POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Blog: *गद्य-सर्जना*

Blogger: satyam shivam
एक योगी स्वाध्याय,आत्मचिंतन और इंद्रियों पर नियंत्रण कर स्वयं को मन का स्वामी बना लेता है।मन की चंचलता को स्थिर कर एक कुशल सारथी की भाँति इच्छाओं और कामनाओं की लगाम अपने हाथों में लेकर स्वयं का सम्पूर्ण जीवन योग,साधना और आत्मचिंतन में लगा देता है।उसका स्वयं पर नियंत... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   4:31am 5 Feb 2012 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
एक योगी स्वाध्याय,आत्मचिंतन और इंद्रियों पर नियंत्रण कर स्वयं को मन का स्वामी बना लेता है।मन की चंचलता को स्थिर कर एक कुशल सारथी की भाँति इच्छाओं और कामनाओं की लगाम अपने हाथों में लेकर स्वयं का सम्पूर्ण जीवन योग,साधना और आत्मचिंतन में लगा देता है।उसका स्वयं पर नियंत... Read more
clicks 300 View   Vote 0 Like   4:31am 5 Feb 2012 #सत्यम शिवम लेख
Blogger: satyam shivam
हे मेरे प्रेम! तुम कहाँ हो?क्यूँ ना नजर आते हो आजकल मुझे।क्या तुम अबतक मुझसे रुठे हो,कभी आवाज भी नहीं देते या भूला दिया है तुमने मुझे।मै अब भी अक्सर हर रात तुम्हारा इंतजार करता हूँ उसी छत पर जहाँ तुम मुझसे पहले ही पहुँच कर मेरा इंतजार करते थे और मेरे पहुँचने पर दुसरी तरफ ... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   11:12am 12 Jan 2012 #सत्यम शिवम लेख
Blogger: satyam shivam
"साहित्य प्रेमी संघ"के त्तत्वावधान में हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह "टूटते सितारों की उड़ान"में मेरे द्वारा लिखा गया सम्पादकीय......जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है और काव्य सृजन संघर्षरत मन की व्यथा के उद्गार।इंसान अपने जीवन में बहुत सी कठिनाईयों को झेलता है और परिवर्त... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   10:02am 8 Dec 2011 #सत्यम शिवम लेख
Blogger: satyam shivam
"साहित्य प्रेमी संघ" के त्तत्वावधान में हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह "टूटते सितारों की उड़ान" में मेरे द्वारा लिखा गया सम्पादकीय......जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है और काव्य सृजन संघर्षरत मन की व्यथा के उद्गार।इंसान अपने जीवन में बहुत सी कठिनाईयों को झेलता है और परिवर्... Read more
clicks 276 View   Vote 0 Like   10:02am 8 Dec 2011 #सत्यम शिवम लेख
Blogger: satyam shivam
"साहित्य प्रेमी संघ" के त्तत्वावधान में हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रह "टूटते सितारों की उड़ान" में मेरे द्वारा लिखा गया सम्पादकीय......जीवन संघर्ष का दुसरा नाम है और काव्य सृजन संघर्षरत मन की व्यथा के उद्गार।इंसान अपने जीवन में बहुत सी कठिनाईयों को झेलता है और परिवर्... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   10:02am 8 Dec 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
अभी अभी जिस वक्त को याद कर रहा हूँ,आज उससे काफी दूर निकल आया हूँ मै।ना अब वैसी स्वच्छंदता है मेरे उन्मादों में और ना ही प्रेम की वैसी स्मृति है आज।आज कई जिम्मेदारियों में दबा दबा सा ख्वाहिशों का वो परिंदा थोड़ी दूर निले गगन में भी उड़ पाने में असमर्थ है।बस भविष्य की कई उ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:59pm 10 Nov 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
कौन हो तुम?मै नहीं जानता तुम्हें या शायद जानना ही नहीं चाहता।मुझे तो बस "मै" बन कर रहना है,"तुम" नहीं बनना।ऐसी भावनाओं में घिरा आज का मनुष्य स्वयं पोषित करता है स्वयं के अभिमान को।वह नहीं चाहता शाश्वत को जानना,वह तो बस अपने द्वारा बनाये गये स्वयं की कृत्रिम नगरी में आजीवन... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   12:27pm 10 Sep 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
वह स्पर्श भूला नहीं हूँ मै या शायद मेरे जेहन में इस कदर समा गया है वो कि उससे विरक्ति स्वयं से वैराग जैसा है।दूर से आती हुई मदमस्त पवन हौले से मेरे कानों में कुछ कहती है और हर बार सुनने की कोशिश में उस स्पर्श का स्मरण हो आता है जो हुआ था मुझको उस पल जब तुम दूर थी मुझसे।वह स्... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   12:26pm 26 Aug 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
कोमल भावनाओं की जितनी भी अभिव्यक्तियाँ मेरे अंतरमन में समायी है,वो सब तुम्हीं से पाया है मैने।तुम्हीं ने आभास कराया है मुझे मेरे अस्तित्व का और सौंपा है मुझे मेरा वजूद।तुम्हारे बिना मै स्वयं की कल्पना भी नहीं कर सकता माँ।माँ मेरी कोई भी पहचान बस तुम तक ही सीमित है।आज ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   11:02am 14 Aug 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
मन कभी बिल्कुल आवारा सा बन न जाने कहाँ कहाँ से घूम कर आता है।कभी तुम्हारे साथ का पहला दिन याद करता है तो कभी उस एहसास को खोजने निकल पड़ता है जिसमें तुमसे मिलन के हर एक क्षण का लेखा जोखा अब भी वैसे ही यादों के पन्नों पे ज्यों का त्यों लिखा हुआ है।धीरे धीरे सम्मोहीत होता जा... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   12:52pm 3 Aug 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
अभी-अभी मिली है खबर मुझे तुम्हारे ना होने का और मेरा वजूद कुछ क्षण बिल्कुल सन्न सा हो गया है यह जानकर कि अब तक बस तुम्हारे बिना जी रहा था वो।कुछ अलग हो गया है उससे।शायद कोई वजनदार चीज थी वो।जो कभी कभी कोमल दिल पर भी आघात कर देती थी।पर अब उसके जाने के बाद सब कुछ बेहतर है।अब ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   8:48am 27 Jul 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
जगत में काल का स्वरुप अचिन्तय है।जिसके वश में पूरा संसार हर पल सृष्टि से प्रारम्भ होकर प्रलय की ओर बढ़ता जाता है।सृष्टि दिवस के आरम्भ जैसा है और प्रलय अवसान सा।पर क्या?है कोई ऐसा जो इस काल के बंधन से मुक्त है।जिसका ना कोई आरम्भ है और ना कोई अंत।काल के भी काल का लेखा-जोखा ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   12:50pm 17 Jul 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
कुछ तो है ऐसा जो शाश्वत है।वही चिर काल से चिर काल तक है।वह सर्वशक्तिमान ईश्वर है।परन्तु उस आध्यात्मिक ईमारत की नींव भी बस आस्था की अमिट भावनाओं पे पड़ी है।आस्था के बिना ना तो सृष्टि के सृजनात्मक कार्यो की कल्पना की जा सकती है और ना ही सृष्टिकर्ता की।जिसकी आस्था की शक्... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   4:55pm 13 Jul 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
अपनी अश्लील भावनाओं को प्रेम की पवित्रता का नाम देकर कोई अपनी अतृप्त वासना को छुपा नहीं सकता।वासना के गंदे कीड़े जब पुरुष मन की धरातल पर रेंगने लगते है तब वह बहसी,दरिंदा हो जाता है।अपनी सारी संवेदनाओं को दावँ पर रख बस जिस्म की प्यासी भूख को पूरा करने के लिए किसी हद तक ग... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   7:50pm 5 Jul 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
चाहता है ह्रदय फिर से तुम्हें पाने को और इस बार पाकर कभी ना खोने को।सुनना चाहता है तुम्हारी हर एक वो शिकायत जो तुम इक अनूठे अधिकार के साथ करती थी मुझसे।और मै तुम्हारी डाँट सुन कर भी हँस पड़ता था उस भोलेपन पर जो छलकता था तुम्हारी हर एक शब्द से।बड़े दिन हो गये,गये हुए तुमको... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   8:55am 25 Jun 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
हार कर आज आ बैठा मै अकेला छत पर।कितना पुकारा तुमको और तुम्हारे नाम को।अब तो शायद मेरे चारों ओर हर पल गूँजता रहता है नाम तुम्हारा प्रतिध्वनि बन कर।पर पता नहीं वो प्रतिध्वनि क्या तुमसे टकरा कर लौटती है या बस यूँ ही चली आती है मन को दिलासा दिलाने।आज मन में कई प्रश्न लि... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   11:27am 18 Jun 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
याद आने लगा आज सदियों बाद फिर से वो दिन जब तुमसे नहीं मिला था,ना हुई थी बात अपनी,ना थी कोई जान पहचान तुमसे।पर ये दिल ना जाने क्यों तुमको अपना मान बैठा था।तुमसे जब पहली बार बात हुई थी अजीब हालत थी इन धड़कनों की।मुझसे ज्यादा अधीर तो बेचारे ये ही हो रहे थे।धड़कती रहती थी हर प... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   11:49am 12 Jun 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
सच में कुछ बदलाव तो था इस बार की अपनी मुलाकात में।इस बार वो इंतजार न था और ना था वो प्यार जो मै तुमसे करता था।शायद मुझे भी आभास हो रहा था इसका पर पता नहीं क्यों वो एहसास फिर धड़कनों में समा ही नहीं पा रहा था।वो खुमारी जो झलकती थी मेरी आँखों से और मेरे दिल के धड़कनों के संग ध... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   7:55am 5 Jun 2011 #प्रेम रस
Blogger: satyam shivam
विराट अथाह समुद्र के बीच में खड़ा मै।जहाँ चारों ओर बस दृश्य होता जलमंडल का कभी ना अंत होने वाला छोड़।पवन अपने वेग में समेट कर लाती संदेश इस जलमग्नता का और प्राणश्वासों की विलुप्तता का।अंधकार का सम्राज्य और भी भयावह बना देता इस सम्पूर्ण परिदृश्य को और इक लकड़ी के छोटे ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   12:32pm 30 May 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
शंकाओं से भरी हुई वो सुबह,अनिश्चिताओं के हजारों किरणों को खुद में समेटे जगाता रहा मुझे।पुरानी जिन्दगी यादों के पन्नों में सीमट गयी और नयी जिन्दगी भविष्य के सपनों को कही दूर मुझे दिखाती दे गयी एक भोर।इस सुबह कोई ना था।सब अजनबी थे मेरे आसपास।बस अकेला मै और मेरी बदली हुई... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   10:03am 26 May 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
अपने सभी अरमानों को दबा लिया दिल में ही कही और किसी से ना कुछ कहा।कई ख्बाव जो पलते थे आपकी आँखों में दिन-रात उसे आपने मेरी आँखों को सौंप दिया।क्यों किया ऐसा आपने,बस मेरे लिए ना पापा!आप हरदम बस सोचते रहे हमारी खुशी के लिए और मै कुछ ना समझा आपके प्यार को।वो आपका प्यार ही तो थ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   12:36pm 16 May 2011 #गद्य सर्जना
Blogger: satyam shivam
हरी हरी घासों पे लेटा,खुले आसमान के निचे संसर्ग की उन्मादकता का स्वागत करता मै।तुम्हारी नीली आँखों में गगन की सारी उड़ानों को ढ़ुँढ़ता और तुम्हारे स्पर्श से मेरे रोम रोम में हर्ष की इक नयी कली का मानों प्रस्फुटन होता।तुम्हारे साथ होने का ये आभास कही कोई कोरी कल्पना त... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   8:29am 11 May 2011 #प्रेम रस
[ Prev Page ] [ Next Page ]


Members Login

Email ID:
Password:
        New User? SIGN UP
  Forget Password? Click here!
Share:
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3938) कुल पोस्ट (195028)