| (विभिन्न रंगों से रंगी एक प्रस्तुति, हालिया समय का स्वरूप, गर्मी का भयावह रूप,)जालिम है लू जानलेवा है ये गर्मीकाबिले तारीफ़ है विद्दुत विभाग की बेशर्मीतड़प रहे है पशु पक्षी, तृष्णा से निकल रही जानसूख रहे जल श्रोत, फिर भी हम है, निस्फिक्र अनजानन लगती गर्मी, न सूखते जल श्रोत, ... |
| बरसों की खबर -खबर बनकर रह गयी गलियों की चौड़ाई सिमट गयी उपाह-फोह की आवाज कमरे में दम तोड़ दी बदल ,गयी लोग -बाक की भाषा नजरें बदल गयी नया बरस आ गया ख़बरों में नई उमंग -तरंग नए संपादक आ गए गलियां में जो हवा बह रही थी ओ हवा प्रदूषित हो गयी प्यार करने वाले पथिक अपनी राह बदल दी लोगों ... |
| तुम्हारे लिए जिहाद के मायने धर्मयुद्व है,लेकिन धर्म की परिभाषा क्या जानते हो ।जिसकी खातिर तुमने इंकलाब का नारा बुलंद किया,तोरा बोरा की पहाडियों में खाक छानते रहे,09/11 की रात अमेरिका को खून से नहलाया,आतंक का ऐसा पर्याय बने कि,यमराज को भी पसीना आया।लेकिन क्या जिहाद की भाष... |
| वैसे ही बहुत कम हैं उजालों के रास्ते,फिर पीकर धुआं तुम जीतो हो किसके वास्ते,माना जीना नहीं आसान इस मुश्किल दौर मेंकश लेके नहीं निकलते खुशियों के रास्तेजिन्नात नहीं अब मौत ही मिलती है रगड़ कर,यूँ सूरती नहीं हाथों से रगड़ के फांकते ,तेरी ज़िन्दगी के साथ जुडी कई ... |
| मैंइकलकीरबनाती अगरहोती हाथमेरे कलम,समां देती उसमेअपनेसारे सपनेऔर आशाओं के महल !इस सिरे सेउस सिरे तक -लिख देतीनाम तुम्हारेजीवन की हर इक लहर !पर एक ख्यालभर रह गयाजेहन में ये मेरे -समझ गईअब इनटूटते -टकराते -किनारोंसे में किन इकलकीर मेंसमाते हैंसपने, औरन हीकलम बनातीहै को... |
| गांधी के सच्चे लोगों में विनोबा भावे एक ऐसा नाम है जो वास्तव में गांधी जी के कार्यों को भली प्रकार उनकी मृत्यु के बाद आगे ले गए। विनोबा ने अपने समय के उन मूल्यों और आध्यात्मिक पहलुओं पर विचार किया जो किसी गांधीवादी और सच्चे समाज सेवक के लिए मिसाल है। उनके जीवन का सबसे उ... |
| कही दूर हमेशा-हमेशा के लिये----------------------------------वो दूंड रही थी बेचेनी में ,करुण क्रंदन के साथ,वो चिड़िया ,हाँ --------वो चिड़िया ---कल था उसका बसेरा जहाँ ,आज ढेर था पड़ा बहाँ ,सुबह सबेरे के उगते सूरज कि लालिमा ,आसमान में किसी चित्रकार कि चित्रकारी का नमूना सी दिखाई देती थी जहाँ,कोयल कि तान ... |
| जबसे तेरी यादों में दिल को बहलाना सीख लियाहमने मुहब्बत में खोकर भी पाना सीख लियाजब धड़कन-२ भीगी गम से, सांसे भी चुभने लगीदर्द की चिंगारी को बुझाने के लिए आंसू बहाना सीख लियातरसी-२ प्यासी-२ भटकती हैं मेरी नजरें इधर उधरजबसे तेरी आँखों ने संयत अदा में शर्मना सीख लियाजबसे ... |
| नई दिल्ली। ‘नागरी लिपि पूर्णतयः वैज्ञानिक एवं विश्व की सर्वश्रेष्ठ लिपि है। भारत की सभी भाषाओं की एक अतिरिक्त लिपि के रूप में यह राष्ट्रीय एकता का सेतूबंध है इसलिए मैंने संसद सदस्य के रूप में पेश अपे प्राईवेट बिल के द्वारा हर भारतीय नागरिक के लिए इसका प्रशिक्षण अन... |
| वैसे ही बहुत कम हैं उजालों के रास्ते,फिर पीकर धुआं तुम जीतो हो किसके वास्ते,माना जीना नहीं आसान इस मुश्किल दौर मेंकश लेके नहीं निकलते खुशियों के रास्तेजिन्नात नहीं अब मौत ही मिलती है रगड़ कर,यूँ सूरती नहीं हाथों से रगड़ के फांकते ,तेरी ज़िन्दगी के साथ जुडी कई ... |
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February 10, 2012, 7:02 pm |
| जन्नत मुजको दिला दी जिसने दुनिया मैंवो हे मेरी माँदुनिया मैं जीने का हक दिया मुजकोवो हे मेरी माँकचरे का डेर नदिया किनारा था मेरामुजको अपनी दुनिया लीवो हे मेरी माँरात का अंधेरा मेरी आखो का डरमेरे डर मेरी ताकत बनीवो हे मेरी माँमैं डर क़र ना सोया पूरी रात कभीमेरे लिए जाग... |
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February 6, 2012, 1:34 pm |
| सब जानते प्रभु तो हैप्रार्थना ये कैसी?किस्मत की बात सच तो नित साधना ये कैसी?जितनी भी प्रार्थनाएं इक माँग-पत्र जैसायदि फर्ज को निभाते फिर वन्दना ये कैसी?हम हैं तभी तो तुम हो रौनक तुम्हारे दर पेचढ़ते हैं क्यों चढ़ावा नित कामना ये कैसी?होती जहाँ पे पूजा हैं मैकदे भी रौशनद... |
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January 24, 2012, 3:43 pm |
| जब मैं नमाज नहीं पढ़ता थाखुदा मेरा दोस्त था...जब भी कोई काम पड़ता थालड़ता था झगड़ता थाखुदा मेरा दोस्त था...जब भी परेशां होता थामेरा काम बना देता थाखुदा मेरा दोस्त था...जब से नमाज पढ़ने लगा हूँवो बड़ा आदमी हो गया हैउसका रुतबा बड़ा हो गया हैमुझसे दूर जा बैठा हैअब भी मेरी दुआएँहोती ह... |
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January 21, 2012, 1:58 pm |
| भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने युवा कवयित्री, साहित्यकार एवं चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को ‘’डा0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2011‘‘ से सम्मानित किया है। आकांक्षा यादव को यह सम्मान साहित्य सेवा एवं सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। ... |
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December 15, 2011, 6:14 pm |
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