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Blog: मन पखेरू उड़ चला फिर

Blogger: सुनीता शानू
तुम जब भी उदास होते हो मै उन वजहों को खोजने लगती हूँ जो बन जाती है तुम्हारी उदासी की वजह और उन ख़ूबसूरत पलों को याद करती हूँ जो मेरी उदासी के समयतुमने पैदा किये थेमुझे हँसाने व रिझाने के लियेकाश! कभी तो मिटेंगे एक साथ ये उदासी के काले बादलजब हम दोनों कोनहीं करना ... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   5:17pm 3 Sep 2019 #कविता
Blogger: सुनीता शानू
रिश्ते निभाये जा रहे हैं सीलन, घुटन और उबकाई के साथरिश्ते निभाये जा रहे हैं दूषित बदबूदार राजनीति के साथरिश्तों में नही दिखती जरूरत अपनापनरिश्ते दिखने लगे हैं दंभ के चौले सेमेरी तमाम कोशिशें नाकाम करने की ख़्वाहिश मेंरिश्तों ने ओढ़ ली है काली स्याह चादरडर है कही... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   11:31am 21 Aug 2019 #
Blogger: सुनीता शानू
*फिर मिलेंगे*ये मिलना मिलाना या फिर कहना कि फिर मिलनाया मिलने के लिये बस कह देनाकि फिर कब मिलोगेमिलने का एक दस्तूर है बसमिलने को जो मिलते हैंवे कहते कब हैं मिलने कीमिल ही जाते हैं मिलने वालेजिनको चाह है मिलने कीकहने भर से गर कोई मिलतामिल ही जातान रहती उम्मीद की को... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   10:59am 11 Aug 2018 #
Blogger: सुनीता शानू
 बढे जा रही हैं उम्र और मेरी उम्र के साथ-साथ बढ रहे हो तुम भीऔर तुम्हारे साथ जी रही हैं मेरी उम्मीदें, मेरे ख्वाबमै एक अलग ढँग की माँ हूँशायद अपनी माँ से भी अलगमैने तुम्हें भी पा लिया था बचपन के अनछुये ख्वाबों मेंवो ख्वाब जो शायद कम ही देखे जाते हैंवो ख्वाबजिन... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:37pm 31 Aug 2017 #
Blogger: सुनीता शानू
इंतज़ार तेरे पास आने काइंतज़ार तुझे देख भर लेने काइंतज़ार तुम्हे गले से लगा लेने काइंतज़ार तुम्हारा माथा चूम कर हौले से हाथ दबाने काइंतज़ार यह कहने का कि मै हूँ तुम्हारे लियेइंतज़ार तुझसे मिलने कामिलकर शिकायत करने काकि तुम अब तक अकेले कैसे रहेशिकायत यह भी कितुमको अ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:43pm 31 Jul 2017 #
Blogger: सुनीता शानू
सैंड टू ऑल की गईतुम्हारी तमाम कविताओं मेंढूँढती हूँ वो चंद पंक्तियाँजो नितान्त व्यक्तिगत होंगीजो लिखी गई होंगीकिसी ख़ास मक़सद सेकिन्हीं ख़ास पलों मेंसिर्फ मेरे लियेनहीं होगा उन परकिसी और की वाह वाही का ठप्पा भीलेकिनसैंड टू ऑल की गई सारी कवितायेंबिछी पड़ी हैं सबक... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   9:17am 30 Jul 2017 #
Blogger: सुनीता शानू
मेरी नर्म हथेली पर अपने गर्म होंठों के अहसास छोड़ता चल पड़ता है वोऔर मै अन्यमनस्क सीदेखती हूँ अपनी हथेलीकाश वक्त रूक जाये,बस जरा सा ठहर जायेलेकिन तुम्हारे साथ चलते घड़ी की सुईयां भी दौड़ती सी लगती है धीरे से मेरा हाथ मेरी गोद में रखकर,हौले से पीठ थपथपाता है वोअ... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   5:23am 25 Dec 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
बहुत दिन हुए नहीं लिख पाईलिखती तो तुम भी जान पातेवो हजारों अनकही बातेंजो रात दिन बुनती हैं ख्वाबख्वाब जिसमें होते हो तुम और तुम्हारा खयालजब हम मिले थे पिछली दफ़ामेरे खयालों की पोटली सिमट गई थीतुम्हारे इर्द-गिर्दचुपचाप खामोशी के साथलेकिन मैमै नहीं रह पाई थी खामोशबति... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:57am 24 Dec 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
दिन बहुत हुये...दिन नहीं साल हुये हैंहाँ सालों की ही बातें हैजाने कितनी मुलाक़ातें हैगिन सकते हैं हम उँगलियों पर लेकिनदिन...महिने...साल...गिन लेने के बाद भीगिनकर बता सकोगे!बाल से भी बारीक उन लम्हों को जो बिताये है तुम्हारे साथ और साथ बिताने के इंतज़ार में ढुलकते आँसु... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   6:46pm 2 Nov 2015 #
Blogger: सुनीता शानू
दोस्तों फ़ेसबुक पर विचित्र- विचित्र लोग बैठे हैंं, इधर उधर से कुछ भी उठाते हैं और लाइक शेयर बटोरते हैं, अभी एक महाशय  ने कहा कि क्या मै आपके अल्फ़ाज़ से बनी कविता मेरे नाम से पोस्ट कर सकता हूँ तो एक बार मैने सोचा क्या हर्ज़ है करने में, लेकिन मेरे ये अल्फ़ाज़ किसी खास के लिये थ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   2:24am 23 Jun 2014 #
Blogger: सुनीता शानू
बनिये की बीवी बनियाईनपंडित की बीवी पंडिताईनया कहें किपति पर पत्नी का अधिकारया फिर पत्नी को विरासत मे प्राप्तऎसी कुर्सीजो मिल गई ब्याहता बनते हीकुछ भी कहेंगें...लेकिन खुद कोडॉक्टर की बीवी डॉक्टरनीमास्टर की बीवी मास्टरनीकहलाने वाली पत्नियाँउतारी जा सकती हैंकभी भ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:33pm 14 Mar 2014 #
Blogger: सुनीता शानू
ये ज़िंदगी किताब हैबस इक हसीन  ख्वाब हैपढ़ी गई, कि छोड़ दी,आधी पढी ऒ मोड़ दीजो जान के अंजान हैकहे कि दिल  नादान हैपल-पल यही खिताब हैगलतियाँ बेहिसाब हैखाई कसम ओ तोड़ दीरंगत भी सब निचोड़ दीये छाँव है वो धूप हैये प्रीत है वो भूख हैचेहरे पे इक नकाब हैफिर भी ये लाजवाब हैये ज़िंदगी ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   7:03am 5 Mar 2014 #
Blogger: सुनीता शानू
जब से सिमट गया हैसारा घर मोबाइल मेंइमोशन खो गये हैं व्वाट्स अप की स्माइल मेंबच्चे सामने आने से कतराते हैंअब बस मोबाइल पर हीबतियाते हैंपहले यदा-कदाप्यार भरे दो बोल कह दिया करते थेडाल गले में बाहेंझूल लिया करते थेअब तो मोबाइल पर हीमुस्कुराते हैंटाटा बाय-बायहाथ ह... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   3:13am 2 Mar 2014 #
Blogger: सुनीता शानू
कितनी बार कहा हैदीवार से चिपकी मत सुना कर लोगों की बातेंमगर वो न मानी थी, आखिरकार गुस्से मे आ हाथ की पँखी सेकाट डाली थी पूँछ आम्गुरी लोहारिन नेकुछ देर बिलबिलाती रहीऔर शाँत हो गई, मगर वो जिद्दी पूँछ कटी होकर भी सुनती रही लोगों की बातें, कितनी बार कहा है धीरे ब... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   9:01am 10 Jan 2014 #
Blogger: सुनीता शानू
नही पड़ता फर्क तेरे कुछ न कहने सेतेरे दूर होने या पास होकर भी न होने सेकिन्तु होती है बेचैनीभर जाती हूँ एक अज़ीब सी चुप्पी सेया चहकती हूँ बेवजह मैकैसी कशमकश है मुझे खुद से जुदा किये हैफिर भी नही कह पातीये खुदकुशी है...शानू... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   7:25am 8 Jan 2014 #
Blogger: सुनीता शानू
कसमकसम खाई थी दोनों ने,एक ने अल्लाह की-एक ने भगवान की-दोनों ही डरते थे,अल्लाह से भगवान सेमगर...उससे भी अधिक डर था उन्हेंखुद के झूठे हो जाने का,उस पाक परवर दिगार से-मुआफ़ी माँग ली जायेगीकभी भीअकेले में॥... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   11:54am 30 Dec 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
कल बड़े दिन की खुशी में हम भूल गये उन सड़क किनारे के बच्चों को जिनके आगे से न जाने कितने सांता गाड़ियों में आये और रेड लाईट से होकर गुजर गये। उसी एक वाकये पर यह कविता लिखी है...देखिये जरा...तेरी किस्मत बाबूथोड़ा सा दे दो..मेरी क्रिसमस...नही… तेरी किस्मतनही बच्ची कहो मेरी क्रिसमस... Read more
clicks 273 View   Vote 0 Like   2:18am 26 Dec 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
आज बहुत तेज़ बारीश आई बस यूँही लिख डाला एक पैगाम  उस आवारा बादल के नाम जो एक हवा के झोंके से कहीं भी बरस जाता है...गुगल से साभारबहुत दिनों से घुटन सी घिर आई थी कली-कली भीकुम्हलाई थीप्यास कोई एकभटक रही थीधरती सीबिन पानी के तड़प  रही थीरुकी-रुकी सी सांसों नेआधी-अधूरी बातों ... Read more
clicks 207 View   Vote 0 Like   4:56pm 26 Sep 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
ये वो कविता है जिसे हिन्दी के अक्षरों में लिखने में बहुत समय लग गया था। मै देवनागरी से परीचित नही थी और बहुत मुश्किल से सुषा फोंट्स का जुगाड़ कर लिख पाई थी। इसके बाद कृति देव और अब बराहा देवनागरी :) बहुत ही आसान हो गया है हिन्दी लिखना...Ref :-102_sunita         DATE_05.08.2006   uk tku... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   1:19pm 21 Sep 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
दोस्तों एक कहानी लिखी है "एक अकेली" कहानी के भीतर की कविता यहाँ प्रस्तुत है ये खत कहानी की नायिका सौम्या ने अपने प्रेमी शेखर को लिखा था उसी खत का थोड़ा सा अंश प्रस्तुत है...आज पहली बार चली हूँ दो कदमतुम्हारे बिनआज पहली बार कुछ किया है मैनेतुमसे कहे बिन तुम्हारी नार... Read more
clicks 272 View   Vote 0 Like   12:27pm 10 Sep 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
मन पखेरु का विमोचन न हुआ बीरबल की खिचड़ी बन गई जिसे सुनीता जी पकाये जा रही हैं...पकाये जा रही हैं। क्यों यही सोच रहे थे न आप?  :)  देखा आखिर मैने आपके मन की बात भी पढ़ ही ली है। खैर खाने को तो तैयार हैं न खिचड़ी... तो दोस्तों बात शुरु होती है तब से जब मेरे दिल में कविताओं को ए... Read more
clicks 240 View   Vote 0 Like   11:11am 8 Jul 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
“मन पखेरु उड़ चला फिर” मेरी इकलौती पुस्तक का एक बार नही दो बार विमोचन हुआ। बहुत ही निराली बात है दोस्तों लेकिन मुझ जैसे निराले लोगों से आप उम्मीद कर ही क्या सकते थे? अब बात आती है बहुत सारी बातों की कि रिपोर्ट छप गई समीक्षाऎं हो गई। यानि की जो होना था हो चुका अब खबर बासी हु... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   4:59pm 26 May 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
ऊँ नमः शिवाय...मेरे और तुम्हारे बीचएक मौन पसरा हुआ हैअनन्तकाल सेमगर फिर भी मै समझती हूँ, तुम्हारे इसमौन की परिभाषामेरे हर सवाल पर-तुम मौन ही रहते हो-क्योंकि तुम जानते हो-जवाब भी तो-मुझे मेरे अनुरुप ही चाहियेतुम कुछ पूछते नहीमगर मै सब बताती हूँ तुम्हेंमुझे पता है तुम्हा... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   12:32pm 30 Mar 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
होली मुबारक हो आप सभी को...रंगों की होली सजायें रगोंलीहुये तुम मेरे मै तुम्हारी होली…आओ मिटा दें दूरियाँ दिलों सेज़िंदगी सजा दें आज रंगों सेभुला दें गिले-शिकवे सारे औ’रंगों की होली सजायें रगोंलीहुये तुम मेरे मै तुम्हारी होली…ज़िंदगी की बाज़ी लगा दी मगरन हम हारे न तु... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   1:10pm 26 Mar 2013 #
Blogger: सुनीता शानू
कहोगे कि कोई नया संग्रह बन रहा है या कोई बात है? किसी से प्यार का चक्कर तो नही। अब बताओ  ये तमाम बातें होंगी क्या तभी कविता बनेगी। ये फ़ेसबुक भी बड़ी अज़ीब जगह है दोस्तों... न लिखने दे न पढ़े आखिर कोई करे तो क्या करे :(दो चार ठौ कविता बन पड़ी सो है सो यहीं पर ठेले जा रहे हैं... :)उस... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   7:23pm 28 Feb 2013 #
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