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मान जाऊंगा..... ज़िद न करो

छोड़के मुझको मेरे दर से जब तू निकला था।जैसे आकाश फटे, खूं जिगर से निकला था।।किसी की न सुनी, सब की जान ले के गया।वो जो इक तीर सा तेरी नजर से निकला था।।सदियों तक मेरे जेहन में गूंजता ही रहा।कठिन सवाल सा, जो लब से तेरे निकला था।।मेरी आँगन में अँधेरा, जग को रोशन कर गया।वो जो जुग...
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  May 30, 2017, 5:15 pm
मुझसे थोड़ा तो प्यार करना था।एक बार ऐतबार करना था।।दिल को बस जार जार करना था।कुछ तो ऐसे निबाह करना था।।साथ रिश्तों का ऐतबार लिये।हमको ये दश्त पार करना था।।जमीं पर उतर के चाँद आये।ऐसी शब् का चुनाव करना था।।गम-ए-दौरां बिठा के डोली में।रोज खुद को कहार करना था।।याद में जो...
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  May 8, 2017, 5:03 pm
कभी कातिल, कभी महबूब, कभी मसीहा लिक्खा। हमने उनको बेखुदी में खुद न जाने क्या  लिक्खा।।इम्तिहाने जीस्त में हासिल सिफर, पर क्या गिला?उसको उतने अंक मिले जिसने जैसा परचा लिक्खा।।लाखों दस्तक पर भी तेरा दरवाजा तो बंद रहा।जाते जाते दर पे तेरे, अपना नाम पता&nb...
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  December 5, 2016, 5:38 pm
चिट भी उसकी, पट उसी की, सब सियासी तौर है।कह रही है कुछ जबां, लेकिन कहानी और है।।था वही, जिसकी इबादत में जहां पाबोस था।और, हम समझे कि दुनिया की खुदाई और है।।मैं सहन करता रहा हंस हंस केसब जुल्मो सितम।वो तो खुद कुछ और, उनकी बेहयाई और है।।नींद गहरी है मगर, अब रात हर बेख्वाब से।ह...
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  October 30, 2016, 4:48 pm
अपनी आंखों में हसीं ख्वाब की स्याही रख।बहुत प्यासा है तू, पास एक सुराही रख।।तेरी मंजिल की हदें तुझसे ही गुजरती हैं।एक मुसाफिर है तू, तू अपना सफर जारी रख।।वो न लहरों में कभी डूबा है, न डूबेगा।तू हिफाजत से रहेगा, तू उससे अपनी यारी रख।।उसने बड़े ही करीने से बनाई ये दुनिया।...
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  December 29, 2015, 5:28 pm
फिर बना लूं इक नयी कागज की कश्ती आज भी।है कला वो याद, पर गुज़रा ज़माना चाहिये।।तेरे घर के सामने एक घर बनाने के लिये।सिर्फ पैसा ही नहीं, एक प्लॉट खाली चाहिये।।सीखना है कुछ अगर, इन पंछियों से सीखिये।तिनका-तिनका कर के ही, एक घर बनाना चाहिये।।लब को सी लें, अश्क पी ...
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  July 29, 2015, 10:31 pm
बेदर्द सवालों के मतलब, जब समझोगे तब समझोगे।दुखती रग क्योंकर दुखती है? जब समझोगे तब समझोगे।।रुखे-सूखे रिश्ते-नाते, और मरासिम मद्धम से।इनसे होकर कैसे गुजरें, जब समझोगे तब समझोगे।।एक और एक ग्यारह भी है, एक और एक सिफर भी है।ये अहले सियासी बातें हैं, जब समझोगे तब ...
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  July 16, 2015, 10:03 pm
तुम माटी के पुतले निकले।सोच से बिल्कुल उल्टे निकले।।मंजिल उनके सजदे करती।जो भी घर से बाहर निकले।।अपने ग़म को बांध के रख लो।शायद अरमां भी कम निकले।।घर की जानिब जिनका रुख था।वो ही सबसे बेहतर निकले।।उसको चल कुछ कह कर निकलें।शायद वो भी हमदम निकले।।तुम थे... मैं था... ठीक ही...
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  June 14, 2015, 10:54 pm
जब भी राज उजागर होगा ।सामने कोई सागर होगा ।।उसका उतना ही कद होगा ।जिसका जितना चादर होगा ।।जीवन जिसका खुद एक दर्पण ।शायर वो ही शायर होगा ।।दिल की बात को दिल में रखना ।गागर तब ये सागर होगा ।।उससे कन्नी काट के चलना ।जिसके हाथ में पावर होगा ।।मौला तेरे घर आएंगे ।जब तू खुद से ...
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  May 23, 2015, 9:35 pm
तुम्हारी प्यार की बातों में, इक किस्सा पुराना हैकिसी का कर्ज है तुमपर, वो भी हमको चुकाना है।  मेरी दीवानगी को तुम न समझे हो, न समझोगेजिसे कल गा रहे थे तुम, उसे सबको सुनाना है।तेरी आंखों के हर सपने को, सीने में सजा लूंगातेरी जज्बात की बातों को, होठों में छुपा लूंगा।बता, मै...
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  February 26, 2014, 6:55 pm
दर्द जब खुद ही संवर जाता हैजाने कितनों का ग़म चुराता हैमेरे ज़ख्मों का चीरकर सीनाकर्ज़ औरों के वो चुकाता हैतेरी सोहबत का उस पे साया हैऔर, हरदम उसे सताता हैरास्ते भर वो बात करता रहाऔर मंजिल पर मुंह चुराता हैजी लिया, और फिर जिया भी नहींरिश्ता कुछ इस तरह निभाता है क्...
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  October 31, 2011, 7:00 pm
नया कुछ कर दिखाना चाहता हूंतुम्हें मैं आज़माना चाहता हूं .ग़ज़ल अबतक अधूरी रह गई हैतुम्हें मक्ता बनाना चाहता हूं .तेरी हसरत की सुई चुभ रही हैमैं इक धागा पिरोना चाहता हूं .ज़माना उसकी बातें कर रहा हैजिसे अपना बनाना चाहता हूं .'गिरि' अब यूं नहीं खामोश रहिएमैं इक किस्सा ...
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  September 24, 2011, 10:03 pm
बेरुखी का कोई चिराग जलाये रखना कम से कम एक सितारे को सताये रखना शमा जल जायेगी बुझ जायेगी रुसवा होगीदिल में जज्बात की इक लौ को जलाये रखना तू वहीं है जहां से मेरी सदा लौटी हैअगर सुना न हो तो कान लगाये रखना न जाने कौन सी महफिल है जहां मैं भी नहींमेरी जज्बात की रंगत को बनाये...
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  July 14, 2011, 4:00 pm
ख्वाब उनमें नहीं अब पलते हैंउसकी आंखें चिराग़ जैसी हैंउसकी आंखों में है जहां का ग़मउसकी किस्मत खुदा के जैसी हैकहने को तो दुनिया भी एक महफिल हैइसकी सूरत बाजार जैसी हैहरेक घर को इबादत की नजर से देखोघर की खुशबू कुरान जैसी है जबसे आया हूं होम करता रहा हूंजिन्दगी हवन कुंड के ...
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  May 2, 2011, 10:00 am
कभी तुमसे शिकायत की, कोई सूरत नहीं होतीकि मैं जब मैं नहीं होता, तो तुम तुम भी नहीं होतीतमाशा जिन्दगी में वक्त के साये में होता हैकि जब सुरज नहीं होता है, परछाईं नहीं होतीन वो तेरी कहानी है, न वो मेरी कहानी हैजिसे सब इश्क कहते हैं, वो किस्सा-ए-नादानी हैसुना है इश्क के किस्सो...
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  April 7, 2011, 1:22 pm
तेरे दीदार की हसरत, हमारे दिल में पलती है.हुई मुद्दत मेरी नज़रें, तुम्हारा राह तकती हैं.यही ख्वाहिश थी बस दिल में, मैं तेरे दर पे आ बैठा.और उसपे पूछना तेरा, बताओ क्यों यहां आए ? अनूठे यार हो तुम भी, गज़ब के प्यार हैं हम भी.भले मझधार हो तुम भी, सुनो पतवार हैं हम भी.सवालों से ...
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  April 2, 2011, 4:40 pm
ख्वाब पुराने मत देखा करधुंधली यादें मत देखा करऔर भी दर्द उभर आयेंगे दिल के छाले मत देखा करजीवन में पैबंद बहुत हैंमूँद ले आँखें मत देखा करअपने घर कि बात अलग हैऔरों के घर मत देखा कर कहने वाले बस कहते हैं दिन में सपने मत देखा करजीवन का जब जोग लिया हैचुभती साँसें मत दे...
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  February 14, 2011, 8:00 am
मैं तब किशोर था जब मैं एक कवि सम्मलेन में यूँ ही चला गयावहां कई कवियों को सुनना अच्छा लगा बहुत ही अच्छा पर दो पंक्तियों ने मुझे अन्दर तक झिंझोड़ कर रख दिया " ऐ चाँद!तुम क्यों नहीं उतर आते? मेरे बेटे की थाली में रोटी का टुकड़ा बनकर"शायद इसलिए कि मैंने पहली बार चाँद में मामा, स...
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  November 9, 2010, 8:27 am
इस कमरतोड महंगाई मेंजबसे रोटी का जुगाड दूभर हुआ हैकवियों ने चांद में रोटी देखना शुरू कर दियाऔर अब..... धुंधला सा चांद अपना पता बताने से डरने लगा है........
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  November 2, 2010, 8:05 pm
खूबसुरत सनम शुक्रिया आप नज़रें चुरा लीजिये  मेरी आंखें तो बस में नहीं आप काजल लगा लीजियेजिंदगी घिस न जाये कहीं हाथ आगे बढा दीजिये बात शेरों से बनती नहीं मेरे लब पे रहा कीजिये भीड़ ज्यादा है बाज़ार में 'गिरि' के दिल में रहा कीजिये ...
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  October 24, 2010, 9:07 pm
आजजबकि ये तय है कि हमें बिछड़ जाना है हमारे और तुम्हारे रास्ते अलग अलग हो चुके हैं तो ये सोचना जरूरी है कि हम गलत थे या तुम? मैं सोचता हूँऔर सोचता चला जाता हूँ...कहीं मैं तो गलत नहीं था शायद!क्योंकि तुम तो गलत हो नहीं सकते मुझे लगता है मैं ही गलत थामैं ये भी जानता हूँ कि तुम भ...
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  October 13, 2010, 5:24 pm
ज़ख्म दिल पर क़ुबूल करते हैं अपनी रातें बबूल करते हैं लब पे अब लर्ज़िश ए हसरत न रही हम तेरे हैं गुरुर करते हैं चाहतों में भले असर कम होचाहनेवाले कमाल करते हैं जिंदगी से नहीं निभी उनकीज़ख्म को जो जुनून करते हैं रोशनी के लिये कभी सूरज राह तारों की नहीं तकते हैंउनका हर लब्ज़ संभ...
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  September 16, 2010, 10:41 pm
लगता है मैं मंजिल तक आ पहुंचा हूँपर मंजिल से परिचय करना बाकी है.जीवन की हर गुत्थी को सुलझा लूं पर रिश्तों में एक बार उलझना बाकी है. तर्क-ए-ताल्लुक करना है तो तू कर ले मेरा आखिरी वादा अब भी बाकी है. काम वफ़ा के हमने तो हर बार किये नाम के साथ वफ़ा का जुड़ना बाकी है. सोच रहा ह...
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  August 13, 2010, 5:43 pm
मुझे ऐसे दर से बचाना सनमजहाँ तुम हो और कोई दुआ भी न हो.बहुत थक गया हूँ तेरे प्यार में मोहब्बत का एक आशियाना तो हो.कोई शख्स ऐसा न ढूंढे मिला दिल लगाया हो जिसने और हारा न हो.खुदा ऐसा दिन क्या कभी आयेगा?बेवफ़ाई का जिस दिन बहाना न हो.शोखियों में तेरी घोल दी ये गज़लभले 'गिरि'न हों ...
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  August 11, 2010, 10:50 pm
दे दे खुदा के नाम पे प्यारे ताक़त हो गर देने की.चाह अगर तो मांग ले मुझसे हिम्मत हो गर लेने की.इस दुनिया की रौनक से अब इस दिल का क्या काम रहा. जब नज़रों में अक्स उभरता साकी के अल्हड़पन की.  नज़रों में साकी की सूरत साथी जबसे दिखती है. मदिरा की क्या बात करुं और क्यों चर्चा मयखानो...
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  August 5, 2010, 7:55 pm
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