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Blog: मेरी भावनायें...

Blogger: rashmi prabha
भावनाओं की आँधी उठे या शनै: शनै:शीतल बयार बहे या हो बारिश सी फुहार सारे शब्द कहाँ पकड़ में आते हैं !कुछ अटक जाते हैं अधर में कुछ छुप जाते हैं चाँदनी में कुछ बहते हैं आँखों से और कभी उँगलियों के पोरों से छिटक जाते हैं तो कभी आँचल में टंक जाते हैं ...... मैंने देखा है कई बार इनको प... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   1:32pm 31 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
मैं गले की तरह रुंध जाती हूँ बन जाती हूँ सिसकियाँ चित्रित हो जाती हूँ आंसुओं के धब्बों सरीखे !हो जाती हूँ सर्वशक्तिमान सिसकियों के मध्य से उठाती हूँ जज्बा और आंसुओं को हटाकर मुस्कान का आह्वान करती हूँ !मैं हो जाती हूँ खुद रहस्य और उन रहस्यों का करती हूँ सामना जो विघ्न क... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:00am 29 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
खुद की तलाश खुद के लिए होती है क्योंकि प्रश्न खुद में होते हैं ये बात और है कि इस तलाश यात्रा में कई चेहरे खुद को पा लेते हैं ................अबोध आकृति जब माँ की बाहों के घेरे में होती है तब वही उसका संसार होता है वही प्राप्य और वही संतोष .... !पर जब अक्षरों की शुरुआत होती है साथ में को... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:52am 27 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
यह तलाश क्या है क्यूँ है और इसकी अवधि क्या है !क्या इसका आरम्भ सृष्टि के आरम्भ से है या सिर्फ यह वर्तमान है या आगत के भी स्रोत इससे जुड़े हैं ?क्या तलाश मुक्ति है या वह प्रलाप जो नदी के गर्भ में है या वह प्रवाह जिसका गंतव्य उसके समर्पण से जुड़ा है !जन्म का रहस्य जानना है या म... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   4:07am 25 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
मैं समय हूँ तो क्या ? किसी से कुछ छिनने का ख्यालया यूँ हीं चलते हुए ले लेने काख्यालकभी नहीं आया .दिया तो पूरे मन से दियामीठे को मीठा ही रहने दियाकड़वे को कड़वा ....लेने में पूरा विश्वास रहासुनने में पूरा विश्वास रहामानने में पूरा विश्वास रहाकुछ चेहरों को मैंने झूठ से परे ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   4:55am 24 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
बन्द कमरे में या सड़कों परगुहार लगाती चीखों कोमैंने ठीक उसी तरहमहसूस किया हैजिस दहशत और बचाव की उम्मीद मेंवे गूंजती हैं !सांय सांय सी एक आवाज़दिल दिमाग मेंअंधड़ की मानिंद उठापटक करती है !तहसनहस मानसिक स्थिति कोसहेजने के क्रम मेंमैं कहाँ होती हूँ -खुद ही नहीं जान पाती ... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   3:15am 23 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
मैंने जो जिया वो मेरा जूनून था , मेरे बदलते तर्क भी मेरा जूनून थे !मुझे बस जीना था और कमाल की बात हैसूरज चाँद सितारे धरती आकाश ...सबको जूनून रहा मेरे संग चलने काराह चलते जो मिला वह मेरे जूनून से जुड़ गया ............. इस कमाल में मैंने पाया कि मेरे पास अव्यवहारिक प्यार है , सोच है , कु... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   3:13am 18 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
( माँ )सृष्टि तुम प्रकृति तुम सौन्दर्य तुम परिवर्तन तुम तुम ही हो विद्या तुम्हीं हो लक्ष्मीऔर साहसी दुर्गा तुमतुम हो सपना तुम्हीं हकीकतजीवन का हर स्रोत हो तुम ...शिव की जटा से निकली गंगाआदिशक्ति हो तुमतुम्हीं साज हो तुम्हीं हो गीततोतली भाषा भी तुमतुम्हीं खिलौनातुम्ह... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   4:31am 15 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
( कवि मात्र खुद को कैनवस पर नहीं उतारता , बल्कि समग्रता में जीता है ..... चिड़िया की आँखों की भाषा लिखने से वह चिड़िया नहीं हो जाता , बल्कि वह एक संवेदनशीलता का उदाहरण है ... सिक्के के दूसरे पहलू को उजागर करने की चेष्टा ! )चाहो न चाहोज़िन्दगी बढ़ जाती हैएक क्षण भी नहीं रूकतीविचा... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   6:04am 14 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
खुद की तलाश हर किसी को होती है .... बचपन में हम झांकते हैं कुँए में , जोर से बोलते हैं .... पानी में झांकता चेहरा , बोली की प्रतिध्वनि पर मुस्कुराना खुद को पाने जैसा प्रयास और सुकून है .... खुद को ढूंढना ' मैं ' के बंधन से मुक्त होता है , इस खोज में एक आध्यात्म होता है . इसे समझना , इसे व्... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   12:55pm 10 May 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
मैं जीवन का सत्य लिखना चाहती हूँ बिल्कुल हँस की तरह दूध अलग पानी अलग ...पानी की मिलावट यानि झूठ की मिलावट अधिक होती है पर न ग्वाला मानता है न दुनिया ग्वाले के स्वर में भी सख्ती झूठे के स्वर में कभी तल्खी कभी बेचारगी ....... रिकॉर्ड करो - कोई फर्क नहीं पड़ता झूठ के पाँव बड़े मजबू... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:29am 4 Apr 2012 #
Blogger: rashmi prabha
शब्दों की झोपड़ी में तुम्हें देखा था !!!...इतनी बारीकी से तुमने उसे बनाया था कि मुसलाधार बारिश हतप्रभ ...- कोई सुराख नहीं थी निकलने की कमरे में टपकने की !दरवाज़े नहीं थे -पर मजाल थी किसी की कि अन्दर आ जाए एहसासों की हवाएँ भी इजाज़त लिया करती थीं !न तुम सीता थी न उर्मिला न यशोदा न... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   7:12am 1 Apr 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
मुझे जानना हो तो तितली को देखोगौरैया को देखो पारो को देखोसोहणी को जानोमेरे बच्चों को देखो क्षितिज को देखोउड़ते बादलों को देखोरिमझिम बारिश को देखो बुद्ध को जानो.............जो उत्तर मिले मैं हूँ !ख़ामोशी को देखो बोलती आँखों को देखो इस पार उस पार का रहस्य जानो छत पर अटकी बारिश ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:06am 30 Mar 2012 #
Blogger: rashmi prabha
हाँ मैं कृष्ण ----मैं तो कुछ कहता ही नहीं कह चुका जो कहना था गुन चुका जो गुनना था पर तुम सब अपने बंधन में आज भी हो ...कभी धृतराष्ट्र कभी दुर्योधन कभी शकुनी ....कभी कर्ण कभी अर्जुन कभी युद्धिष्ठिर !एक बार पूर्णतः यशोदा या राधा बनो न प्रश्न न संशय न हार न जीत बस ------ माखन और बांसुरी क... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   3:49pm 27 Mar 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
तुम्हारी सोच मुझसे नहीं मिलती तो तुम बदल गए तुम्हारी मासूमियत खो गई तुम बनावटी हो गए तुमने अपने वक़्त को सिर्फ अपने लिए मोड़ दिया ................मेरी सोच तुमसे नहीं मिलती पर मैं तुम्हें अपनी सोच बताती गईतुम्हारी सोच सुनती गई .... आँधियाँ , तूफ़ान और बदलते लोग अपनी सोच के साथ ...मैं ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   5:07am 20 Mar 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
शब्दों का महाजाल कहें या मायाजाल फैलता जा रहा है जकड़ता जा रहा है अनकहे एहसासों का वक़्त नहीं अपनी डफली अपना राग है'हम सही ' बाकी शक के दायरे में तो स्पर्श का माधुर्य कहाँ और कैसा !शब्द जब बेमानी नहीं थे तो वे ही एहसास थे अब स्व के मद में शब्दों की पैदावार ही अप्राकृतिक हो ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   7:29am 16 Mar 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
( महिला दिवस ! पर )मैं औरत हूँ नहीं चाहिए ऐसा कोई दिवस मुझे जिसमें तुम कुछ लिखो कुछ सूक्तियां कहो कुछ दर्द उजागर करो ... !मैं अपूर्ण हूँ ही नहीं जो एक दिवस के नाम पर तुम मुझे पूर्णता देने का प्रयास करो !अन्नपूर्णा को अपूर्ण तुमने बनाया तुम्हारी नियत , तुम्हारी मर्ज़ी ...निःसं... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   1:57pm 4 Mar 2012 #
Blogger: rashmi prabha
देखा है मैंने अँधेरे से उभरते एक साए को - शायद मेरा था ... नहीं नहीं निःसंदेह मेरा ही था सुना मैंने सन्नाटों को - जो मेरे अन्दर की दबी घुटन से निकलते थे बिना किसी आहट के !खुद को कोसों दूर करके देखा - मैं हूँ या नहीं जानने के लिए कई बार करीब गई धड़कनों की थाह ली साँसों का एहसास लि... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   4:32pm 22 Feb 2012 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
कहाँ से आते हैं ये ख्याल ??? आँखों से टपकते उँगलियों में ऐंठते पाँव में जमते - होठों में सिले पर शब्द - अनवरत ...आँखों से ओझल ये कौन रोता हैकौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है भीगे भीगे से ख्यालों की सदा ये कौन देता है पनपते हैं शब्द अनवरत ...दहलीज़ पे होती है एक सरसराहट कमरे ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:07am 23 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
अमृता -एक टीनएजर की आँखों में उतरी तो उतरती ही चली गई ...वक़्त की नाजुकता रक्त के उबाल को किशोर ने समय दिया फिर क्या था समय अमृता को ले आया ....अमृता के पास शब्द थे इमरोज़ के पास सुकून का जादू जिससे मिला उसे दिया निःसंदेह अमृता ख़ास थी तो उसके घर का कोना कोना महक उठा इस सुकून स... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   11:35am 21 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
सन्नाटा मुझे पसंद नहीं नहीं अच्छा लगता मुझे जब अन्दर सांय सांय सा होता है न दिल धड़कता है न दिमाग कुछ सोचता है चेहरे पर अवाक सी लहरें उठती रहती हैं ...ऐसे में मैं गीतों की भीड़ में चली जाती हूँ यह गीत वह गीत ....देखते देखते ख्यालों में हल्की बारिश होने लगती है खुली हवा ... लहरा... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   4:01am 20 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
जो मैं कहूँ वो तुम कहो - ज़रूरी नहीं फिर जो तुम कहते हो वही मैं भी कहूँ - क्यूँ ज़रूरी होता है ?मैं तो मानती हूँ कि विचारों की स्वतंत्रता ज़रूरी हैअपना अपना स्पेस ज़रूरी है तुम भी मानते हो ...तभी मेरी बात से अलग होकर तुम उसे सहज मानते हो पर मेरे अलग विचार से तुम बिफर उठते हो !य... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   1:09pm 18 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
बात सकारात्मकता की हो नकारात्मकता की हो तो ग्लास आधा खाली है आधा भरा है का तर्क समझ में आता है पर पानी हो , प्यास हो और आधा ग्लास पानी मिले यह बात गले के नीचे नहीं उतरती ...वैसे गौर कीजिये ,यह तर्क एक ख़ास चेहरे की भंगिमा के साथ वही बताते हैं जो आधा ग्लास पानी देखते आगबबुला ह... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:23am 17 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
उन्होंने बड़े प्यार से कहा -'तुम बहुत बहादुर हो "........ चेहरे पे मुस्कान उतर आई वर्षों की परिस्थितियों ने ली अंगड़ाई और मैंने खुद का मुआयना किया ...मैं एक डरपोक लड़की माँ की चूड़ियों में ऊँगली फंसाकर सोती थी ताकि जब भूत मुझे पकड़ने आए तो माँ की चूड़ियों में फंसी ऊँगली माँ को ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:52pm 14 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
Blogger: rashmi prabha
तुम कुशल तैराक हो मैं तैरना नहीं जानती तुम प्रतीक्षित हो गुरुर में मैं पार पहुँचाने का आग्रह करुँगी ...सत्य है- मैं तैरना नहीं जानती पर पार पहुँचने की प्रबल चाह प्रभु से छुपी नहीं है नहीं छुपी है प्रभु से यह बात कि ...डूबने के भय से मैं आशंकित नहीं पानी में उतर ही जाऊँगी ऐसे ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   3:04am 12 Dec 2011 #सर्वाधिकार सुरक्षित
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