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उच्चारण

ज़िन्दगी को आज खाती है सुरा।मौत का पैगाम लाती है सुरा।।उदर में जब पड़ गई दो घूँट हाला,प्रेयसी लगनी लगी हर एक बाला,जानवर जैसा बनाती है सुरा।मौत का पैगाम लाती है सुरा।।ध्यान जनता का हटाने के लिए,नस्ल को पागल बनाने के लिए,आज शासन को चलाती है सुरा,मौत का पैगाम लाती है सुरा।...
Tag :सभ्यता पर ज़ुल्म ढाती है सुरा
  August 21, 2017, 7:08 am
सीधा-सादा, भोला-भाला।बचपन होता बहुत निराला।।बच्चे सच्चे और सलोने।बच्चे होते स्वयं खिलौने।।पल में रूठें, पल में मानें।बच्चे बैर कभी ना ठानें।।किलकारी से घर गुंजाते।धमा-चौकड़ी खूब मचाते।।टी.वी. से मन को बहलाते।कार्टून इनके मन भाते।।पापा जब थककर घर आते।बच्चे खुशियो...
Tag :बालकविता
  August 20, 2017, 7:22 am
अभी-अभी बारिश हुई, अभी खिली है धूप।सबके मन को मोहता, चौमासे का रूप।।खेल रहे आकाश में, बादल अपना खेल।इन्द्रधनुष में हो रहा, सात रंग का मेल।।रिमझिम-रिमझिम पड़ रहीं, धरती पर बौछार।वन-उपवन-तालाब में, जल का है संचार।।निचले भागों में बसे, लोग रहे अकुलाय।बारिश का जलपान क...
Tag :दोहे
  August 19, 2017, 3:50 pm
करती धन की लालसा, जग को मटियामेट।दौलत से भरता नहीं, कभी किसी का पेट।।ज्ञान बाँटने के लिए, लिखते लोग निबन्ध।लेकिन सबके हैं यहाँ, धन से ही सम्बन्ध।। जो होते धनहीन हैं, उनको मिलता चैन।जब से धन आने लगा, तब से ही बेचैन।।क्षमा-सरलता-धैर्य का, मन में नहीं निवेश।धन की गरमी ला रही...
Tag :माँगे सबकी खैर
  August 18, 2017, 5:01 pm
तुम शब्दयुक्त हो छन्दमुक्त,बहती हो निर्मल धारा सी।तुम सरल-तरल अनुप्रासयुक्त,हो रजत कणों की तारा सी।आलेख पंक्तियाँ जोड़-तोड़करबन जाती हो गद्यगीत।संयोग-वियोग, भक्ति रस से,छलकाती हो तुम प्रीत-रीत।उपवन में गन्ध तुम्हारी है,कानन में है मृदुगान भरा।लगती रजनी उजियारी सी,...
Tag :सुख के सूरज से सजी धरा
  August 17, 2017, 3:33 pm
करते-करते भजन, स्वार्थ छलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।।  झूमती घाटियों में, हवा बे-रहम, घूमती वादियों में, हया  बे-शरम, शीत में है तपन, हिम पिघलने लगे। करते-करते यजन, हाथ जलने लगे।।  उम्र भर जख्म पर जख्म खाते रहे, फूल गुलशन में हरदम खिलाते रहे, ...
Tag :स्वार्थ छलने लगे
  August 16, 2017, 7:15 am
चौमासे में श्याम घटा जब आसमान पर छाती है।आजादी के उत्सव की वो मुझको याद दिलाती है।।देख फुहारों को उगते हैं, मेरे अन्तस में अक्षर,इनसे ही कुछ शब्द बनाकर तुकबन्दी हो जाती है।खुली हवा में साँस ले रहे हम जिनके बलिदानों से,उन वीरों की गौरवगाथा, मन में जोश जगाती है।लाठी-गोली ...
Tag :गीतिका
  August 15, 2017, 7:00 am
डरा रही नर-नार को, बन्दूकों की छाँव।नहीं सुरक्षित अब रहे, सीमाओं पर गाँव।।--देख दुर्दशा गाँव की, मन में बहुत मलाल।विद्यालय जाँये भला, कैसे अपने बाल।।--आजादी के जश्न को, मना रहा है देश।लेकिन मेरे गाँव का, बिगड़ रहा परिवेश।।--फसलें भी चौपट हुईं, खेत बने शमसान।गोलों की बौछार ...
Tag :दोहे
  August 15, 2017, 6:53 am
मित्रों!आप सबको स्वतन्त्रता-दिवस कीहार्दिक शुभकामनाएँ।--"मुझको प्राणों से प्यारा है अपना वतन"जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसकी घाटी में महका हुआ है पवन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसके उत्तर में अविचल हिमालय खड़ा,और द...
Tag :देशभक्तिगीत
  August 14, 2017, 7:13 am
तन के उजले मन के गन्दे।कितने बदल गये हैं बन्दे।।शब्दकोश तक रह गया, अब तो जग में प्यार।अपने सुख के ही लिए, करते सब व्यापार।।भोग-विलासों में सब अन्धे।कितने बदल गये हैं बन्दे।।मतलब में पहचानते, करते प्यार-अपार।हित-साधन के बाद में, देते हैं दुत्कार।।निशिदिन फेंक र...
Tag :दोहागीत
  August 13, 2017, 6:24 am
कहाँ खो गई मीठी-मीठी इन्सानों की बोली।किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।कहाँ गयीं मधुरस में भीगी निश्छल वो मुस्कानें,कहाँ गये वो देशप्रेम से सिंचित मधुर तराने,किसकी कारा में बन्दी है सोनचिरैया भोली।किसने नदियों की धारा में विष की बूटी घोली।।लुप्त कहाँ हो ग...
Tag :फटी घाघरा-चोली
  August 12, 2017, 11:49 am
कई दिनों से नभ में,बादल ने डाला है डेरा।सूरज मना रहा है छुट्टी,दिन में हुआ अन्धेरा।।हरियाली बिखरी धरती पर,दादुर गाते गान मधुर।शाम ढली तो सन्नाटे को,चीर रहा झींगुर का सुर।आसमान का पानी पीकर,धान खेत में लहराते।काफल-सेब, खुमानी-आड़ू,छटा अनोखी दिखलाते।बाहर पानी-भीतर पान...
Tag :कविता
  August 11, 2017, 4:38 pm
जो भी आगे कदम बढ़ायेंगे।फासलों को वही मिटायेंगे।। तुम हमें याद करोगे जब भी,हम बिना पंख उड़ के आयेंगे।    यही हसरत तो मुद्दतों से है,हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे।  ज़िन्दगी का यही फ़साना है,कभी रोयेंगे कभी गायेंगे। खामियाँ हैं, नसीहतें भी हैं,गल्तियों से, स...
Tag :ग़ज़ल
  August 10, 2017, 11:35 am
मिट्टी को कंचन करे, नहीं लगाता देर।दिखा रहा है आइना, समय-समय का फेर।१।समय-समय की बात है, समय-समय के ढंग।जग में होते समय के, अलग-अलग ही रंग।२।पल-पल में है बदलता, सरल कभी है वक्र।रुकता-थकता है नहीं, कभी समय का चक्र।३।समय न करता है दया, जब अपनी पर आय।ज्ञानी-ध्यानी-...
Tag :समय-समय का फेर
  August 9, 2017, 8:10 am
जिसकी माटी में चहका हुआ है सुमन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसकी घाटी में महका हुआ है पवन,मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।जिसके उत्तर में अविचल हिमालय खड़ा,और दक्षिण में फैला है सागर बड़ा.नीर से सींचती गंगा-यमुना चमन।मुझको प्राणों से प्यारा वो अपना वतन।...
Tag :देशभक्तिगीत
  August 8, 2017, 11:52 am
हरियाला सावन ले आया, नेह भरा उपहार।कितना पावन, कितना निश्छल राखी का त्यौहार।।यही कामना करती मन में, गूँजे घर में शहनाई,खुद चलकर बहना के द्वारे, आये उसका भाई,कच्चे धागों में उमड़ा है भाई-बहन का प्यार।कितना पावन, कितना निश्छल राखी का त्यौहार।।तिलक लगाती और खिलाती, उसको स...
Tag :भाई-बहन का प्यार
  August 7, 2017, 2:00 am
परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार।रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन प्यार।।--राखी लेकर आ गयी, बहना बाबुल-द्वार।भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।।--रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास।जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।।--ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है प्यार।भावनाओं से ब...
Tag :निश्छल पावन प्यार
  August 6, 2017, 6:26 am
हम तो प्रतिदिन माँगते, दुनियाभर की खैर।अमन-चैन से सब रहें, अपने हों या गैर।।--जिस पग पर काँटे चुभें, वहाँ न रखना पैर।जहाँ एक दिन मित्रता, बाकी दिन हो बैर।।--मतलब की है दोस्ती, मतलब का सब प्यार।मतलब के ही वास्ते, होती है मनुहार।।--सौ-सौ बार विचारिए, क्या होता है मित्र।खूब ...
Tag :दोहे
  August 5, 2017, 9:00 am
रूप कितने-रंग कितने।बादलों के ढंग कितने।।कहीं चाँदी सी चमक है,कहीं पर श्यामल बने हैं।कहीं पर छितराये से हैं,कहीं पर झुरमुट घने हैं।मोहते ये मन सभी का,कर रहे हैं दंग कितने।बादलों के ढंग कितने।।सींचने आये धरा को,अमल-शीतल नीर लेकर।हल चलेंगे खेत में अब,धान की तकदीर लेकर।...
Tag :जल बिना बदरंग कितने
  August 5, 2017, 7:01 am
मैं उस समय ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ता था। जीवविज्ञान विषय की क्लास में मेरे साथ कुछ लड़कियाँ भी पढ़तीं थीं। परन्तु मैं बेहद शर्मीला था। इसी लिए कक्षाध्यापक ने मेरी सीट लड़कियों की बिल्कुल बगल में निश्चित कर दी थी।कक्षा में सिर्फ एक ही लड़का मेरा दोस्त था। उसका नाम राम सिंह ...
Tag :लघुकथा
  August 4, 2017, 7:27 am
आता सावन मास में, राखी का त्यौहार।भाई अपनी बहन को, देते हैं उपहार।।कच्चे धागों में बँधा, ममता और दुलार। सम्बन्धों के पाश हैं, राखी के ये तार।।जरी-सूत या जूट के, या रेशम के तार।रचा-बसा हर तार में, बहना का है प्यार।।आडम्बर से हीन है, पावन रक्षा पर्व।अपने भइया पर करें, स...
Tag :राखी के ये तार
  August 3, 2017, 7:16 am
बहती अविरल भाव से, निर्मल जल की धार।सुन्दर सुमनों ने लिया, पानी में आकार।।--मोती जैसी सुमन से, टपक रही है ओस।मन को महकाती महक, कर देती मदहोस।।--हीरे जैसी चमक है, निखरा-निखरा गात।कितना सुन्दर लग रहा, झरता हुआ प्रपात।।--नाविक बैठा सोचता, चप्पू लेकर साथ।अनुपम रचना कर रहा, सारे...
Tag :निखरा-निखरा गात
  August 2, 2017, 12:44 pm
जमाना है तिजारत का, तिज़ारत ही तिज़ारत हैतिज़ारत में सियासत है, सियासत में तिज़ारत हैनहीं अब वक़्त है, ईमानदारी का सचाई काखनक को देखते ही, हो गया ईमान ग़ारत हैहुनर बाज़ार में बिकता, इल्म की बोलियाँ लगतींवजीरों का वतन है ये, दलालों का ही भारत हैप्रजा के तन्त्र में कोई, नह...
Tag :तिजारत ही तिजारत है
  August 1, 2017, 11:37 am
जमाना है तिजारत का, तिज़ारत ही तिज़ारत हैतिज़ारत में सियासत है, सियासत में तिज़ारत हैनहीं अब वक़्त है, ईमानदारी का सचाई काखनक को देखते ही, हो गया ईमान ग़ारत हैहुनर बाज़ार में बिकता, इल्म की बोलियाँ लगतींवजीरों का वतन है ये, दलालों का ही भारत हैप्रजा के तन्त्र में कोई, नह...
Tag :तिजारत ही तिजारत है
  August 1, 2017, 11:37 am
आवारा बादल हुए, खुद ही पीते नीर।सावन सूखा जा रहा, धरती हुई अधीर।।नभ में बादल गरजते, चपला करती नृत्य।भूल गये बरसात में, बादल अपना कृत्य।।सूरज अब भी गगन में, रौब रहा है झाड़।तेज धूप के तेज से, घन को रहा पछाड़।। बिन बादल के हो गया, सावन में आकाश।सूरज ने बरसात में, लिया न...
Tag :बरसो अब घनश्याम
  August 1, 2017, 7:50 am
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