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उच्चारण

मित्रों!आज श्रद्धाञ्जलि के रूप में अपने अभिन्न मित्रस्व. गुरु सहाय भटनागर 'बदनाम'की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँआदमी फिर ज़िन्दगी के बोझ से मरता रहाआदमी है आदमी को देखकर हँसता रहाइक तरफ़ जीना था मुश्किल घर में थी मजबूरियाँफिर भी एक इंसान जाम-ए-मय में था ढलता रहा...
Tag :मुफ़लिसी के साए में अपना सफ़र चलता रहा
  October 15, 2018, 3:57 pm
जन्म हिमालय पर लिया, नमन आपको मात।शैलसुता के नाम से, आप हुईं विख्यात।। कठिन तपस्या से मिला, ब्रह्मचारिणी नाम।तप के बल से पा लिया, शिवशंकर का धाम।। चन्द्र और घंटा रहे, जिनके हरदम पास।घंटाध्वनि से हो रहा, दिव्यशक्ति आभास।। जगजननी माता बनी, जग की सिरजनहार।कूष्माण्ड...
Tag :दोहे
  October 14, 2018, 8:28 am
माँ मेरी रचना में, कुछ शब्द सरल भर दो।गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। दिन-रात तपस्या कर, मैंने पूजा तुमको,जीवन भर का मेरा, संधान सफल कर दो।गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। कुछ भी तो नहीं मेरा, माँ सब कुछ है तेरा,इस रीती गागर में,  निज स्नेह सबल भर दो।...
Tag :माता उज्जवल कर दो
  October 13, 2018, 7:37 am
जब होगा अपने भारत में, उन्नत-सबल किसान।तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।भ्रष्टाचारी जब खेतों में, कंकरीट नहीं बोयेंगे,गट्ठर बाँध अन्न की जब सब, अपने सिर पर ढोयेंगे,कहलायेगा तब ही अपना भारत देश महान।तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।भोग छोड़कर...
Tag :गीत
  October 12, 2018, 3:37 pm
मुखौटे राम के पहने हुए, रावण जमाने में। लुटेरे ओढ़ पीताम्बर, लगे खाने-कमाने में।।दया के द्वार पर, बैठे हुए हैं लोभ के पहरे, मिटी सम्वेदना सारी, मनुज के स्रोत है बहरे, सियासत के भिखारी व्यस्त हैं कुर्सी बचाने में। लुटेरे ओढ़ पीताम्बर लगे खाने-कमाने में।।जो सदियों...
Tag :सियासत के भिखारी
  October 11, 2018, 12:43 pm
शुद्ध आचरण में रहे, उज्जवल चित्र-चरित्र।प्रतिदिन तन के साथ में, मन को करो पवित्र।।शाकाहारी मनुज ही, पूजा का है पात्र।खान-पान में शुद्धता, सिखलाते नवरात्र।।त्यौहारों के नाम पर, लोक-दिखावा मात्र।पाश्चात्य परिवेश में, गुम हो गये सुपात्र।।माता के नवरात्र हों, या हों अपन...
Tag :मन को करो पवित्र
  October 10, 2018, 11:59 am
 --श्राद्ध गये तो आ गये, माता के नवरात्र।लीला का मंचन करें, रामायण के पात्र।।सबको देते प्रेरणा, माता के नवरूप।निष्ठा से पूजन करो, लेकर दीपक-धूप।।सच्चे मन से कीजिए, माता का गुण-गान।माता तो सन्तान का, रखती पल-पल ध्यान।।अभ्यागत को देखकर, होना नहीं उदास।करो प्रेम से आ...
Tag :माता के नवरात्र।
  October 9, 2018, 12:31 pm
अपनी मर्जी से करें, शासक सारे काज।जनता है जनतन्त्र में, गूँगी गुड़िया आज।।भाषणबाजी में बहुत, नेता जी हैं दक्ष।इसीलिए कमजोर है, सचमुच आज विपक्ष।।महँगाई में हो रहा, नेता मालामाल।आम आदमी का हुआ, जीना यहाँ मुहाल।।जब तक वो जनता रहे, तब तक थे कंगाल।जनसेवक बनकर हुए, वो सब ...
Tag :दोहे
  October 8, 2018, 5:08 pm
महक रहा है मन का आँगन,दबी हुई कस्तूरी होगी।दिल की बात नहीं कह पाये,कुछ तो बात जरूरी होगी।।सूरज-चन्दा जगमग करते,नीचे धरती, ऊपर अम्बर।आशाओं पर टिकी ज़िन्दग़ी,अरमानों का भरा समन्दर।कैसे जाये श्रमिक वहाँ पर,जहाँ न कुछ मजदूरी होगी।कुछ तो बात जरूरी होगी।।प्रसारण ...
Tag :दिल की बात
  October 7, 2018, 2:16 pm
घुमाकर बात को करना, शरीफों की नजाकत है भले ही बात हो वजनी, मगर उसमें सियासत है छुरी को जब मिले मौका, हमेशा वार करती है छुरी मीठी हो या कड़वी, छिपी उसमें कयामत है बगीचा सींचना होगा, सभी को नेह के जल से यहाँ जनतन्त्र है जिन्दा, नहीं कोई रियासत है   लगे प्रतिबन्ध ...
Tag :(जय विजय
  October 6, 2018, 3:14 pm
नभ से बादल छँट गये, निर्मल हुए पहाड़।अपने-अपन भवन को, लोग रहे हैं झाड़।।धरती ने धारण किया, हरा-भरा परिधान।खेतों में लहरा रहे, खुश हो करके धान।।बारिश से जो हो गयीं, दीवारें बदरंग।उन पर अब पुतने लगे, फिर से नूतन रंग।।सबके अपने ढंग हैं, सबके अलग रिवाज।श्राद्ध पक्ष में कर रहे...
Tag :भवन को
  October 5, 2018, 7:35 am
 असली गाँधी ने किए, खूब कमाल-धमाल।अब का गाँघी देश में, करता खूब बबाल।। तब के गाँधी ने किया, देश दासता मुक्त।अब का गाँधी है नहीं, शासन के उपयुक्त।।तब के गाँधी को मिला, बापू का सम्मान।अब गाँधी पप्पू बना, सहता है अपमान।।बनकर उभरा देश में, जब भी तानाशाह।किया प्रजा के त...
Tag :दोहे
  October 4, 2018, 4:06 pm
साहित्यकारों की वेबपत्रिकासाहित्य की रचनास्थलीवर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम), 2018में मेरी दो रचनाएँ"तुम मौन-निमन्त्रण तो दे दो"  (गीत)और एक बालकविता"मास्साब मत पकड़ो कान"जलने को परवाना आतुर, आशा के दीप जलाओ तो।कब से बैठा प्यासा चातुर, गगरी से जल छलकाओ तो।। मधुवन म...
Tag :प्रकाशन
  October 3, 2018, 1:09 pm
बापू के अवसान को, बीते सत्तर साल।राम-राज आया नहीं, मन में यही मलाल।।गंगा जी में उग रहे, जगह-जगह शैवाल।होगा पावन नीर कब, मन में यही सवाल।।भाषण तक सीमित हुए, गाँधी के उपदेश।सत्य-अहिंसा का नहीं, बना यहाँ परिवेश।।भुना रहे थे कल तलक, जो गाँधी का नाम।जनता ने उनका किया, पूरा काम त...
Tag :नहीं राम का राज
  October 2, 2018, 10:59 am
!! श्रद्धापूर्वक नमन !! सत्य,अहिंसा का पथ जिसने, दुनिया को दिखलाया।सारे जग से न्यारा गांधी, सबका बापू कहलाया।। भाले-बरछी, तोप-तमञ्चे, हथियारों को छोड़ दिया,देश-भक्ति के नारों से, जनता का मानस जोड़ दिया,स्वतन्त्रता का मन्त्र अनोखा, तुमने ही बतलाया।सारे जग से न्यारा...
Tag :जय-जवान और जय-किसान
  October 1, 2018, 12:21 pm
श्रीमती जी का जन्मदिन"तीस सितम्बर"जब-जब दर्पण को देखा है,उसमें रूप तुम्हारा पाया।जीवन के हर दोराहे पर,तुमको साथ हमेशा पाया।। कभी मनाया हमने तुमको,कभी मनाया तुमने हमको,स्नेहभरा इक दीप जलाकरहटा दिया जीवन के तम को,अथक परिश्रम करके तुमनेनिर्धनता को दूर भगाया।जीव...
Tag :मेरी श्रीमती जी का जन्मदिन
  September 29, 2018, 5:00 pm
रखना सोच-विचार कर, लोगों से अनुबन्ध।कच्चे धागे की तरह, होते हैं सम्बन्ध।।उपनिवेश का आदमी, बन बैठा उपवेश्य।खाना-पीना-खेलना, अब उसका उद्देश्य।।दाँव-पेंच में तो नहीं, होता कोई दक्ष।पारदर्शिता से रखो, न्यायालय में पक्ष।।पहले जैसा तो नहीं, रहा जगत में काम।काम-काम में हो रह...
Tag :रहा जगत में काम
  September 29, 2018, 3:42 pm
नमन आपको शारदे, मन के हरो विकार।नूतन छन्दों का मुझे, दो अभिनव उपहार।।--तुक-लय-गति का है नहीं, मुझको कुछ भी ज्ञान।मेधावी मुझको करो, मैं मूरख नादान।।--सच्चे मन से आपका, करता हूँ मैं ध्यान।शब्दों को पहनाइए, माँ निर्मल परिधान।।--गीत-ग़ज़ल-दोहे लिखूँ, लिखूँ बाल साहित्य।माता मे...
Tag :पावन हो परिवेश
  September 28, 2018, 7:37 am
जो स्वदेश का मान बढ़ाते,वो ही दक्ष कहाते हैं। धरा सुसज्जित होती जिनसे,वो ही वृक्ष कहाते हैं।हरित क्रान्ति के संवाहक जो,जन-गण के रखवाले हैं, आँगन-खेत, बाग-जंगल में,लहराते मतवाले हैं,जो प्राणों को देने वाली,मन्द समीर बहाते हैं। धरा सुसज्जित होती जिनसे,वो ही व...
Tag :गीत
  September 27, 2018, 12:30 pm
मतलब के हैं अब गुरू, मतलब के ही शिष्य।दोनों इसी जुगाड़ में, कैसे बने भविष्य।।सम्बन्धों की आज तो, हालत बड़ी विचित्र।नहीं रहे गुरु-शिष्य अब, पावन और पवित्र।।साथ बैठ गुरु-शिष्य जब, छलकाते हों जाम।नवयुग की इस पौध का, क्या होगा अंजाम।।बाजारों में बिक रहा, अब गुरुओं का ज...
Tag :दोहे
  September 25, 2018, 12:07 pm
जो हैं कोमल-सरल उनको मेरा नमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।कुछ भी दुर्लभ नहीं आदमी के लिए,मान-सम्मान है संयमी के लिए,सींचना नेह से अपना प्यारा चमन।जो घमण्डी हैं उनका ही होता पतन।।रास्ते में मिलेंगे बहुत पेंचो-खम,साथ में आओ मिलकर बढ़ायें कदम,नीर पावन बनाओ करो आचमन।ज...
Tag :नीर पावन बनाओ करो आचमन
  September 24, 2018, 4:40 pm
श्रद्धा से ही कीजिए, निज पुरुखों को याद।श्रद्धा ही तो श्राद्ध की, होती है बुनियाद।।--आदिकाल से चल रही, जग में जग की रीत।वर्तमान ही बाद में, होता सदा अतीत।।--जीवन आता है नहीं, जब जाता है रूठ।जर्जर सूखे पेड़ को, सब कहते हैं ठूठ।।--जग में आवागमन का, चलता रहता चक्र।अन्तरिक्ष मे...
Tag :पितृपक्ष में कीजिए
  September 24, 2018, 7:43 am
वजन भजन में कम हुआ, गजल हो गयी पास।भजन कहाँ लव-लीन की, बुझा सकेंगे प्यास।।कुछ को दौलत का नशा, कोई मद में चूर।आशिक होते हैं सदा, लोकलाज से दूर।।लुभा रहा जसलीन को, मखमल का कालीन।दौलत पाने के लिए, आतुर लव में लीन।।झूठा प्यार-दुलार है,मतलब का है खेल।जीवन जीने के लिए, चढ़ी...
Tag :दोहे
  September 23, 2018, 9:47 am
बहुत घिनौनी कर रहा, हरकत पाकिस्तान।सीना छप्पन इंच का, दिखला दो श्रीमान।।सम्मुख पाकिस्तान के, क्यों होते मजबूर।आतंकी नापाक का, कर दो दूर गुरूर।।सम्बन्धों के तार जब, सभी गये हैं टूट।बैरी पाकिस्तान को, फिर क्यों देते छूट।।जितनी की थीं सन्धियाँ, सभी करो अब भंग।दब्बू बनन...
Tag :दोहे
  September 22, 2018, 3:49 pm
त्यौहारों की धूम मची है,पर्व नया-नित आता है।परम्पराओं-मान्यताओं की,हमको याद दिलाता है।।उत्सव हैं उल्लास जगाते,सूने मन के उपवन में,खिल जाते हैं सुमन बसन्ती,उर के उजड़े मधुवन में,जीवन जीने की अभिलाषा,को फिर से पनपाता है।परम्पराओं-मान्यताओं की,हमको याद दिलाता ...
Tag :गीत
  September 21, 2018, 10:17 am
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