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Blog: Dwarka Baheti 'Dwarkesh'

Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
                        धर्म का मर्म कर्म               | यतो अभ्युदयः निश्रेयसः सिध्दि सः धर्मः |ऐसे कर्म करना जिससे लौकार्थिक व पारमार्थिक दोनों के कल्याण की सिध्दि प्राप्त हो, हर मानव का धर्म है |ऐसे कर्म कैसे किये जाय, यह जानने से पहिले कर्... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   11:54am 10 Mar 2014 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
आधे-अधूरे हर पुरुष,चाहता है,अपनी स्त्री में,अलग-अलग, हजारों नारियों की,एक साथ, विशेषता |हर नारी,  चाहती है,अपने मर्द में,अलग-अलग पुरुषों की,एक साथ,क्षमता |जो नहीं सम्भव,इस जग में,किसी को भी,वो चाहे द्रोपदी हो, या-लीलामयी गोविन्दा |इस जग में,कोई भी नहीं होता है पूर्ण,और ना ही ... Read more
clicks 263 View   Vote 0 Like   5:45pm 14 Oct 2013 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
          मूर्तिपूजा का रहस्य  ईश्वर निराकार, निर्गुण, असीम, अनन्त व सर्वज्ञ है एवम् हम साकार, सगुण, ससीम, सान्त व अल्पज्ञ | ऐसी स्थिति में एक साधारण व्यक्ति अपना ईश्वर के साथ कैसे सम्बन्ध स्थापित करे, उसे कैसे समझे और कैसे उस सम्बन्ध को निरन्तर स्मरण रखे ? इस सम... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   10:09am 26 Sep 2013 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
साम्प्रदायिकता मेरा ईश्वर सबसे श्रेष्ठ,बाकी सबका एकदम निष्कृष्ट !इसका प्रमाण ?आओ आपस में लड़ लें,वाद से, विवाद से,हथियार से, उन्माद से,रक्त की धार से....जो जीतेगा उसका ही,वह,सर्वव्याप्त, सर्व कल्याणकारी,आनन्दमयी, प्रेमस्वरूप ईश्वर,होगा सबसे श्रेष्ठ !!!???... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   6:39pm 22 Sep 2013 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
      ज्ञानगधे पर लादे गए नमक सा,जानकारियों के पाण्डित्य का पुलन्दा,जिससे गधा तो अपनी जान छुड़ाना चाहता है,  क्योंकि वह जानता है, कि- यह तो है केवल एक बोझा |लेकिन, जिससे स्वयं को आभूषित समझ,अपने आप को समझदार समझने वाला हर इन्सान,उसे,हीरे-जवाहरात सा दिन-रात ढोता,जिससे वह सदै... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   10:16am 1 Apr 2013 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
  बहादुर बाला को श्रद्धांजलि तुम अनामिका होकर भी, चर्चित हो हर लब पर,तुम तो मर कर भी, हो गई सदा के लिए अमर,चेता दी आग करोड़ों मुर्दा दिलों मैं, चेतना की एक धधकती मशाल बन कर,तुम तो रहोगी जिन्दा, सदा हमारे दिलों में,हे देवी ! तुम्हें मेरा वन्दन शत-शत |तुम तो शहीद हो गई, मानवता की ब... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   12:05pm 2 Jan 2013 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
  बहादुर बाला को श्रद्धांजलि तुम अनामिका होकर भी, चर्चित हो हर लब पर,तुम तो मर कर भी, हो गई सदा के लिए अमर,चेता दी आग करोड़ों मुर्दा दिलों मैं, चेतना की एक धधकती मशाल बन कर,तुम तो रहोगी जिन्दा, सदा हमारे दिलों में,हे देवी ! तुम्हें मेरा वन्दन शत-शत |तुम तो शहीद हो गई, मानवता की ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   12:05pm 2 Jan 2013 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
               धर्म                 डॉ. द्वारका बाहेती        धर्म को लेकर इस दुनिया में जितने विवाद व दंगे हुए हैं शायद उतने किसी भी अन्य कारण से नहीं हुए होंगे | सभी मनुष्य अपने संस्कार या पूर्वाग्रह सिद्धान्तों के वशीभूत हो अपने-अपने धर्म को सर्वश्रेष्ट व दूसरे के धर्म को एकद... Read more
clicks 210 View   Vote 1 Like   6:42pm 23 May 2012 #गद्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
       मनुष्य- शाकाहारी या मांसाहारी ?   प्रकृति में सब कुछ नियमबद्ध है | उसमें जो कुछ भी घटता है उसको  वैज्ञानिक धरातल पर कसा जा सकता है | जब भी कोई उसके विरुद्ध जा उससे छेड़छाड़ करता है तो उसके दुष्परिणाम उसके साथ-साथ अन्य सभी को भी भोगना पड़ते हैं |        मानव, प्रकृति की सबसे प... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   8:50am 17 Nov 2011 #गद्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
       तम्बाकू की विनती मैं अलबेली तम्बाकू, प्यार करूँ गर्दभराज से,आकर्षित, सम्मोहित करती, उनको अपने महक भरे प्यार से |लेकिन उनको तो नफरत है, मेरी रंगत, खुशबू तक से,अतः जलभुन कर बनी विष-बाला, इर्षा, द्वेष, जलन, मत्सर से |पर मनुज दीवाना मुझ पर मरता, पागल, मतवाला हो कर,मजनूं सा पा... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   6:10pm 4 Nov 2011 #भाव-रस
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
 नज़र के नज़रिये नज़र-नज़र है, बड़ी अजब है |अखबार सी जिसमें, कई खबर है |नज़र के मटके, लटके, झटके |नज़र के तेवर, बड़े गजब है |नज़र महोब्बत,नज़र है नफ़रत | नज़र वफ़ा है, नज़र दगा है |नज़रप्यास है, नज़र जाम है |नज़र शराबी, नज़र है साकी |नज़र होंश है, नज़र नशा है |नज़र आग है, नज़र आब है |नज़र बेरहम, नज़र दया है |    नज़र ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   6:10pm 20 Sep 2011 #शृंगार रस
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
   अमृत- क्षण पनघट जाने निकली राधा,जिसका था अल्हड़ यौवन |साथ लिए अपनी मटकी,अपनी मस्ती, अपनी ही धुन |अस्त-व्यस्त सब चुनरी-चोली,आँचल उसका मचल रहा |बिखरे बाल घनघोर घटा से,मुखडा जैसे उसका चंदा  |मदमाती सी चली जा रही,वह दुनियाँ से बेखबर |गदराये अपने यौवन से,अन्जान, अनभिज्ञ वह ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   7:29pm 1 Aug 2011 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
    सफल – जीवन            १  सोचते ही रहते हैं, क्या करें, कैसे करें ?कौन सी राह चल, यह जीवन सफल करें ?कोई भी एक राह ले, चलें अडिग यदि अनवरत |मिल ही जायेगी मंजिल, होगा यह जीवन सफल |                २ फूटी हुई बाल्टी में भरा जीवन,निकलते ही जा रह... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   7:13pm 1 Aug 2011 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
 क्या यही प्यार है जिन्दगी की धुवांधार बारिश में,कमल पर पड़ी ओस की बूंद सा,एक अहसास,क्या यही है प्यार......?जिन्दगी के काँटों के बिछोने में,फूलों की पखुडियों सा,एक अहसास,क्या यही है प्यार........?जिन्दगी के साफ-सुथरे मरुस्थल में,गुलाबों से महकते गुलिस्ताँ सा,एक अहसास,क्या यही है ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   11:41am 27 Jul 2011 #शृंगार रस
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
      पूर्णांगिनी मैं अधूरा सा भटकता फिर रहा था,एक भ्रमर सा |कभी एक तो कभी दूसरे,रंग-बिरंगे फूल पर,मचलता था मन मेरा |कभी एक तो कभी दूसरी,खुशबू लुभाती थी मुझे |मैं असमंजस में पड़ा,यों ही भटकता फिर रहा था,बस अधूरा |फिर मिली तुम,और वे रंग-सौरभ,जिन्हें मैं,खोजता फिर रहा था,सब तुममे... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:31pm 3 Jul 2011 #शृंगार रस
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
मानवता जिन्दा है जंगल कट रहे हैं,हरियाली घट रही है,मरुस्थल बढ़ रहे हैं,फूल फिर भी खिलते हैं,बहारें फिर भी आती हैं |गंदगी बढ़ रही है,बदबू फ़ैल रही है,प्रदूषण के बादल छ रहे हैं |सूरज व चाँद फिर भी उगते हैं,मेघ फिर भी आते हैं,आसमां में छाते हैं,खुशहाली बरसते हैं |लूट-खसोट, मारकाट,ह... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:10pm 12 Jun 2011 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
          मेरा भारत महान  जब तक दावानल सी बढ़ती, जानलेवा भूख,और अकाल में सूखी धरती सी, प्यास बनी रहेगी |जब तक ठण्ड सा ठिठुरता, गरीब का नंगापन,और बाढ़ की तरह फैलता, आतंकवाद रहेगा |जब तक टीवी पर विज्ञापनों की तरह, बढ़ती बेरोजगारी,और भूकम्प की तरह निगल जाने वाली, बीमारियाँ रहेंगी |जब... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   2:05pm 1 May 2011 #हास्य-व्यंग्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
       संस्कारित-पौधा बच्चा होता, जैसे छोटा कोमल पौधा |बढ़ता अपनी ही मस्ती में, अपनी ही वह धुन में होता | लेकिन जग को नहीं पसंद, उसकी मस्ती उसकी धुन |उसे उसकी जग-जननी से उखाड़,रोपा सामाजिक गमले में,अपने-अपने मज़हब की मिट्टी डाल |फिर जैसे-जैसे बड़ा हुआ,शुरू हुआ उसको देना एक विशेष आक... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   10:20am 26 Apr 2011 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
 भावों का दर्पण    छुपा लो चाहे जितना मन में,छुपा नहीं पाता है चेहरा |दिल का हाल बता देता है,भावों का दर्पण है चेहरा |शांत, गंभीर जो होता चेहरा,सागर सा लगता है गहरा |भावनाओं से नयनों में, तब –प्यार सा उमड़े तूफां गहरा |उलझा माथा रेखाओं में,सिकुड़ापन चिंता बतलाती |गुस्से सी भौह... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   10:04am 22 Mar 2011 #भाव-रस
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
    शादीशादी,दो दिलों का सम्बन्ध,आत्माओं का मिलन,प्यार के धागों का बन्धन,न शिकवा, न शिकायत, न कोई प्रश्न,यह तो है बस पूर्ण समर्पण |या फिर,आधिपत्य, अधिकार,लेन-देन, एक व्यापर |मार-पीट, जीत-हार,झगड़ा-फसाद, एक तकरार ?या,बस एक समझौता ?या, किसी भी खूंटे से बाँधा हुआ,एक सामाजिक बन्धन ?... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   9:55am 22 Mar 2011 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
 होली पर प्रेमी-प्रेमिका की छेड़छाड़प्रेयसी –पिचकारी से रंगन की, काहे बौछार करत|कचनारी अंगन पे, मोहे है मार पड़त |भीग गई चुनरिया, लाज से मैं हूँ मरत |कजरारे नयन बची, काहे मोरी लाज हरत ?सर-सर-सर, सर-सर-सर, स र र र र, स र र र र,सर-सर-सर, सर-सर-सर, स र र र र ,स र र र र |प्रेमी – होली के रंगन में, ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   10:11am 18 Mar 2011 #हास्य-व्यंग्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
        नौटंकी दुनिया –  कठपुतली जीवनदौड़ा-भागी ,आपा-धापी ,रेलम-पेल ,धक्कम-धक्का |धमा-चौकड़ी ,हाथा-पाई ,भागम-भाग ,भीड़-भडक्का |तू-तू ,मैं-मैं ,बक-बक ,झक-झक ,उठा-पटक ,लटका-झटका |कूद-फांद ,धींगा-मस्ती ,अफरा-तफरी ,धक्का-मुक्का |छिना-झपटी ,मारा-मारी ,उछल-कूद ,धूम-धड़क्का |हडबड नौटंकी दुनिया ... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   10:34am 14 Mar 2011 #हास्य-व्यंग्य
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
   तीन तरह के आदमी इस दुनिया में होते हैं, तीन तरह के आदमी,एक ‘उ’ उल्लू की मात्रावाला ‘बुद्धू’, पागल, विक्षिप्त |जिसे सुख-दुख, जीत-हार, लाभ-हानि, कुछ समझ नहीं आता,इसीलिए वह हर हाल में, अपने को मस्त पाता |दूसरा वह जो ‘बुद्धू’ से ‘उ’ उल्लू की मात्रा को,अपने विवेक से हटा ‘बुद्ध’ ह... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   10:26am 14 Mar 2011 #
Blogger: द्वारका बाहेती 'द्वारकेश'
बहुरंगीजीवन मधुशाला १ मदिरालय बनने को कब से ,सारा जग है मतवाला |ऊपर छत नीले अम्बर की ,जड़ित चाँद ,मंडल-तारा |नीचे आँगन हरित अवनी का ,पर्वत,सागर,नदिया-धारा |रंग-बिरंगे फूलों से सजी ,प्यारी-प्यारी मधुशाला |२यह सुन्दर सुघड़ बदन मेरा ,बस इक पीने का प्याला |लयबद्ध प्राण जो बहते ,वही... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   5:39pm 23 Feb 2011 #जीवन मधुशाला
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