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उच्चारण

है यहाँ जीवन कठिन,वातावरण कितना सलोना।बाँटता सुख है सभी को,मखमली जैसा बिछौना।पेड़-पौधें हैं सजीले,खेत हैं सीढ़ीनुमा,पर्वतों की घाटियों में,पल रही है हरितिमा,प्राणदायक बूटियों से,महकता जंगल का कोना।शारदा, गंगो-जमुन का,है यहीं पर स्रोत-उदगम,मन्दिरों-देवालयों की,छटा अ...
Tag :पहाड़ों की सतह में
  December 19, 2018, 1:01 pm
लोगों अपने आप पर, करना यह अहसान।भूले से भी कृतघ्न को, मत देना सम्मान।।जो खाता जिस थाल में, करता उसमें छेद।ऐसे कपटी व्यक्ति को, कभी न देना भेद।।मतलब वाले लोग तो, रखते मन मॆं पाप।कह देते हैं गधों को, मतलब में वो बाप।।अच्छे लोगों को सदा, देते रहना मान।माने जो अहसान को, ह...
Tag :दोहे
  December 18, 2018, 12:02 pm
कुम्भ शब्द बहुविकल्पी, जिसके अर्थ अनेक।मन में होना चाहिए, श्रद्धाभाव-विवेक।।कुम्भराशि में हो गुरू, मेष राशि में सूर्य।तभी चमकती वो धरा, जैसे हो वैदूर्य।।सागर मंथन में मिला, अमृत का जो पात्र। उसे हड़पने के लिए, पीछे पड़े कुपात्र।।सुधा कुम्भ को ले उड़ा, नभ में देव ...
Tag :कुम्भ की महिमा अपरम्पार
  December 17, 2018, 3:24 pm
हमें जब भी हसीं लम्हे पुराने याद आते हैंतुम्हें मिलने-मिलाने के बहाने याद आते हैंचमन में गूँजती हैं आज भी वो ही सदाएँ हैंतुम्हारे गुनगुनाए गीत-गाने याद आते हैंगवाही दे रहे हैं ये पुराने पेड़ बगिया केजहाँ बैठे कभी थे वो ठिकाने याद आते हैंबहुत आँसू बहाये थे, बड़े सपने स...
Tag :ग़ज़ल
  December 15, 2018, 11:04 am
सरदी पड़ती ग़ज़ब की, गया दिवाकर हार।मैदानी भूभाग में, कुहरे की है मार।।--लकड़ी-ईंधन का हुआ, अब तो बड़ा अभाव।बदन सेंकने के लिए, कैसे जले अलाव।।--हैं काजू-बादाम के, आसमान पर भाव।मूँगफली को खाइए, मेरा यही सुझाव।।--शीतलता की मार से, है गरीब भयभीत।बच्चे-बूढ़ों के लिए, कठिन झेलना...
Tag :दोहे
  December 14, 2018, 10:51 am
सुख का सूरज नहीं गगन में।कुहरा पसरा है कानन में।।पाला पड़ता, शीत बरसता,सर्दी में है बदन ठिठुरता,तन ढकने को वस्त्र न पूरे,निर्धनता में जीवन मरता,पौधे मुरझाये गुलशन में।कुहरा पसरा है कानन में।।आपाधापी और वितण्डा,बिना गैस के चूल्हा ठण्डा,गइया-जंगल नजर न आते,पायें कहाँ स...
Tag :पौधे मुरझाये गुलशन में
  December 13, 2018, 3:04 pm
फूली रोटी देखकर, मन होता अनुरक्त।हँसी-खुशी से काट लो, जैसा भी हो वक्त।१।फूली-फूली रोटियाँ, सजनी रही बनाय।बाट जोहती है सदा, कब साजन घर आय।२।घर के खाने में भरा, घरवाली का प्यार।सजनी खाने के लिए, करती है मनुहार।३।फूली-फूली रोटियाँ, मन को करें विभोर।इनको खाने देश में, आते रो...
Tag :फूली-फूली रोटियाँ
  December 12, 2018, 4:20 pm
उलटफेर परिणाम में, महज नहीं संयोग।तानाशाही को सहन, कब तक करते लोग।।जनता की तो नाक में, पड़ती नहीं नकेल।जनमत पर ही है टिका, लोकतन्त्र का खेल।।जनसेवक जनतन्त्र में, ओटन लगे कपास।पूरी होगी किस तरह, तब जनता की आस।।जनता का जनतन्त्र में, जिसको मिलता साथ।सत्ता की चाबी रहे, उस द...
Tag :महज नहीं संयोग
  December 11, 2018, 6:54 pm
 पुरखों का इससे अधिक, होगा क्या अपमान।जातिवाद में बँट गये, महावीर हनुमान।।राजनीति के बन गये, दोनों आज गुलाम।जनता को लड़वा रहे, पण्डित और इमाम।।भजन-योग-प्रवचन गये, अब योगी जी भूल। लगे फाँकने रात-दिन, राजनीति की धूल।।रास नहीं आता जिन्हें, योगासन का कार्य।व्यापारी...
Tag :महावीर हनुमान
  December 10, 2018, 5:44 pm
वो पतला सा शॉल      आज से ठीक अट्ठारह साल पुरानी बात है। उत्तराखण्ड को जन्मे हुए उस समय एक मास ही हुआ था और उसके पहले मनोनीत मुख्यमन्त्री थे नित्यानन्द स्वामी। मा. नित्यानन्द स्वामी से मेरा बहुत पुराना सम्बन्ध था। उस समय मैं खटीमा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय ...
Tag :संस्मरण
  December 9, 2018, 1:42 pm
जीवन एक मुसाफिरखानाजो आया है, उसको जानाझूठी काया, झूठी छायामाया में मत मन भरमानासुख के सपने रिश्ते-नातेबहुत कठिन है इन्हें निभानाताकत है तो, सब है अपनेकमजोरी में झिड़की-तानाआँखों के तारे दुर्दिन मेंजान गये हैं आँख दिखानाइस दुनिया की यही कहानीकल हो जाता आज पुरा...
Tag :ग़ज़ल
  December 8, 2018, 3:46 pm
मैं तुमको मैना कहता हूँ,लेकिन तुम हो गुरगल जैसी।तुम गाती हो कर्कश सुर में,क्या मैना होती है ऐसी??सुन्दर तन पाया है तुमने,लेकिन बहुत घमण्डी हो।नहीं जानती प्रीत-रीत को,तुम चिड़िया उदण्डी हो।।जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाकर,तुम आगे को बढ़ती हो।अपनी सखी-सहेली से तुम,सौतन जैसी लड़त...
Tag :प्रकाशन
  December 7, 2018, 10:47 am
जो लगता था कभी पराया,वो ही अब मनमीत हो गया।पतझड़ में जो लिखा तराना,वो वासन्ती गीत हो गया।।अच्छे लगते हैं अब सपने,अनजाने भी लगते अपने,पारस पत्थर को छू करके,रिश्ता आज पुनीत हो गया।मैंने जब सरगम को गाया,उसने सुर में ताल बजाया,गायन-वादन के संगम से,मनमोहक संगीत हो गया।उमर हो ...
Tag :भवसागर भयभीत हो गया
  December 6, 2018, 6:30 am
मित्रों!आज देखिए मेरी दो कुण्डलियाँ(1)खोल दो मन की खिड़कीखिड़की खोली जब सुबह, आया सुखद समीर।उपवन में मुझको दिखा, मोती जैसा नीर।।मोती जैसा नीर, घास पर चमक रहा है।सूरज की किरणों में, हीरक दमक रहा है।।कह मयंक कविराय, शीत देता था झिड़की।रवि का है सन्देश, खोल दो मन की खिड...
Tag :मेरी दो कुण्डलियाँ
  December 5, 2018, 11:45 am
मृग छौने की चाल अब, हुई बैल की चाल।धीरे-धीरे कट रहे, दिवस-महीने-साल।।जीवन के संग्राम में, किया बहुत संघर्ष।वैवाहिक जीवन हुआ, अब पैंतालिस वर्ष।।देख शिष्य की लगन को, गुरू बाँटता ज्ञान।श्रम-सेवा परमार्थ से, मिलता जग में मान।।जो है सरल सुभाव का, वो ही है खुशहाल।धीरे-धीर...
Tag :दोहागीत
  December 4, 2018, 3:22 pm
छिपा क्षितिज में सूरज राजा,ओढ़ कुहासे की चादर।सरदी से जग ठिठुर रहा है,बदन काँपता थर-थर-थर।। कुदरत के हैं अजब नजारे,शैल ढके हैं हिम से सारे,दुबके हुए नीड़ में पंछी,हवा चल रही सर-सर-सर। सरदी से जग ठिठुर रहा है,बदन काँपता थर-थर-थर।। कोट पहनकर, छोड़ रजाई,दादा जी ने आग जलाई...
Tag :सरदी से जग ठिठुर रहा
  December 3, 2018, 4:25 pm
गीत-ग़ज़ल, दोहा-चौपाई, सिसक रहे अमराई मेंभाईचारा तोड़ रहा दम, रिश्तों की अँगनाई मेंफटा हुआ दामन दर्जी को, सिलना नहीं अभी आयासारा जीवन निकल गया है, कपड़ों की कतराई मेंरत्नाकर में जब भी होता, खारे पानी का मन्थनमच जाती है उथल-पुथल सी, सागर की गहराई मेंकेशर की क्यारी को क...
Tag :सागर की गहराई में
  December 2, 2018, 10:30 am
"अनोखा संस्मरण"    लगभग 25 साल पुरानी बात है! उन दिनों मेरा निवास ग्राउडफ्लोर पर था। दोनों बच्चे अलग कमरे में सोते थे। हमारे बेडरूम से 10 कदम की दूरी पर बाहर बराम्दे में शौचालय था। रात में मुझे लघुशंका के लिए जाना पड़ा। उसके बाद मैं अपने बिस्तर पर आकर सो गया। लेकिन दिसम...
Tag :बातें परलोक की
  December 1, 2018, 12:20 pm
“नदी सरोवर झील” एक संग्रहणीय दोहासंग्रह श्री जय सिंह आशावत जी काफी समय से दोहों पर अपनी लेखनी चला रहे हैं। आपने मुखपोथी (फेसबुक) पर 2017 में मेरे द्वारा संचालित “दोहाशिरोमणि प्रतियोगिता” समूह में भी प्रतिभाग किया था। दोहों की गुणवत्ता को देखते हुए साहित्य शारदा ...
Tag :समीश्रा
  November 30, 2018, 3:31 pm
अब सपनों में आ रहे, राम और रहमान।उलझ गये जज्बात में, मेहनतकश इंसान।।--सच्ची होती है नहीं, सपनों की हर बात।जीते-जी मिलती नहीं, जन्नत की सौगात।।--आवारा सपने हुए, हरजाई हैं मीत।जीवन में कैसे बजे, अब मधुरिम संगीत।।--सत्य हारता जा रहा, झूठ रहा है जीत।कलयुग में भूले सभी, अपना आज अ...
Tag :धर्म रहा दम तोड़
  November 29, 2018, 4:36 pm
चन्दा में चाहे कितने ही, धब्बे काले-काले हों।सूरज में चाहे कितने ही, सुख के भरे उजाले हों।लेकिन वो चन्दा जैसी शीतलता नही दे पायेगा।अन्तर के अनुभावों में, कोमलता नही दे पायेगा।।सूरज में है तपन, चाँद में ठण्डक चन्दन जैसी है।प्रेम-प्रीत के सम्वादों की, गुंजन वन्...
Tag :‘चन्दा और सूरज’
  November 28, 2018, 12:06 pm
अपने छोटे से जीवन में कितने सपने देखे मन मेंइठलाना-बलखाना सीखा हँसना और हँसाना सीखा सखियों के संग झूला-झूला मैंने इस प्यारे मधुबन मेंकितने सपने देखे मन में भाँति-भाँति के सुमन खिले थे आपस में सब हिले-मिले थे प्यार-दुलार दिया था सबने बचपन बीता इस गुलशन मे...
Tag :नारी की कथा-व्यथा
  November 27, 2018, 4:54 pm
जिन्दगी जिन्दगी पे भारी है हाड़ धुनने का काम जारी हैपेट भरता था जो जमाने का उसकी खाली पड़ी पिटारी हैसाहुकारों का कर्ज बाकी हैखत्म होती नहीं उधारी हैकल तलक जो शिकार होता था आज खुद बन गया शिकारी हैआज जीवन में मारामारी हैजान अपनी सभी को प्यारी हैजब से गुलशन का वो ब...
Tag :जिन्दगी जिन्दगी पे भारी है
  November 26, 2018, 5:26 pm
 नीड़ में सबके यहाँ प्रारब्ध है सोया हुआकाटते वो ही फसल जो बीज था बोया हुआखोलकर गठरी न देखी, दूसरों की खोलतागन्ध को है खोजता, मूरख हिरण खोया हुआकोयले की खान में, हीरा कहाँ से आयेगामैल है मन में भरा, केवल बदन धोया हुआअब तो माली ही वतन का खाद-पानी खा रहे इस लिए आता नज़र सु...
Tag :प्रारब्ध है सोया हुआ
  November 25, 2018, 11:59 am
 कोयल और कबूतरी, सेंक रहे हैं धूप।बिना नहाये लग रहा, मैला उनका रूप।।अच्छा लगता है बहुत, शीतकाल में घाम।खिली गुनगुनी धूप में, सिक जाता है चाम।।छा जाता कुहरा सघन, माघ-पौष के मास।जलते तभी अलाव हैं, चौराहों के पास।।नभ में सूरज गुम हुआ,  हाड़ कँपाता शीत।दाँतों से बजने लगा, ...
Tag :सेंक रहे हैं धूप
  November 24, 2018, 11:59 am
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