय...मेरे और तुम्हारे बीचएक मौन पसरा हुआ हैअनन्तकाल सेमगर फिर भी मै समझती हूँ, तुम्हारे इसमौन की परिभाषामेरे हर सवाल पर-तुम मौन ही रहते हो-क्योंकि तुम जानते हो-जवाब भी तो-मुझे मेरे अनुरुप ही चाहियेतुम कुछ पूछते नहीमगर मै सब बताती हूँ तुम्हेंमुझे पता है तुम्हा...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  March 30, 2013, 6:02 pm
होली मुबारक हो आप सभी को...रंगों की होली सजायें रगोंलीहुये तुम मेरे मै तुम्हारी होली…आओ मिटा दें दूरियाँ दिलों सेज़िंदगी सजा दें आज रंगों सेभुला दें गिले-शिकवे सारे औ’रंगों की होली सजायें रगोंलीहुये तुम मेरे मै तुम्हारी होली…ज़िंदगी की बाज़ी लगा दी मगरन हम हारे न तु...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  March 26, 2013, 6:40 pm
कहोगे कि कोई नया संग्रह बन रहा है या कोई बात है? किसी से प्यार का चक्कर तो नही। अब बताओ  ये तमाम बातें होंगी क्या तभी कविता बनेगी। ये फ़ेसबुक भी बड़ी अज़ीब जगह है दोस्तों... न लिखने दे न पढ़े आखिर कोई करे तो क्या करे :(दो चार ठौ कविता बन पड़ी सो है सो यहीं पर ठेले जा रहे हैं... :)उस...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  March 1, 2013, 12:53 am
सुप्रभात मित्रों... सुबह-सुबह माथा खराब हो उससे पहले चलिये कुछ हॉस्य हो जाये... :)सेल की दुकान देखते देखतेएक आदमी नरक के दरवाजे आ गयायमराज को देख घबरा गयाबोला हे महाराजइतनी जल्दी क्यों मुझे बुलायाअभी तो मेरा समय नही आयायमराज बोला तुम्हें बुलाया नही गया हैतुम खुद चले आये...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  February 23, 2013, 10:40 am
मेरा बनाया रेखाचित्र (मन पखेरु उड़ चला फिर काव्यसंग्रह से)कितना मुश्किल हैखुद को समझानाकि ऎ दिलखुद से दिल लगानाउसकी हर बात परजो मुस्कुरा देती हूँन समझना कि उसेसचमुच भुला देती हूँआंखों की नमीबता देती है उसेमेरा रोते-रोतेमुस्कुराना...जिसको थामे रहीहर पल बांहे मेरीकि...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  February 22, 2013, 8:06 pm
आनंदकृष्ण जी द्वारा लिखी गई भूमिका आप भी पढ़िये। उनके द्वारा लिखी गई भूमिका पढ़कर मै अपनी कविताओं से परिचित हुई हूँ....आनंदकृष्ण जी खुद एक अच्छे कवि हैं तथा आलोचक भी हैं। उनके द्वारा मेरी कविताओं की समालोचना मेरे लिये सौभाग्य की बात है...( कविता संग्रह “मन पखेरू उड़ चला फ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  February 20, 2013, 2:58 pm
यादों की स्याही से लिखा थाजो खत तुमनेहर शब्द चूमा हैअधरों नेतुम्हें याद करकि जैसे उभर आई होतस्वीर तुम्हारीइन शब्दों मेंतुम दूर हो मुझसेयह कह भी दियाकिसने तुम्हेंसाँसों का कहना हैकि येतुमसे होकरसमा जाती हैमुझमेंजब भी उठती है सीने मेंएक लहर-सीतुम आते होऔर हाथ अपना र...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  February 12, 2013, 4:37 pm
सुप्रभात मित्रों,जाने कब से मेरे दोस्त, मेरे अपने मुझसे सवाल कर रहे थे कि मै अपनी कविताओं को संग्रह का रुप कब दूँगी। हर बार बुक फ़ेयर में पहला सवाल यही होता था कि मेरा संग्रह कब आयेगा। जिसकी खबर खुद मुझे भी नही थी। परन्तु मेरे दोस्तों का स्नेह उनकी दुआएं जल्दी ही रंग लाई ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  February 4, 2013, 7:30 pm
माँ आज फिर ’तुम’याद आने लगी होकई सालों से नही मिला आँचल तुम्हारा’वो आँचल’ जिसकी ओट मेंखेलती थी छुपछुपाईवो आँचल जिसके कौने सेपोंछती थी तुम मेरे आँसूउसी आँचल की छाँव मेंबसता था मेरा नन्हा संसारकई बार तुमसे डाँट खा करछुपा लेता था वही आँचलमाँ आज फिर तुमबहुत याद आने लगी ...
मन पखेरू उड़ चला फिर आसमाँ को ना...
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  January 24, 2013, 7:13 pm
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