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उच्चारण

बाबा बनकर कर रहे, लोग अनैतिक काम।इसीलिए वो भोगते, कारा उम्र तमाम।।सच्चाई छिपती नहीं, लगे भले ही देर।फँस जाते हैं जाल में, दोषी सभी दिलेर।।मन में कपट भरा हुआ, होठों पर हरि-नाम।उसका ही फल भोगता, बापू आसाराम।।मगर मीन का भेष धर, करता गन्दा ताल।सजा मौत की दीजिए, उसको तो ...
Tag :दोहे
  April 26, 2018, 12:36 pm
चंचल मन में ईश का, दुर्लभ है संयोग।भावशून्य हो चित्त जब, तब ही सम्भव योग।।जन्म दिवस पर बाँटते, इष्ट-मित्र उपहार।लेकिन घटते जा रहे, साल-महीने-वार।।जिनके सूखे गात हैं, पीत हो गये पात।उनको भी मधुमास में, मिल जाती सौगात।।जीत-हार का खेल है, जीवन का संग्राम।भावनाओं पर तो कभी, ल...
Tag :दोहे
  April 25, 2018, 11:44 am
हित जिससे होता जुड़ा, वो होता साहित्य।सारे जग को रौशनी, देता है आदित्य।। जीवनपथ पर ओ मनुज, चलना सीधी चाल।जीवनभर टिकता नहीं, फोकट का धन-माल।। गण-गणना पर है टिकी, सब दोहों की डोर।।छन्दों में करना नहीं, तुकबन्दी कमजोर। चार दिनों की ज़िन्दगी, काहे का अभिमान।धरा यहीं ...
Tag :दोहे
  April 24, 2018, 7:38 am
पाठक-पुस्तक में हमें, करना होगा न्याय।पुस्तक-दिन हो सार्थक, ऐसा करो उपाय।।--अब कोई करता नहीं, पुस्तक से सम्वाद।इसीलिए पुस्तक-दिवस, नहीं किसी को याद।।--उपयोगी पुस्तक नहीं, बस्ते का है भार।बच्चों को कैसे भला, होगा इनसे प्यार।।--अभिरुचियाँ समझे बिना, पौध रहे हैं रोप।नन्ह...
Tag :पुस्तक दिन
  April 23, 2018, 6:37 am
वेदना के "रूप"को पहचानते हैं। धूप में घर सब बनाना जानते हैं।।भावनाओं पर कड़ा पहरा रहा, दुःख से नाता बड़ा गहरा रहा, मीत इनको ज़िन्दग़ी का मानते हैं। धूप में घर सब बनाना जानते हैं।। काल का तो चक्र चलता जा रहा है वक़्त ऐसे  ही निकलता जा रहा, ख़ाक क्यों दरबार की ...
Tag :घर सब बनाना जानते हैं
  April 22, 2018, 7:56 am
एक साल में एक दिन, धरती का त्यौहार।कैसे धरती दिवस का, सपना हो साकार।१।--कंकरीट जबसे बना,  जीवन का आधार।धरती की तब से हुई, बड़ी करारी हार।२।--पेड़ कट गये धरा के, बंजर हुई जमीन।प्राणवायु घटने लगी, छाया हुई विलीन।३।--नैसर्गिक अनुभाव का, होने लगा अभाव।दुनिया में होने लगे, मौस...
Tag :बंजर हुई जमीन
  April 21, 2018, 10:58 am
सभी तरह की निकलती, बातों में से बात।बातें देतीं हैं बता, इंसानी औकात।।--माप नहीं सकते कभी, बातों का अनुपात।रोके से रुकती नहीं, जब चलती हैं बात।।--जनसेवक हैं बाँटते, बातों में खैरात।अच्छी लगती सभी को, चिकनी-चुपड़ी बात।।--नुक्कड़-नुक्कड़ पर जुड़ी, छोटी-बड़ी जमात।ठलवे करते ...
Tag :बातों में है बात
  April 20, 2018, 6:47 am
सहते हो सन्ताप गुलमोहर!फिर भी हँसते जाते हो।लू के गरम थपेड़े खाकर,अपना “रूप” दिखाते हो।।ताप धरा का बढ़ा मगर,गदराई तुम्हारी डाली है,पात-पात में नजर आ रही,नवयौवन की लाली है,दुख में कैसे मुस्काते हैं,सबक यही सिखलाते हो।लू के गरम थपेड़े खाकर,अपना “रूप” दिखाते हो।।गरमी और ...
Tag :गुलमोहर
  April 19, 2018, 6:48 am
पग-पग पर है घेरती, सौतन जिसको आज।उस भाषा के जाल में, जकड़ा हुआ समाज।।--कविता हिन्दी की मगर, अँगरेजी का जोर।छिपा हुआ बैठा अभी, दाढ़ी में है चोर।।--अँगरेजी का दिलों पर, छाया हुआ बुखार।कदम-कदम पर हो रही, हिन्दी की ही हार।।--आसन पर सब बैठ कर, करते हैं आखेट।भाषा के तो नाम पर, होते ल...
Tag :दोहे
  April 18, 2018, 6:24 am
लम्बी-लम्बी हरी मुलायम।ककड़ी मोह रही सबका मन।।कुछ होती हल्के रंगों की,कुछ होती हैं बहुरंगी सी,कुछ होती हैं सीधी सच्ची,कुछ तिरछी हैं बेढंगी सी,ककड़ी खाने से हो जाता,शीतल-शीतल मन का उपवन।ककड़ी मोह रही सबका मन।।नदी किनारे पालेजों में, ककड़ी लदी हुईं बेलों पर,ककड़ी ...
Tag :बालगीत
  April 16, 2018, 7:13 am
चुनाव लड़ना क्या आम आदमी के बस की बात है?मेरे विचार से तो बिल्कुल नहीं!    क्योंकि वार्ड मेम्बर से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक के चुनाव में धन का जिस प्रकार से खुला खेल होता है उसे दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतन्त्र का ईमानदार व्यक्ति झेल ही नहीं सकता। कारण यह है कि ...
Tag :चुनाव लड़ना बस की बात नहीं
  April 15, 2018, 4:47 pm
जबरदस्ती के दोहेजैसे कुहरा चीरकर, उगता है आदित्य।वैसे ही कुण्ठाओं में, पलता है साहित्य।।अपने नवल विचार को, जो लिखते हैं नित्य।उनके ही साहित्य में, मिलता है लालित्य।।जो पुर के हित के लिए, करता पौरोहित्य।कर्मकाण्ड में निहित है, जीवन का साहित्य।। लालन-पालन में भरा,...
Tag :दोहे
  April 14, 2018, 3:37 pm
बहुत समय से चौपाई के विषय में कुछ लिखने की सोच रहा था!आज प्रस्तुत है मेरा यह छोटा सा आलेख।     यहाँ यह स्पष्ट करना अपना चाहूँगा कि चौपाई को लिखने और जानने के लिए पहले छंद के बारे में जानना बहुत आवश्यक है।"छन्द काव्य को स्मरण योग्य बना देता है।"      छंद का सर...
Tag :चौपाई के बारे में भी जानिए
  April 13, 2018, 6:00 pm
पाठकों से सम्वाद करता दोहा संग्रह“कदम-कदम पर घास”डॉ. राकेश सक्सेना (गीतकार) रीडर- हिन्दी विभाग,जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय, एटा (उ.प्र.)          समर्थ व सिद्धहस्त रचनाकार डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ की “कदम-कदम पर घास” आरती प्रकाशन, लालकुआ...
Tag :
  April 13, 2018, 12:08 pm
बैशाखी का आ गया, देखो पावन पर्व।खुशियाँ सबको बाँटते, सुर-नर, मुनि-गन्धर्व।।कोई गरवा कर रहा, कोई भँगड़ा नृत्य।खुशियों से भरपूर हैं, उत्सव के सब कृत्य।।तितली पंख हिला रही, भँवरा गाता गीत।उपवन में मधुमक्खियाँ, छेड़ रहीं संगीत।।कोई गीता बाँचता, कोई पढ़े कुरान।पाकर नये अन...
Tag :दोहे
  April 12, 2018, 11:52 am
क्या है प्यार-रॉबर्ट लुई स्टीवेंसन"काव्यानुवाद"-0-0-आज तुम्हारे बिना हमारा,कितना शान्त अकेला घर है।नये-पुराने मित्रवृन्द के लिएप्रशंसा के कुछ स्वर हैं।सुन्दर और युवा मित्रों के,लिए बना है माह दिसम्बर।किन्तु मई का मास अलग है,छिपा अनुग्रह इसमें सुखकर।पेरिस का तो हरा र...
Tag :क्या है प्यार
  April 11, 2018, 11:49 am
हैवानों की होड़ अब, करने लगा समाज।खौफ नहीं कानून का, बदले रीति-रिवाज।।लोकतन्त्र में न्याय से, होती अक्सर भूल।कौआ मोती निगलता, हंस फाँकता धूल।।धनबल-तनबल-राजबल, जन-गण रहे पछाड़।बच जाते मक्कार भी, लेकर शक की आड़।।माँ-बहनों के रूप की, लगती बोली आज।खौफ नहीं कान...
Tag :दोहा गीत
  April 10, 2018, 7:09 am
दोहों के ही योग से, बनता दोहागीत।मर्म समझ लो प्यार का, ओ मेरे मनमीत।।ढाई आखर में छिपा, दुनियाभर का सार।जो नैसर्गिकरूप से, उमड़े वो है प्यार।।प्यार नहीं है वासना, ये तो है उपहार।दिल से दिल का मिलन ही, इसका है आधार।।प्यारभरे इस खेल में, नहीं हार औ’ जीत।मर्म समझ लो प...
Tag :दोहागीत
  April 9, 2018, 6:50 am
रहता वन में और हमारे,संग-साथ भी रहता है।यह गजराज तस्करों के,जालिम-जुल्मों को सहता है।।समझदार है, सीधा भी है,काम हमारे आता है।सरकस के कोड़े खाकर,  नूतन करतब दिखलाता है।।मूक प्राणियों पर हमको तो,तरस बहुत ही आता है।इनकी देख दुर्दशा अपना,सीना फटता जाता है।।वन्य जीव ज...
Tag :प्रकाशन
  April 7, 2018, 10:30 am
दोहे के बारे में जानिए--मन में जब तक आपके, होगा शब्द-अभाव।दोहे में तब तक नहीं, होंगे पुलकित भाव।१।--गति-यति, सुर-लय-ताल सब, हैं दोहे के अंग।कविता रचने के लिए, इनको रखना संग।२।--दोहा वाचन में अगर, आता हो व्यवधान।गिनो अक्षरों को जरा, एक बार श्रीमान।३।--लघु में लग...
Tag :दोहे
  April 7, 2018, 7:58 am
माँ के चेहरे पर रहे, सहज-सरल मुसकान।माता से बढ़कर नहीं, कोई देव महान।।--व्रत-तप-पूजन के लिए, आते हैं नवरात।माँ को मत बिसराइए, कैसे हों हालात।।--बिना अर्चना के नहीं, मिलता है वरदान।प्रतिदिन करना चाहिए, माता का गुणगान।।--जय दुर्गा नवरात में, बोल रहे थे लोग।बाकी पूरे सालभर, मु...
Tag :दोहे
  April 6, 2018, 7:22 am
माता का सम्मान करो,जय माता की कहने वालों।भूतकाल को याद करो,नवयुग में रहने वालों।।झाड़ और झंखाड़ हटाकर, राह बनाना सीखो,ऊबड़-खाबड़ धरती में भी, फसल उगाना सीखो,गंगा में स्नान करो,कीचड़ में रहने वालों।भूतकाल को याद करो,नवयुग में रहने वालों।।बेटों के जैसा ही, बेटी से भी प्य...
Tag :माता का सम्मान करो
  April 5, 2018, 7:27 am
सौम्य शीतल व्यक्तित्व के धनी- डा. मयंक "आचार्य देवेन्द्र देव"परिवर्तिनि खलु संसारे मृतः को वा न जायते।स एव जातो यस्य जातेंन याति वंशं समुद्भवम्।         अर्थात् इस परिवर्तनशील संसार में कौन मरता नहीं है और कौन जन्म नहीं लेता है (सभी मरते-पैदा होते है) किन...
Tag :आलेख
  April 4, 2018, 10:33 am
जगतनियन्ता है गुरू, हम सब उसके छात्र।रटा-रटाया बोलते, रंगमंच के पात्र।।ओज-तेज से युक्त ही, कहलाता अमिताभ।लोग उठाते हैं सदा, भोलेपन का लाभ।।केवल मतलब के लिए, जहाँ मधुर हों बात।जग में ऐसे मीत ही, पहुँचाते आघात।।लेने के ही नाम पर, फैले जिनके हाथ।उनसे मत आशा करो, जो हैं स्व...
Tag :विविध दोहे
  April 3, 2018, 7:43 am
पारा अब चढ़ने लगा, सरदी गयी सिधार।गरम हवा के साथ में, उड़ता गर्द-गुबार।।पक कर अब तैयार हैं, गेहूँ और मसूर।फसल काटने चल पड़े, कृषक और मजदूर।।जब से आया चैत हैं, सूरज हुआ जवान।सूख रहे हैं धूप से, खेत और खलिहान।।नदियों के तट पर उगे, खरबूजा-तरबूज।ककड़ी-खीरा ब...
Tag :दोहे
  April 2, 2018, 10:56 am
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