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Blog: हमदम

Blogger: sachin
उदयपुर नाम का एक राज्य था। राजा रत्नेश का शासन चल रहा था। वे बड़े लापरवाह और कठोर प्रकृति के थे। राज्य में निर्धनता आसमान को छू रही थी। प्रजा रत्नेश का आदर-सम्मान करना भूल चुकी थी। राजा को प्रणाम-नमस्कार किए बिना लोग अपना मुख मोड़ लेते थे। प्रजा के व्यवहार से रत्नेश स... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   11:32am 15 Apr 2016 #राजा बदल गया
Blogger: sachin
एक बार दो राज्यों के बीच युद्ध कीतैयारियां चल रही थीं। दोनों के शासक एक प्रसिद्ध संत के भक्त थे। वेअपनी-अपनी विजय का आशीर्वाद मांगने के लिए अलग-अलग समय पर उनके पास पहुंचे।पहले शासक को आशीर्वाद देते हुए संत बोले, ‘तुम्हारी विजय निश्चित है।’दूसरेशासक को उन्होंने कहा, ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   10:01am 12 Jan 2014 #भाग्य और पुरुषार्थ
Blogger: sachin
एक मछुआरा था । उस दिनसुबह से शाम तक नदी में जाल डालकर मछलियाँ पकड़ने की कोशिश करता रहा , लेकिन एक भी मछली जाल में न फँसी ।जैसे -जैसे सूरज डूबने लगा , उसकी निराशा गहरी होती गयी । भगवान का नाम लेकर उसने एक बार और जाल डाला पर इस बार भी वह असफल रहा ,पर एक वजनी पोटली उसके जाल में... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   5:31am 8 Jun 2013 #प्रकृति और प्रारब्ध
Blogger: sachin
राजा भोज वन में शिकार करने गए लेकिनघूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचेबैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाएगुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तोदूर, तुरंत मुंह फेरकर जा... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   9:12am 3 Mar 2013 #मन का राजा
Blogger: sachin
एक किसान बहुत बूढ़ा होने के कारण खेतों में काम नहीं कर सकता था।  वह सारा दिन खेत के किनारे पेड़ की छाँव में बैठा रहता|  उसका बेटा खेत में काम करता रहता और रह-रह के सोचता कि  उसके पिता का जीवन अब व्यर्थ है क्योंकि वह कोई काम करने लायक नहीं रहे।  यह सोच-सोच कर उसका बेटा एक द... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:36am 1 Aug 2012 #ताबूत
Blogger: sachin
पर्वतरोहियों का एक दल एक अजेय पर्वत पर विजय पाने के लिए निकला। उनमें एक अतिउत्साही पर्वतरोही भी था , जो यह चाहता था कि पर्वत के शिखर पर विजय पताका फ़हराने का श्रेय उसे ही मिले । रात के घने अंधेरे में वह अपने तम्बू से चुपके से निकल पड़ा और अकेले ही उसने पर्वत पर चढ़ना आरंभ क... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   10:41am 2 Jul 2012 #पर्वतरोही
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एक ऋषि अपने आश्रम के बाहर टहल रहे  थे l उन्होंने देखा कि एक काली सी भया कृति वहां चली आ रही है। ऋषि  ने उसे रोका और पूछा, कौन हो तुम? वह बोली, मुनिवर मैं मौत हूं। यह सुनकर ऋषि हैरानी से बोले, तुम्हें अचानक इस गांव में आने की क्या जरूरत पड़ गई?मौत बोली, मुनिवर मैं कभी भी बिना बुल... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   8:25am 3 Jun 2012 #बोधकथा
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एक शिकारी प्रतिदिन शिकार करने जंगल जाया करता था . एक दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला और वह थक हार कर पेड़ के निचे बैठ गया . तभी उसकी नज़र पेड़ पर बैठी चिड़िया पर गयी . शिकारी ने तुरंत जाल फेंक कर चिड़िया को पकड़ लिया . चिड़िया के बहुत कहने पर भी शिकारी ने चिड़िया को नहीं छोड़ा . कुछ देर श... Read more
clicks 188 View   Vote 0 Like   8:50am 22 Apr 2012 #बोधकथा
Blogger: sachin
 एक शिकारी रोज जंगल जाकर पशु - पक्षियों का शिकार करता था।एक दिन उसे बहुत भटकने के बाद भी शिकार नहीं मिला।थककर वह एक पेड़ के निचे बैठ गया।पेड़ पर उसे चिड़िया बैठी दिखाई दी। उसने खुश होकर चिड़िया पर निशाना साधा तो चिड़िया बोली - भाई , मुझे मत मारो।यदि तुम मुझे छोड़ दो तो मैं तु... Read more
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रामगढ़ के राजा ने रूपल नामक व्यक्ति की बुद्धिमानी की चर्चा सुनकर उसे अपना मंत्री नियुक्त किया । रूपल निष्ठा व चतुराई से अपना कार्य करने लगा । एक दिन राजा के मन में विचार आया की रूपल की बुद्धिमता की परीक्षा लेनी चाहिए । उन्होंने रूपल को राजभवन में बुलाया और उसके सामने भ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   11:18am 5 Jun 2011 #बोधकथा
Blogger: sachin
एक राजा को पक्षी पालने का शौक था। अपने पाले पक्षिओ में एक बाज उन्हें इतना प्रिय था कि उसे वे अपने हाथ पर बिठाए रहते और कही जाते तो साथ ही ले जाते थे। एक बार राजा वन में आखेट करने गए। उनका घोड़ा दुसरे साथियों से आगे निकल गया। राजा वन में भटक गए। उन्हें बहुत प्यास लगी थी।घूम... Read more
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एक रात एक आदमी ने एक सपना देखा ।  उसने सपने में देखा कि वह और भगवान समुद्र तट पर साथ-साथ टहल रहे हैं ।  आकाश में उसकी बीती जिंद़गी के दृश्य चलचित्र की तरह चल रहे थे ।  उसने देखा कि उसकी जिंद़गी के हर पल में रेत में दो जोड़ी पैरों के निशान थे, एक उसके पैरों के और दूसरे भगवान ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   2:08pm 15 Apr 2011 #बोधकथा
Blogger: sachin
एक महात्मा थे। उनकी तपस्या का यह प्रभाव था कि हिंसक हिंसा को भूल गये। शेर और बकरी, सर्प और मेढ़क अपने जन्मजात वैर को भूल गये। उनकी तपस्या से इन्द्र का आसन डोलने लगा। इन्द्र ने अपने ज्ञान से देखा कि अब उसका पद टिक नहीं सकेगा। वहएक बटोही के रुप में महात्मा के आश्रम में आया... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   11:33am 5 Apr 2011 #बोधकथा
Blogger: sachin
एक मच्छीमार जाल लेकर नदी पर गया। उसने नदी में जाल फैलाया और किनारे पर बैठ गया। सन्धया के समय जब उसने जाल निकाला तो जाल में मछलियों केसाथ केकड़े भी थे। उसके पास दो टोकरियां थीं। उसने एक टोकरी में मछलियां भर कर उस पर ढक्कन लगा दिया और दूसरी टोकरी में केकड़े भर कर उसे खुला ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   11:04am 25 Mar 2011 #स्वाभाव का नतीजा
Blogger: sachin
एक गाँव में एक फकीर आए। वे किसी की भी समस्या दूर कर सकते हैं। सभी लोग जल्दी से जल्दी अपनी समस्या फकीर को बताकर उपाय जानना चाहते थे। नतीजा यह हुआ कि हर कोई बोलने लगा और किसी को कुछ समझ में नहीं आया। अचानक फकीर चिल्लाए. ‘खामोश’। सब चुप हो गए। फकीर ने कहा, “मैं सबकी समस्या दू... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   8:22am 14 Mar 2011 #बोधकथा
Blogger: sachin
एकबोधकथाजीवनमेंजबसबकुछएकसाथऔरजल्दी - जल्दीकरनेकीइच्छाहोतीहै , सबकुछतेजी सेपालेनेकीइच्छाहोतीहै , औरहमेंलगनेलगताहैकिदिनकेचौबीसघंटेभीकम पड़तेहैं , उससमययेबोधकथा , " काँचकीबरनीऔरदोकपचाय " हमेंयादआती है।दर्शनशास्त्रकेएकप्रोफ़ेसरकक्षामेंआयेऔरउन्होंन... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:00am 1 Jan 1970 #
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