Hamarivani.com

उड़ान

एक बैल जंगल के रास्ते जा रहा था. उसके सींग बड़े-बड़े थे. वह मस्ती से हरी-हरी घास खाता हुआ जा रहा था कि अचानक एक पेड़ की अपेक्षाकृत नीची झुकी हुई शाखा में उसका सींग फँस गया. उसने जोर लगाया तो वह शाखा टूट गयी और वह फिर पहले जैसा मस्ती से चलने लगा. उसे अपने ताकत का अन्दाजा हो गया. एक...
उड़ान...
Tag :
  January 27, 2011, 7:49 pm
आजकल सीरियल के शीर्षक जिस ओर संकेत करते हैं उसके कथानक और समग्र प्रभाव बिलकुल अलग और आमतौर पर नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने वाले होते हैं. मैं खासतौर पर कलर्स पर प्रसारित हो रहे दो सीरियलों का उल्लेख करना चाहूँगी. प्रथम, 'न आना इस देश लाडो', जिसमें पूरे सीरियल में स्त्र...
उड़ान...
Tag :सीरियल्स
  November 22, 2010, 5:48 am
एक व्यक्ति की भक्ति से प्रसन्न होकर देवता प्रकट हुए और बोले दो दिन बाद तुम पूरे परिवार के साथ मिलना मैं तुम्हें वरदान देना चाहता हूँ. वह प्रसन्न हो गया और सपरिवार दो दिन बाद वरदान लेने के लिये उपस्थित हुआ. देवता ने 'नारी प्रथम' का अनुसरण करते हुए पहले उसकी पत्नी से कहा कि ...
उड़ान...
Tag :लघुकथा
  November 2, 2010, 4:59 pm
पूरा एक घंटा बीत गया था और नम्बर आ ही नहीं रहा था. अभी पाँच मरीज और बचे थे फिर मेरा नम्बर आने वाला था. मैं कुछ जगहों पर खुद को असहाय पाती हूँ : डाँक्टर के क्लीनिक में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना; प्लेटफार्म पर ट्रेन के आने का इंतजार और ..... तीसरा वाला क्यूँ बताऊँ ! अचानक एक आ...
उड़ान...
Tag :
  June 5, 2010, 6:58 am
अभिभूत हूँ मैं तुमने जो सन्देशमातृ दिवस पर मुझे दिया है. आज भी जब याद करती हूँ उन क्षणों को जब मैनें मातृत्व सुख अर्जित किया था तो रोमांचित हो जाती हूँ. और यह मातृत्व सुख तुमने ही तो प्रदान किया था - सर्वप्रथम. ऊँगली पकड़कर तुम्हें चलना सिखाने से लेकर अब तक, जबकि तुम बी. टेक. ...
उड़ान...
Tag :सन्देश
  May 9, 2010, 10:29 pm
मजदूर दिवस पर मेरी कविता पढें यहाँ क्लिककरके...
उड़ान...
Tag :
  May 1, 2010, 5:23 am
लोग चिल्ला रहे थे. वह भी चिल्ला रहा था. लोग गालियाँ सुना रहे थे. वह भी गालियाँ सुना रहा था.मैनें कहा : इंसान ऐसे होते हैं.लोग चिल्ला रहे थे. वह शांत था. लोग गालियाँ सुना रहे थे. वह मुस्करा रहा था..मैनें कहा : इंसान ऐसे भी होते हैंवह चिल्ला रहा था. लोग शांत थे. वह  गालियाँ सुना र...
उड़ान...
Tag :समाज
  April 24, 2010, 5:12 am
नीद से लड़ते हुए जब थकी-हारी फिर नीद आ जाती हैसपना देखना मेरा तुम्हें जाहिर होइसलिये बड़बड़ाती हूँ.रक्तपिपासु घूमते है निर्द्वन्ददेखकर डर जाती हूँ फिर जन्मने की ख्वाहिश में अक्सर मैं मर जाती हूँ...
उड़ान...
Tag :
  April 14, 2010, 5:52 am
कुछ कारणो से लम्बे समय से ब्लागजगत से दूर रही. आज एक रचना के साथ लौट रही हूँ.चलो धूप से बात करेंअब तो शुभ प्रभात करें.रिश्ता-रिश्ता स्पर्श करेंअब तो ना आघात करें.सुनियोजित करते ही हैंकुछ तो अकस्मात करें.तेरे-मेरे अपने है-सपनेफिर किसका रक्तपात करें .नेह का प्यासा अंतर्मन...
उड़ान...
Tag :
  April 5, 2010, 6:35 pm
मंजिल की ओरमहज़ एक कदमऔर यकीन मानिये मंजिलएक कदम और नजदीक हो गयादूसरे कदम नेऔर एक कदम नज़दीक कर दियातीसरा --चौथा ----और फिर अब तोमंजिल दूर नहीं है**********...
उड़ान...
Tag :कविता
  November 2, 2009, 4:45 pm
**कुछ रिश्ते उधार के होते हैंकुछ रिश्ते प्यार के होते हैंइतनी बेरूखी अच्छी नहीं हैकुछ रिश्ते इंतज़ार के होते हैंटूट जाते हैं पल में देखो तोकुछ रिश्ते तार के होते हैंनाज़ुक फूल, कब उफ किया!कुछ रिश्ते खा़र के होते हैंबिक गये पर इतनी हैरानी क्यूँकुछ रिश्ते व्यापार के होते ...
उड़ान...
Tag :
  August 4, 2009, 6:41 pm
जाने कितने सपने पालता है मनफिर सपनों को खंगालता है मननाज़ुक इतना कि टूटता रहता हैखुद ही को फिर संभालता है मनखुद ही के खिलाफ बयान देकरअपना भडा़स निकालता है मनकभी बच्चों सा मचल जाता हैकभी हर बात को टालता है मनआसमान छूने की आरज़ू इसकीगेंद सा खुद को उछालता है मन...
उड़ान...
Tag :
  July 13, 2009, 5:12 am
दिनभर काम कियाअब है थककर चूर-चूर और नहीं है कोईयह है एक मजदूरइसको इसकी मेहनत का प्रतिफल क्या मिलता है?दो वक्त की रोटी भीमुश्किल से इनको मिलता हैबच्चे इनके बिलख बिलख करखो देते हैं नूरऔर नहीं है कोईयह है एक मजदूरखुले आसमान के नीचे रहकरऔरों का छत ये बनाते हैंहिम्मत नहीं ...
उड़ान...
Tag :कविता
  July 4, 2009, 6:57 pm
मौसम ने अंगडाई लीबदल छाये हैं घनघोररंग-बिरंगे पंखो वालेनाच रहे हैं देखो मोर.सावन की रिमझिम बूंदेक्यों बैठे हो आंखे मूंदेहरियाली छाई हर ओरनाच रहे हैं देखो मोर.बढ़ गयी फूलों की लालीझूम रहे हैं डाली-डालीचुप हो जा मत कर शोरनाच रहे हैं देखो मोर--------------------चित्र साभार : google...
उड़ान...
Tag :
  June 21, 2009, 7:55 pm
यह ऊंचा मकानजब अपनी ऊँचाई आंकता हैबेशरमपड़ोस की झुग्गी-झोपड़ियों मेंझांकता है------------आईनापत्थरों के गाँव में,सूरज पेड़ की छॉव मेंमछली देखोडूबने के डर से बैठ गयी है नाव में ...
उड़ान...
Tag :
  June 12, 2009, 8:42 pm
सच्चाईकोकहनासीखोसच्चाईकोसहनासीखोबुलंदीकेअभिलाषीहैंतोकभीकभारढहनासीखोउजड़गएहैंघरतोक्याचौराहोंपररहनासीखोपत्थर-पत्थरछूकरगुज़रोपानी-पानीबहनासीखो...
उड़ान...
Tag :
  June 9, 2009, 6:12 am
मजदूर माँ के बच्चे का बचपन ऐसे ही पलता है ---- ! !...
उड़ान...
Tag :
  June 6, 2009, 6:57 pm
उजाड़कर बस्ती शोक मनाते हैंकत्ल करके फिर आंसू बहाते हैं.गुमशुदा तलाश में पढ़कर नामख़ुद ही को लोग ढूढ़ने जाते हैं.ख़ुद के चेहरों पर लगा कर दागआईनों पर देखिये कहर ढाते हैं.इस बस्ती से बेखौफ न गुज़रिये बात-बात पे लोग खंज़र उठाते हैं .मज़हबी शिकंजे में जकडे़ ये लोगफख्र से आ...
उड़ान...
Tag :
  June 5, 2009, 6:23 am
आओ!हम उस ज़मीन को सींचेजिसके अन्दरनन्हा बीज छटपटा रहा हैअंकुरित होने को.आओ!हम उस ज़मीन में खाद डालेजिसके अन्दर कोमल अंकुर लड़ रहा हैकठोर परतों सेपल्लवित होने कोहमें विश्वास हैहारना ही होगा उन परतों को;ज़र्ज़र होना ही हैउन दीवारों कोजिसके भीतर सृजन का एक भी बीज विद्य...
उड़ान...
Tag :
  June 2, 2009, 6:50 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3685) कुल पोस्ट (167833)