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*गद्य-सर्जना*

एक योगी स्वाध्याय,आत्मचिंतन और इंद्रियों पर नियंत्रण कर स्वयं को मन का स्वामी बना लेता है।मन की चंचलता को स्थिर कर एक कुशल सारथी की भाँति इच्छाओं और कामनाओं की लगाम अपने हाथों में लेकर स्वयं का सम्पूर्ण जीवन योग,साधना और आत्मचिंतन में लगा देता है।उसका स्वयं पर नियंत...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  February 5, 2012, 10:01 am
एक योगी स्वाध्याय,आत्मचिंतन और इंद्रियों पर नियंत्रण कर स्वयं को मन का स्वामी बना लेता है।मन की चंचलता को स्थिर कर एक कुशल सारथी की भाँति इच्छाओं और कामनाओं की लगाम अपने हाथों में लेकर स्वयं का सम्पूर्ण जीवन योग,साधना और आत्मचिंतन में लगा देता है।उसका स्वयं पर नियंत...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :सत्यम शिवम लेख
  February 5, 2012, 10:01 am
हे मेरे प्रेम! तुम कहाँ हो?क्यूँ ना नजर आते हो आजकल मुझे।क्या तुम अबतक मुझसे रुठे हो,कभी आवाज भी नहीं देते या भूला दिया है तुमने मुझे।मै अब भी अक्सर हर रात तुम्हारा इंतजार करता हूँ उसी छत पर जहाँ तुम मुझसे पहले ही पहुँच कर मेरा इंतजार करते थे और मेरे पहुँचने पर दुसरी तरफ ...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :सत्यम शिवम लेख
  January 12, 2012, 4:42 pm
"साहित्य प्रेमी संघ"के त्तत्वावधान में हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह "टूटते सितारों की उड़ान"में मेरे द्वारा लिखा गया सम्पादकीय......जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है और काव्य सृजन संघर्षरत मन की व्यथा के उद्गार।इंसान अपने जीवन में बहुत सी कठिनाईयों को झेलता है और परिवर्त...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :सत्यम शिवम लेख
  December 8, 2011, 3:32 pm
"साहित्य प्रेमी संघ" के त्तत्वावधान में हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह "टूटते सितारों की उड़ान" में मेरे द्वारा लिखा गया सम्पादकीय......जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है और काव्य सृजन संघर्षरत मन की व्यथा के उद्गार।इंसान अपने जीवन में बहुत सी कठिनाईयों को झेलता है और परिवर्...
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Tag :सत्यम शिवम लेख
  December 8, 2011, 3:32 pm
"साहित्य प्रेमी संघ" के त्तत्वावधान में हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह "टूटते सितारों की उड़ान" में मेरे द्वारा लिखा गया सम्पादकीय......जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है और काव्य सृजन संघर्षरत मन की व्यथा के उद्गार।इंसान अपने जीवन में बहुत सी कठिनाईयों को झेलता है और परिवर्...
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Tag :गद्य सर्जना
  December 8, 2011, 3:32 pm
अभी अभी जिस वक्त को याद कर रहा हूँ,आज उससे काफी दूर निकल आया हूँ मै।ना अब वैसी स्वच्छंदता है मेरे उन्मादों में और ना ही प्रेम की वैसी स्मृति है आज।आज कई जिम्मेदारियों में दबा दबा सा ख्वाहिशों का वो परिंदा थोड़ी दूर निले गगन में भी उड़ पाने में असमर्थ है।बस भविष्य की कई उ...
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Tag :प्रेम रस
  November 11, 2011, 12:29 am
कौन हो तुम?मै नहीं जानता तुम्हें या शायद जानना ही नहीं चाहता।मुझे तो बस "मै" बन कर रहना है,"तुम" नहीं बनना।ऐसी भावनाओं में घिरा आज का मनुष्य स्वयं पोषित करता है स्वयं के अभिमान को।वह नहीं चाहता शाश्वत को जानना,वह तो बस अपने द्वारा बनाये गये स्वयं की कृत्रिम नगरी में आजीवन...
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Tag :गद्य सर्जना
  September 10, 2011, 5:57 pm
वह स्पर्श भूला नहीं हूँ मै या शायद मेरे जेहन में इस कदर समा गया है वो कि उससे विरक्ति स्वयं से वैराग जैसा है।दूर से आती हुई मदमस्त पवन हौले से मेरे कानों में कुछ कहती है और हर बार सुनने की कोशिश में उस स्पर्श का स्मरण हो आता है जो हुआ था मुझको उस पल जब तुम दूर थी मुझसे।वह स्...
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Tag :प्रेम रस
  August 26, 2011, 5:56 pm
कोमल भावनाओं की जितनी भी अभिव्यक्तियाँ मेरे अंतरमन में समायी है,वो सब तुम्हीं से पाया है मैने।तुम्हीं ने आभास कराया है मुझे मेरे अस्तित्व का और सौंपा है मुझे मेरा वजूद।तुम्हारे बिना मै स्वयं की कल्पना भी नहीं कर सकता माँ।माँ मेरी कोई भी पहचान बस तुम तक ही सीमित है।आज ...
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Tag :गद्य सर्जना
  August 14, 2011, 4:32 pm
मन कभी बिल्कुल आवारा सा बन न जाने कहाँ कहाँ से घूम कर आता है।कभी तुम्हारे साथ का पहला दिन याद करता है तो कभी उस एहसास को खोजने निकल पड़ता है जिसमें तुमसे मिलन के हर एक क्षण का लेखा जोखा अब भी वैसे ही यादों के पन्नों पे ज्यों का त्यों लिखा हुआ है।धीरे धीरे सम्मोहीत होता जा...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :प्रेम रस
  August 3, 2011, 6:22 pm
अभी-अभी मिली है खबर मुझे तुम्हारे ना होने का और मेरा वजूद कुछ क्षण बिल्कुल सन्न सा हो गया है यह जानकर कि अब तक बस तुम्हारे बिना जी रहा था वो।कुछ अलग हो गया है उससे।शायद कोई वजनदार चीज थी वो।जो कभी कभी कोमल दिल पर भी आघात कर देती थी।पर अब उसके जाने के बाद सब कुछ बेहतर है।अब ...
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Tag :प्रेम रस
  July 27, 2011, 2:18 pm
जगत में काल का स्वरुप अचिन्तय है।जिसके वश में पूरा संसार हर पल सृष्टि से प्रारम्भ होकर प्रलय की ओर बढ़ता जाता है।सृष्टि दिवस के आरम्भ जैसा है और प्रलय अवसान सा।पर क्या?है कोई ऐसा जो इस काल के बंधन से मुक्त है।जिसका ना कोई आरम्भ है और ना कोई अंत।काल के भी काल का लेखा-जोखा ...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  July 17, 2011, 6:20 pm
कुछ तो है ऐसा जो शाश्वत है।वही चिर काल से चिर काल तक है।वह सर्वशक्तिमान ईश्वर है।परन्तु उस आध्यात्मिक ईमारत की नींव भी बस आस्था की अमिट भावनाओं पे पड़ी है।आस्था के बिना ना तो सृष्टि के सृजनात्मक कार्यो की कल्पना की जा सकती है और ना ही सृष्टिकर्ता की।जिसकी आस्था की शक्...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  July 13, 2011, 10:25 pm
अपनी अश्लील भावनाओं को प्रेम की पवित्रता का नाम देकर कोई अपनी अतृप्त वासना को छुपा नहीं सकता।वासना के गंदे कीड़े जब पुरुष मन की धरातल पर रेंगने लगते है तब वह बहसी,दरिंदा हो जाता है।अपनी सारी संवेदनाओं को दावँ पर रख बस जिस्म की प्यासी भूख को पूरा करने के लिए किसी हद तक ग...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  July 6, 2011, 1:20 am
चाहता है ह्रदय फिर से तुम्हें पाने को और इस बार पाकर कभी ना खोने को।सुनना चाहता है तुम्हारी हर एक वो शिकायत जो तुम इक अनूठे अधिकार के साथ करती थी मुझसे।और मै तुम्हारी डाँट सुन कर भी हँस पड़ता था उस भोलेपन पर जो छलकता था तुम्हारी हर एक शब्द से।बड़े दिन हो गये,गये हुए तुमको...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :प्रेम रस
  June 25, 2011, 2:25 pm
हार कर आज आ बैठा मै अकेला छत पर।कितना पुकारा तुमको और तुम्हारे नाम को।अब तो शायद मेरे चारों ओर हर पल गूँजता रहता है नाम तुम्हारा प्रतिध्वनि बन कर।पर पता नहीं वो प्रतिध्वनि क्या तुमसे टकरा कर लौटती है या बस यूँ ही चली आती है मन को दिलासा दिलाने।आज मन में कई प्रश्न लि...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :प्रेम रस
  June 18, 2011, 4:57 pm
याद आने लगा आज सदियों बाद फिर से वो दिन जब तुमसे नहीं मिला था,ना हुई थी बात अपनी,ना थी कोई जान पहचान तुमसे।पर ये दिल ना जाने क्यों तुमको अपना मान बैठा था।तुमसे जब पहली बार बात हुई थी अजीब हालत थी इन धड़कनों की।मुझसे ज्यादा अधीर तो बेचारे ये ही हो रहे थे।धड़कती रहती थी हर प...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :प्रेम रस
  June 12, 2011, 5:19 pm
सच में कुछ बदलाव तो था इस बार की अपनी मुलाकात में।इस बार वो इंतजार न था और ना था वो प्यार जो मै तुमसे करता था।शायद मुझे भी आभास हो रहा था इसका पर पता नहीं क्यों वो एहसास फिर धड़कनों में समा ही नहीं पा रहा था।वो खुमारी जो झलकती थी मेरी आँखों से और मेरे दिल के धड़कनों के संग ध...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :प्रेम रस
  June 5, 2011, 1:25 pm
विराट अथाह समुद्र के बीच में खड़ा मै।जहाँ चारों ओर बस दृश्य होता जलमंडल का कभी ना अंत होने वाला छोड़।पवन अपने वेग में समेट कर लाती संदेश इस जलमग्नता का और प्राणश्वासों की विलुप्तता का।अंधकार का सम्राज्य और भी भयावह बना देता इस सम्पूर्ण परिदृश्य को और इक लकड़ी के छोटे ...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  May 30, 2011, 6:02 pm
शंकाओं से भरी हुई वो सुबह,अनिश्चिताओं के हजारों किरणों को खुद में समेटे जगाता रहा मुझे।पुरानी जिन्दगी यादों के पन्नों में सीमट गयी और नयी जिन्दगी भविष्य के सपनों को कही दूर मुझे दिखाती दे गयी एक भोर।इस सुबह कोई ना था।सब अजनबी थे मेरे आसपास।बस अकेला मै और मेरी बदली हुई...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  May 26, 2011, 3:33 pm
अपने सभी अरमानों को दबा लिया दिल में ही कही और किसी से ना कुछ कहा।कई ख्बाव जो पलते थे आपकी आँखों में दिन-रात उसे आपने मेरी आँखों को सौंप दिया।क्यों किया ऐसा आपने,बस मेरे लिए ना पापा!आप हरदम बस सोचते रहे हमारी खुशी के लिए और मै कुछ ना समझा आपके प्यार को।वो आपका प्यार ही तो थ...
*गद्य-सर्जना*...
Tag :गद्य सर्जना
  May 16, 2011, 6:06 pm
हरी हरी घासों पे लेटा,खुले आसमान के निचे संसर्ग की उन्मादकता का स्वागत करता मै।तुम्हारी नीली आँखों में गगन की सारी उड़ानों को ढ़ुँढ़ता और तुम्हारे स्पर्श से मेरे रोम रोम में हर्ष की इक नयी कली का मानों प्रस्फुटन होता।तुम्हारे साथ होने का ये आभास कही कोई कोरी कल्पना त...
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Tag :प्रेम रस
  May 11, 2011, 1:59 pm
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