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Blog: अनुभूतियों का आकाश

Blogger: kushwansh
आज फिर नींद नही आईपता नहीं क्योऐसे तो नींद  हर रात मे  बड़ी मुश्किल से आती हैयहाँ से वहाँचहलकदमी करता मैंमुड़कर वापस बिस्तर को देखता हूँतो नेपथ्य से गूँजती हैअजीब सी  आवाज़शायद सो गई है वोअभी तो खाना खाया था साथ मेइतनी जल्दीकैसे सो जाती है वोक्या कुछ भी नहीं चलता उसक... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   12:40pm 14 Jun 2016 #
Blogger: kushwansh
मेरे जेहन से एक पत्थर उछलामैंने सोचा उसके हृदय मे लगा उसने मुझे देखा ही नहींमैंने सोचा शायद मेरा भ्रम है पत्थर शायद उछला ही नहींमैंने रास्ते से कटीली झाड़ियाँ बटोरींऔर उसके निकास पर बिछा दीवो उनपर पैर रखकर चला गयामैंने देखा कुछ दूर जाकर उसने पैर के काटें निकालेऔ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   7:06am 7 Jun 2016 #
Blogger: kushwansh
तुमने मेरे लिए क्या कियाये ज्वलंत सवाल गाहे बगाहे जीवन  को छलनी करता रहाऔर मैं आगे और आगे बढ़ता रहा मैंने सोचा वाकई गहरा है ये पूछना तुमने क्या किया एक शून्य हो जाता है मेरे चारो तरफऔर मैं उन शून्य हुयेगुब्बारे में घुसा , उल्टा होता रहता हू बलून मे कोई द्वार नहीं होता ... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   8:21am 3 Jun 2016 #
Blogger: kushwansh
रात के ग्यारह बजे थेतेज रफ्तार गाड़ी घर को भागी जा रही थीफर्राट , कोई रोक टॉक नहीं न ही लाल लाल चेहरे किए,इस पर, उस पर ताना कसते, चेहरेन ही आगे निकालने की होडन ही पीछे आते गाड़ी के हार्न का शोरसब कुछ एकदम शांत अचानक आगे मोड पर एक अस्सी साल केराम नामी दुपट्टा ओढ़े साधूगा... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   6:20am 2 Jun 2016 #
Blogger: kushwansh
उम्र के दिलकश नज़ारे साथ थेजीने के अद्भुत सहारेसाथ थे बोलता था हृदय अबोला जो रहा एहसास के स्नेहिल किनारे साथ थे रफ्ता रफ्ता उम्र निकलती ही रही छिप के बैठे प्यार सारेसाथ थे चाँद का सौन्दर्य चाँदनी की कलागुलाब के फूलों कामहका जलजला सुगंध योंवन के सिता... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   7:21am 31 May 2016 #
Blogger: kushwansh
जी लिए बहुतऔर जी कर भी करेंगे क्यापी लिए आंशू बहुतकुछ और पीकर भी करेंगे क्याबचपनबिना कुछ सोचता फिरता रहायौवनगुलाबी ,साँझ सी बुनता रहाबुन लिएज़िंदगी के  तारकाँटों के करीबतने रहकर भी चुभेझुककर चले तोचिर गई पीठसामने देखा तो मंजरऔर भी वीभत्स थाज़िंदगी से हार मानेबैठा ह... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   10:25am 10 May 2016 #
Blogger: kushwansh
शाम जब झुरमुट से निकाल करमेरे आगोश मे फैलने लगी मुझे आभाष हुआ रात होने लगी चौपाल पर बाबा अभी भी बैठे है  पता नहीं क्योंये तो उनका खाने का समय हैन वो चीखे न चिल्लाये सूरज डूब रहा है खाना कहाँ हैसूरज ढल जाने के बाद वो नहीं खातेचाहे भूंखे ही सो जाये नियम नहीं टूटतानियम तो उ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   8:47am 3 May 2016 #गाव
Blogger: kushwansh
बांस की खपच्चियाँदेखीं हैं तुमनेहसिए से चीर करकई टुकड़ों मे विभक्त किया जाता है जिन्हेंऔर वो कभी उफ भी नहीं करतींचिर  करमानव के काम आने वाली वस्तु बन जातीं हैऔर अपने वजूद को कभी याद नहीं रखतींइस आकार से पहलेक्या था उसका अस्तित्वशायद ही याद रह पाता हो उन्हेंझुंड मे ल... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   6:46am 27 Apr 2016 #पत्नी
Blogger: kushwansh
कल रात मेरे शहर कीहवा बदल गईसूरज चढ़ आया थामगर दिन नहीं हुआअंधेरा ही बना रहाआसमान पर टिमटिमाते रहे तारेअठखेलिया करता रहा चाँददिन चर्या ही शुरू नहीं हुयीसारी गालियां रहीं सूनीबस घड़िया नहीं रुकींसरपट भागता रहा समयपेड़ों पर सोये रहे पक्षीगौरैया तो पहले ही गायब  थीअब क... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   9:45am 25 Apr 2016 #
Blogger: kushwansh
अनुभूतियों का आकाश: एक अदद चेहराकापीराइट सुरक्षित महेश कुशवंश... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   11:30am 20 Apr 2016 #
Blogger: kushwansh
कभी सोचता हूँतो याद आता है मुझेअपना अक्श,गड्ड मड्ड,आकार रहित,बिना आँख कान नाक ,एकदम सपाट चेहराशायद अनगढ़,संवेदना व्यक्त करती आंखे,शायद बनी ही नहींमाथे पर आडी तिरछी लकीरेंजो बस आंतरिक सुनामी कोआयाम देतीं,कोई देखे तो  दूर से ही समझ लेकटीली झड़ियोंऔर अनेकों झंझावातों से... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:14am 20 Apr 2016 #चेहरा
Blogger: kushwansh
मैं भूंखा हू अए  रोटी तुम कहाँ हो  ?कब से नहीं देखा तुम्हें साबूत बस टुकड़ों मे ही दिखाई देती होबहन भाइयों मेँ बटी हुयी कभी धूल मे सनी कभी पानी मे गीली गीलीमाँ भी कैसी है  चूल्हा तो जलाती हैमगर रोटी नहीं बनाती बस इधर उधर कूडे  से बीन लाती हैहाँ शहनाई और ब... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:16am 16 Apr 2016 #
Blogger: kushwansh
दोपहर थीलगभग तीन बजा थामोबाइल बजाप्रतापगढ़ वाले मामा जी थेएक गंभीर हादसे की सूचना दे रहे थेतेईश साल का अमर मैसूर के पास पिकनिक मनाते हुयेनदी मे बह गयापिता के पास एक लड़की का फोन आयाअमर  के ही  फोन से"अमर  इस नो मोर"ये क्या हुआ ? किसी को समझ मे नहीं आयाबड़ा भाई आनन फानन बं... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   8:56am 16 Apr 2016 #
Blogger: kushwansh
आओ माँ इन गलियों मेंभक्तों का उद्धार करो भटक गए जो पथ से बंदे उनका बेड़ा पार करोअन्तर्मन मे चलता है कुछ बाहर मन करता कुछ और चंचल मन उड़ता फिरता है असंतोष का भीषण दौररिस्ते-नाते गौण हुये सबशोहरत , पैसा हुआ प्रबल जी लों जितना जी पाओ तुम  कब,  किसने देखा है कलसमव... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   7:34am 8 Apr 2016 #
Blogger: kushwansh
धीरे धीरे वो कुछ इतने करीब  आए कानों मे जैसे कोई लय गुनगुनाए फासले मिटने लगे कलियों के  खिलने की तरहधुप्प अंधेरी रात जैसे दूधिया रोशनी मे नहायेसोचता हू तुझको तो धड़कनें गिन लेता हूँ बिखरे हुये बाल जैसे सुबह की शबनम मे नहाये घुली जाती है महक यहाँ वह... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   5:37am 31 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
त्योहार की तैयारी मेकौन कितना आगे गयाकिसने किस पर कितना रंगा बिखेराकिसी को याद नही रहामेज पर सजे रहेतरह तरह के पकवानकई दिनों बासी होते रहेउनमे से एक तिहाई भी खर्च नहीं हुयेनहीं खाये गएजो खाये गए उनमेगिनती घर वालों की भी थी दरवाजे पर घंटी बजीकोई आयामाली थामालकिन त्यो... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   11:22am 28 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
होली मेंकुछ गाल बजाओरंग जमाओखिड़की से घुस, चुपके चुपकेरंगों की बौछार गिराओरंग जमाओभाभी से मत मौका चूकोसाली के  लवकानों फूँकोवेलेंटाइन से पेच लड़ाओरंग जमाओदोस्तों के संगढ़ोल नगाड़ेभंग चढा, मिरदंग बाजा रेराधा बन के,   नाचो प्यारेसारे आम महिला बन जाओरंग जमाओफागुन में, ... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   11:11am 22 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
छत सेगलियारे सेछत की मुडेर सेन जाने कब सेजो चिड़ियाँ चहचहाती हैउनमे से कोई भी विदेशी  नहींनिहायत देसी गौरैया है येइसकी घण्टियों सी आवाज़हृदय को झंकृत करती हुयीनस नस मे उतरजाती हैकल कल करते झरनेझरने मे अठखेलियाँ करतेजल क्रीडा करते पंक्षीआग उगलते सूरज की गर्मी  मेत... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   12:16pm 21 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
....कल रात मे नींद नही आई बहुत देर तक करवटें बदलने के बाद कब झपक गया पता नहींजब आँख खुली तो फगुनायी चेतना मे सराबोर था आँखें बंद थी या यू कहूँखोलने का मन ही नही था एक बहुत बोल्ड लिखने वाली ब्लॉगर ने न जाने कहाँ कहाँ गुलाल बिखेर  दिया था और मैं हो गया था गुलाबीए... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   9:37am 16 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
....कल रात मे नींद नही आई बहुत देर तक करवटें बदलने के बाद कब झपक गया पता नहींजब आँख खुली तो फगुनायी चेतना मे सराबोर था आँखें बंद थी या यू कहूँखोलने का मन ही नही था एक बहुत बोल्ड लिखने वाली ब्लॉगर ने न जाने कहाँ कहाँ गुलाल बिखेर  दिया था और मैं हो गया था गुलाबीए... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   9:37am 16 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
हम आज़ाद हैंदेश भी आज़ाद हैदेश की हवा, पानी सब आज़ाद हैंकौन सी हवा कहाँ रोकनी हैकिसको कौन सी हवा मिलनी चाहिएकिसको कौन सा पानी मिलना चाहिएसब कुछ तय नहीं हो सकताऔर न ही तय हो सकता है भविस्यवर्तमान को घायल करहवाओं मे तैरते प्रश्नों के उत्तर नही हो सकतेऔर हर प्रश्न के उत्तर भी... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   6:02am 10 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
सुबह ,बड़े तड़के उठकरएक गोली खाली पेट खाकर भागतीस्नान ध्यान , पूजा-पाठ, नास्ता बनाने की हड़बड़ीऔर फिर खाने की तैयारीछोटे बच्चों की परवरिश से निब्रत  होकर भीदिनचर्या  नहीं बदल पायी उसकीपति को आफिस भेजकरअम्मा नासता कर लो की हुंकार लगा करदो रूखी रोटिया , सूखी सब्जी सेअखबा... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:16am 8 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
कहते हैं सबये राजनीति वोटों तक ही नही सीमित होनी चाहिएउससे आगे भी जानी चाहिएतुम्हारी जाति क्या हैक्या है तुम्हारा मजहबअगड़े हो क्याया मनुवादी , या फिरपिछड़ाउससे भी पिछड़ामहा पिछड़ादलितउससे भी दलितमहा दलितऔर इन सबका कुछ न कुछ आरक्षणशब्द बदलते गएआदमी वहीं का वहींराजनी... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   5:29am 1 Mar 2016 #
Blogger: kushwansh
कल जब मैं आखिरी बारतुम्हारे घर से निकलान जाने क्यों मुझे  सब कुछअपना सा लगाशब्दों की तलवार ने काट रखे थे  मेरेदोनों बाजूऔर मैं खोजता रह गया कलमलिखने को प्यार की नई परिभाषाजिस  परिभाषा मे होतुम्हारा जिस्मऔर मेरे अरमानों का खूनलिव-इन-रीलेशन निभाते रहने की कलाऔर क... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   8:35am 23 Feb 2016 #
Blogger: kushwansh
जननी ,जन्मभूमिस्वर्ग से भी बड़ी हैका पाठ  पढ़ते पढ़तेन जाने कब बड़े हो गए हम इतने बड़े की याद ही नही रहे , मातृभूमि और स्वतन्त्रता के मायनेअभिव्यक्ति की आजादी और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के अर्थ बदल गई देशद्रोह की परिभाषा हम भूल गये , माँ के आँचल की परवरिश लावण्य औ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   6:30am 16 Feb 2016 #
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