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परिचर्चा

सच में - मैं,तुम,वह,आप,हम  …… सभी पढ़ते हैं और समस्या,सवाल से परे एक 'बढ़िया' लिखकर,'मार्मिक' लिखकर बढ़ जाते हैं  …। जवाब देने से परहेज क्यूँ? जिन विचारों की ज़रूरत परिवार,समाज,देश के लिए आवश्यक है - उससे भागना क्या अपराध नहीं !जितनी तेजी से विकृति अपनी जड़ें फैला रही है - उस...
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  September 1, 2013, 8:41 pm
प्रश्न काफी गंभीर ,हैं  जवाब दे सकेगा कोई तहेदिल से ?MERE HISSE ME TANHAYI KYU HAI?: क्या होता?क्या होता?अगर इस दामिनी की जगह सरकार के किसी बड़े नेता की बहू या बेटी की इज्ज़त लुटी होती क्या होता तब?अगर वो यूँ ही बेबस और लाचार ज़िन्दगी और मौत से जूझती अश्रु भरे नयनों से ये सवाल पूछती कि कब ...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  February 26, 2013, 3:30 pm
समस्या मात्र स्त्रियों की नहीं,पुरुषों की नहीं,समाज की नहींपूरे देश के पारंपरिक अस्तित्व की है विरोध गलत का है सड़े -गले अंडे फेंकने से हमारा तरीका भी प्रश्न बन जाता है धर्म हो या स्व का सम्मान मतभेद,ज़हर फैलानेवाले वे होते हैं जिनकी मित्रता दीमकों से होती है ....... ज़...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  January 29, 2013, 12:44 pm
धुंआ धुंआ सोच फ़ैल रही है .... मिल रही है एक दूसरे के ख्यालों के पानी में अपने ख्यालों का अर्थ पा रही है .......... पता तो सबको है बिना आग के धुंआ कहाँ ....                         रश्मि प्रभा(एक ख़त बेटी के नाम)मेरी प्यारी बेटी ..आज वह वक्त आ गया है जब मैं तुम्हे ज़िंदगी की उन सच्चाइयों से रूबर...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  January 28, 2013, 2:24 pm
समस्या अनेक - स्वर एक - शंखनाद की तरह अब देखना है जोर कितना बाजू ए कातिल में है !!!                     रश्मि प्रभा दामिनियों के दर्द से कराहता देशवो मुक्त हो गई । इस समाज इस देश इस संसार से उसका चला जाना ही उचित था । मगर दुःखद पहलू यह है कि उसे प्रतिघात का न मौक़ा मिला न पलटवार करने ...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  January 26, 2013, 10:44 am
यह आह्वान किसी और के लिए नहीं अपने घर के लिए है देश,परिवार,समाज,शहर,गाँव ....प्राकृतिक कण कण हमारी धरोहर है हमारा उत्तरदायित्व है ........... कहर इस कदर है कि सांप भी छुप गए हैं आम आदमी तो नीलकंठ हो चला है या यूँ कहिये - होना पड़ा है !तो जब हो चुके हैं हम नीलकंठ तो त्रिनेत्र भी खोलन...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  January 25, 2013, 10:42 am
सोचती हूँ किसीसे अँधेरे की पोटली में धूप भरे धूप के दर्द की बातें करूँ कहूँ -धूप बिखरना चाहती है सिड़े एहसासों को स्वस्थ बनाना चाहती है पर संकीर्णता की इतनी कालिमा है कि धूप ओस बनकर टपकने लगती है ........ क्या करें इस अस्वाभाविक प्रवृति की प्रकृति का ?                रश्मि प्रभा...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  January 24, 2013, 10:54 am
शब्द माध्यम है हमको कुछ शब्दों के गुल्लक मिले हैं प्रेम,दर्द,आक्रोश,मौन .........के समानुभूति की सरहदों पर हमारा मन तैनात है दुश्मन अपनी विकृति के बारूद से हमारे संस्कारों का हनन कर रहे ... बहुत चुप रहे हम सोचते रहे - कोई मसीहा आएगा !मसीहा ....... हमारे ही शब्द हैं जो सोयी हुई आत्...
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  January 23, 2013, 12:37 pm
तलाश ही पड़ाव है - कई छद्म कुरूप सत्य उभरते हैं, आलोचनाओं की धार पर भाव उतरते हैं - रक्त की धार से बेखबर........ स्त्री लोगों का कुरेदा हुआ ज़ख्म है जिसे वक्त दर वक्त अलग अलग मरहम खुद तैयार कर वह अपने को सम्पूर्ण बनाती है ..... !सम्पूर्णता की तलाश .... माना - पूरी नहीं होती पर उदाहरण व...
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  January 22, 2013, 11:20 am
प्रथम रश्मि का आना रंगिनी तूने कैसे पहचाना ..... सोई थी तू स्वप्न नीड़ में " (पन्त).............. कवि की जिज्ञासा,आम कौतुहल,बच्चों के चेहरे पर प्रश्नों से बनता सम्बन्ध .... उड़ा पाल माझी बढ़ा नाव आगे ...न पड़ता दिखाई यदि हो किनारा अगर हो गई आज प्रतिकूल धारा क्षुधित व्याघ्र सा क्षुब्ध स...
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  November 5, 2012, 1:09 pm
  http://kishorechoudhary.blogspot.in/चौराहे पर सीढ़ियाँ .... किशोर चौधरी ने रखीं, अपनी सोच की ऊँचाइयों को हिंदी की ऊँगली थमाई, भावनाओं के वन से चन्दन सी लकड़ियाँ इकट्ठी कीं .... साल दर साल बदलते मौसमों से कुछ नमी,कुछ सिहरन,कुछ जेठ की धूप ,कुछ तेज झकझोरती हवाओं से खड़खडाते पत्ते लिए और चौराहों को  ...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  November 2, 2012, 9:46 am
किसी के घर शादी हुई ..... आलोचना - बेकार सजावट थी !- खाने में कोई स्वाद था ही नहीं !- वगैरह वगैरह ................. किसी के घर मृत्यु - - शोक ऐसे मनाया जाता है !- कफ़न का कपड़ा एकदम मामूली था !- घाट पर तो वो कुछ देने के लिए तैयार ही नहीं थे !वगैरह वगैरह ...........सम्मान हो, अपमान हो - आलोचना करने को पूरी प...
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  September 1, 2012, 9:41 am
 YEH MEHLON YEH TAKHTON (The Immortal Muhammad Rafi)Movie: PYASAALyrics: Sahir LudhiyanviMusic by S. D. BurmanStarring Guru Dutt Mala Sinha Waheeda RehmanJohnny Walker Rehman Directed by Guru Dutt Produced by Guru Dutt Written by Abrar Alvi Cinematography V.K. Murthy Editing by Y. G. Chawhan Release date(s) February 19, 1957आज तक आपने देश भक्ति और राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत बेहतरीन गीत इस ब्लॉग पर सुने ! उन गीतों में जो भारत दिखाई देता है वह हमारे स्वप्नों का भा...
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  August 23, 2012, 12:16 pm
समानता की बात आए दिन होती है..... बेटा बेटी एक समान का नारा अपने बचपन से सुनती आ रही हूँ . शिक्षा को लेकर कई परिवर्तन हुए ..... पर समानता का मामला अधर में ही रहा !.............अगल बगल दो घर .... एक समानता का पक्षधर , दूसरा आलोचना करनेवाला ..... यूँ भी - समानता से परे सम्मान की बात हो , सुरक्षा की ब...
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  August 23, 2012, 11:21 am
सहगल ढिल्लन शाहनवाज इन्कलाब जिंदाबाद ....एक नहीं कई नाम आज आजादी खोजते हैं पूछते हैं सवालकहाँ गये -लाल बाल पाल जिन्होंने कहा था - " आजादी याचना से नहीं मिलतीबल्कि इसके लिए संघर्ष करना पड़ता है। "किसने मिटा दिया भारत माँ की हथेलियों से इक़बाल के ये शब्द - "नहीं है नाउम्मीद इ...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  August 15, 2012, 11:29 am
ब्लॉग .... एक अपना प्रकाशन , जहाँ बिना कोई मूल्य अदा किये हम लिखते हैं , पाठक भी मिलते हैं - जिन्हें पढ़ने के लिए कोई मूल्य नहीं चुकाना पड़ता . वे पढ़ते हैं , इच्छा हुई तो प्रतिक्रिया देते हैं - जिसके लिए आग्रह मान्य है , पर ज़बरदस्ती नहीं .किताब की दूकान पर कई तरह की किताबें उपल...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  August 3, 2012, 3:18 pm
सम्मान , आदर , स्नेह अपनी जगह है और मेरा मानना भी अपनी जगह है , पर जिस पोस्ट की वजह से महफूज़ तुम अभी तक अपनी गलती न मानकर यह पोस्ट दे रहे हो - उससे इसका कोई औचित्य नहीं , ना बेवजह इसकी ज़रूरत थी या है . http://www.mahfoozali.com/2012/07/blog-post_25.html. रिश्तों की अपनी एक गरिमा होती है , जिसके लिए ढोल की ज़रू...
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  July 26, 2012, 4:08 pm
जब बेटे का मूल्य तय करते हैं माता-पिता , तभी स्पष्ट रहता है कि महत्व घर में आनेवाली बहू का नहीं , पैसे का है . और पैसे की चाहकब और बढ़ जाए , आनेवाली अग्नि में झुलस जाए - कहा नहीं जा सकता . पैसे के साथ अपनी बेटी का सुख चाहनेवाले माता-पिता भीइस दर्दनाक मौत के उतने ही ज़िम्मेदार हो...
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  July 25, 2012, 2:37 pm
नारी ब्लॉग निःसंदेह नारियों का आह्वान करता है , कई सार्थक मुद्दों पर बहस करता है , एक आधार देता है और इसके लिए रचनासामाजिक तौर पर सम्मान के योग्य हैं . सम्मान कोई दस्तावेज नहीं , बल्कि सम्मान ये है कि इस ब्लॉग में नारी की सहभागिता कितनी है . आज नारी के परिप्रेक्ष्य में हम र...
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  July 24, 2012, 8:42 pm
नारी ब्लॉग की संस्थापिका रचना के साथ कदम बढाते हुए आज का आरम्भ मैं दीपिका रानी की रचना से कर रही हूँ . पति से अलग होने पर एक औरत की क्या स्थिति होती है .... शब्द शब्द में इसकी सत्यता को उकेरा है दीपिका ने -पति से बिछुड़ी औरतपति से बिछुड़ी औरतएक रद्दी किताब हैजो पढ़ी जा चुकी ह...
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  July 23, 2012, 6:16 pm
( नारीरचना )सदियों सेतैयार की जाती रही हैंएक फौज औरतो की जो चलती रहेबिना प्रश्न किये , बिना मुंह खोलेकरती रहे जो शादी जनति रहे जो बच्चेजिसके सुख की परिभाषा होपति और पुत्र के सुख की कामनाऔरजो लड़ती रहे एक दूसरे सेबिना ये जाने कि वोएक चाल मे फंस गयी हैजहाँ पूरक वो कहलाती ह...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  July 22, 2012, 4:04 pm
रचना का नारी ब्लॉग और रचना का विश्वास - समय बदलेगा और जरुर बदलेगा उस दिन जिस...समय बदलेगा और जरुर बदलेगा उस दिन जिस दिन हर महिला उठ कर किसी भी नारी के प्रति कहे गए अप शब्दों मे पूरी नारी जाति का अपमान देखेगी ।" यह बहुत बड़ी बात है और यही वह आधार है जहाँ से परिवर्तन के सारे स्र...
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  July 21, 2012, 5:02 pm
नारीरचना )नारी ब्लॉग के अंतर्गत अभिव्यक्ति की काव्यात्मक विधा भी हैनारी का कविता ब्लॉगकविता वह माध्यम है , जिसमें हम अपने मन की अनगिनततरंगों को चित्रित कर देते हैं औरतेज बनकर रास्ते केअवरोधों को हटाते हैं .संस्थापिका रचना के ये भाव मन में विरोधी विरक्त भाव भरते हैं -त...
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  July 20, 2012, 3:43 pm
( नारीरचना )जाने कितना रोईकब सिसकियाँ जब्त हुईं सीने में अब तो बड़े से बड़े हादसे आँखों की कोरों पे जम जाते हैं और लोग मुझे उदासीन समझते हैं !!!....इस उदासीनता को एक राह देने का सशक्त कदम उठाया रचनाने , एक मुहीम चलाई और कई कदम साथ हो गए . कोई भी कार्य मुश्किल नहीं होता , बस देखने...
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  July 18, 2012, 2:32 pm
( नारीरचना )सर्वप्रथम हम इस बात को स्पष्ट रूप से जानें कि नारी ब्लॉगक्यूँ ! हम अक्सर उन बातों पर प्रकाश डालते हैं , जहाँ विरोधाभास , दोहरा व्यवहार पाते हैं . उदाहरण के लिए -सती प्रथा , बाल-विवाह , शिक्षा ,दहेज़-प्रथा ,विधवा-विवाह ,इत्यादि . आरम्भ से स्त्री , जो अन्नपूर्णा कहलाई...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  July 17, 2012, 6:04 pm
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