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Blog: गीत कलश

Blogger: राकेश खंडेलवाल
ज़िन्दगी के बिछे इस बियावान मेंफूल इक आस का खिल सकेगा नहींवक्त की रेत पर जो इबारत लिखीनाम उसमें मेरा मिल सकेगा नहींउम्र की राह को आके झुलसा गईकंपकंपाती किरण आस्था दीप कीयाद की पोटली साथ में थी रहीएक मोती लुटा रह गये सीप सीजैसे पतझर हुआ  रात दिन का सफ़रफूल अरमान के सारे ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   12:30am 24 Apr 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
मैं गिरा जब जब गिरा हूँ एक निर्झर की तरह​मैं  बिखर कर हो गया हूँ एक सागर की व्ज़हहै मेरा विस्तार नभ की नीलिमा के पार भी मैं किनारा हूँ समय का और हूँ मंझधार भीमैं प्रणय की भावना के आदि का उद्गम रहा हूँऔर मै ही वीथियों में उम्र की हूँ एक सहचरमैं ही हूँ असमंजसों के चक्र क... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   1:30am 17 Apr 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
जड़ दिया अतुकांत को  जब ​​​ छंद में मैंनेतब मधूर ​इ​क गीत ​ को  जीवन ​दिया  मैंनेमैं प्रणय की वीथियों में भावना बन कर बहाहर ​सुलगते  ज्वार को अनुभूत मैं करत रहारूप तब इक अन्तरे ​को दे दिया ​मैंने कर ​दिए  पर्याय ​ ​के ​ ​पर्याय ​ अन्वेषित शांत मन ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   1:00am 10 Apr 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
टूटते हर पल बिखरते स्वप्न  संवरे नयन मे जोये नियति ने तय किया है जिंदगी की इस डगर परहर संवरती भोर में अंगड़ाइयां ली चाहतो नेसांझ तक चलते हुए दिन ने उन्हें पल पल निखाराआस की महकी हहु पुरबाई की उंगली पकड़ कररात ने काजल बना कर आँख में उनको संवारा  ईजिलों की पकड़ ढीली पर नज... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:30am 3 Apr 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
आज हवा की पाती पढ़ कर लगी सुनाने है वे ही पलजिनमें सम्बोधन करने में होंठ लगे अपने कँपने थेशब्द उमड़ कर चले ह्रदय से किन्तु कंठ तक पहुँच न पायेऔर नयन की झीलों में तिरते रह गये सभी सपने थे अनायास ही वर्तमान पर गिरीं अवनिकायें अतीत कीऔर समय संजीवित होकर फ़िर आया आँखों के आगे... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   1:30am 27 Mar 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
केंद्र पर मैं टिक रहूँ या वृत्त का विस्तार पाऊंजानता हूँ ये मेरी आकांक्षायें तय करेंगीऐतिहासिक परिधियों में सोच की सीमाये बंदीऔर सपने जो विरासत आँख में आंजे हुये है दृष्टि केवल संकुचित है देहरी की अल्पना तकसाथ है प्रतिमान जो बस एक सुर  साजे हुये हैमैं इसी ​इ​क ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   2:00am 20 Mar 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
मौसमों ने तकाजा किया द्वार आउठ ये मनहूसियत को रखो ताक परघुल रही है हवा में अजब सी खुनकतुम भी चढ़ लो चने के जरा झाड़ परगाओ पंचम में चौताल को घोलकरथाप मारो  जरा जोर से  चंग  मेंलाल नीला गुलाबी हरा क्या करेआओ रंग दें तुम्हें इश्क  के रंग मेंआओ पिचकारियों में उमंगें भरे... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:00am 13 Mar 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
सोच की खिड़कियां हो गई फ़ाल्गुनीसिर्फ़ दिखते गुलालों के बादल उड़ेफूल टेसू के कुछ मुस्कुराते हुयेपीली सरसों के आकर चिकुर में जड़ेगैल बरसाने से नंद के गांव कीगा रही है उमंगें पिरो छन्द मेंपूर्णिमा की किरन प्रिज़्म से छन कहेआओ रँग दें तुम्हें इश्क के रंग मेंस्वर्णमय यौवनी ओ... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   2:00am 12 Mar 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
नाम जिसपे लिखा हो मेरा, आज भीडाकिया कोई सन्देश लाया नहींगीत रचता रहा मैं तुम्हारे लिएएक भी तुमने पर गुनगुनाया नहींरोज ही धूप की रश्मियां, स्वर्ण सेकामना चित्र में रंग भरती रहीआस की कोंपले मन के उद्यान मेंगंध में भीग कर थी संवरती रहीएक आकांक्षा की प्रतीक्षा घनीकाजर... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   2:00am 6 Mar 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
जीवन के पतझड़ में जर्जर सूखी दिन की शाखाओं परकिसने आ मल्हार छेड़ दी औ अलगोजा बजा दिया हैमुड़ी बहारो की काँवरिया मीलो पहले ही ​इस पथ सेएक एक कर पाँखुर पाँखुर बिखर चुके है फूल समूचेबंजर क्यारी में आ लेता अंकुर कोई नहीं अंगड़ाईऔर न आता कोई झोंका गंधों का साया भी छू​ ​के​फिर&n... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   2:00am 27 Feb 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
और एक दिन बीता कर्मक्षेत्र से नीड तलक बिखरे चिन्हों को चुनते हुए राह में बिखर रहे सपनों का हर अवशेष उठाते हुए बांह में संध्या के  तट  पर आ पाया हर घट था रीता और एक दिन बीता एक अधुरी परछाई में सुबह शाम आकार तलाश  करतेछिद्रित आशा के प्याले मे दोपहरी के शेष ओसक... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   2:00am 20 Feb 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
 तुमने मुझे पंख सौंपे है और कहा विस्तृत वितान है पंख पसारे मैं आतुर हूँ बस उड़ान  में विघ्न न डालो पुरबाई जब सहलाती है पंखों की फड़फड़ाहटों कोनई चेतना उस पल आकर सहज प्राण में है भर जाती  आतुर होने लगता है मन,नव  उड़ान लेने को नभ में सूरज को बन एक चुनौती पर फैल... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   2:00am 13 Feb 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
चुन सभी अवशेष दिन केअलगनी पर टांक केस्वप्न मांगे है नयन नेचंद घिरती रात से धुप दोपहरी चुरा कर ले गई थी साथ मेंसांझ ​थी प्यासी रही ​ले  छागला ​को हाथ मेंभोर ने दी रिक्त झोली​ ​​ही  सजा पाथेय कीमिल न पाया अर्थ कोई भी सफर ​की  बात मेंचाल हम चलते रहेल... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:30am 7 Feb 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
कभी एक चिंगारी बन कर विद्रोहों की अगन जगातीबन कर कभी मशाल समूचे वन उपवन केओ धधकाती हैसोये ​चेतन ​ को शब्दो ​की दस्तक देकर रही उठातीकलम हाथ में जब भी आती शिवम् सुन्द​रम ​ गाती है विलग उँगलियों के ​स्पर्शों  ने विलग नए आयाम निखारेहल्दीघाटी और उर्वशी, प... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   1:47am 15 Jan 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
और इक बरस बीताकरते हुए प्रतीक्षा अब की बारजतन कर बोयेजितने वे अंकुर फूटेंगेअंधियारे जो मारे हुए कुंडलीबन मेहमान रुके हैसंभवतः रूठेंगेआश्वासन की कटी पतंगोंकी डोरी में उलझे अच्छे दिन आ जाएंगेनऐ भोर के नए उजालेनव सूरज की किरणें लेकरतन मन चमकाएंगे अँधियारा पर जीत... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   2:00am 9 Jan 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
जाते हुए वर्ष की संध्याभेज रही है स्नेह निमंत्रणआओ अंगनाई में सूरजवर्ष नया मंगलमय कहनेकितनी रिसी तिमिर की गठरीबारह मासों के गतिक्रम मेंकितनी थी उपलब्ध हताशाजीवन के अनथक उद्यम मेंआँखों की देहरी से कितनेसपने टूट टूट कर बिखरेऔर अपेक्षा के कितने पलघिरे उपेक्षाओं में... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   1:30am 1 Jan 2017 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
बादलों के पृष्ठ पर पिघले सितारे शब्द बन कर चांदनी की स्याही में ढल लिख रहे हैं नाम तेरा धुप की किरणें तेरी कुछ सुरभिमय सांसें उठाये खींचती हैं कूचियां बन कर क्षितिज पर नव सवेराप्राण सलिल पा तेरा सान्निध्य रुत होती सुहागनओर संध्या की गली सुरमाई, होती आसमानीशोर म... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   2:00am 26 Dec 2016 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
पल तो रहे सफलताओ  ​के​दूर सदा ही इन राहो सेखड़े मोड़ पर आभासों से हम करते संवाद रह गएझड़े उम्र की शाखाओं से एक एक कर सारे पत्तेतय करते पाथेय सजे से नीड सांझ तक के, की दूरीऔ तलाशते हुए आस के पंछी इक सूने अम्बर मेंरही रोकती परवाज़ो को जिनकी घिर कोई मज़बूरीउभरा नहीं नजर के आगे आ ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   2:00am 19 Dec 2016 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
सूर्य नूतन वर्ष का बस है गली को मोड़ पर हीआओ अगवानी करे, ले पृष्ठ कोरे साथ मन केवेदना के पल गुजरते वर्ष ने जितने दिए थेहम उन्हें इतिहास की अलमारियों में बंद कर देनैन में अटकी हुई है बदलियां निचुड़ी हुई जोअलगनी के छोर पर उनको उठाकर आज धर देअर्थहीना शबडी की अब तोड़ कर पारंपरि... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   2:00am 12 Dec 2016 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
अच्छे है नवगीत गीत सब्किन्तु आज मन कहता है सुननव विषयो को नए शब्द देऔर नई उपमाएं ढूंढेंदिशा पीर घन क्षितिज वेदनापत्र लिए बिन चला डाकियाखाली लिए पृष्ठ जीवन केअवलंबों से परे हाशियाकजरे सुरमे से आगे जाकरदीपित संध्याये ढूंढेंविरह मिलन हो राजनीतिया भूख गगरीबी खोटे सिक... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   11:33pm 7 Dec 2016 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
कल्पना के चित्र पर ज्यों पड़ गई इंचों बरफ सीरह गईं आतुर निगाहें एक अनचीन्हे दरस की फिर किरण की डोर पकडे बादलों के झुण्ड उमड़ेकसमसाने लग गईं बाहें कसक लेकर परस की शून्य में घुलते क्षितिज की रेख पर से आ फिसलतीझालरी कोई हवा की लग रहा कुछ कह रही है आ रही लगता कही से कोई स्वर ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:00am 28 May 2012 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
गीत लिखते हुये ये कलम थक गईएक भी तुम मगर गुनगुनाये नहींगीत के शब्द में खुद कलम ढल सकेइस तरह से कभी मुस्कुराये नहींछन्द के बन्द में कुन्तलों की लटेंबाँधती तो रही ये मचलती हुईरागिनी की लहर पे रिराती रहीरूप की ज्योत्सनायें छिटकती हुईराग की सीढियों पर सजाये हुयेथिरकनें ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   2:00am 14 May 2012 #
Blogger: राकेश खंडेलवाल
संजो रखे हैं पल स्मृतियों के मैंने मन की मंजूषा में और संवारा करता हूँ उनसे संध्या का एकाकीपनवे पल जिनमें दृष्टि साधना करते करते उलझे नयनावे पल जिनमें रही नींद में सोई हुई कंठ की वाणीवे पल जिनमें रहे अपरिचित शब्द अधर की अंगनाई सेरही छलकती जिनमें केवल रह रह कर भावों की ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   12:04pm 9 Apr 2012 #
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