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Roshi: कभी कभी अतीत चिपक जाता है कुछ यु जैसे हो परछाइशारी...: कभी कभी अतीत चिपक जाता है कुछ यु जैसे हो परछाइ शारीर से घुलमिल जाता है यु जैसे हो पेटजाई   चाहकर भी ना पीछा छुडा सकते हैं हम उससे  ढोन......
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  May 25, 2012, 11:25 pm
Roshi: बिसर गए वो दिन जब सब भाई बहिन होते थे इकट्ठा सुबह ...: बिसर गए वो दिन जब सब भाई बहिन होते थे इकट्ठा  सुबह से होता था जी भरकर उधम ,और हंसीठठठा  ना कोई था समर कैंमप ,ना था होम वर्क का टनटा  द......
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  May 24, 2012, 11:32 pm
Roshi: देखा आज एक पूर्ण पल्लवित पलाश का एक वृक्ष अपने पूर...: देखा आज एक पूर्ण पल्लवित पलाश का एक वृक्ष  अपने पूरे यौवन ,पूरे शबाब के साथ खड़ा था वो  अपनी पूर्ण विकसित शाखों को यूँ फेलाए  था वो  ज......
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  May 23, 2012, 12:25 am
Roshi: ना कोई चिट्ठी .ना कोई संदेस पंहुचा सकते हैं हम वंह...: ना कोई चिट्ठी .ना कोई संदेस पंहुचा सकते हैं हम वंहा चली गयी हो माँ आप हम को छोड़ कर जहाँ  रोज़ रोता है दिल ,और तिल तिल-तिल मरते हैं हम य......
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  May 12, 2012, 10:17 pm
Roshi: जीने की आशा: जान अपनी कितनी होती है कीमती देखा कल निज आँखों से पकड़ा था लोगो ने एक चोर को रंगे हाथ अपने हाथों से कितना मार-मार कर किया था लहूलुहान लात......
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  April 4, 2012, 10:58 pm
Roshi: टूटते रिश्ते: जीवन के है अद्भुत रूप और विचित्र रंग आज किसी का साथ और कल दुसरे का संग ना है रत्ती भर उनको साथ छोड़ने का गम बरसों की दोस्ती बस यूं ही भु......
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  April 3, 2012, 11:05 pm
जीवन के है अद्भुत रूप और विचित्र रंगआज किसी का साथ और कल दुसरे का संगना है रत्ती भर उनको साथ छोड़ने का गमबरसों की दोस्ती बस यूं ही भुला दी पाने को किसी और का संगवो सारे लम्हे जो थे बांटे साथ बैठ कर एक संगएक पल में ही उड़ा दी सारी धज्जियाँ रूई की मानिदना रखे कुछ भी अपने पास ...
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  April 3, 2012, 11:04 pm
Roshi: माँ के भक्त: माँ के भक्त बने वो घंटो मंदिर में कीर्तन किया करते हैं घर आकर पत्नी और बेटी पर सितम धाय करते हैं  नवरात्री में सिर्फ फलाहार  का सेवन किया क......
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  March 25, 2012, 5:18 pm
Roshi: होली: होली आयी,फिजाओं में सप्तरंग और बागों में भी है कोयल चेह्काई ब्रिध -बालक ,नर -नारी और युवा तन -मन सभी पर है मस्ती छायी रंग ,गुलाल इतर की खुसब......
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  March 17, 2012, 9:55 pm
Roshi: होली के पावन-पर्व पर कुछ वेह्शी दरिंदो ने हमारे जं...: होली के पावन-पर्व पर कुछ वेह्शी दरिंदो ने हमारे जंवाज पुलिसअफसर नरेन्द्र सिंह की निर्मम हत्या कर दी  उनकी पत्नी माँ बननेवाली हैं इस घटना ने ......
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  March 17, 2012, 9:52 pm
होली आयी,फिजाओं में सप्तरंग और बागों में भी है कोयल चेह्काईब्रिध -बालक ,नर -नारी और युवा तन -मन सभी पर है मस्ती छायीरंग ,गुलाल इतर की खुसबू इन सबने है अद्भुत छठा बिखराईगुझिया ,समोसे ,चाट -पकोड़ी और प्रेमियौं ने तो है भांग घुट्वाईजीजा -साली ,देवर -भावी जैसे सभी रिश्तों ने दी ...
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  March 17, 2012, 9:35 pm
Roshi: प्रेम दिवस: आज दुनिया मना रही है बेलेंतिने दिवस अद्भुत प्रेम प्रदर्शन करने का सुंदर दिवस सिर्फ एक दिन ही क्यूँ इस प्रेम के लिए ३६४ दिवस क्य......
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  February 14, 2012, 8:59 pm
Roshi: मकर संक्रांति: आज थी मकर संक्रांति और था मांगने वालों का रेला तभी नज़र पड़ी कोने में कड़ी था एक वृद्ध अकेला पास बुलाया और पुछा बाबा क्या चाहिये ? बोला......
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  January 21, 2012, 9:03 pm
Roshi: जिन्दगी का फलसफा: सब कहते हैं की बीति बातें बिसार दो ,और आगे की सुध लो पर भूलना क्या होता है इतना आसा ? जिनको था दिल और दिमाग ने इतना चाहा एक ही झटके में ......
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  December 13, 2011, 10:11 pm
Roshi: मधुमास: शीत ऋतू,शीतल पवन मधुमास में भीगा तन मन परस्पर उपजा घना विश्वास,तृप्त आत्मा और प्रमुदित हर्षित जीवन गए थे दोनों हनीमून परविवाह के बाद नवयु......
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  December 13, 2011, 10:09 pm
सब कहते हैं की बीति बातें बिसार दो ,और आगे की सुध लोपर भूलना क्या होता है इतना आसा ?जिनको था दिल और दिमाग ने इतना चाहाएक ही झटके में टूटा पूरा का पूरा भरम का जालखुल गयी आंखें ,मिला जिन्दगी को सबक .और नए ख्यालपर किससे  कहें ? क्या कहें ,बचा न था कुछ भी बाकीस्वयंम सिर्फ स्वंयं प...
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  December 13, 2011, 10:07 pm
शीत ऋतू,शीतल पवन मधुमास में भीगा तन मनपरस्पर उपजा घना विश्वास,तृप्त आत्मा और प्रमुदित हर्षित जीवनगए थे दोनों हनीमून परविवाह के बाद नवयुगलपर बदल ही गयी थी काया कुछ ही दिन में पाकर नव स्पंदनप्यार का रंग भी होता है बड़ा अद्भुत और नवीनएक दुसरे को स्वसमर्पण ,साथी को आत्मसा...
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  December 13, 2011, 9:39 pm
Roshi: माँ का आशीर्वाद: कब बच्चे हो जाते हैं बड़े और करने लगते हैं फैसले स्वयंपता भी न चलता है रह जाते हैं स्तब्ध हम .......... कभी उचित कभी अनुचित उठा जाते हैं वो......
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  December 8, 2011, 10:45 pm
कब बच्चे हो जाते हैं बड़े और करने लगते हैं फैसले स्वयंपता भी न चलता है रह जाते हैं स्तब्ध हम ..........कभी उचित कभी अनुचित उठा जाते हैं वो कदमपर हम फोरन भूल जाते हैं अपना गमयह ही तो होता है दिल और खून का रिश्ताजो मुआफ कर देता है अपने कोख जायों का हर सितममाँ तो माँ होती है औलाद...
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  December 8, 2011, 9:31 pm
कब बच्चे हो  जाते हैं बड़े और करने लगते हैं फैसले स्वयंपता भी न चलता है रह जाते हैं स्तब्ध हम ..........कभी उचित कभी अनुचित उठा जाते हैं वो कदमपर हम फोरन भूल  जाते हैं अपना गमयह ही तो होता है दिल और खून का रिश्ताजो मुआफ कर देता है अपने कोख जायों का हर सितममाँ तो माँ होती है औलाद द...
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  December 7, 2011, 9:05 pm
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