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Blog: मेरी डायरी

Blogger: shivraj gujar
छठी में एक कहानी पढ़ी थी। लालची कुत्ते की 'ग्रीडी डॉग'। पढ़ी अंग्रेजी में थी पर याद हिंदी में है। लालच के बहकावे में आकर कुत्ते ने अपनी परछाई से ही दूसरी रोटी पाने की कोशिश की। इस चक्कर में उसने अपने पास वाली रोटी भी गंवा दी थी। तब तब शायद लालच छोटा रहा होगा इसलिए कुत्ते क... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:43pm 22 May 2011 #
Blogger: shivraj gujar
जिंदगीसे अभी तुम्हारी जंग शुरू भी नहीं हुई थी। अभी तो तुम अपने मां-बाप के कंधों पर खेल रही थी। अच्छी पढ़ाई कर रही थी। आने वाले दिनों में तुम एक ऐसे सफर पर जाने वाली थी जहां तुम्हें लोगों की जिंदगी बचानी थी। तुम्हारे पेशे में तो लोगों को बहादुर बनाया जाता है, ताकि वे मरते ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   5:39pm 3 Feb 2011 #
Blogger: shivraj gujar
शिवराज गूजरएक आठ साल की बच्ची पलक के बस में जिंदा जल जाने की खबर ने अंदर तक हिला कर रख दिया। खबर यूं थी कि -बच्ची ने पिता द्वारा सिगरेट के पैकेट के साथ छोड़ी गई माचिस के साथ बाल-सुलभ छेडख़ानी की। तीली जली, मजा आया और वो खेलने लगी। खेल-खेल में कब कपड़ों में आग लगी पता नहीं चला।... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   8:30am 29 Jan 2011 #
Blogger: shivraj gujar
रेलवेफाटक बंद था। लोग अपने वाहन रोक कर खड़े थे, पर शायद उसे ज्यादा जल्दी थी। फाटक के बगल से उसने स्कूटी चढ़ा दी पटरी पर। अभी वह पटरी के बीचों-बीच थी कि ट्रेन आ गई। मौत उसकी आंखें के आगे नाचने लगी। इस वक्त जो उसने सबसे अच्छा काम किया वो यह था कि स्कूटी का मोह छोड़ पटरी के बाह... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   7:25pm 22 Jan 2011 #
Blogger: shivraj gujar
'कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा'भानुमति का यह टोटका काफी पुराना है पर आज भी अचूक है। लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे हैं। उसने इसका पेटेंट करवा लिया होता तो आज उसकी पीडियों के वारे न्यारे होते. खैर गलती हो गयी उसका क्या रोना. आज रीमिक्स का दौर है. भाइयों ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   1:46pm 16 Jan 2011 #
Blogger: shivraj gujar
हर रोजकाम पर जाते वक्तकरता है खुद सेएक वादाआज लौट आऊंगाघर जल्दीकुछ वक्त बिताऊंगाबच्चों के साथबीवी के साथकुछ दुख-कुछ सुखकी बातें करूंगामां-बाबूजी के साथपरपलटता है जबहो चुकी होती है रातसो चुके होते हैं बच्चेमां-बाबूजी के खर्राटे बता देते हैं गहरी नींद में हैंश्रीमत... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:30am 29 Aug 2010 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
अजी सुनते होघर में घुसा ही था कि श्रीमती जी बोलींमुन्ना चलने लग गया है.हाँ, फिर ?फिर क्या ?दाखिला नहीं कराना है स्कूल मेंमैं चौंका,यह नन्ही जानखुली नहीं अभी ढंग से जबानक्या पढेगा ?अजी अभी पढाना किसको है.यह तो रिहर्सल है, स्कूल जाने कीऔर फिर यहाँ यह रोता भी हैवहाँ मेडमें ह... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   8:00pm 5 Aug 2010 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
1हां ! भईअब क्यों आएगा तूंगांव।कौन है अब तेरा यहां। तेरी लुगाई और तेरे बच्चेले गया तू शहरयह झिड़की सुननी पड़ती हैहर उस बेटे कोजो आ गया है शहररोजी-रोटी कमाने।आया था जब वो शहरअकेला थासो भाग जाता था गांवसप्ताह-महीन में।अब यह नहीं हो पाताइतनी जल्दीक्योंकि-अब बढ़ गई है जिम... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   3:53pm 31 Jul 2010 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
मंदरो-मंदरो बरसे मेह मन हरसावे मिनखां रोजीव-जनावर राजी होग्यारूप निखरग्यो रूंखां रोकरषां का खिलग्या मुखड़ादेख मुळकता खेतां नेबैठ मेड़ पै गावे हाळीड़ाछोड़ माळ में बेलां नेहरख्यो-हरख्यो दीखे कांकड़ओढ्यां चादर हरियाळीढांढा छोड़ खेलरया ग्वाळ्याछोड़ आपणी फरवाळीशि... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   3:14pm 8 Jul 2010 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
आज मदर्स डे है। यानी मां का दिन। मां, जिसने हमारे अस्तित्व में आने की प्रक्रिया की पहली अवस्था से लेकर आज के दिन तक हर पल हमारे लिए और सिर्फ हमारे लिए जीवन जिया है। परिवार के लोगों की हर जरूरत का ध्यान रखने में भी उसकी नजर कहीं न कहीं से हमारी ही ओर निहारती रही। तीन बच्चों ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   3:22pm 9 May 2010 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
गंदे कपड़ेजूठे बरतनबूढ़ी सास के आगे पटकसहेली के साथ फिल्म देखने निकलीमिसेज शर्मापरदे परबहू के सास पर अत्याचार देखफूट-फूट कर रोईसहेली के कंधे पर सिर रखकरसिसकते हुए बोली-कुछ बहुएं भी ना!-शिवराज गूजर... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   4:32pm 16 Apr 2010 #
Blogger: shivraj gujar
बेटे की शादी के बाद उसमें बड़ा बदलाव आयादहेज के विरोध मेंउसने बड़ा आंदोलन चलायासोई हुई उसकी आत्माअचानक! जाग गई थीबेटी जो उसकी शादी के लायक हो गई थी।शिवराज गूजर... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   3:00pm 2 Apr 2010 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
दोपहर का वक्त था। रोज की तरह चिड़कली छोटी बहन पंखी के साथ मिलकर अपनी गुडिय़ा का ब्याह रचाने में मशगूल थी। पास ही बैठी नाथी देवी रस्सी बटने के साथ-साथ शादी के सभी आयोजनों में शरीक थीं। विदाई की बेला थी। दहेज का सामान रखा जा रहा था। अन्य सामानों के साथ जब चिड़कली ने केरोसिन ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   2:29pm 17 Jan 2010 #
Blogger: shivraj gujar
आज बहुत ठंड थी। धूप खाने छत पर चला आया। दोनों बेटे और बेटी पतंग उड़ाने में मस्त थे। मैं पहुंचा तो हल्की सी मुस्कराहट के साथ देखा और फिर से नजरें टिका दीं आसमान पर। अभी ठीक से बैठा भी नहीं था कि वो काटा के शोर ने बरबस ही ध्यान खींच लिया। किसी की पतंग कट गई थी शायद। हवा में लह... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   3:05pm 13 Jan 2010 #
Blogger: shivraj gujar
उसने कहामैं जा रही हूंहमेशा-हमेशा के लिएतुमसे दूरबस, जो बचे हैं पलवो गुजार लोहंसी-खुशीमेरे संगक्या-खोयाक्या-पायाइसका हिसाबलगा लेनाकलअभी तो हूं मैं तुम्हारेऔर तुम मेरे साथसुनो,जब मैं चली जाऊंगीतुम उदास मत होनारोना भी मतन घंटों बैठ करडूबते सूरज को निहारने मेंअपना व... Read more
clicks 200 View   Vote 0 Like   1:31pm 31 Dec 2009 #रचना संसार
Blogger: shivraj gujar
यह कैसी मस्ती है, जिसमें घरवालों की भावनाओं का, अपने शरीर को होने वाली क्षति का कोई स्थान नहीं है।मैं पुलिया के नीचे घुसने के लिए मोड़ पर मुड़ा ही था कि सामने से स्कूटी पर तेज गति से आ रही दो युवतियां मेरी बाइक से भिड़ते-भिड़ते बचीं। मेरा जी धक से रह गया। मेरी हड़बड़ाहट प... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:22pm 29 Dec 2009 #
Blogger: shivraj gujar
यह विचार हमें योगेन्द्र पिन्टू ने जयपुर से भेजे हैं ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:49pm 16 Dec 2009 #
Blogger: shivraj gujar
सोचता हूँ क्यों न तुम्हारा नामखुसबू रख दूं, ताकि तुम्हें पुकार सकूं बेहिचक कहीं भी, कभी भीसबके बीच में.मैं कहूँगा खुसबू आ रही है.सब कहेंगे हाँ, आ रही है.मेरा मतलब तुमसे होगा और उनका मतलब............... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   12:35pm 6 Nov 2009 #
Blogger: shivraj gujar
कई दिनों से कुछ नहीं लिख पाया इसलिए अपनी एक पुराणी लघुकथा पोस्ट कर रहा हूँ. कई साथी इसे पढ़ चुके होंगे, लेकिन यह उन्हें भी नया सा अनुभव देगी, क्योंकि यह रोज मर्रा की जिंदगी से जुडी हुयी है.गोद मैं बच्चा लिए व हाथ मैं झोला लटकाए एक ग्रामीण महिला बस मैं चडी, सीट खाली नही देख एक ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   2:06pm 17 May 2009 #
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