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उच्चारण

सावन सूखा बीत न जाये।नभ की गागर रीत न जाये।।कृषक-श्रमिक भी थे चिन्ताकुल।धान बिना बारिश थे व्याकुल।। रूठ न जाये कहीं विधाता।डर था सबको यही सताता।।लेकिन बादल है घिर आया। घटाटोप अंधियारा छाया।। अम्बुआझार चली पुरवायी।शायद बारिस की रुत आयी।।बिजली कड़की, बादल गर...
Tag :चौमासा बारिश से होता
  June 23, 2017, 5:33 am
आज छोटे पुत्र विनीत का जन्मदिन है,इस अवसर पर मेरे कुछ उद्गार...खाओ आज मिठाई जमकर,जन्मदिवस है आज तुम्हारा।महके-चहके जीवन बगिया,आलोकित हो जीवन सारा।।बाबा-दादी, स्वर्गलोक से,सब देंगे अपना प्यार तुम्हें।वर्षगाँठ है आज तुम्हारी,सब देंगे उपहार तुम्हें।। मम्मी-पापा जी भर...
Tag :छोटे पुत्र विनीत का जन्मदिन
  June 21, 2017, 4:30 am
सुबह-शाम कर लीजिए, सच्चे मन से योग।तन-मन को निर्मल करे, योग भगाए रोग।१।--दुनियाभर में बन गया, योग-दिवस इतिहास।योगासन सब कीजिए, अवसर है यह खास।।मानुष जन्म मिला हमें, करने को शुभकाम।पापकर्म करके इसे, मत करना बदनाम।।थोड़े से ही योग से, काया रहे निरोग।।तन-मन को निर्मल करे, यो...
Tag :बहुत जरूरी योग
  June 20, 2017, 6:00 am
योग-ध्यान का दे दिया, अब जग को सन्देश।विश्वगुरू कहलायगा, फिर से भारत देश।।--खुश होकर अपना लिया, सबने अपना योग।भारत के पीछे चले, दुनियाभर के लोग।।--पातंजलि की राह पर, चलने लगा हुजूम।रामदेव के योग की, दुनियाभर में धूम।।--ऋषि-मुनियों के योग से, होंगे सभी निरोग।भोगवाद को छोड़...
Tag :दोहे
  June 19, 2017, 4:51 am
पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत्-शत् बार।बिना आपके है नहीं, जीवन का आधार।।--बचपन मेरा खो गया, हुआ वृद्ध मैं आज।सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।--जब तक मेरे शीश पर, रहा आपका हाथ।लेकिन अब आशीष का, छूट गया है साथ।।--तारतम्य टूटा हुआ, उलझ गये हैं तार।कौन मुझे अब करेगा,...
Tag :पिता सबल आधार
  June 18, 2017, 9:46 am
सबका अपना-अपना होता,जीने का अन्दाज़ निराला।अक्षर-अक्षर मिलकर ही तो,बनती है शब्दों की माला।।भाषा-भूषा, प्रान्त-देश का,सम्प्रदाय का झगड़ा छोड़ो,जो सीधे-सच्चे मानव हैं,उनसे अपना नाता जोड़ो,नभ जब सूरज उगता है,लाता अपने साथ उजाला।अक्षर-अक्षर मिलकर ही तो,बनती है शब्दों की म...
Tag :पल में तोला
  June 18, 2017, 4:00 am
अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई की157वीं पुण्यतिथि पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान कीयह अमर कविता सम्पूर्णरूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ!सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटि तानी थी,बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई ...
Tag :
  June 17, 2017, 6:39 am
सबके मन को मोहते, अमलतास के फूल।शीतलता को बाँटते, मौसम के अनुकूल।१।--सूरज झुलसाता बदन, बढ़ा धरा का ताप।अमलतास तुम पथिक का, हर लेते सन्ताप।२।--मौन तपस्वी से खड़े, सहते लू की मार।अमलतास के पेड़ से, बहती सुखद बयार।३।--पीले झूमर पहनकर, तन को लिया सँवार।किसे रिझाने के लिए, करते ...
Tag :दोहे
  June 17, 2017, 5:52 am
गीत सुनाती माटी अपने, गौरव और गुमान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस्तान की।।खेतों में उगता है सोना, इधर-उधर क्यों झाँक रहे?भिक्षुक बनकर हाथ पसारे, अम्बर को क्यों ताँक रहे?आज जरूरत धरती माँ को, बेटों के श्रमदान की।दशा सुधारो अब तो लोगों, अपने हिन्दुस...
Tag :गीत सुनाती माटी
  June 16, 2017, 6:09 am
कहीं कुहरा, कहीं सूरज, कहीं आकाश में बादल घने हैं।दुःख और सुख भोगने को, जीव के तन-मन बने हैं।।आसमां पर चल रहे हैं, पाँव के नीचे धरा है,कल्पना में पल रहे हैं, सामने भोजन धरा है,पा लिया सब कुछ मगर, फिर भी बने हम अनमने हैं।दुःख और सुख भोगने को, जीव के तन-मन बने हैं।।आ...
Tag :गीत
  June 14, 2017, 5:47 am
रूप कितने-रंग कितने।बादलों के ढंग कितने।। कहीं चाँदी सी चमक है,कहीं पर श्यामल बने हैं।कहीं पर छितराये से हैं,कहीं पर झुरमुट घने हैं।मोहते ये मन सभी का,कर रहे हैं दंग कितने।बादलों के ढंग कितने।। सींचने आये धरा को,अमल-शीतल नीर लेकर।हल चलेंगे खेत में अब,धान की तकदीर ल...
Tag :बादलों के ढंग कितने
  June 13, 2017, 6:57 am
देवालय का सजग सन्तरी,हर-पल राग सुनाता है।प्राणवायु को देने वाला ही,पीपल कहलाता है।।इसकी शीतल छाया में,सारे प्राणी सुख पाते हैं,कागा और कबूतर इस पर,अपना नीड़ बनाते हैं,देवालय में पीपल राजा,देवों से बतियाता है।प्राणवायु को देने वाला ही,पीपल कहलाता है।।सभी आस्थावान लोग...
Tag :पीपल ही उद्गाता है
  June 12, 2017, 6:36 am
लड़की लड़का सी दिखें, लड़के रखते केश।पौरुष पुरुषों में नहीं, दूषित है परिवेश।।--देख जमाने की दशा, मन में होता क्षोभ।लाभ कमाने के लिए, बढ़ता जाता लोभ।।--भौतिकता की बाढ़ में, घिरा हुआ है देश।फैशन की आँधी चली, बिगड़ गया है वेश।।--पूरब में अब आ गये, पश्चिम के सब रोग।योग छोड़क...
Tag :दोहे
  June 11, 2017, 4:00 am
जिन्दगी आगे बढ़ेगी कब तलककाठ की हाँडी चढ़ेगी कब तलकलहर आयेगी बहा ले जायेगी सबरेत में मूरत गढ़ेगी कब तलकप्यार के सब रास्ते अवरुद्ध हैंदोष अपने सर मढ़ेगी कब तलकउस ओर गहरी खाई है चट्टान केइस इबारत को पढ़ेगी कब तलकखूबसूरत “रूप” पर सब हैं फिदाजंग किस्मत की लड़ेगी कब तलक...
Tag :रेत में मूरत गढ़ेगी कब तलक
  June 10, 2017, 4:00 am
सूरज की भीषण गर्मी से,लोगो को राहत दे जाता।।लू के गरम थपेड़े खाकर,अमलतास खिलता-मुस्काता।।डाली-डाली पर हैं पहनेझूमर से सोने के गहने,पीले फूलों के गजरों का,रूप सभी के मन को भाता।लू के गरम थपेड़े खाकर,अमलतास खिलता-मुस्काता।।दूभर हो जाता है जीना,तन से बहता बहुत पसीना,शीतल...
Tag :झूमर से सोने के गहने
  June 9, 2017, 6:37 am
समय के साथ हम भी कुछ, बदल जाते तो अच्छा था।नदी के घाट पर हम भी, फिसल जाते तो अच्छा था।महकता था चमन सारा, चहकता था हरेक बूटा,चटकती शोख़ कलियों पर, मचल जाते तो अच्छा था।पुरातनपंथिया अपनी, बनी थीं राह का रोड़ा,नये उन रास्तों पर हम, निकल जाते तो अच्छा था।मगर बन गोश्त का हलवा, हमे...
Tag :बदल जाते तो अच्छा था
  June 8, 2017, 6:18 am
समय के साथ हम भी कुछ, बदल जाते तो अच्छा था।नदी के घाट पर हम भी, फिसल जाते तो अच्छा था।महकता था चमन सारा, चहकता था हरेक बूटा,चटकती शोख़ कलियों पर, मचल जाते तो अच्छा था।पुरातनपंथिया अपनी, बनी थीं राह का रोड़ा,नये उन रास्तों पर हम, निकल जाते तो अच्छा था।मगर बन गोश्त का हलवा, हमे...
Tag :बदल जाते तो अच्छा था
  June 8, 2017, 6:18 am
साहित्य की विधा"क्षणिका"    क्षणिका को जानने पहले यह जानना आवश्यक है कि क्षणिका क्या होती है? मेरे विचार से “क्षण की अनुभूति को चुटीले शब्दों में पिरोकर परोसना ही क्षणिका होती है। अर्थात् मन में उपजे गहन विचार को थोड़े से शब्दों में इस प्रकार बाँधना कि कलम से निकले...
Tag :साहित्य की विधा
  June 7, 2017, 5:45 am
कब सरसेंगे गीत निरालेकब बरसेंगे बादल कालेघाम जलाता है तन-मन कोजून सताता है जन-जन कोपड़े हुए पानी के लालेकब बरसेंगे बादल कालेआसमान से आग बरसतीगर्मी से है धरती तपतीसूरज के तेवर मतवालेकब बरसेंगे बादल कालेकातर सुर में व्यथा सुनातेदादुर टर्र-टर्र चिल्लातेसूख गये हैं नद...
Tag :गीत
  June 7, 2017, 4:00 am
ठण्डी-ठण्डी हवा खिलाये।इसी लिए कूलर कहलाये।।जब जाड़ा कम हो जाता है।होली का मौसम आता है।।फिर चलतीं हैं गर्म हवाएँ।यही हवाएँ लू कहलायें।।तब यह बक्सा बड़े काम का।सुख देता है परम धाम का।।कूलर गर्मी हर लेता है।कमरा ठण्डा कर देता है।।चाहे घर हो या हो दफ्तर।कूलर सजा हुआ ख...
Tag :बालकविता
  June 6, 2017, 6:53 am
धरा-दिवस पर कीजिए, यही प्रतिज्ञा आज।भू पर पेड़ लगाइए, जीवित रहे समाज।१।--हरितक्रान्ति से मिटेगा, धरती का सन्ताप।पर्यावरण बचाइए, बचे रहेंगे आप।२।--पेड़ लगाकर कीजिए, अपने पर उपकार।करो हमेशा यत्न से, धरती का सिंगार।३।--खाली रहे न कहीं भी, अब खेतों की मेढ़।सड़क किनारे मित्र...
Tag :दोहे
  June 5, 2017, 10:58 am
पीला-श्वेत-गुलाबी जिसका,रूप सभी को भाया है।लू के गर्म थपेड़े खाकर,फिर कनेर मुस्काया है।।आया चलकर खुला खजाना,फिर से आज कुबेर का।निर्धन के आँगन में पनपा,बूटा एक कनेर का।कोमल और सजीले फूलों ने,मन को भरमाया है।लू के गर्म थपेड़े खाकर,फिर कनेर मुस्काया है।।कितनी शीतलता दे...
Tag :बूटा एक कनेर का
  June 5, 2017, 6:33 am
जब गायेंगे नये गीत फिर।तब पायेंगे नये मीत फिर।।मन में नवउत्साह जगेगा,मातम खुशियों में बदलेगा।आशा का अंकुर उपजेगा,जीने का आधार मिलेगा।खुद ही चलकर आ जायेगी,दरवाजे पर नयी जीत फिर।जगमग-जगमग दीप जलेंगे,अँधियारे को दूर करेंगे।तन-मन न्योछावर करने को,पागल परवाने मचलेंगे।...
Tag :नयी रीत फिर
  June 5, 2017, 6:24 am
सूरज आग उगलता जाता।नभ में घन का पता न पाता।१।जन-जीवन है अकुलाया सा,कोमल पौधा मुर्झाया सा,सूखा सम्बन्धों का नाता।नभ में घन का पता न पाता।२।सूख रहे हैं बाँध सरोवर,धूप निगलती आज धरोहर,रूठ गया है आज विधाता।नभ में घन का पता न पाता।३।दादुर जल बिन बहुत उदासा,चिल्लाता है चातक ...
Tag :बहता तन से बहुत पसीना
  June 4, 2017, 3:08 pm
हैवानों की होड़ अब, करने लगा समाज।खौफ नहीं कानून का, बदले रीति-रिवाज।।लोकतन्त्र में न्याय से, होती अक्सर भूल।कौआ मोती निगलता, हंस फाँकता धूल।।धनबल-तनबल-राजबल, जन-गण रहे पछाड़।बच जाते मक्कार भी, लेकर शक की आड़।।माँ-बहनों के रूप की, लगती बोली आज।खौफ नहीं कान...
Tag :बदले रीति-रिवाज
  June 3, 2017, 10:46 am
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