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Blog: कवितायन

Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
हाँ,मैं भूल गया हूँ मुस्कुराना/अपने से बातें करना/कहकहे लगाना/या तुम्हारे गेसुओं में फिराते उँगलियाँभूल जाना जीने की ज... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   6:40am 3 Mar 2019 #खंदक
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
मेरे लिएफिर नही लौटाबयारो वाला मौसमलाख चाहने पर भीमिट्टी से नही उठी सौंधी गमकन ही इन्द्रधनुष खिंचा वितान परनही आई ठिठ&... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:30pm 25 Nov 2018 #ठिठुरन
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
करीब साढे नौ सालों के बाद अचानक फ़िर अपने ब्लॉग कि याद आई है.....उम्र ने बढते हुयेद्दर्ज कर दी थी पेशानियों पेअपनी मौजुदगीऔर सफ़ेदी बढते हुयेकह ही दिया थाकि बहुत हो चुका सबमन था किमानता ही नहीकभी यहाँ कभी वहाँअखबारों से शुरु हुआ सिलसिलाथमा तो व्हात्सएप परइस बीच पत्रिका... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   11:13am 1 Jul 2017 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
एक बोझिल सुबह जिसमें समेटना है दिन का विस्तार इसके पहले कि मायूसियाँशाम के साथ लिपटने लगे पहलु के साथ दौड़ना है दिनभर काæ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   1:52pm 28 Aug 2016 #दिन
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
मैंजब तक नही जानता था अपने पंखों कोअन्जान था आकाश की गहराइयों से बस धरती के छोर पर ही खत्म हो जाती थी दुनिया मेरी एक सुबह आकाश ने रचे रंगों के षड़यंत्र मेरे लिएतब कहीं जाके मेरे पंखों ने लांघी क्षमता की दहलीज और समूचा आकाश सिमट आया मेरी उड़ान में ---------------------मुकेश कुमार त... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:35pm 3 Sep 2013 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
एक स्त्री अपने होने की जंग से कहीं ज्यादा लड़ती है, आदमी के लिए और उसके अस्तित्व को बचाए रखने की जद्दोजहद में अपनी पहचान को खो देती है, दरअसल जो सहअस्तित्व का भाव है वो दांपत्य के बोझ में खो जाता है और यूँ लगता है कि जैसे स्त्री उस रिश्ते में मौजूद भर है बगैर किसी पहचान के ल... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   11:30am 19 May 2013 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
मेरे एक करीबी मित्र हैं वली खान और उनके साहबजादे अमन खान, बस एक दिन यूँ ही कह बैठे कि अंकल एक ऐसी कविता सुनाओ जिसमें मैं हूँ, बच्चे की अचानक की गई इस माँग से मैं पहले तो हतप्रभ था लेकिन फिर एक प्रयास से उनके ड़ाईंग रूम में ही तकरीबन आशु कविता सी जो उस बच्चे ने बहुत पसंद की और ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   12:18pm 7 Apr 2013 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
एक लम्बे अंतराल के बाद कोई पोस्ट कर पा रहा हूँ,  इसबीच अपनी नौकरी की व्यस्तताएँ, कमिटमेंट्स फिर बेटे का बीमार हो जाना और फिर एम.ई.(प्रोडक्शन इंजि एवं डिजाइन) कि परिक्षाएँ न जाने उलझने हैं कि खत्म ही नही होती। अब बाहा-२०१३ (www.bajasaeindia.org) की तैयारियों में उलझा हुआ हूँ, बहरहाल हा... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:07pm 8 Feb 2013 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
हमदोनोंकेबीचपूरेचैबीसघंटेथेयदि मेरे बस में होता तो लिख देता अपने हिस्से को भी तुम्हारे नामऔरयहजद्दोजेहद  यहीं खत्म हो जाती हमेशा के लिए किमेरे पास तुम्हारे लिए वक्त नही हैमेरेअपनेपासतोअपनी वज़हों के लिए खामोशियाँ ही बचती हैजिन्हें तुम अक्सर मेरी लाचारियों का ना... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   12:02pm 20 Oct 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
हमारेबीचउम्मीदोंकाआस्माँहैऔरहमेंजोड़ताहुआइन्द्रधनुषजिससेतुमचुनतीहोकोईचटकरंगअपनीपसंदकाऔरमेरेलिएधूसरजिन्दगीमेंअबभीशेषहैंरंगकईहमारेबीचनउम्मिदियोंकीजमींहैऔरअंनततकफैलाहुआफासलामैंबोदेनाचाहताहूँतुम्हारीप्रतीक्षाकेबीज  इसछोरपेऔरतुम्हेंदेनेकेलि... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   12:14pm 19 Sep 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
मैं,केवल विस्तार भर हूँ उस अशेष-शेष का और कुछ भी नही इससे ज्यादा यहाँ तक कि मेरा होना भी तुम्हारे होने की वज़ह का मोहताज है शायद,यही हमें जोड़ता भी है और अलहदा भी करता है ठीक वहीं से जहाँ तुम पाते हो अपने विचारों को गड्ड-मड्ड होते और छोड़ देते हो प्रश्नों को उलझे हुए धागों सा ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   4:45pm 11 Aug 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
सच!,मुझे तभी तक अच्छा लगा जब तक मैं समझता रहा कि केवल मुझे ही हक़ है मुँह उठा के बोल देना का कुछ भी / किसी को भीबगैर यह देखे कि मेरा सच उसके दिल को चीर के निकलेगा कहींया तोड़ देगा उसके विश्वास को कि सच होता है, अब भी ? धीरे-धीरे मुझे, यह समझ आने लगा कि सच!अक्सर तकलीफ पहुँचाता हैअब, ... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:04am 17 Jul 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
अबमुझे कोई रूचि नही होती किबेमतलब ही झाँकता रहूँआसमान मेंऔर अपने आसपासमंडराते बादलों से करूं बातेंज़मीन की ज़मीन पर रहने वालों कीमुझेइस ऊँचाई सेअब ज़मीन पर देखनाफिर खोजते रहना बस्तियों कोया दूर तक पीछा करना सर्पिली सड़कों कानही लुभाता हैअबनही सुहाता हैचिकने पन्नों प... Read more
clicks 179 View   Vote 1 Like   3:29am 11 Jun 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
आज सुबह ही लौटा हूँ पिछले तीन दिनों से भटक रहा था कोयम्बटूर फिर बेंगलुरू। इस सफर में सिर्फ कोयम्बटूर में ही दिखे मंदिर में सिर झुकाते लोग, सड़क पर देवी की शोभा यात्रा निकालते हुए लोग यह सब देखते हुए न जाने किन ख्यालों में खो गया........... मैंआजतक नहीसमझपायाहूँकिलोगकैसेबचाले... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   12:33pm 11 May 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
होली हो जाने के बावजूद भी न जाने क्यों आजतक वो रंगों की महक घुली हुई है मेरे इर्दगिर्द और मैं हर पल बस भीगता जाता हूँ और इन्हीं भीगे हुए पलों को जब आपसे बाँटना चाहा तो :-रंगथे यहाँवहाँफैलेहुएजैसे किसीबच्चेनेकैनवासके साथहोलीखेलीहोहर एक रंगखोरहाथाअपनी पहचानदूसरे रंग... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   4:45pm 20 Apr 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
तुम्हारेपसीनेकी बू मुझेअच्छी लगती है किसीरूम फ्रेशनर से भी बेहतर औरचाहता हूँ कितुमयूँ ही मेरेतेज होती साँसों में समा जाओ इसबात का कोईमतलब नही होता किहमारे बीच लाख नासमझियाँ हों लेकिनफिर भी मैं गुमहो जाना चाहता हूँतुम्हारीबाहों के दायरे में अपनेपूरे अस्तित्व के स... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   12:05pm 21 Mar 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
जबसे, दिखनेऔर बिकने के संबंधों को  गणितने परिभाषित किया औरअर्थशास्त्र के  सिद्धाँतोंने समझाया कि बिकनेके लिए दिखना सम्पूरक है कपड़ेछोटे होने लगे पहले,पतलूनऊँची हुई तोज़ुराबेंझाँकने लगी पाँयचों से बाहर फिरज़ुराबों पे लिखाजाने लगा ब्राण्ड अबसिर्फ ज़ुराबें ही पहनी जा... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   12:24pm 21 Feb 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
प्रेम,अपनेकोव्यक्तकरनेकेलिएकेवलसौन्दर्यकोहीनहीखोजतावहकिसीभीरूपमेंतलाशलेताहैस्वयंकोअभिव्यक्तकरनेकारास्ताप्रेमकीविशुद्धअभिव्यक्तीमैंनेमहसूसकीहैनिश्छलझरनोंमेंअन्जानपहाड़ीकेकिसी निर्झर कोनेसे जब, कोई नदी प्रकृति के मोह मेंछलाँग लगा देती हैकिसी अनछु... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   12:27pm 25 Jan 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
नये साल की पूर्व रात्रि, जो भी मन में था उसे निम्न पंक्तियों के माध्यम से आप सभी तक पहुँचा रहा हूँ।तुम्हारे,शब्द मुझे व्यापार से लगते हैं अक्सर चढ़े हुए या गिरे-गिरे से और हरबार तुम आदमी का मोल-भाव करते नज़र आते हो तुम्हारे,शब्द गंधाते हैं मेरी साँसों में ताजे माँस की तरह ... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   12:58am 5 Jan 2012 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
रिश्तोंको,जिन्दगीकीइसहद्दकेबादमैंसमझनेलगाहूँकियहाँअपना-परायाकुछनहीहोताहैयहकेवलएकभ्रमहैऔरजिसमेंनकेवलमैं, नतुमहमसभीघिरेहैंकमोबेशकेवलसन्दर्भबदलतेहैंवक्तकेसाथऔरहमतुमवहींहोतेहैंघिरेहुएऔरकुछनहीबदलताहैयहाँअलबत्ताकुछदेरमैंतुम्हारीभूमिकानिभालेता... Read more
clicks 558 View   Vote 0 Like   5:39am 14 Dec 2011 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
तुम, यदि बचनाचाहतेहोऔरबचे रहनाभी सदियों तकतोसीखलोआदमीकोकाटनाड़र पैदाकरोंउसकीआँखोंमेंअपने लिएकोई ऐसे हीनहीजीपाताउसके साथकभी देखाहै? भीमबेटका* कीदीवारोंपरभित्तियों मेंदर्जजानवर, अबदेखनेकोनहीमिलतेमार दिये.......सबआदमी नेअपनेसाथरखतेहुए(* भीमबेटका भोपाल (म.प्र.) क... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:38pm 23 Nov 2011 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
खिड़कियों से,बाहर झाँकते हुए तुम कभी भी नही देख पाओगे दुनिया कैसी हैतुम्हारी किताबों से कितनी अलग जिस जमीन पर वह घर है खिड़कियों वाला वो भी उसी दुनियाँ में हैं जिसे तुम अपने ड्राईंगरूम में कार्नर टॅबल पर पाते हो  खिड़कियाँ,यदि न बनाई गई होती तो तुम शायद नही पहचान पाते हवा ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   12:13pm 18 Oct 2011 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
आज चार दिन के प्रवास पर निकला हूँ और यह पहला ही दिन है और वो भी अभी पूरा नही हुआ है, कल सुबह से ही ट्रेनिंग क्लास और फिर न जाने क्या-क्या। लेकिन एक बात तो है, मैं तुम्हें मिस कर रहा हूँ...........इस वक्त भीतुम्हें,बड़ा अजीब सा लगता हैघर में यूँ ही सिमटे रहनाया समयकाटनेकोलेकर बैठ जा... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:54pm 26 Sep 2011 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
शायद,तुमनहीजगातेतोहमजागतेहीनहीनींदकाखुमारअबभीबाकीहैहमजैसेस्वपनमेंजीनेकेआदीहोगयेहैंऔरहमारीदुनियाजिसमेंवोभीहैंजोदेतेहैंनशाहमेंग़ाफिलकरनेकेलिएतुमनहीबतातेकिजबआसमानमेंतारेनहीहोतेतोउसेदिनकहतेहैंशायदहमजानहीनहीपातेकिदिनहोनेकामतलबक्याहैबसरातमें... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   1:53pm 27 Aug 2011 #
Blogger: Mukesh Kumar Tiwari
जो, आवाजें तुम्हें सुनाय़ी दे रही उन्हें सुनते रहना या बर्दाश्त कर पाना तुम्हारे बस में नही है तुम,बहुतकुछ न चाह के भी देख रहे हो बरबस जैसे इन्द्रियों ने खुद हथिया लिये हो सारे नियंत्रण अपनेकानों को हाथ से ढांप लेने /उंगलियाँ डाल लेने से कुछ नही होगायह आवाजें तब भी आयेंग... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   6:04pm 13 Aug 2011 #
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