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Blog: Dil ki awaz

Blogger: beqrar
फनकार करते हैं अब बसर जैसे तैसे फ़ना हो चुके हैं हुनर कैसे कैसेमयकशी, रंजोगम का जवाब बन गई,दवा बन चुके हैं, ज़हर कैसे कैसे,जब से मेरे गाँव मे आया है वो शहरीदेखता हूँ सब मे असर कैसे कैसेफलक का चाँद थे जो, अब तारों मे नही गिनतीढाती है जिंदगी भी कहर कैसे कैसेसूखी पलकों को देख, ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   9:44am 6 Mar 2012 #
Blogger: beqrar
जो गिरने से पहले ही मुझे थाम लिया होता.मैने भी कहाँ अब तक तेरा नाम लिया होता,मेरे गिरने की संभलने की मिसालें नही बनती,जो तूने भी मोहब्बत से अगर काम लिया होता,... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   7:35pm 10 Aug 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
मफलिसो, यतीमों पे जिसकी नज़र ना होवो अधूरा दौलतमंद है जिसमे सबर ना हो,दौलत को आता देख कर ईमानदारी ने कहाशायद अब इस दर पे कभी मेरी कदर ना हो,वाक़िफ़-ए-हालत हूँ, तभी तो चोट लगती हैसाजिशें ऐसी हो तेरी के मुझको खबर ना हो,रोज बूढ़ी आँखो से रास्ते को तकता हैरोज़ी की खातिर कोई बेट... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   7:57pm 8 Aug 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
कल फिर सहर मे होगी, मुलाकात चलते चलते सूरज कह गया था ये, शाम ढलते ढलतेपलकों मे समेटे रखा, मरने नही दिया,ख्वाब सभी सच हो गये आँखों मे पलते पलते,तासीर थी जुदा मेरी, कुछ तेरा असर हुआ,पीलापन आ ही जाता है उबटन को मलते मलतेबाति खुद जली, खोया तेल का वज़ूदरात बहूत मश-हूर हुआ, चिराग ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:45am 3 Aug 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
बना, बिगड़ा, गिरा, संभला, उठा, बैठा, बहा, बहकाकभी रोया, कभी चहका, कभी खोया कभी महका,कभी तन्हा कभी मेला, सब तक़दीर का खेला,सूना समझा, हंसा बोला, कभी माशा कभी तोला,कभी राशन कभी कपड़े, पानी के लिए झगड़े,केरोसिन कभी शक्कर, कभी चावल, कभी कंकर,उधारी वो बानिए की, निकल जाना है फिर छुपकर,... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:53pm 19 Jul 2011 #Kavita
Blogger: beqrar
ये प्यार मोहब्बत, ये इश्क़ों के किस्से,ये झूठी कहानी, वफ़ाओं के क़िस्से,बिना दिल को समझे, दिल की ये बातें,बिना गम को जाने, गमख्वारी के किस्से,खुद ही की बेवफ़ाई, और तोहमत किसी पे,ये फिरकापरस्ती के बोझिल से किस्से,ख़यालों की दुनिया मे जो तुमने बसाए,उन वीरान मकानो, के टूटे ये ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:50pm 26 Jun 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
यूँ मुस्करा के देखो, “काँटे” गुलाब कर दोलबों से प्याले छू के, पानी शराब कर दो,पन्ने कई है खाली, हैं सफे कई अधूरे,चले आओ ज़िंदगी मे, पूरी किताब कर दो,... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:00pm 22 Jun 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
हसरत थी इतनी तो थोड़ी हिम्मत भी दिखाई होतीआ ही गये थे बाज़ार मे तो बोली भी लगाई होती,क्या क्या ना कहता रहा,  नज़रें झुका के वोसच्चाई थी बातों मे तो नज़रें भी मिलाई होती,गाँधी-नेहरू की बातें, ठीक है बेटे को सुनाना,बाप-दादा की कहानी भी कभी उसको सुनाई होती,मेरी रज़ा को बूझत... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   5:15pm 12 Jun 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
बिन धागे के फूलों का बिखरना लाजिमी था,राहों मे गिरे तो फिर कुचलना लाजिमी थामुश्किल मे मदद का मुझे हाथ ना मिला,खुद आप ही मेरा, संभलना लाजिमी थाहर वक़्त जो मुस्कान को होठों पे रखता हैउस शख्स का तन्हाई मे सिसकना लाज़िमी था,हर रोज दिखाए जाते थे ढेर दौलत के,चिकनी थी मिट्टी, वह... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   8:17am 9 Jun 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
शाहरूख, सलमान या फिर दिग्विजय सिंग जी.....सभी का कहना है की बाबा रामदेव को सिर्फ़ अपने काम तक ही सीमित रहना चाहिए इससे ज़्यादा किसी और काम मे हाथ नही डालना चाहिए....मैने जब इन महाशयों के ये बयान टीवी पर देखे तो मन मे सवाल उठा की भाई.....एक बाबा जो योग सिखाता है उसने अगर काले धन को ... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:21pm 3 Jun 2011 #
Blogger: beqrar
ममता मे पलते हैं, रिश्ते हिमायत के,औलाद से हैं बाप के रिश्ते हिफ़ाज़त केतोड़ने से पहले महज इतना ख़याल होमुश्किल से बनते हैं रिश्ते मुहब्बत केभरोसे की कच्ची डोर से बँधे हुए हैं येसहेज कर रखना ये रिश्ते नफ़ासत के,खत मे तुझे “मेरी जान” हर बार लिख  दियाकाग़ज़ पे ही लिखना ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:59pm 2 Jun 2011 #ghazal kavita
Blogger: beqrar
सीखा-साखा भूल गया सब, असलियत जब सवार हुई,दिन था मेरा अदबी-शहरी, रातें मेरी गँवार हुई,दिल की रह गई दिल मे मेरे, बोल ना फूटे अधरों से,सुनी-सुनाई सुना दी तुझको, बातें मेरी उधार हुई,हर बार तेरे सवरने मे, खामी सी लगती थी मुझको,क्यूँ आज सुबह भीगे तन पर, तेरी बिंदिया ही सिंगार हुई,तू ... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   7:05pm 31 May 2011 #
Blogger: beqrar
रुख़ बदला हवाओं का, और परदा सरक गया,असलियत छुपाई लाख, पर चेहरा झलक गया,ना किर्चेन ही बिखरी, ना आवाज़ कोई आई,इस अदा से लगी ठेस के बस शीशा दरक गया,उसी दिन से बे-ईमानी से, कुछ बू सी आने लगी,जिस दिन बू-ए-ईमान से गिरेबान महक गया,तर्क-ए-ताल्लुक को लोग, मेरी रज़ा जाने बैठे थे,एन वक़्त प... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:59am 20 Apr 2011 #
Blogger: beqrar
मेरे महबूब भी मुझसे कुछ इस हाल से मिले,मैदान-ए-जंग मे शम्सीरें जैसे ढाल से मिले,मेरी बुलंदी ही थी शायद दोस्ती की अकेली वज़ह,वक़्त बदला तो हर नज़र मे कई सवाल से मिले,छलक गईं उनकी भी आँखें मेरा घर गिरा कर,जो भीगे से कुछ पत्थर मेरी दीवाल से मिले,ना मजनू से मेरा जोड़, ना रांझा स... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   8:41am 18 Mar 2011 #
Blogger: beqrar
तपती हुई दुपहरी मे वर्षा का कयास क्यूँ,उष्णता ही भाग्य है तो शीतलता की आस क्यूँ,गेरू-आ पहन भी गर राम और अल्लाह हैं दो,तो लौट आओ समाज मे ये व्यर्थ का सन्यास क्यूँ,एक -दूजे को देख-कर, हर एक बस ये सोचता हैसभी हैं मगन खुशी मे और में निराश क्यूँ,मेरा घर रोशनी से हो भले सराबोर मगर,ब... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   8:10am 21 Feb 2011 #
Blogger: beqrar
कल्पना ही था वो एक,मुझे बहलाने के लिए,मा ने गढ़ा था उसे महज़,मुझे खाना खिलाने के लिए,अक्सर मेरी ना खाने की ज़िद पे,मा अपने हाथ से नीवाला बनाती,एक काल्पनिक कौवा, जो मेरा नीवाला खाने को,तैयार रहता, उसका डर दिखाती,और मे कौवे के खाने से पहले,वो कौर जल्दी से खा लेता,मा फिर से एक क... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:28am 20 Feb 2011 #
Blogger: beqrar
बहूत कर चुका हूँ मे, लबो-रुखसार की बातें,पलकों की चिलमन की, तेरे दीदार की बातें,तेरी कम्बख़्त नज़रों के तीरो तलवार की बातें,गुलशन चमन की फूलों की बहार की बातेंचलो आज करते हैं कुछ घर-संसार की बातें,बूढ़े बाप की चर्चा, उस बीमार की बातें,मा के आँचल से बहती रूहानी बयार की बाते... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   4:36pm 18 Feb 2011 #
Blogger: beqrar
छतों पे बिखरी होती थी पतंगों की बहार,नीचे बुलाती लालों को, माओं की पूकार,छुपान-छुपी का खेल, सतोलिये का खुमार,मंदिर मे प्रसाद के लिए लगाए लंबी कतारसाइकिलों की रेस मे गिरना-उठना बार बार,टायरों के खेल और धूल के गुबार,गुलेल छोटी सी शेर चीतों के शिकारधमाल, मार-धाड़ फिर शर्ट ता... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:42pm 16 Feb 2011 #
Blogger: beqrar
"सच्चे सौदे" की लिए अब यहाँ, बाज़ार नही मिलते,सच्चाई और ईमानदारी के, खरीदार नही मिलते,मेरे अंजाम से बे-खबर, कुछ लोग कह गये,अब "रांझा, मजनू" से इश्क़ के, तलबगार नही मिलते,"नव-रत्नो" का सा इल्म रखते है अब भी लोग परउन्हे अकबर जैसे शहन्शाओं के, दरबार नही मिलते,मे रोया शिद्दत से और छ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   8:27am 14 Feb 2011 #
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