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मेरी सोच

                                   ये तो विश्वास की बात है कि हमारे जीवन में लकीरों का कितना महत्व है और हमारे हाथ की लकीरें को पढने वाले बहुत मिल जाते हैं।  माथे की लकीरें भी पढ़ना प्रबुद्ध जन जानते हैं और उनका आकलन  कितना ...
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  March 12, 2016, 9:41 pm
                                                       दिन के बाद जब साँझ आती तो दिन का अवसान होने को होता है और फिर रात और नयी सुबह , लेकिन जीवन एक ऐसा दिन है जो दिन , महीने और सालों के बाद ही सुबह, दुपहर और साँझ तक जाता है और फिर रात यानि कि अ...
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  October 21, 2015, 1:52 pm
                         जीवन में अनुभव से धारणा बनती है और धीरे धीरे जब ये अनुभव बार बार होते जाते हैं तो ये धारणाएं मन में अपनी  गहरी पैठ बना लेती हैं।  बस ऐसा ही कुछ नए साल के पहले दिन से जुड़े मेरे मन के पूर्वाग्रह भी हैं और यह ऐसे ही नही...
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  January 1, 2015, 4:06 pm
                                    संयुक्त परिवार कल आने वाली पीढ़ी इतिहास के पन्नों पर पढ़ेगी जैसे हम अपने इतिहास में गुजरे ज़माने की पर्दा प्रथा , सती प्रथा और अबोध बच्चों के विवाह की प्रथा के विषय में पढ़ कर जान लेते हैं।  प...
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Tag :संयुक्त परिवार
  May 15, 2014, 7:13 pm
                                     कभी कभी कोई एक पंक्ति या फिर एक कमेंट पूरे के पूरे आलेख की पृष्ठभूमि तैयार कर जाती है. किस सोच के पीछे कौन सा मनोविज्ञान छिप कर उजागर कर जाएगा इसको कोई नहीं जानता।  पिछले बार  स्टेटस मैंने अपडेट किय...
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  May 6, 2014, 10:35 pm
                                हमारी सोच सकारात्मक हो तो हमें अपने जीवन में परिणाम भी अच्छे मिलते हैं।  ये बात हमें दार्शनिकों , बड़े बूढ़ों और अपने शिक्षकों से सुनने को मिलती रही है.   हम चाहे जीतनी भी आधी आबादी के आत्मनिर्भर हो...
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  April 12, 2014, 10:28 pm
             हिन्दू धर्म के अनुसार चैत्र मास की प्रतिपदा से नव वर्ष आरम्भ होता है और इसी दिन से हमारे नए पंचांग का निर्माण होता है और नवग्रहों की स्थिति को लक्षित किया जाता है।आज से विक्रम संवत्सर २०७१ का शुभारम्भ हो रहा है।  वैसे मेरा कुछ अनुमान है कि ...
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  March 31, 2014, 2:37 pm
                           हमारे देश में प्रतिभाशाली युवा अपनी मेधा को अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए लगा देते हैं . वह मंजिल भी इतनी आसन नहीं होती है . रात दिन के कठिन परिश्रम करके वह आई ए एस/पी सी एस बनने का सपना पूरा कर पाते हैं लेकिन फिर भी...
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  August 20, 2013, 4:45 pm
                                 आज 10 अगस्त को पापा को  हमसे दूर गए हुए 22 साल हो गए . लेकिन  क्या कभी वे हमारी यादों से दूर हुए शायद कभी नहीं क्योंकि जनक वो थे हमारे .   अपने सारे   संस्कार , विचार और जीवनचर्या को पूरी पूरी तरह स...
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  August 10, 2013, 9:00 am
                               आज कल चल रहे समाज के वीभत्स वातावरण को देख कर आत्मा काँप जा रही है . हम किस उम्र की बात कहें ? सवा साल की बच्ची से दुष्कर्म की बात पढ़ कर तो लगा कि क्या वाकई बच्चियों को जन्म से पहले ही मार देने की प्रथा इसी लिए चलाई गयी थी . परदे की प...
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Tag :संस्कार
  July 10, 2013, 4:00 pm
                           कभी इस तरह से सोचा ही नहीं कि जन्मदिन कैसे मनाया जाय ? अपने से तो कोई प्रोग्राम बनाया नहीं जाता और मैं खुद अपनी एनिवर्सरी या बर्थडे मनाने  लिए पार्टी रखने में विश्वास भी नहीं करती हूँ . बचपन से चार बहनों औ...
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  July 7, 2013, 2:16 pm
                         विश्व पटल पर "नारी"ब्लॉग आप सबके सामने  आया है . अपने  अस्तित्व के लिए सिर्फ ये ब्लॉग   ही नहीं बल्कि ये आधी आबादी भी  रही है . लेकिन यहाँ बात उस अस्तित्व की नहीं है बल्कि  इस बात से है कि  आधी आबादी के हक के  लिए लड़ रहा ये ब्लॉग  सिर्फ हमारे सामने अपने  को सिद्ध ...
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  April 23, 2013, 5:10 pm
                     ये प्रश्न सिर्फ मेरे मन में ही उठा है या और भी लोगों के मन में उठा होगा ये तो मैं नहीं जानती लेकिन अपने समाज और युवाओं के बढते हुए आधुनिकता के दायरे में आकर वे उन बातों को बेकार की बात समझने लगे हैं ,जिन्हें ये दकियानूसी समाज सदियो से पालता  चला आ रहा है।           ...
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  January 22, 2013, 7:10 pm
                              अधूरे सपनों की कसक को लेकर चली थी कि सबके आधे अधूरे सपनों से दो चार होंगे और फिर सोचेंगे कि  इन सपनों के सजने और टूटने में क्या था? किसने अधिक इस सफर में अपने सपनों के  साथ समझौता किया और कौन उसके लिए जिम्मेदार रहा? उसका नारी होना या फिर सामाजिक सीमाओं की प...
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  November 29, 2012, 3:24 pm
                  सपने तो सपने हैं चाहे छोटे हों या बड़े , हर मन में बसते हैं . उम्र के साथ ये भी बढ़ाते जाते हैं। कभी हमने बच्चों से पूछा होता की क्या चाहते हैं ? तो वे अपने सपनों को आकार  देते हुए कुछ न कुछ जरूर बता देते - जैसे किसी को उड़ने वाला जहाज चाहिए , किसी को बार्बी की गुडिया ...
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Tag :सपना और यशवंत माथुर
  November 3, 2012, 12:59 pm
                   सपने की बात करे  तो फिर सपने अपने अपने  और अलग अलग शब्दों में व्यक्त किये जाते हैं    क्योंकि ये वह चीज है जो निजी होते हैं वह बात और ही की यही सपना किसी और आँखों में पलता हुआ मिल जाय तो उससे कितना  महसूस होता है। कभी कई लोगों के सपनों में झाँका तो लगा की अरे ये ही ...
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Tag :सपने और वाणी शर्मा
  November 2, 2012, 1:39 pm
                             कुछ लोग अपनी शख्सियत को सबसे अलग प्रस्तुत करने में माहिर होते हैं और वाही अंदाज उनकी अपनी विशेषता होती है। सपने सभी ने देखे और अपने अपने सपनों के स्वरूप को शब्दों में ही ढाल कर भेजा लेकिन समीर जी ने उसे सबसे अलग कविता रूप देकर प्रस्तुत किया क्योंकि सपन...
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Tag :सपने और समीर लाल
  November 1, 2012, 1:33 pm
            ये शास्त्री जी का सपना  जो पूरा हुआ उनके द्वारा देखा गया और हम कर रहे हैं अधूरे सपनों की बात , लेकिन शास्त्री जी के भेजे इस पूर्णसपने को हम उतना ही सम्मान  देना चाहते हैं जितना  अपने विषय से जुड़े  संस्मरण को दिया है। इस लिए आप सबसे विषय से इतर जाने के लिए  क्षमा चाह...
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Tag :सपने और रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
  October 31, 2012, 1:17 pm
                         हमारे सपनों के आकर और स्वरूप अलग अलग होता है , संगीता जी उन सब में सबसे अलग दिशा में जाकर अपने सपने देख रही हैं क्योंकि अब तक के सरे लोगों से अलग एक दिशा में उनके कदम बढ़ रहे हैं। उनके सपनों के साथ जुड़ कर हम सभी उनके इसा सपने को साकार होने की कामना करती हूँ  .       ...
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Tag :सपने और संगीता पुरी
  October 30, 2012, 1:42 pm
             सपने कुछ अपने कुछ औरों के लिए भी होते हैं कभी हम खुद के लिए कुछ देखते हैं लेकिन कभी हमारे सपने देखते तो हम हैं लेकिन वो होते औरों के लिए हैं। एक परमार्थ का सपना - एक सुन्दर सोच का प्रतीक , हो सकता है कि ये आज न पूरा हुआ हो कल पूरा हो जाए . ये कसक ही तो है जिस सपने को पूरा क...
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Tag :सपने और स्वप्न मंजूषा शैल
  October 29, 2012, 3:51 pm
                                कहाँ से चले थे और कहाँ पहुँच ?गए  ? सपने समेटे और फिर एक एक करके सबको प्रस्तुत किया . सपने देखना बुरा नहीं होता और फिर अगर वे अधूरे रह भी जाते हैं तो फिर उनकी कोई नयी राह निकल कर सामने आ जाती है। विकल्प पाकर भी हम बहुत खुश रह लेते हैं। हमारे वे देखे हुए सपने ...
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  October 27, 2012, 3:02 pm
           सबके सपनों को प्रस्तुत करते करते आज अपने सपने को भी बांटने  का मन हो गया और फिर बस मैंने सोचा कि  अपना वह सपना भी सबके साथ बाँट लूं। बस  एक सपना देखा था और उसके बाद से आज के जीवन में तो जो है वह आज है - कल के बारे में  की जरूरत नहीं समझती क्योंकि न जाने कौन सा पल मौत की अ...
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Tag :सपने और रेखा श्रीवास्तव
  October 26, 2012, 3:31 pm
                     सपने देखे जाते हैं और ये सपने कभी तो साकार होते हैं और कभी टूट कर बिखर जाते हैं। इन बिखरे हुए सपनों के टुकडे अपने अस्तित्व को यूँ ही नहीं जाने देते हैं और कभी कभी इन टुकड़ों से एक नयी उर्जा मिलाती है और फिर नए सिरे से अपने सपनों को आकर देने की प्रेरणा मिलाती है। ...
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Tag :सपने और अरुण चन्द्र राय
  October 25, 2012, 3:15 pm
                   रवीन्द्र  जी का सपना हमारे विषय से थोडा सा इतर है क्योंकि इस समय ये सपना  उनके पिता का था और उन्होंने देखा था फिर किस रूप में पूरा हो रहा है? ये प्रसंग मुझे बहुत ही अच्छा लगा इस लिए इसको मैंने प्रस्तुत करने का फैसला लिया है . हमारे बुजुर्ग भी अपने सपनों को कैसे अ...
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Tag :सपने और रवीन्द्र प्रभात
  October 24, 2012, 2:12 pm
               ये सपने  भी कितने सीमित होते हैं क्योंकि एक लड़की को अपने सपने को हम सब के साथ मिलकर ही देखने पड़ते  हैं और  सपनों को  पूरा करने  के लिए भी  समझौते करने पड़ते हैं . वह उस में भी खुश है  - फिर  भी उसे  न जाने क्यों अधूरे होने के दंश से गुजरना पड़ता है . क्या सिर्फ इस लिए की वह...
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Tag :सपना और पल्लवी सक्सेना
  October 23, 2012, 12:30 pm
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