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उच्चारण

जो मेरे मन को भायेगा,उस पर मैं कलम चलाऊँगा।दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,आगे को बढ़ता जाऊँगा।।मैं कभी वक्र होकर घूमूँ,हो जाऊँ सरल-सपाट कहीं।मैं स्वतन्त्र हूँ, मैं स्वछन्द हूँ,मैं कोई चारण भाट नहीं।फरमाइश पर नहीं लिखूँगा,गीत न जबरन गाऊँगा।दुर्गम-पथरीले पथ पर मैं,आगे को बढ...
Tag :शिव का डमरू बन जाऊँगा
  February 21, 2017, 6:02 am
जो लगता था कभी पराया, जाने कब मनमीत हो गया।पतझड़ में जो लिखा तराना,वो वासन्ती गीत हो गया।।अच्छे लगते हैं अब सपने,अनजाने भी लगते अपने,पारस पत्थर को छू करके,रिश्ता आज पुनीत हो गया।मैंने जब सरगम को गाया,उसने सुर में ताल बजाया,गायन-वादन के संगम से,मनमोहक संगीत हो गया।सुलझ ग...
Tag :जीवन आशातीत हो गया
  February 20, 2017, 8:47 am
कितने हसीन फूल, खिले हैं पलाश मेंफिर भी भटक रहे हैं, चमन की तलाश मेंपश्चिम की गर्म आँधियाँ, पूरब में आ गयीग़ाफ़िल हुए हैं लोग, क्षणिक सुख-विलास मेंजब मिल गया सुराज तो, किरदार मर गयाशैतान सन्त सा सजा, उजले लिबास मेंक़श्ती को डूबने से, बचायेगा कौन अबशामिल हैं नयी पीढ़ियाँ, ...
Tag :चमन की तलाश में
  February 18, 2017, 8:12 pm
बौराई गेहूँ की काया,फिर से अपने खेत में।सरसों ने पीताम्बर पाया,फिर से अपने खेत में।।हरे-भरे हैं खेत-बाग-वन,पौधों पर छाया है यौवन,झड़बेरी ने "रूप"दिखाया,फिर से अपने खेत में।।नये पात पेड़ों पर आये,टेसू ने भी फूल खिलाये,भँवरा गुन-गुन करता आया,फिर से अपने खेत में।।धानी-धानी ...
Tag :
  February 17, 2017, 10:15 am
देता है ऋतुराज निमन्त्रण,तन-मन का शृंगार करो।पतझड़ की मारी बगिया में,फिर से नवल निखार भरो।।नये पंख पक्षी पाते हैं,नवपल्लव वृक्षों में आते,आँगन-उपवन, तन-मन सबके,वासन्ती होकर मुस्काते,स्नेह और श्रद्धा-आशा केउर मन्दिर में दीप धरो।पतझड़ की मारी बगिया में,फिर से नवल निखार ...
Tag :देता है ऋतुराज निमन्त्रण
  February 17, 2017, 3:00 am
निहित ज्ञान का पुंज है, गीता में श्रीमान।पढ़ना इसको ध्यान से, इसमें है विज्ञान।।जनता की है दुर्दशा, जन-जीवन बेहाल।कूड़ा-कर्कट बीनते, भारत माँ के लाल।।मामा शकुनि हो गये, बिगड़ गये हैं ढंग।पक्षपात को देखकर, हुए भानजे दंग।।देते हैं सन्ताप को, नीच घरों के लो...
Tag :विविध दोहावली
  February 15, 2017, 7:04 am
प्रेम दिवस पर जगत में, बढ़ा प्रेम का रोग।झूठे मन से कर रहे, प्रणय-निवेदन लोग।१।--प्रेमदिवस चल पड़ा, अब तो बहुत रिवाज।छोड़ स्वदेशी सभ्यता, पागल हुआ समाज।२।--आवारा षटपद हुए, कलियाँ हैं हैरान।इन्सानों के भेष में, घूम रहे हैवान।३।--प्रेमदिवस पर छा गये, इन्द्रधनुष के रंग।पंछ...
Tag :प्रेमदिवस
  February 14, 2017, 6:36 am
दिल से मत तजना कभी, प्रीत-रीत उदगार।सारस से तुम सीख लो, क्या होता है प्यार।१।प्रेम दिवस पर लीजिए, व्रत जीवन में धार।हर पल करना चाहिए, सच्चा-सच्चा प्यार।‍‍‍२।एक दिवस के ही लिए, उमड़ रहा प्यार।प्रणय दिवस के बाद में, बढ़ जाता तक़रार।३।पूरे जीवन प्यार का, ...
Tag :प्रेम-प्रीत का ढंग. वैलेंटाइन
  February 14, 2017, 6:11 am
चुम्बन का दिन आ गया, कर लो सच्चा प्यार।बिना मोल के जो मिले, चुम्बन वो उपहार।१।--चुम्बन के इस दिवस पर, बुझा लीजिए प्यास।दिन-प्रतिदिन बढ़ता रहे, आपस में विश्वास।२।--एक दिवस के लिए क्यों? चुम्बन का व्यापार।जीवनभर करते रहो, मीठा-मीठा प्यार।३।-- अपनाओ निज सभ्यता,&nb...
Tag :दोहे
  February 13, 2017, 6:08 am
 वासन्ती परिधान पहनकर, मौसम आया प्यारा है।कोमल-कोमल फूलों ने भी, अपना रूप निखारा है।।तितली सुन्दर पंख हिलाती, भँवरे गुंजन करते हैं,खेतों में लहराते बिरुए, जीवन में रस भरते हैं,उपवन की फुलवारी लगती कंचन का गलियारा है।कोमल-कोमल फूलों ने भी, अपना रूप निखारा है।।बीन-बीनक...
Tag :बसन्त
  February 12, 2017, 8:01 pm
जो दिल से उपजे वही, होता सच्चा प्यार।मिलन नहीं है वासना, आलिंगन उपहार।१।पश्चिम के परिवेश की, ले करके हम आड़।आलिंगन के नाम पर, करते हैं खिलवाड़।२।एकदिवस के लिए क्यों, करते हो व्यापार।जीवनभर करते रहो, मीठा-मीठा प्यार।३।मानवता अपनाइए, यही हमारा मन्त्र।वासन...
Tag :दोहे
  February 12, 2017, 7:19 am
प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।।छाया हुआ रूप का ही नशा है,जवानी में उन्माद ही तो बसा है,दिखावे ने अपना शिकंजा कसा है,प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है?प्रज्ञा जहाँ है, प्रतिज्ञा वहाँ है।।बिना स्नेह के दीप कैसे जलेगा?बिना प्य...
Tag :प्रतिज्ञादिवस में प्रतिज्ञा कहाँ है
  February 10, 2017, 7:17 am
आया है ऋतुराज अब, समय हुआ अनुकूल।बौराये हैं पेड़ भी, पाकर कोमल फूल।। --टेसू अंगारा हुआ, खेत उगलते गन्ध।सपने सिन्दूरी हुए, देख नये सम्बन्ध।।--पंछी कलरव कर रहे, देख बसन्ती रूप।शाखा पर बैठे हुए, सेंक रहे हैं धूप।।--सरसों फूली खेत में, गेहूँ करे किलोल।कानों में पड़ने लगे, कोयल...
Tag :दोहे
  February 9, 2017, 7:20 am
सुन्दर-सुन्दर और सजीले!आकर्षक और रंग-रँगीले!!  शिवशंकर और साँईबाबा!यहाँ विराजे काशी-काबा!!  कृष्ण-कन्हैया अलबेला है!जीवन दर्शन का मेला है!!  जग-जननी माँ पार्वती हैं!धवल वस्त्र में सरस्वती हैं!!  आदि-देव की छटा निराली!इनकी सूँड बहुत मतवाली!!  जो जी चाहे वो ले...
Tag :बेच रहा मैं भगवानों को
  February 8, 2017, 6:26 am
7 फरवरीरोज-डे (गुलाबदिवस)प्रणय दिवस में रोज-डे, बाँट रहा मुस्कान।पीता सबकी वेदना, कभी न होता म्लान।।--00--ढोंग-दिखावा दिवस हैं, पश्चिम के सब वार।रोज बदलते है जहाँ, सबके ही दिलदार।।--सबसे अच्छा विश्व में, अपना भारत देश।नैसर्गिक अनुभाव के, सजे यहाँ परिवेश।।--कामुकता-अ...
Tag :दोहे
  February 7, 2017, 1:02 pm
आशा और निराशा की जो,पढ़ लेते हैं सारी भाषा।दो नयनों में ही होती हैं,सारी दुनिया की परिभाषा।।दुख के बादल आते ही ये,खारे जल को हैं बरसाते।सुख का जब अनुभव होता है,तब ये फूले नहीं समाते।सरल बहुत हैं-चंचल भी हैं,इनके भीतर भरी पिपासा।दो नयनों में ही होती हैं,सारी दुनिया क...
Tag :पढ़ लेते हैं सारी भाषा
  February 7, 2017, 5:00 am
सरदी अब घटने लगी, चहका है मधुमास।खेतों से नव-अन्न की, आने लगी सुवास।।--बया नीड़ से झाँकती, अपने चारों ओर। हरित धरा पर हो गयी, अब तो सुन्दर भोर।।--धूम मचाने आ गया, फिर से अब ऋतुराज।बदल गया मधुमास में, सबका आज मिजाज।।--जोड़ों पर चढ़ने लगा, फिर से इश्क बुखार।वादों की चलने लगी, ...
Tag :दोहे
  February 5, 2017, 8:56 pm
हँसी-खुशी से बचपन बीता, सुख से बीती सकल जवानी।कठिन बुढ़ापे का पथ आया,जीवन की है यही कहानी।। तन तो भले हुआ हो दुर्बल,लेकिन वाणी हुई सबल है,उम्र छियासठ साल हो गयी,पहले जैसी नहीं रवानी। जीवन की है यही कहानी।। बीत गया है समय सुहाना,देह कलेवर हुआ पुराना,जाने कब आ जाय बुलावा,ल...
Tag :गीत
  February 4, 2017, 7:25 am
हँसता-खिलता जैसा,इन प्यारे सुमनों का मन है।गुब्बारों सा नाजुक,सारे बच्चों का जीवन है।।नन्हें-मुन्नों के मन को,मत ठेस कभी पहुँचाना।नित्यप्रति कोमल पौधों पर, स्नेह-सुधा बरसाना ।।ये कोरे कागज के जैसे,होते भोले-भाले।इन नटखट गुड्डे-गुड़ियों के,होते खेल निराले।।भरा हु...
Tag :हँसता-गाता बचपन
  February 3, 2017, 6:28 am
चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके,आसमान तक जाती हो।।मेरे अगर पंख होते तो,मैं भी नभ तक हो आता।पेड़ो के ऊपर जा करके,ताजे-मीठे फल खाता।।जब मन करता मैं उड़ कर के,नानी जी के घर जाता।आसमान में कलाबाजियाँ कर के,सबको दिखलाता।।सूरज उगने से पहले त...
Tag :2017 में मेरी बालकविता
  February 2, 2017, 8:01 am
चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके,आसमान तक जाती हो।।मेरे अगर पंख होते तो,मैं भी नभ तक हो आता।पेड़ो के ऊपर जा करके,ताजे-मीठे फल खाता।।जब मन करता मैं उड़ कर के,नानी जी के घर जाता।आसमान में कलाबाजियाँ कर के,सबको दिखलाता।।सूरज उगने से पहले त...
Tag :2017 में मेरी बालकविता
  February 2, 2017, 8:01 am
आरती उतार लो,आ गया बसन्त है!ज़िन्दग़ी सँवार लो, आ गया बसन्त है!खेत लहलहा उठे,खिल उठी वसुन्धरा,चित्रकार ने नया,आज रंग है भरा,पीत वस्त्र धार लो,आ गया बसन्त है!ज़िन्दग़ी सँवार लो, आ गया बसन्त है!शारदे के द्वार से,ज्ञान का प्रसाद लो,दूर हों विकार सब,शब्द का प्रसाद लो,धूप-दी...
Tag :ज्ञान का प्रसाद लो
  February 1, 2017, 6:23 am
  माँ मेरी झोली में, कुछ शब्द सरल भर दो। गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। दिन-रात तपस्या कर, मैंने पूजा तुमको, जीवन भर का मेरा, संधान सफल कर दो। गीतों के सागर से, सब दूर गरल कर दो।। कुछ भी तो नहीं मेरा, माँ सब कुछ है तेरा, इस रीती गागर में,  निज स्...
Tag :वन्दना
  January 31, 2017, 12:57 pm
सबके मन को भाया बसन्त।आया बसन्त-आया बसन्त।।उतरी हरियाली उपवन में,आ गईं बहारें मधुवन में,गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,पुष्पित बगिया भी महक उठी, अनुरक्त हुआ मन का आँगन।आया बसन्त, आया बसन्त।१।कोयल ने गाया मधुर गान,चिड़ियों ने छाया नववितान,यौवन ने ली है अँगड़ाई,सूखी शाखा ...
Tag :सबके मन को भाया बसन्त
  January 30, 2017, 4:00 am
भारत की महानता का, नही है अतीत याद,वोट माँगने को, नेता आया बिनबुलाया है।देश का कहाँ है ध्यान, होता नित्य सुरापान,जाति, धर्म, प्रान्त जैसे, मुद्दों को भुनाया है।युवराज-सन्त चल पड़े, गली-हाट में,निर्वाचन के दौर ने, ये दिवस भी दिखाया है।।--दुर्बल पौधों को ही ज्...
Tag :नेता आया बिनबुलाया है
  January 29, 2017, 6:45 am
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