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मेरा सरोकार

                             आज अंतर्राष्ट्रीय  वयोवृद्ध दिवस है। हर घर में वरिष्ठ लोग होते हैं और हमें उनका सम्मान करना चाहिए।  संयुक्त परिवार के विघटन ने वरिष्ठों को एकाकी बना दिया।  ऐसा नहीं है कई वरिष्ठ आज भी अपने युवावस्था क...
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  October 1, 2017, 7:44 pm
                            इस वर्ष नवरात्रि के दिनों में हमेशा की तरह कन्यायें खिलानी थी और इसके लिए मेरी मानस पुत्री रंजना यादव  ने मुझसे एक ऐसी कार्यशाला करने का प्रस्ताव रखा कि मुझे उसकी सोच में एक नयी दिशा दिखाई दी।  बच्चों को ...
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  October 1, 2017, 12:23 pm
                                                             ब्लॉगिंग के ९ वर्ष !                                                &...
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  September 21, 2017, 4:57 pm
                                          एक समय था जब कि घर की धुरी दादा दादी ही हुआ करते थे या उनके भी बुजुर्ग होते थे तो उनकी हर काम में सहमति या भागीदारी जरूरी थी।  उनका आदेश भी सबके लिए सिर आँखों पर रहता था। शिक्ष...
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  September 10, 2017, 2:03 pm
          मशीन अनुवाद का सफर कुछ अधिक लम्बा हो चुका है फिर भी बहुत कुछ शेष है. यह एक अंतहीन सफर ही तो है जिसको मैं अपने कार्यकारी समूह के साथ और विभिन्न संस्थानों  के साथ मिल कर विगत 22 वर्षों  से  करती चली आ रही हूँ. इस लम्बे सफर में मैंने जिन भाषाओं को इस मश...
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  August 31, 2017, 2:16 pm
शीन अनुवाद का विस्तार (६)              मशीन अनुवाद सिर्फ सीधे सीधे वाक्यों के अतिरिक्त भी होता है. अगर हम किसी भी शासकीय पत्र को लें तो उसके लिखने का तरीका और उसकी शब्दावली अलग होती है. इसमें हर शब्द का एक अलग अर्थ हो सकता है. इसके लिए एक अलग शासकीय शब्दों...
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  August 22, 2017, 6:44 pm
               मशीन अनुवाद की दृष्टि से हमारे अनुवाद के क्षेत्र का इतना विस्तृत दायरा है कि उसके अनुरुप इसको सक्षम बनाने  का कार्य सतत ही चलता रहेगा। हमारे दैनिक जीवन में और तमाम विषयों के अनुसार नए नए शब्दों का निर्माण होता रहता है और हम रोजमर्रा ...
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  August 10, 2017, 12:14 pm
मशीन अनुवाद की प्रक्रिया जटिल ज़रूर है लेकिन उपयोग करने वाले के लिए बहुत ही सहज है. अगर हम आलोचना करने पर उतर आयें तो फिर हर चीज़ कि आलोचना की जा सकती है क्योंकि पूर्ण तो एक मनुष्य भी नहीं होता है फिर मशीन कि क्या बात करें? ये  मनुष्य  ही है जो अपने कार्य को त्वरित करने के...
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  August 6, 2017, 4:47 pm
             मशीन अनुवाद के प्रारंभिक स्वरूप के बारे में मैं पहले बता चुकी हूँ. इसके द्वारा हम विस्तृत सोच को जन्म दे चुके हैं. जीवन के हर क्षेत्र में इसकी भूमिका तो वही है लेकिन उसके स्वरूप अलग अलग हो जाते हैं. हम एक सामान्य अनुवाद प्रणाली का प्रयोग कर...
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  August 4, 2017, 1:38 pm
                                   हिंदी भले ही विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा न हो लेकिन हिंदी भारत की प्रमुख भाषा है और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र  भाषा भी है. हम अपने देश , प्रदेश, शहर, गाँव और गली मोहल्...
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  August 3, 2017, 1:27 pm
         आज मुझे अपने ब्लॉग को शुरु किये हुए आठ वर्ष हो गये । बहुत कुछ सीखा और अपने पाँच ब्लॉग बनाये हैं , अलग अलग उद्देश्य से । ईमानदारी से कहूँगी कि कुछ वर्षों तक तो उनके साथ न्याय कर पायी फिर कुछ  अन्य कार्यों में व्यस्तता और सामाजिक सरोकार में वृद्धि से समय कम दे ...
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  September 21, 2016, 2:44 pm
   जीवन के तमाम पर्वों में एक जन्माष्टमी सबसे ज्यादा उत्साह से मनाते थे । इसका कारण यह था कि इसकी झाँकी सजाने का सारा दारोमदार बच्चों पर ही होता था । हर घर में तब झाँकी सजाई जाती थी . थोड़ी तैयारी करके सहेली के घर जाकर देख आते और नये आइडिया लेकर आ जाते ।       रक्षा बं...
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  August 25, 2016, 11:11 pm
आश्रम या गृह- समाज सेवा का प्रतीक माने जाते हैं  जैसे -- सरकारी नारी कल्याण केंद्र , वृद्धाश्रम , बाल सुधार केंद्र या बालिका सुधार गृह , अनाथालय , संवासिनी गृह और बाल संरक्षण गृह का नाम सुनकर ये ही लगता है।  लेकिन इनको चलाने वाले एनजीओ में होने वाली गतिविधियों से यही सम...
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  August 25, 2016, 4:53 pm
                        आज डॉक्टर्स डे है और वाकई डॉक्टर्स जो भगवान का रूप है इसी दुनियां में हैं।  उनका एक ही धर्म होता है और वह है मानव सेवा।  कभी कभी तो वह अपने पास से पैसे भी देकर सेवा कर जाते हैं।  आज का दिन वाकई ऐसे ही लोगों के लिए नमन ...
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  July 1, 2016, 1:10 pm
      इधर विभिन्न स्रोतों से देख रही हूँ  कि कई बार बच्चियों की  तस्वीरें फेसबुक ,  व्हाट्स ऐप और अन्य सोशल मीडिया पर दिखलाई दे रही हैं और आज कल कुछ ज्यादा नजर आने लगी हैं। कभी तो ये विचार आकर सोचने पर मजबूर कर देता है कि वास्तव में ऐसा हो रहा है तो क्यों हो रहा ह...
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  June 5, 2016, 4:31 pm
                      शिक्षा मानव जीवन की ऐसी नींव डालता है , जो उसके मनो-मष्तिष्क में गहरे पैठ जाती है और इसके कारण ही बच्चों के जीवन में संस्कार या फिर अपने समाज , देश और परिवार के प्रति एक अवधारणा बन जाती है।  चाहे घर हो , स्कूल हो या फिर उसका अ...
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  June 2, 2016, 4:47 pm
                        2 अप्रैल को विश्वऑटिज्मदिवस के नाम से जाना जा रहा है।  कभी हमने सोचा है कि हमें   विश्व ऑटिज्म दिवस की आवश्यकता क्यों पड़ी ? आज जिस गति से जीवन निरन्तर आगे बढ़ता चला जा रहा है ,वैसे ही हम रोगों की दिशा में भी प्रगति कर र...
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  April 2, 2016, 3:07 pm
                     जीवन की बढ़ती  आपाधापी और दूर दूर फैले कार्यक्षेत्र में लगने वाले समय ने और खाने पीने की नयी नयी सुविधाओं ने जीवन  सहज बना दिया है लेकिन शरीर को जल्दी ही दवाओं पर निर्भर भी बनाता जा रहा है।              &nb...
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  March 10, 2016, 5:17 pm
               कई बार अख़बार की खबरें सामने से गुजर जाती हैं और उन्हें कभी पूरा पूरा पढ़ने का मन भी नहीं करता है लेकिन कोई खबर आग का गोल बनकर अंदर तक खाक कर जाती है। व्यवस्था , क़ानून और न्याय सब एक मजाक लगता है। इंसान ने दिमागी असंतुलन की और जाते हुए वीभत्...
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  November 22, 2015, 3:32 pm
                             लिखना तो वर्षों से चलता चला आ रहा है लेकिन ब्लॉग से मेरा परिचय जब हुआ तो वो सितम्बर २००८ से।  इसमें काम कैसे किया जाय ? ये तो मैंने अपने ऑरकुट मित्रों से सीखा क्योंकि तब फेसबुक थी नहीं और हम लंच टाइम में अप...
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  September 21, 2015, 7:35 pm
                       मेरी पाँचों बेटियां             बड़ी बेटी के नौकरी में जाते ही उससे छोटी वाली बेटी का भी एम सी ए पूरा हो गया और साथ ही उसको कैंपस से ही चुनाव भी हो गया।  उसकी नौकरी इनफ़ोसिस कंपनी में लगी।  रिश्तेदारों की नजरें चम...
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  August 19, 2015, 10:51 pm
                  लिखते लिखते कितनी यादें छूट जाती हैं लेकिन उनका तारतम्य तो कहीं न कहीं बिठाना पड़ता है।  जब मेरी छोटी बेटी हुई तो लगा लोगों पर पहाड़ टूट पड़ा।  मेरे घर में तो नहीं हुआ ऐसा। वह ६ महीने की ही थी कि मुझे आई आई टी में जॉब मिल गयी। उस समय जॉब...
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  August 13, 2015, 3:42 pm
                  लोगों के इस व्यवहार से लगा मानो हमने कोई गुनाह किया है। अरे हमारी तो पहली संतान थी और लोग क्यों मातम मना रहे थे? कुछ दिनों बाद सब शान्ति रही।  अब जिठानी जी को नसीहतें मिलनी शुरू हो गयीं।--अरे तीन बेटियां हो गयीं घर में ,अब एक बेटा घर में होना ही चाह...
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  August 6, 2015, 1:17 pm
                            बेटियों होना माँ बाप के लिए कम और लोगों के लिए बोझ दिखना सिर्फ आज से नहीं बल्कि सदियों से चला आ रहा है और उन सदियों की स्थिति को हम इतिहास में पढ़ते आ रहे हैं।  दशकों से तो हम खुद ही इसको महसूस करते आ रहे हैं ल...
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  July 21, 2015, 4:46 pm
                          वर्षों पहले जब हमारी माँ ने अपने बच्चों को जन्म दिया था , तब की काल , परिस्थितियाँ और शिक्षा का परिदृश्य कुछ और था। लेकिन रोज रोज सामने आने वाली स्थितियाँ और घटनाएँ हमें फिर सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि क्या हम वाक...
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  July 4, 2015, 1:47 pm
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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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