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उच्चारण

कल केवल कुहरा आया था,अब बादल भी छाया है।हाय भयानक इस सर्दी ने,सबका हाड़ कँपाया है।।भीनी-भीनी पड़ी फुहारें,झीना-झीना उजियारा।आग सेंकता सरजू दादा,दिन में छाया अँधियारा।कॉफी और चाय का प्याला,सबसे ज्यादा भाया है। हाय भयानक इस सर्दी ने,सबका हाड़ कँपाया है।।आलू और शकरकन...
Tag :अपना नीड़ बनाया है
  December 13, 2017, 7:28 am
मित्रों!कई वर्ष पूर्व यह गीत रचा था।आज आप सबके साथ साझा कर रहा हूँ।छला प्यार में जिसने मुझको,मैंने उससे प्यार किया है।जीवन के इस दाँव-पेंच में,मैंने सब-कुछ हार दिया है।।जब राहों पर कदम बढ़ाया,काँटों ने उलझाया मुझको।जब गुलशन के पास गया तो,फूलों ने ठुकराया मुझको।जिस...
Tag :मैंने सब-कुछ हार दिया है
  December 12, 2017, 7:50 am
आपाधापी की दुनिया में,ऐसे मीत-स्वजन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन देखे हैं।।धीर-वीर-गम्भीर मौन है,कायर केवल शोर मचाता।ओछी गगरी ही बतियाती,भरा घड़ा कुछ बोल न पाता।गर्जन करते, बरस न पाते,हमने वो सावन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन देखे ह...
Tag :वो निष्ठुर उपवन देखे हैं
  December 11, 2017, 7:35 am
धूप नहीं नभ में खिली, अंग ठिठुरता जाय।सरदी में अच्छी लगे, गरम-गरम ही चाय।१।आग सेंकने का चढ़ा, देखो कैसा चाव।सरदी में अच्छा लगे, जलता हुआ अलाव।२।ठिठुरन से जमने लगा, सारे तन का खून।शीतल ऋतु में आग से, मिलता बहुत सुकून।३। बच्चे-बूढ़े आग को, सेंक रहे हैं आज।भीषण शीत-प्रकोप ...
Tag :दोहे
  December 10, 2017, 7:54 am
जीवन के पथ में मिले, जाने कितने मोड़।लेकिन में सीधा चला, मोड़ दिये सब छोड़।। पग-पग पर मिलते रहे, मुझको झंझावात। शह पर शह पड़ती रहीं, मगर न खाई मात।।मैं आगे बढ़ता गया, भले लक्ष्य हो दूर। कभी उमर के सामने, नहीं हुआ मजबूर।।साधक कभी न हारता, साधन जाता हार।सच्ची निष्ठा से म...
Tag :प्यार नहीं व्यापार
  December 9, 2017, 7:26 am
उत्तराखण्ड के मा.मुख्यमन्त्रीश्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत नेमेरी दो पुस्तकों “ग़ज़लियात-ए-रूप”  तथा “स्मृति उपवन”का विमोचन किया।      (6 दिसम्बर, 2017) सौ बिस्तरों वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, खटीमा के लोकार्पण के अवसर  पर पधारे उत्तराखण्ड के माननी...
Tag :“ग़ज़लियात-ए-रूप” तथा “स्मृति रपट
  December 7, 2017, 4:35 pm
कुहरे ने सूरज ढका, थर-थर काँपे देह।पर्वत पर हिमपात है, नहीं बरसता मेह।।--ऊनी कपड़े पहनकर, मिलता है आराम।बच्चे-बूढ़े ढक रहे, अपनी-अपनी चाम।।--ख़ास मजे को लूटते, व्याकुल होते आम।मूँगफली मेवा समझ, खाते सुबहो-शाम।।--आज घरेलू गैस के, बढ़े हुए हैं भाव।लकड़ी मिलती हैं ...
Tag :महँगा आलू-प्याज
  December 7, 2017, 7:30 am
कुहासे की चादरमौसम ने ओढ़ ली,ठिठुरन से मित्रता,भास्कर ने जोड़ ली। निर्धनता खोज रही,आग के अलाव,ईंधन के बढ़ गयेऐसे में भाव।हो रहा खुलेआम,जंगलों का दोहन,खेतों में पनप रहेकंकरीट के वन। ठण्ड से काँप रहा,कोमल बदन,कूड़े से पन्नियाँ,बीन रहा बचपन।खोज रहा नौनिहाल,कचरे में र...
Tag :गर्मी में स्वेदकण
  December 6, 2017, 6:52 am
मृग छौने की चाल अब, हुई बैल की चाल।धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।।--जीवन के संग्राम में, किया बहुत संघर्ष।वैवाहिक जीवन हुआ, आज चवालिस वर्ष।।पात्र देख कर शिष्य को, ज्ञानी देता ज्ञान।श्रम-सेवा परमार्थ से, मिलता जग में मान।।जो है सरल सुभाव का, वो ही है खुशहाल।धीरे-धीर...
Tag :दोहागीत
  December 5, 2017, 7:07 am
कुहरा करता है मनमानी।जाड़े पर छा गयी जवानी।।  नभ में धुआँ-धुआँ सा छाया,शीतलता ने असर दिखाया,काँप रही है थर-थर काया,हीटर-गीजर शुरू हो गये,नहीं सुहाता ठण्डा पानी।जाड़े पर छा गयी जवानी।। बालक विद्यालय को जाते,कभी न मौसम से घबराते, पढ़कर सब काबिल बन पाते,करो साधना सच...
Tag :बालगीत
  December 4, 2017, 7:01 am
शिष्ट मधुर व्यवहार, बहुत अच्छा लगता है।सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।फूहड़पन के वस्त्र, बुरे सबको लगते हैं,जंग लगे से शस्त्र, बुरे सबको लगते हैं,स्वाभाविक श्रंगार, बहुत अच्छा लगता है।सपनों का संसार, बहुत अच्छा लगता है।।वचनों से कंगाल, बुरे सबको लगते हैं,जीवन क...
Tag :बहुत अच्छा लगता है
  December 2, 2017, 9:50 am
 "गिलहरी"बैठ मजे से मेरी छत पर,दाना-दुनका खाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!तुमको पास बुलाने को,मैंमूँगफली दिखलाता हूँ,कट्टो-कट्टो कहकर तुमको,जब आवाज लगाता हूँ,कुट-कुट करती हुई तभी तुम,जल्दी से आ जाती हो!उछल-कूद करती रहती हो,सबके मन को भाती हो!!नाम गिलहरी, ब...
Tag :बालकविता
  December 2, 2017, 7:19 am
थोड़े से माली रहे, आज चमन को सींच।बाकी सब लालित्य का, चीर रहे हैं खींच।।--उपवन में चलता नहीं, गुणा-भाग का जोड़।लेकिन फिर भी कर रहे, माली तोड़-मरोड़।।--बिना अध्ययन कर रहे, मनमानी कुछ लोग।नियमों की अवहेलना, हुआ भयंकर रोग।।--योगदान जिसका नहीं, माँगें वही हिसाब।इसीलिए तो हो रह...
Tag :पढ़े-लिखे मुहताज़
  December 1, 2017, 6:59 am
आदिकाल से चल रही, यही जगत में रीत।वर्तमान ही बाद में, होता सदा अतीत।।--जग में आवागमन का, चलता रहता चक्र।अन्तरिक्ष में ग्रहों की, गति होती है वक्र।।--जिनके पुण्य-प्रताप से, रिद्धि-सिद्धि का वास।उनका कभी न कीजिए, जीवन में उपहास।।--जीवित माता-पिता को, मत देना सन्ताप।नित्य नि...
Tag :दोहे
  November 30, 2017, 1:14 pm
दुनियादारी में सदा, रखना संग विवेक।उसको करते याद सब, जो होता है नेक।।फैले हैं संसार में, यूँ तो पन्थ अनेक।सबके दिल में जो बसे, वो नारायण एक।।रूप-रंग सबका अलग, होता भिन्न विवेक।उर मन्दिर में ही करो, ईश्वर का अभिषेक।।कविता-कानन में उगे, अब तो छन्द अनेक।अगल सभी की मापनी, अलग...
Tag :दोहे
  November 29, 2017, 11:05 am
मतलब में करना नहीं, लोगों की मनुहार।।अपने लेखन में करो, अपने आप सुधार।रँगे पश्चिमी रंग में, जब से अपने गीत।तब से अपने देश का, बिगड़ गया संगीत।।वचनबद्ध रहना सदा, कहलाना प्रणवीर।वचन निभाने के लिए, हमको मिला शरीर।।कहना सच्ची बात को, मत होना भयभीत।जो दे सही सुझाव को, व...
Tag :दोहे
  November 28, 2017, 12:03 pm
बिना किसी सम्बन्ध के, भावों का संचार।अनुभव करते हृदय से, आभासी संसार।।--होता अन्तर्जाल पर, दूर-दूर से प्यार।अच्छा लगता है बहुत, आभासी संसार।।--बिना किसी हथियार के, करते हैं सब वार।देखो कितना मुक्त है, आभासी संसार।।--बिना किसी आकार के, लगता जो साकार।सपनो...
Tag :दोहे
  November 27, 2017, 7:07 am
दुनियाभर में बहुत हैं, ऐसे जहाँपनाह।उल्लू की होती जिन्हें, कदम-कदम पर चाह।।--उल्लू का होता जहाँ, शासन पर अधिकार।समझो वहाँ समाज का, होगा बण्टाधार।। --खोज रहें हों घूस के, उल्लू जहाँ उपाय।न्यायालय में फिर कहाँ, होगा पूरा न्याय।।--दिनभर जो सोता रहे, जागे पूरी रात।वो मानव की ...
Tag :दोहे
  November 26, 2017, 7:00 am
निर्वाचन के बाद में, आम हो गये खास।आम-खास के बीच में, लेकिन भरी खटास।।बची हुई है आम में, जब तक यहाँ मिठास।तब तक दोनों में रहे, नातेदारी खास।।आम-खास के खेल में, आम गया है हार।आम खास की कर रहा, सदियों सेमनुहार।।चूस-चूसकर आम को, बन बैठे जो खास।वो ही करते आम का, महफिल में उपहास...
Tag :दोहे
  November 25, 2017, 10:50 am
घटते जाते धरा से, बरगद-पीपल-नीम।इसीलिए तो आ रहे, घर में रोज हकीम।।--रक्षक पर्यावरण के, होते पौधे-पेड़।लेकिन मानव ने दिये, जड़ से पेड़ उखेड़।।--पेड़ काटता जा रहा, धरती का इंसान।प्राणवायु कैसे मिले, सोच अरे नादान।।--दौलत के मद में मनुज, करता तोड़-मरोड़।हरितक्रा...
Tag :दोहे
  November 24, 2017, 7:33 am
अच्छे दिन की चाह में, जनता है बदहाल।महँगे होते जा रहे, आटा चावल-दाल।बाजारों में एक से, कभी न रहते भाव।आता कभी उतार तो, आता कभी चढ़ाव।।रहती एक समान कब, नक्षत्रों की चाल।कभी रुलाती प्याज तो, कभी टमाटर लाल।सरकंडे के नीड़ में, बंजारों का वास।निर्धनता का हो रहा, पग-पग पर ...
Tag :रवि लगता नाराज
  November 22, 2017, 12:57 pm
जीवन के अवसान का, कैसे हो अनुमान।कुदरत के कानून को,भूल गया इंसान।।जितनी बढ़ती है उमर, उतनी बढ़ती प्यास।भँवरा जीवनभर नहीं, ले पाता सन्यास।।जिनके लेखन में रहें, कुण्ठा भरे विचार।फिर उनके सपने भला, कैसे हों साकार।।मेहनत से जो कुछ मिले, उसमें कर सन्तोष।मिन्नत करने से ...
Tag :मत होना मदहोश
  November 21, 2017, 7:59 am
जीवन के दो चक्र हैं, सुख-दुख जिनके नाम।दोनों ही हालात में, धीरज से लो काम।।सरल सुभाव अगर नहीं, धर्म-कर्म सब व्यर्थ।वक्र स्वभाव मनुष्य का, करता सदा अनर्थ।।जीवन प्रहसन के सभी, इस दुनिया में पात्र।सबका जीवन है यहाँ, चार दिनों का मात्र।।छन्द-शास्त्र गायब हुए, मुक्त हुआ साहि...
Tag :नहीं रहा लालित्य
  November 20, 2017, 3:46 pm
आज “चैतन्य का कोना”ब्लॉग पर अचानक ही डॉ. मोनिका शर्माकी इस पोस्ट पर भी नजर पड़ी।  ब्लॉगिंग से जुड़े सभी लोग रूपचंद्र शास्त्री 'मयंक'जी की बाल कवितायेँ पढ़ ही चुके हैं । मुझे भी उनकी बाल कवितायेँ बहुत पसंद हैं । आज चैतन्य की हिन्दी की टेक्सटबुक (अंकुर हिन्दी पाठमाला...
Tag :
  November 19, 2017, 8:00 am
आज दुर्गा की अवतार श्रीमती इन्दिरा गांधीका भी जन्मदिवस है। अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के192वें जन्म-दिवस पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान कीयह अमर कविता सम्पूर्णरूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ!सिंहासन हिल ...
Tag :जन्मदिन
  November 18, 2017, 6:19 pm
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