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जिंदगी की राहें

झील का शांत जलठंडा, शीतलपर एक पत्थर या कंकड़के गिरते हीझंकृत कर देती हैजल तरंग संगीतऔर फिरनाविक की पतवारजब करती हैजल को पीछे की ओरआगे बढ़ता नावऔर पृष्ठ भूमि सेएक बंगला गीत"जोदी तोर डाक सुने केयूना आसे तोबे एकला चलो रे ...... "  ...
जिंदगी की राहें...
Mukesh Kumar Sinha
Tag :ज़िन्दगी
  June 25, 2013, 11:20 am
कर रहा था इंतज़ारऑपरेशन थियेटर के बाहरतभी नर्स ने निकल कर पकड़ायाऔर था,हाथो में,  नन्हा सा नाजुक सा होगा सिर्फ डेढ़ या दो बितताथा, अंडर वेट भी पर था,पहली नजर में ही दिल का टुकड़ा एक क्षण में समझ आ गया था क्या होता है,बनना पापा .......पहले आता था गुस्सा,अपने पापा परक्यों?करते ह...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :प्यार
  June 15, 2013, 2:48 pm
माँ के फटे आँचल को पकड़े गुजर रहा था बाजार से ननकूऐ माँ! वो खिलौने वाली कार दिलवा दो न !बाप रे,वो महंगी कार ना बेटा,नहीं ले सकते चलो माँ,वो टाफी/चिप्स ही दिलवा दो न पेट खराब करवानी है क्या क्यों परेशान कर रहा है लगातार …………घर आने ही वाला है खाना भी दूँगी,प्यार व दुलार भी मिले...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :माँ
  June 10, 2013, 11:48 am
आखिर वो दिन,वो मुकाम,मेरे इस ब्लॉग को हासिल हो ही गया,जो कभी सोचा तक नहीं था। एक दो तीन ... नहीं पाँच साल। हाँ। मेरे इस प्यारे से अजीज पन्ने को,मेरे इस ब्लॉग को बनाए हुए आज पाँच साल हो गए।  HAPPY BIRTHDAY “जिंदगी की राहें”!!कभी भी दिमाग में ये बात नहीं आई थी कि ये मेरा ब्लॉग,मेरे लिए नया ...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :anniversary
  May 31, 2013, 10:45 am
वक़्तअजीब है तू भीनरम हाथो सेतूने पकड़ा था हाथफिर हथेली परअश्क की बूंदें बिखर गईटूटते खवाबों कीकतरनही तो थी, वे बूंदेंजो दिला रही थी यादहर आँखोंमेंखवाब प्यारे नहीं लगते !!है न...........
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :खवाब
  May 24, 2013, 12:26 pm
काश!!मेरे में होती, नीले नभ जैसी विशालताताकि तू कह पातीमैं हूँ तुम्हारा अपनाएक टुकड़ा आसमान !काश, मेरे में होतीसमुद्र जैसी गहराईताकि तू डूब पातीमेरे अहसासों के भंवर मेंकाश, मेरे में होतीहिमालय सी गंभीरताताकि तुम्हे लगतामैं हूँ तुम्हारे लिए कवच सारक्षा करने वाला, रखव...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :प्यार
  May 20, 2013, 2:28 pm
हल्की सी आँख लगीधमक से यमराज की गदा चलीसपने में आँख मिचमिचाईमेरी आवाज भर्राईक्या हुआ देवधिदेव !काहे नींद तोड़ रहे होअपराध तो बताओबिना बताए क्यों आएसोने से पहले कुछ हुआ नहींथे अच्छे नींद में हम सोयेअब आधी रात क्यों आएदयानिधान! अब बता भी दोक्या सच में लेने आए होया बस नी...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :यमराज
  May 14, 2013, 4:46 pm
10 फरवरी को विश्व पुस्तक मेला में लोकार्पित हुई मेरे सह सम्पादन मे साझा कविता संग्रह "पगडंडियाँ" से मेरी एक रचना आप सबके लिए... Jपोस्टर !!नाम सुनते ही,बसबस आ जाते हैं फिल्मी दृश्यजेहन मे,है न !पर सोचना,क्या है जुड़ा नहीं ये जिंदगी के हर पड़ाव से ...याद है मुझे मिक्की-डोनाल्ड या ...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :ज़िन्दगी
  May 9, 2013, 5:18 pm
पिछले दस फ़रवरी को विश्व पुस्तक मेले के दौरान पगडंडियाँ (साझा कविता संग्रह) जिसका सह संपादन मैंने अंजू चौधरी और रंजू भाटिया के साथ मिल कर किया था, का लोकार्पण वरिष्ठ कथाकार श्रीमति चित्रा मुदगल, श्री विजय किशोर मानव, कवि व पूर्व संपादक "कादंबनी", श्री बलराम, कथाकार...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :press clippings
  May 4, 2013, 2:51 pm
हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !क्योंकि मैं पुरुष हूँ, क्योंकि मैं भारतीय हूँहाँ मैं शर्मिंदा हूँ !क्योंकि मैं निवासी हूँ उस शहर काजहां महफूज नहीं है, "मासूम बच्ची" भी  हाँ मैं शर्मिंदा हूँ !क्योंकि पहले मैं शान से अपने बिहारी होने पर करता था गर्वक्योंकि ये भूमि सीता-बुद्ध-महा...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :महावीर
  April 25, 2013, 12:41 pm
आज एक सोच मन मे आईक्यूँ न समर्पित करूँ एक कविताएक "मजदूर" को ...पर उसके लिएकविता/गीत/छंद/साहित्यका होगा क्या महत्व ?फिर सोचामेहनतकश जिंदगी पर लिख डालूँ कुछपर रहने दिया वो भीक्योंकि तब लिखनी पड़ेगी "जरूरतें"और जरूरत से ज्यादाभूख, प्यास, दर्द, पसीनापर भी तो लिखना पड़ेगा ......
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :may day
  April 22, 2013, 12:01 pm
ये वाइल्ड फेंटेसिस और उसमे सिर्फ तुम सच में,ढाती है कहर !अस्पताल काबेड न. 26,वार्ड न. 3उसके जिस्म से जुड़ा मशीन दिखा रहा था सारे ग्राफ मौत के करीब ..उसके बदन से जुड़े थे ढेरों पाइप जिसमें से जा रहा था ब्लड, फूड पाइप भी थी जुड़ी  आंखो के सामने धुंधला दृश्य पावर शायद होगा +15 या +16 प...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :अस्पताल
  April 12, 2013, 9:49 am
10 वाट के बल्व की हलकी रौशनीहाथो में काली चाय से भराबड़ा सा मगबढ़ी हुई दाढ़ीखुरदरी सोच वमेरी, मेरे से बड़ी परछाई !है न आर्ट फिल्मके किसी स्टूडियो का सेटएवं मैं !ओह मैं नहीं ओमपुरीजैसा खुरदरा नायक !परछाई से मुखातिबहो कर -तू कब छोड़ेगा मुझे'उसने''उसकी मुस्कराहट ने'और 'उसके स...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :कप
  March 29, 2013, 11:50 am
कहाँ जनता था उसे??? पर कुछ लोगों का ज़िन्दगी में शामिल होने या खोने पर अपना जरा भी बस नहीं होता.. सब यूँ होता है जैसे कोई ख्वाब देखा हो...कब और कैसे, मेरी आभासी दुनिया में शामिल हो गया और फिर उस दायरे को लांघ गया .... बिलकुल दबे पाओं, हौले से,चुपचाप मुझे खबर तक न चली...ये सोशल मीडिय...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :आभासी दुनिया
  March 13, 2013, 4:17 pm
आज महिला दिवस पर कुछ पंक्तियाँ अपने जिंदगी से जुड़ी सबसे खूबसूरत महिला को समर्पित करता हूँ, आखिर जिंदगी तो उसी से है .... कुछ साधारण से शब्द उसके लिएऐ हसीना !!क्या तू बन पाएगी मेरी रचनाशब्द मे सज पाएगी कभी क्या कभी चंचल शोख अदाढल पाएंगे,बन पाएंगे नज्मबालों का झटकना कैसे दि...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :POEM
  March 8, 2013, 11:48 am
10 फरवरी को विश्व पुस्तक मेला में लोकार्पित हुई मेरे सह सम्पादन मे साझा कविता संग्रह "पगडंडियाँ" से मेरी एक रचना आप सबके लिए... ऐ भास्कर !सुन रहे होआज मान लेना एक नारी का कहनाआजकल हो जाती हूँ लेटतो थोड़ा रुक कर डुबना !!तुम सब ही तो कहते होनारियों आगे बढ़ोघर से बाहर निकलो...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :ऐ भास्कर
  March 1, 2013, 6:10 pm
सन 1945 मे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तथाकथित हवाई दुर्घटना या उनके जापानी सरकार के सहयोग से 1945 के बाद सोवियत रूस मे शरण लेने या बाद मे भारत मे उनके होने के बारे मे हमेशा ही सरकार की ओर से गोलमोल जवाब दिया गया है उन से जुड़ी हुई हर जानकारी को "राष्ट्र हित" का हवाला देते हुये हम...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
  February 27, 2013, 2:21 pm
(लोकार्पण के अविस्मरनीय पल)(पगडंडियाँ कवर पेज)कुछ मेहनत,कुछ शुभकामनायें,कुछ लोगो का साथ,कुछ काव्यात्मक सोच और रच गई,हम सबकी "पगडंडियाँ" ... साथ मे श्रीमति अंजु चौधरी,श्रीमति रंजना भाटिया और श्री शैलेश भारतवासी की अदम्य ताकत तो थी ही....... फिर क्यों नहीं होता एक सफल आयोजन।जी...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :लोकार्पण
  February 15, 2013, 3:59 pm
शुभ प्रभात दोस्तों :)हाँ तो मैं आज अपनी हमसबकी कविता संग्रह "पगडंडियाँ" की बात करने आया हूँ। ये सबको पता है की हिन्दी की पुस्तकें बहुत कम बिकती हैं फिर भी एक कहानी की पुस्तक तो बेस्ट सेलर हो सकती है, पर कविता संग्रह वो भी नौसिखिया रचनाकारों की बिक पानी बहुत ही मुश्किल ...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :विमोचन
  February 9, 2013, 12:46 pm
हर बार ऐसा क्यों होता है अँधेरी सुकून भरी रात में नरम बिछौने पर नींद आने के बस कुछ पल पहले मन के अन्दर से अहसासों के तरकश से शब्दों के प्यारे बाण  लगते हैं चलने....मन ही मन कभी-कभी वास्तविक घटनाओं पर तो कभी काल्पनिकता की दुनिया में हो जाते हैं गुम ... और बस फटाक से कविता र...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :बाण
  January 21, 2013, 6:39 pm
सुना था इक्कीस दिसम्बर को धरती होगी खत्मपर पाँच दिन पहले ही दिखाया दरिंदों ने रूप क्रूरतम छलक गई आँखें, लगा इंतेहा है ये सितम फिर सोचा, चलो आया नया साल जो बिता, भूलो, रहें खुशहाल पर आ रही थी, अंतरात्मा की आवाजउस ज़िंदादिल युवती की कसमउसके दर्द और आहों की कसमहर ऐसे जिल्लत ...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :POEM
  January 1, 2013, 9:37 am
वो जीना चाहती थी वो खुशहाल जिंदगी चाहती थी अम्मा-बाबा के सपने को पूरा करना चाहती थी ...........अम्मा-बाबा ने साथ भी दिया एक छोटे से शहर से डर-डर कर ही सही पर भेजा था उसे इस मानव जंगल में वो भी उनके अरमानो को पंख लगाने हेतु फिजियोथेरपी की पढाई में अव्वल आ करा आगे बढ़ना चाहती थी ...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :अस्पताल
  December 29, 2012, 5:20 pm
हर दर्द को कविता में नहीं पिरोया जा सकता, हाँ उस दर्द को झेलने के बाबजूद जिंदगी जीने की तमन्ना रचना के काबिल होती है...एक दर्दनाक हादसे की शिकार दामिनी (काल्पनिक नाम, यही कह रहे हैं टीवी वाले) के जिन्दादिली को  समर्पित उसके ही कथन .....!!" माँ -पापा को कुछ मत बताना "- दर्द से डूबी ...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :safdarjung
  December 23, 2012, 4:37 pm
ये डी.टी.सी. के बस की सवारीइससे तो थी अपनी यारीहर सुबह कुछ किलोमीटर का सफरकट “जाता था” , नहीं थी फिकरजैसे सुबह 9 बजे का ऑफिस11 बजे तक पहुँचने पर कहलाता नाइसतो बेशक घर से हर सुबह निकलते लेटपर बस स्टैंड पर भी थोड़ा करते वेट अरे! कुछ बालाओं को करना पड़ता था सी-ऑफ ताकि कोई “भग...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :फुद्कियाँ. poem
  December 15, 2012, 11:17 am
भैया !!देना एक छोटी गोल्ड फ्लेकएक मेंथोल टॉफी भीसररर…….माचिस के तिल्ली की आवाजअंदर की और साँसऔर फिर धुएँ का छल्ला मिलता-जुलता म्यूजिक भी "सिगरेट के धुएँ का छल्ला बना कर"ऐसा ही होती है नशुरुआत स्मोकिंग कीसब कुछ परफेक्ट .पर कितना अजीब है नये धुआँ भी अगर आँखों में लगेतो लग...
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Mukesh Kumar Sinha
Tag :धुएँ
  December 5, 2012, 11:02 am
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