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Blog: उच्चारण

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--सन-सन शीतल चला पवन,सरदी ने रंग जमाया।ओढ़ चदरिया कुहरे की,सूरज नभ में शर्माया।।--जलते कहीं अलाव, सेंकता बदन कहीं है कालू,कोई भूनता शकरकन्द को, कोई भूनता आलू,दादा जी ने अपने तन पर,कम्बल है लिपटाया।ओढ़ चदरिया कुहरे की,सूरज नभ में शर्माया।।--जितने वस्त्र लपे... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   7:30pm 15 Jan 2020 #सूर्य भी शीत उगलता है
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
धनु से मकर लग्न में सूरज, आज धरा पर आया।गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।।गंगा जी के तट पर, अपनी खिचड़ी खूब पकाओ,खिचड़ी खाने से पहले, निर्मल जल से तुम नहाओ,आसमान में खुली धूप को सूरज लेकर आया।गया शिशिर का समय और ठिठुरन का हुआ सफाया।।--स्वागत करो बसन्त ऋतु का, जीवन मे... Read more
clicks 8 View   Vote 0 Like   1:08am 15 Jan 2020 #त्यौहारों की गठरी
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता,लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता,बासन्ती मौसम में सर्दी ने ली अँगड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--साँप-नेवले के जैसा ही युद्ध हो रहा,कभी सूर्... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   11:07am 14 Jan 2020 #होती हाड़-कँपाई
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--उत्तरायणी पर्व के, भिन्न-भिन्न हैं नाम।आया लेकर हर्ष को, उत्सव ललित-ललाम।।--गंगा में डुबकी लगा, पावन करो शरीर।नदियों में बहता यहाँ, पावन निर्मल नीर।।--जीवन में उल्लास के, बहुत निराले ढंग।बलखाती आकाश में, उड़ती हुई पतंग।।--सूर्य रश्मियाँ आ गयीं, खिली गुनगुनी धूप।शस... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:36am 14 Jan 2020 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--उत्तरायणी पर्व की, मची हुई है धूम।अपने भारत देश में, लोग रहे हैं झूम।।--सरिताओं के घाट पर, लगने लगी कतार।गंगाजल अभिषेक को, सन्त चले हरद्वार।।--मकर राशि का सूर्य अब, बाँटेगा सौगात।थम जायेगा देश में, जाड़े का उत्पात।।--पतझड़ में झड़ जायगें, सभी पुराने पात।।पेड़ों-पौधों का ... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   4:21am 13 Jan 2020 #सुधरेगा परिवेश
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--कुहरे और सूरज दोनों में,जमकर हुई लड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--ज्यों ही सूरज अपनी कुछ किरणें चमकाता,लेकिन कुहरा इन किरणों को ढकता जाता,बासन्ती मौसम में सर्दी ने ली अँगड़ाई।जीत गया कुहरा, सूरज ने मुँहकी खाई।।--साँप-नेवले के जैसा ही युद्ध हो रहा,कभी सूर्... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   1:01am 13 Jan 2020 #बाल गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--लेकर आयी लोहड़ी, फिर से नूतन हर्ष।करते हैं सब कामना, मंगलमय हो वर्ष।।--शीतल-शीतल रात है, शीतल-शीतल भोर।उत्सव का माहौल है, पसरा चारों ओर।।--खुश हो करके लोहड़ी, मना रहे हैं लोग।ज्वाला में मिष्ठान्न का, लगा रहे हैं भोग।।--मन को बहुत लुभा रहे, त्यौहारों के रंग।रंग-बिरंगी गगन म... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   3:26am 12 Jan 2020 #फिर से नूतन हर्ष
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
ढंग निराले होते जग में,  मिले जुले परिवार के।देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।--चमन एक हो किन्तु वहाँ पर, रंग-विरंगे फूल खिलें,मधु से मिश्रित वाणी बोलें, इक दूजे से लोग मिलें,ग्रीष्म-शीत-बरसात सुनाये, नगमे सुखद बहार के।देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार ... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   8:00pm 11 Jan 2020 #नगमे सुखद बहार के
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--सुबह करते हैं, शाम करते हैं हर खुशी तेरे नाम करते हैं --ओढ़ करके ग़मों की चादर कोकाम अपना तमाम करते हैं--जब भी दैरो-हरम में जाते हैंहम तिरा एहतराम करते हैं --देख करके जईफ लोगों को हम अदब से सलाम करते हैं --ज़िन्द्ग़ी चार दिन का खेला है किसलिए कत्लो-आम करते हैं--आशि... Read more
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
-- रहती है आकांक्षा, जब तक घट में प्राण।जिजीविषा के मर्म को, कहते वेद-पुराण।।-- जीने की इच्छा सदा, रखता मन में जीव।करता है जो कर्म को, वो होता सुग्रीव।।--आशायें जीवित रहे, जब तक रहे शरीर।जिजीविषा के साथ में, सब करते तदवीर।।--धन-दौलत की चाह में, पागल हैं सब लोग।जीवन के हर मो... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   1:22am 10 Jan 2020 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--दुनिया में हिन्दीदिवस, भारत की है शान।सारे जग में बन गयी, हिन्दी की पहचान।।--चारों तरफ मची हुई, अब हिन्दी की धूम।भारतवासी शान से, रहे खुशी में झूम।।--हिन्दी है सबसे सरल, मान रहा संसार।वैज्ञानिकता से भरा, हिन्दी का भण्डार।।--युगों-युगों से चल रहे, काल-खण्ड औ’ कल्प।देवना... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   11:22am 9 Jan 2020 #दोहे
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
उदात्त भावनाओं की अभिव्यक्तियाँ“अरी कलम! तू कुछ तो लिख”       रश्मि अग्रवाल का नाम साहित्यजगत में अनजाना नहीं है। हाल ही में इनका कविता संग्रह “अरी कलम! तू कुछ तो लिख”प्रकाशित हुआ है। आप न केवल एक कवियित्री हैं अपितु एक सफल गद्य लेखिका भी हैं और सुन्दर हस्तल... Read more
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--घरवाली के साथ में, घर रहता गुलजार।जीवनसाथी के बिना, सूना है परिवार।।--सजनी भगिनी-बेटियाँ, रखती सबका ध्यान।कभी न करना चाहिए, नारी का अपमान।।--शक्तिस्वरूपा नार है, माता का अवतार।फिर भी सुनते हैं नहीं, इनकी लोग पुकार।।--नारी के सम्मान का, करें आज संकल्प।महिलाओं का जगत में, ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   9:30pm 7 Jan 2020 #माता का अवतार
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
 बात सत्तावन साल पुरानी है हमारे पड़ोस में एक वृद्ध महिला रहती थी। जिसको पूरा मुहल्ला अम्मा के नाम से पुकारता था, लेकिन उनका नाम हरदेई था।    उन दिनों हमने एक गइया पाली हुई थी। घर में हम लोग सुबह गुड़ के साथ मट्ठा पी लिया करते थे। और माता जी उसके लिए घास लेने चली जात... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   8:30pm 5 Jan 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
एक पुराना संस्मरण--       बात लगभग 60 वर्ष पुरानी है। श्री रामचन्द्र आर्य मेरे मामा जी थे जो आर्य समाज के अनुयायी थे। उनके मन में एक ही लगन थी कि परिवार के सभी बच्चें पढ़-लिख जायें और उनमें आर्य समाज के संस्कार भी आ जायें। बिल्कुल यही विचारधारा मेरे पूज्य पिता जी की ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   8:30pm 4 Jan 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
"संस्मरण-बाबा नागार्जुन"स्कूटर से यात्रा करते हुए डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक', बाबा नागार्जुन और वाचस्पति शर्मा।     बाबा नागार्जुन की तो इतनी स्मृतियाँ मेरे मन व मस्तिष्क में भरी पड़ी हैं कि एक संस्मरण लिखता हूँ तो दूसरा याद हो आता है। मेरे व वाचस्पति जी (... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   12:30pm 3 Jan 2020 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--हो रहा विहान है, रश्मियाँ जवान हैं, पर्वतों की राह में, चढ़ाई है ढलान है।।--मतकरो कुतर्क कुछ, सत्य स्वयं सिद्ध है,हौसले से काम लो, पथ नहीं विरुद्ध है,यत्न से सँवार लो, उजड़ रहा वितान है।पर्वतों की राह में, चढ़ाई है ढलान है।।--मनुजता की नीड़ में, विषाद ही विषाद हैं,धर्म प्रान... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   7:30pm 2 Jan 2020 #हो रहा विहान है
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--महँगाई ने कर दिये, कीर्तिमान सब ध्वस्त।निर्धन जनता के हुए, आज हौसले पस्त।।--पूरी दुनिया में चला, मन्दी का है दौर।लेकिन अपने देश में, महँगाई का ठौर।।--हा-हाकार मचा हुआ, दुर्लभ मिट्टीतेल।मार रसोईगैस की, लोग रहे हैं झेल।।--लाभ कमाती तेल में, भारत की सरकार।फिर क्यों जनता झेल... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   1:04am 2 Jan 2020 #महँगाई की मार
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--गये साल को है प्रणाम! है नये साल का अभिनन्दन।।लाया हूँ स्वागत करने कोथाली में कुछ अक्षत-चन्दन।। है नये साल का अभिनन्दन।।--गंगा की धारा निर्मल हो,मन-सुमन हमेशा खिले रहें,हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के,हृदय हमेशा मिले रहें,पूजा-अजान के साथ-साथ,होवे भारतमाँ का वन्दन।है ... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   7:30pm 31 Dec 2019 #है नये साल का अभिनन्दन
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
गीत "साल पुराना बीत रहा है" साल पुराना बीत रहा है, कल की बातें छोड़ो।फिर से अपना आज सँवारो, सम्बन्धों को जोड़ो।।--आओ दृढ़ संकल्प करें, गंगा को पावन करना है,हिन्दी की बिन्दी को, माता के माथे पर धरना है,जिनसे होता अहित देश का, उन अनुबन्धों को तोड़ो।फिर से अपना आज सँवारो, ... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   12:32am 31 Dec 2019 #सम्बन्धों को जोड़ो
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--उग्रवाद-अलगाव का, किया सही उपचार।अपने भारत पर किया, मोदी ने उपकार।।--हारी कट्टरपन्थियाँ, जीत गई सरकार।।दो हजार उन्नीस में, दिये कई उपहार।।--साहस करके देश पर, किया बहुत उपकार।जो दशकों की गल्तियाँ, उनको दिया सुधार।।--जितनी मिली चुनौतियाँ, किया उन्हें स्वीकार।सीमाओं को द... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:41am 30 Dec 2019 #होंगे नये सुधार
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!जनसेवक खाते हैं काजू,महँगाई खाते बेचारे!!--काँपे माता-काँपे बिटिया, भरपेट न जिनको भोजन है,क्या सरोकार उनको इससे, क्या नूतन और पुरातन है,सर्दी में फटे वसन फटे सारे!नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!--जो इठलाते हैं दौलत पर... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   2:02am 29 Dec 2019 #गीत
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--सन्नाटा पसरा है अब तो,गौरय्या के गाँव में।दम घुटता है आज चमन की,ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।--नहीं रहा अब समय सलोना,बिखर गया ताना-बाना,आगत का स्वागत-अभिनन्दन,आज हो गया बेगाना,कंकड़-काँटे चुभते अब तो,पनिहारी के पाँव में।दम घुटता है आज चमन की, ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।--परम्परा क... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   1:33am 28 Dec 2019 #गौरय्या का गाँव
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
परिवेश पर विविध दोहे--उच्चारण सुधरा नहीं, बना नहीं परिवेश।अँगरेजी के जाल में, जकड़ा सारा देश।१।--अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।सत्य-अहिंसा के यहाँ, मिलते हैं सन्देश।२।--लड़की लड़का सी दिखें, लड़के रखते केश।पौरुष पुरुषों में नहीं, दूषित है परिवेश।३।--भौतिकता की बाढ़ ... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   1:57am 27 Dec 2019 #परिवेश
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
--अब फैशन इस दौड़ में, मानवता लाचार।।नहीं रही शालीनता, वस्त्र गये हैं हार।।--उपवन में कलियाँ करें, जब-जब भी शृंगार।उन्हें रिझाने के लिए, मधुप करें गुंजार।।--कामुकता के मूल में, सुन्दरता के तार।रूप-गन्ध के लोभ में, मधुप करें बेगार।।--रूप-रंग को देखकर, मधुप हुआ लाचार।... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   2:12am 26 Dec 2019 #मानवता लाचार
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