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क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... : View Blog Posts
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क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता...

वो एक कहानी का किरदार हैकहानी में रहता है,कहानी को ही जीता है,पर कहानी के बारे में उसे कुछ नहीं पता,अरे नहीं,आप उसे कठपुतली ना समझें,उसे कोई नहीं चला रहा,ऐसा होता तो सब आसान होता,फिर तो वो छोड़ देता सबसूत्रधार के हाथपर उसे खुद तय करना हैकि उसे क्या करना है,पर, कहानी का रुख वो ...
क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता......
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  January 7, 2016, 11:37 am
एक साल तुम्हारा,एक पल हमारा,कुछ बातें तुम्हारी,एक गीत हमारा,आँखों की चमक तुम्हारी,आँखों में सपना हमारा,सपनो में रंग भरता,आँखों का एक ईशारा,चाहत की ईंटे लेकर,प्यार का रंग मिलकर,एहसासों की ज़मीं पर,है ये संसार हमारा,ये घोंसला हम दोनों का,छोटी सी एक इसमें चिड़िया,इसकी भोली च...
क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता......
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  February 10, 2015, 9:41 am
बचपन से चंडीगढ़ में रहा,साफ़-सुथरा, खुला-खुला,खुशहाल, शांति-प्रिय,दो राज्यों की राजधानी,दो राहों का एक मोड़,दो सरकारें,दो सरकारों का एक कार्यालय, एक सचिवालय,भला कोई पूछेकि दोनों को अलग अलग शहर नहीं मिले क्याराजधानी बनाने के लिए,दोनों इसे अपना बताते हैं,पंजाब अपना हक़ जताता ...
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  April 23, 2014, 2:37 pm
लोग कहते हैं कि तन्हाई बुरी चीज़ है,पर वो तन्हाई को जानते नहीं,इसलिए ऐसा कहते हैं,तन्हाई तो आईना दिखाती है,जिसमे हम अपन अंदर तक झाँक लेते हैं,तन्हाई तो एक दोस्त है,हमारे दिल की बात को हमे सुनाती है,विअसे तो बहुत शोर होता है हमारे आस पास,तन्हाई माँ की तरह हमारा ध्यान भी रखती ...
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  December 6, 2013, 3:02 pm
दिल में एक ख्वाहिश है,कुछ कहने की,कुछ सुनने की,नज़रों से इशारे करने की,इशारों में कुछ समझाने की,फिर शरारत से मुस्कुराने की,दिल में एक ख्वाहिश है,चाहता हूँ कि कुछ बात करूँ,दिन को यूँ ही रात करूँ,इशारों में या लफ़्ज़ों मेंज़ाहिर अपने जज़्बात करूँ,ज़ुबान लड़खड़ाने लगती है,लफ्ज़ जैस...
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  December 4, 2013, 3:54 pm
जीवन का पहला सब कुछ प्यारा होता है नापहली बार आखें खोलनापहला शब्द माँ,पहला जन्मदिन,स्कूल का पहला दिन,वो पहली साइकिल,स्कूल में पहली बार फर्स्ट आना,वो कॉलेज का पहला दिनपहली बार नज़रों का मिलनावो पहला प्यार,पहली बार बहुत कुछ कहने का दिल करनावो पहली बार कुछ ना कह पाना,पहली ब...
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  October 3, 2013, 11:36 am
एक गिलहरी एक छोटी सी गिलहरी,सामने के पार्क में रहती,मेरी पड़ोसी गिलहरी,घर का दरवाज़ा खुला देखमेरे घर आई मेरी मेहमान गिलहरी,मुझसे मिले बिना घर में कुछ ढूंढती इधर उधर भागती वो परेशान गिलहरी,कमरे में खोजा, मंदिर में खोजा,पर हुई वहाँ वो निराश गिलहरी,रसोई में गयी, कि शायद उसे ...
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  September 30, 2013, 4:10 pm
ਇੱਕ ਤੂੰ ਹੋਵੇਂ, ਇੱਕ ਮੈਂ ਹੋਵਾਂ,ਤੇ ਹੋਵੇ ਤਾਰੇਯਾਂ ਦੀ ਛਾਂ ਸੱਜਣਾ,ਤੂ ਬੈਠੀ ਹੋਵੇਂ ਮੇਰੇ ਵਿੱਚ ਰੁਝੀ,ਮੇਰੀ ਬਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇ ਤੇਰੀ ਬਾਂ ਸੱਜਣਾ,ਚੁਮਂ ਲਵਾਂ ਤੇਰੇ ਮੱਥੇ ਨੂੰ,ਤੇਰੀ ਅਖ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਬੁੱਲਾਂ ਨਾਲ ਕੱਜ ਦੇਵਾਂ,ਤੇਰੀ ਮੁਸਕਾਨ ਦੇ ਬਦਲੇ ਵਿੱਚ ਮੈਂ,ਕਰ ਦੇਵਾਂ ਖੁੱਦ ਨੂੰ ਕੁਰਬਾਨ ਸੱਜਣਾ,ਓਹ ਚੰਨ ਵੀ ਸਾੰਨੂ ਤੱਕਦਾ ਏ,ਤੈ...
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  June 4, 2013, 5:28 pm
मेरी हर डायरी, हर एक नोटपैडआगे से कोरे लगते हैं,बस नाम और मेरा मोबाइल नंबर,पर आखरी के पन्नों परकई शब्द मिलते हैं,सब जल्दी जल्दी में लिखे हुए,उन्ही के बीच लिखे कुछ नंबर और उनसे जुड़े लोगों के नाम,लगता है जैसे अन्जाने में  हर शब्द का  आंकलन हो गया हो,ज़ीरो पाकर कुछ शब्द नार...
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  April 23, 2013, 12:42 pm
आजकल लिखना कुछ कम हो गया है,क्यों?पता नहीं.शायद इसलिए कि समय नहीं मिलता,काम बहुत है,या शायद शब्द नहीं मिलते,वही पुराने शब्द लिख लिख करकलम भी जवाब दे चुकी है,या शायद भाव नहीं मिलते,शायद कुछ है ही नहीं कहने को,और ना ही कोई है सुनने को,शायद इसलिए नहीं लिखता,या शायद कुछ परेशान ...
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  March 27, 2013, 12:46 am
रात का शिकवा कि उसकी ख़ामोशी कहाँ गई,वो दिन पर इलज़ाम लगाती रही,कि वो उसके सितारे ले गया,और ले गया उसके चाँद की चांदनी,आपको उस चाँदनी की वो ठंडक मुबारक,हमे आप मुबारक,दिन का शिकवाकि रात उसकी किरने ले गईअपनी मुट्ठी में बंद करके,चेहरे की ये चमक आपको मुबारक,हमे आप मुबारक,हलवाई ...
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  March 27, 2013, 12:11 am
इक दिन लड़ पड़े सब रंग आपस में,कौन किस से बेहतर, कौन सबसे प्यारा है,कौन है जिसके सब दीवाने हैं,किस रंग में डूबा से जग सारा है,हरे रंग ने अपनी बात रखी,कहा कि मैं तो जीवन का प्रतीक हूँ,पेड़ों, पत्तों फलों सबज़ियों में हूँ मैं,चारो ओर की हरियाली और प्रभुता का मैं ही स्वरूप हूँ,नी...
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  March 26, 2013, 10:20 am
घर की सफाई मेंरद्दी के बीच,बचपन की एक ड्राइंग बुक मिली,उसे खोल कर देखा,उसमे पेड़ थे, फूल थे,मंदिर था, उड़ते पंछी थे,समंदर था, पहाड़ थे,पर हर पन्ने पर एक चीज़ ज़रूर थी,रोशनी बिखेरता, मुस्कुराता हुआ सूरज,कहीं कोने में, कहीं बीच में,कहीं पहाड़ों या बादलों के बीच,कहीं इन्द्रधनुष ओढ़े ह...
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  February 16, 2013, 2:35 pm
मेरी ज़िंदगी; दो पन्नों कीडायरी,एक ही पन्ने को मिटाता और कुछ नया लिखता हूँ,दुसरे पन्ने को मैं कभी नहीं भरता,दो पल की ज़िंदगी,एक ही पल को बार बार जिया मैंने,दुसरे पल का मैं एहसान नहीं रखता,रिश्तों से मुझे कुछ लगाव नहीं,बेवक्त मौत मरते हैं हर बार,अब तो मैं किताबें भी पूरी नहीं ...
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  February 3, 2013, 11:58 pm
 मेरी दो अंग्रेज़ी की कवितायेँ Inklinks नाम की पुस्तक में प्रकाशित हुई हैं.  डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम. गुलज़ार साहब, इरशाद कामिल, इब्राहीम अश्क, नीदा फाज़ली जैसे वटवृक्ष की कई महान हस्तियों के छाया तले मेरी दो कोपलें... मेरी कवितायेँ......
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  January 22, 2013, 2:12 pm
गुज़रते वक्त का ध्यान कौन रखता है,बस ये घड़ी,और मेरी ये डायरी,एक एक दिन गिनती है,और ३६५ दिन पूरे होते हीकह देती है कि मेरा समय पूरा हुआ,तुम्हारा भी होने को है,संभल जाओ,तुम अब मुझे बदलो,और स्वागत करो एक नयी डायरी का,साथ ही बदलो अपने शब्द,कुछ खुशी के रंग भरो इनमें,शब्दों का काम ह...
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  January 1, 2013, 1:56 pm
सर्दी और सफ़ेद रंग,क्या सम्बन्ध है आपस में इनका,एक दुसरे के पूरक,या एक दुसरे के प्रतीक,या फिर एक दुसरे के प्रेम में बंधे दो प्रेमी?चाँद की चांदनी,शीतल भी और सफ़ेद भी,बेरंग पानी भी जब जमा,तो हो गया सफ़ेद,आग बुझाने वाला लाल सिलेंडर भीउगलता है सफ़ेद झाग,जवानी का जोश भी जब ठंडा पड़ा...
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  December 26, 2012, 3:47 pm
बात बात पे उसे मेरा ख्याल आता क्यों था?अपने दिल की बात वो मुझे बताता क्यों था?उसका मुस्कुराना पसंद था मुझे,मेरे पास आकार वो आँसू बहाता क्यों था?बाँटना चाहता था मैं अपने दुःख सुख उसके साथ,फिर वो सिर्फ अपने गम मेरे पास लाता क्यों था?इम्तिहान लेना चाहता था या अपना समझता था,अ...
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  December 1, 2012, 5:20 pm
हर कोई कहता है कि मैं बेरंग हूँ,बेरंग इतना कि सफ़ेद भी नहीं,सफ़ेद रंग तो शांत होता है,शीतल होता है,मैं तो वो भी नहीं,वो कहते हैं कि मैं बेरंग हूं,पर मैं इन्ही रंगों का एक अंग हूँ,मेरे अंदर भी बहुत से रंग हैं,रंग बिरंगे सपने हैं,कई रंगीन शब्द मेरे अपने हैं,खुशी के रंग हैं, चेह्क...
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  November 22, 2012, 11:55 pm
तुम अपनी हर परेशानी मुझे दे दो,अपने ग़मों की निगेहबानी मुझे दे दो,तन्हाई तुम्हे सताए ये गलत लगता है,अपने दिल की वीरानी मुझे दे दो,सुना है अपने गम घोल के बहाती हो इनमे,आखों का ये जादुई पानी मुझे दे दो,जिसका मैं किरदार तो था मगर हिस्सा नहीं,आज अपनी वो अधूरी कहानी मुझे दे दो,मु...
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  November 19, 2012, 7:10 am
हर आने जाने वाले को हमसफ़र बताते रहे,दोस्ती को हम मोहोब्बत बताते रहे,घोड़ों की दौड में हम बस ख्याल ही दौडाते रहे,सब खा गए पकवान सारे, हम ख्याली पुलाव पकाते रहे,सब ले गए लूट कर जो भी आस पास था,हम बस हाँ-ना में सर हिलाते रहे,अपने अपने हमसफ़र के साथ चल दिए सब अपने सफ़र पर,हम बस आने जा...
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  November 5, 2012, 10:37 pm
जब भी मन अशांत होता है,तुम अपने घर की छत पे चले जाते हो,आसमान की तरफ देखते हो,चाँद तारों को,भगवान से भी बात कर लेते हो,बिना उसे देखे,पर कभी बादलों की व्यथा देखी है?सुबह हुई,चिडियाँ चहचहा उठी,सब चल दिए अपनी दिनचर्या पर,शाम हुई तो लौट आये,अपने अपने घरौंदों में,सबका अपना ठिकान...
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  October 21, 2012, 10:01 pm
सुबह का मंज़र,सब शांत,पर यह क्या,आसमां की कालिमा में,एक कोना लाल सा हो गया है,दूर कहीं आग लगी है शायद,रात को तो सब ठीक था,एक कहानी सुना करचाँद ने सब को सुलाया था,चिडियाँ भी उस कोने को छोड़शोर मचाती, सब को बतातीउड़ चली हैं,डर गयी हैं शायद,आग बढ़ रही है,सबकी शांत नींद टूट गयी,कई लोग ...
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  October 7, 2012, 11:10 pm
मिट्टी का चूल्हा,कुछ लकड़ियाँ,गोबर की पाथियाँ,ज़रा सा मिट्टी का तेल,और एक माचिस कि डिबिया,बस?नहीं! इतना भर नहीं है ये चूल्हा,इस पर सिर्फ खाना नहीं,सपने भी पकते हैं,आने वाले कल के,मीठी मीठी आँच पर, जिसके घर चूल्हा जला,उस दिन वही अमीर,सबसे पहले जलने वाले चूल्हे की इज्ज़त थी,उसक...
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  October 4, 2012, 11:11 pm
रामायण गीता, कुरान,सब हैं पास,इन सब की झूठी कसमें खाते हैं,जाने क्या चोर है मन में,इस सच से हम डर जाते हैं,दिल में नफरत,तो लबो पे मुस्कान,दिल में मोहोब्बत,तो आखों में इन्कार,अपने दिल की बात खुद से छुपाते हैं,इस सच से हम डर जाते हैं,आखों में सपना,पर टूटने का डर,जो नहीं अपना,उसे ...
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  September 26, 2012, 12:32 am
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