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Blog: Sahitya Surbhi

Blogger: Dilbag Virk
देखना खुद से होता है सुना दूसरों को जाता है दूसरे क्या सुनाते हैं आपको क्या सुनने को करते हैं विवश यह हाथ में नहीं आपके बहुत से शकुनीबहुत से दुर्योधन बहुत से धृतराष्ट्रअक्सर इतना शोर मचाते हैं कि दब जाती  है आवाज़ न सिर्फ़ भीष्मों की विदुरों क... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   1:52pm 24 Mar 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
कुछ आदत थी, कुछ मजबूरी है खामोशी मेरे लिए जरूरी है । उम्मीदें टूटती हैं यहाँ अक्सरख्बाव होंगे सच, उम्मीद पूरी है । बिक रहा है वो कौड़ियों के मोल आदमी की चमक तो कोहेनूरी है । रिश्तों में कुछ फर्क नहीं पड़ता धरती - चाँद में कितनी दूरी है । देर - सवेर नुक्सान उठाए... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   3:04pm 18 Mar 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
इस देश महान का, हुआ है ये हाल कहीं पर है दंगा, कहीं पर हड़ताल । रोशनी की बजाए घर जलाने लगा जिसके भी हाथों दी हमने मशाल । मुद्दों का कभी कोई हल नहीं निकला आयोग बैठे , हुई जाँच-पड़ताल । शर्मो-हया का जिक्र क्यों करते हो सफेद हो गया है, लहू न रहा लाल । तमाशा बन गया है य... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   3:08pm 11 Mar 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
सदा नहीं रहता ये खुशगवार मौसम खुशियों पर हावी हो ही जाते हैं गम । हालात बदलते कितनी देर लगे है आई महूबब की याद, हुई आँख नम । दिल टूटे, चाहे रुसवा हो मुहब्बत कब किसी की सुने, ये वक्त बेरहम । दोस्ती की अहमियत नहीं रही जब यहाँ क्या अहमियत रखेगी लोगों की कसम । नफर... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   1:21pm 4 Mar 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
मझधार ही मझधार हैं, कोई किनारा नहीं मतलबपरस्त दुनिया में, मिलता सहारा नहीं । वो तो कब के भूल चुके हैं कसमें वफ़ा की  याद करवाऊँ उन्हें, ये मुझे गवारा नहीं । हैवानों की दुनिया में न जाने कब हार जाऊँ अभी तक तो शराफत का लिबास उतारा नहीं । जी चाहता है, मस्त रहूँ बस अ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   12:28pm 25 Feb 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
जब तक रहेंगी नफ़रतें इस जहां में लुटती रहेंगी लोगों की मुहब्बतें । इंसां को न वो पूछते हैं, न हम बस सब कुछ होती जा रही सरहदें । न छटा अगर साया स्याह रात का कैसे सजेंगी खुशियों भरी महफ़िलें । मातम मनाते हैं मगर करते कुछ नहीं यूँ तो न लेगा कभी बुरा वक्त करव... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   1:21pm 18 Feb 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
मेरी हार की बात मुझे याद दिलाते रहे लोग आकर पास मेरे कहकहे लगाते रहे । सोचा था, छोड़ दूँ उसकी याद में पीना मगर यादों के साए मै-कदे तक लाते रहे । हमदर्दी जताने आए थे, उन्हें रोकता कैसे वो इसी बहाने मेरे जख्मों को सहलाते रहे । टूटे दिल ने कहा, क्या है जिंदगी के सफ़र म... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   12:02pm 11 Feb 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
अनोखे लाल जी को तो आप जानते ही होंगे ? क्या कहा !! नहीं जानते ? आप भी कमाल करते हैं। आपके शहर में, आपके मोहल्ले की आप वाली गली में, आपके घर के पास ही उनका घर है। रोज सुब्ह-शाम दुआ-सलाम भी होती है आपकी उनसे, फिर भी आप कहते हैं कि आप उन्हें जानते नहीं !!                      अ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   12:56pm 4 Feb 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
सजी दुल्हन-सी धरा, फूलों का श्रृंगार हैभँवरे गुनगुनाने लगे, आई बहार है ।हर पल मुस्करा रहानया तराना गा रहाजीवन बेल पर देखये खुशियाँ सजा रहाझूम उठा है तन-मन, छाया खुमार है ।खुशनुमा मौसम हुआज़िन्दगी का लो मजासाकार हुई लगतीइक खूबसूरत दुआनाचो, जश्न मनाओ तुम, मिला उपहार है ।&... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:09am 24 Jan 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
लगते हैं अब तुम्हें जो दोस्त बहुत प्यारे सच बोलोगे तो दुश्मन हो जाएँगे सारे । हालातों को बदलने के लिए कुछ करना होगा आख़िर कब तक जीएँगे मुकद्दर के सहारे । कितना दुश्वार है जीना, ये उनसे पूछो वहशियत ने छीन लिए जिनकी आँख के तारे । बातें छोड़ो, मुहब्बत से खोखली ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   1:49pm 5 Jan 2015 #
Blogger: Dilbag Virk
ख़ूबसूरत बनी कहानी हैचढ़ गई आग-सी जवानी है ।मैं जुबां पर यकीं न कर पाऊँबात दिल की उसे बतानी है ।इश्क़ ही हल मिला मुझे इसकाज़िन्दगी दाँव पर लगानी है ।प्यार बरसे दुआ यही माँगीनफ़रतों की अगन बुझानी है ।आँख के सामने उसे पायाजब किया इश्क़, याद आनी है ।बस हमें सीखना इसे जीनाज... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:50am 28 Dec 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
ये दर्द अगर दवा बन जाता तो तू मेरा ख़ुदा बन जाता | है मन्दिर-मस्जिद के झगड़ेकाश ! हर-सू मैकदा बन जाता | सीखा होता अगर वक्त से कुछ इतिहास कभी नया बन जाता | अगर वफ़ा की अहमियत होती फिर हर कोई बा-वफ़ा बन जाता | ख़ुश रहना अगर आसां होता तो यह सबका फलसफ़ा बन जाता | तुम 'विर्क'... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   9:19am 24 Dec 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
आकाश देता है निमन्त्रण हर किसी को अपने पास आने का अगर सुन सको तो अँधेरे तहखानों से भी निकलते हैं रास्ते बाहर की दुनिया के अगर देख सको तो जागोउठाओ कदम दृढ़ विश्वास के साथ बढ़ो मंज़िल की ओरवक्त खुद सीढ़ी बनेगा तुम्हें शिखर तक ले जाने के लिए दिलबाग विर्क&... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   1:11pm 16 Dec 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
वो बातें मुहब्बत की सुनाता रहा मैं बैठा अपने जख़्म सहलाता रहा । मुझे  गवारा न था सामने से हटना वो बार-बार निशाना आज़माता रहा । कितनी जालिम होती है ये याद भी इसका वजूद मेरी नींद उड़ाता रहा । इस दिल का क्या करें, ये कहे उसे अपना जो शख्स जख़्म देकर मुस्कराता रह... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   11:34am 10 Dec 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
कोई भी द्रोणाचार्य किसी को अर्जुन नहीं बना सकता हाँ कोई अर्जुन किसी द्रोणाचार्य को अमर जरूर कर सकता है यह प्रश्नचिह्न नहीं है किसी द्रोणाचार्य की योग्यता पर किसी द्रोणाचार्य के ज्ञान पर यह तो वास्तविकता है दरअसल ज्ञान देने की चीज़ नहीं ज्... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   11:53am 1 Dec 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
राम भरोसे चल रहा, मेरा भारत देश इसे लुटेरे लूटते, धर साधू का वेश। धर साधू का वेश, सभी ने भरी तिजौरी ठग, भ्रष्ट और चोर, करें हैं सीनाज़ोरी । कहता सबसे 'विर्क ', कौन अब किसको कोसे भारत देश महान, चले है राम भरोसे । दिलबाग विर्क *****... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   11:32am 22 Nov 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
बड़ी उलझन है, बड़ी मुश्किल है सीने  में  बैठा  दिल  पागल  है । बेगानों  से  बढ़कर  हैं  अपने खामोश रहो, फ़िज़ा बोझिल है । जिसे भुलाना है, उसी को सोचूँ फिर पूछूँ, क्यों वो याद हर पल है ?मुहब्बत की राह आसां तो नहीं यहाँ बेवफ़ाइयों की दलदल है । लोगों जैसा सम... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   1:09pm 19 Nov 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
हो सके तो तुम भूल जाना उन्हें सपनों में ख़ुदा माना था जिन्हें । जिधर से आई है ये रेत ग़म की उधर जाने की कौन कहे तुम्हें । भूल जाओ ग़म का हर फ़साना मुस्कराना सदा, याद कर हसीं लम्हें । उफनता सागर जाने क्या करेगा आओ दिल को चुप रहने की कहें । अश्कों के कारवां को बुल... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   12:37pm 12 Nov 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
दिलों को दीपमालाएँ लुभाती हैं दिवाली में जमीं को देख परियाँ मुस्कराती हैं दिवाली में |जरूरी हार इनकी, ये अँधेरे हार जाते हैं शमाएँ मिल असर अपना दिखाती हैं दिवाली में |मजे से ज़िंदगी जीना कभी तुम सीखना इनसे जवां दिल की उमंगें गीत गाती हैं दिवाली में |यही सच, दौर क... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:00pm 4 Nov 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
बेवफाई  तेरी  का  ये  अंजाम  है गूँजता महफ़िलों में, मेरा नाम है । क्या मिला पूछते हो, सुनो तुम जरा इश्क़ का अश्क़ औ'दर्द ईनाम है । लो, कई चेहरों से उठेगा नक़ाब आ गया अब मेरे हाथ में जाम है । हर तरफ दौर है नफरतों का यहाँ प्यार का लाज़मी आज पैगाम है । बात कहना म... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   4:33pm 23 Oct 2014 #
Blogger: Dilbag Virk
गुनाहों की दास्तां बन चुकी है खबर भीजो चुप रहा अब तो रोएगा अब्र भी ।सच कहना है मुझे बुलंद आवाज मेंइसके लिए मंजूर है मुझको जहर भी ।कत्ल आदमियत का रोज कर रहे हैं लोगशामिल हैं इसमें सब, गाँव भी, शहर भी ।फैसले काइंतजारतुम्हें क्योंकर हैमुजरिम के हक में है मुंसिफ भी, सद्र भी ।... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:07pm 7 Aug 2013 #
Blogger: Dilbag Virk
                 दर्द देगी यहाँ साफगोई सदा                सीख लो बात को तुम घुमाना जरा ।                        तुम गलत मानते, बात ये और है                जो लगा ठीक मुझको वही तो कहा ।               है वहीं, ढूँढना आदमी में उसे       ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   1:46pm 2 Aug 2013 #
Blogger: Dilbag Virk
साफ दिल है और सीधी बात करता हूँमुझे तेरे शहर की तहजीबनहीं आती ।*********... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   11:43am 1 Aug 2013 #
Blogger: Dilbag Virk
अगर तलवार के हक़ में हो जाऊँ तो मुझे माफ करनाकलम को हर रोज हारते देखकर बहुत बेचैन हूँ मैं ।*******... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   1:30pm 30 Jul 2013 #
Blogger: Dilbag Virk
कहकहों का शोर आज फिर गूँजा फिजा में यारो किसी ने दिल तोड़ा है या कोई दर्द छुपा रहा है ।********... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   2:27pm 29 Jul 2013 #
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