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Blog: अनुरक्ति

Blogger: lalit mohan trivedi
आईनायूँ   मुझे , बरगलातारहा !दाहिनेको वोबाँयादिखातारहा !!दुश्मनीकीअदादेखियेतोसही !करकेएहसान, हरदमजतातारहा !!तारखींचाऔ ' फिरछोड़कर,चलदिया !मैंबरसदरबरसझनझनातारहा !!उसनेकोईशिकायतकभीभीनकी !इसतरहसेमुझेवोसतातारहा !!मुझकोमालूमथाएकपत्थरहैवो !आदतनपरमैंसरकोझुकाता... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:24pm 21 Mar 2012 #
Blogger: lalit mohan trivedi
---- गीत ----थमनातुमकोस्वीकारनथा , रफ़्तारनरासमुझेआई !तुमनेचाहाविस्तारऔर , मैंनेचाहीथीगहराई!!उड़नेकीचाह नथीमुझको , तुमरहेडूबनेसेडरते!धरतीही अपनेबीचनथी , बतलाओपाँवकहाँधरते !पानीपरलिक्खेसमझौतोंकी, उम्रभलाकितनीहोती ,कैसेनिभपातीसाथसाथ , मेरीजिदतेरीनिठुरा... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:08pm 15 Jan 2011 #
Blogger: lalit mohan trivedi
दियालेकर, भरीबरसातमें, उसपारजानाहै !उधरपानी, इधरहैआग, दौनोंसेनिभानाहै !!करोकुछबातगीलीसी , ग़ज़लछेड़ोपढोकविता !किसीकोयादकरनेका , बहुतअच्छाबहानाहै !!मेराआईनाभीमेरी, बहुततारीफकरताहै !मुझेलगताहैसोनेसे, इसेभीमुंहमढानाहै !!मुहब्बतकीडगरसीधी , मगरदस्तूरउलटेहै !अगरचाह... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   1:33pm 19 Sep 2010 #
Blogger: lalit mohan trivedi
मैंनेहीक्याकियाकिसीकीलटउलझीसुलझानेको !क्योंकोईजुल्फेंबिखराता , मेरीधूपबचानेको !!बांधबनाकरयेजलधाराजिसनेसाधीनहींकभी !दौनोंहाथजोड़करजिसने , अँजुरीबाँधीनहींकभी !कोईनदियारुकीनहींहै , उसकीप्यासबुझानेको !!क्योंकोईजुल्फेंबिखरातामेरीधूपबचानेको !!जोलगतेथेनम... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:22pm 1 Jun 2010 #
Blogger: lalit mohan trivedi
टूट पायेंगे नहीं पत्थर, ज़रा सी चोट से !ये उड़ाने ही पड़ेंगे, भूमिगत विस्फोट से !!जो ' विचारों ' का मसीहा था 'बिचारा ' हो गया है !जिसको होना था भँवर ,वो ही किनारा हो गया है !हम धरा को कोसते हैं, अंकुरण देती नहीं ,क्यों नहीं कहते कि ये बादल नकारा हो गया है !यदि ज़मीं को खोदकर पानी निका... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   2:04pm 14 Oct 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
ग़ज़ल -----------है बिलाशक ये दरिया ,चमन के लिए !चन्द बूँदें तो रखलो तपन के लिए !!बदमिज़ाजी न बादल की सह पाऊंगा !मुझको मंज़ूर है प्यास मन के लिए !!वो तगाफुल नहीं मुझसे कर पाएंगे !चाहिए आहुती भी हवन के लिए !!याद रखता है इतिहास केवल उन्हैं !जो कफन ओढ़ पाते हैं फ़न के लिए !!हम भरे... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   11:53am 12 Sep 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
ग़ज़ल ..........( भूली बिसरी .....)ढोतेढोतेउजलेचेहरे, हमनेकाटीबहुतउमर !अबतोएकगुनाहकरेंगे ,पछतालेंगेजीवनभर !!वोरेशमसेपश्मोंवाला, थातोसचमुचजादूगर !मोरपंखसेकाटलेगया , वोमेरेलोहेकेपर !!उसकोअगरदेखनाहो तो , आंखोंसेकुछदूररखो !कुछभीनहींदिखाईदेगा , आंखोंमेंपड़गयाअगर !!प्यासतुम... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   6:20pm 15 Jul 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
ग़ज़ल ..........................वहींतकपाँवहैंमेरे ,जहाँतकहैदरीमेरी !इसीमेंसबसमेटाहै ,यहीजादूगरीमेरी !!हमेंनिस्बतगुलाबोंसे , वोहैगुलकंदकाहामी !बचेगीपाँखुरीकैसे ,किताबोंमेंधरीमेरी ?खरीतोसुननहींसकते ,किताबोंसेदबेचहरे !यहाँपरकामआजाएगी ,शायदमसखरीमेरी !!निशानाजोतेराब... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   3:06pm 14 Jun 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
थोड़ी फुर्सत हो तो ही पढियेगा ,आग्रह है मेरा !इस आपाधापी और प्रतिस्पर्धा के युग में" हम जीवन कैसे जीते हैं और कैसे जीना चाहिए "के बीच सेतु तलाशती एक रचना !गीतखूबपताथावोसागरहैखारापानीहै !फिरभीप्यासबुझानेपहुंचेयेहैरानीहै !!बहुतदूरतकसन्नाटोंनेराहनहींछोड़ीलेकिनहमनेम... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   4:57pm 9 May 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
तुम्हारी रसवंती चितवन !और मदिर हो गई चाँदनी घूंघट से छन छन !!झरे मकरंद ,छंद, सिंगार ,अलस ,मद,मान और मनुहारहो गया चकाचौंध दरपन !तुम्हारी .................चुभी तो नयन नीर भर गईझुकी तो पीर पीर कर गईउठी तो तार तार था मनतुम्हारी ................सजीली ज्यों काशी की भोरहठीली हुई बनी चित्तौरऔर गीली त... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   1:59pm 1 Apr 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
( रसिया )कैसौ आयौ नवल बसंत सखी री मोरे आंगन में !पोर पोर में आस , प्यास भर गयौ उसाँसन में !!धरा नें ऐसौ करौ सिंगार !चुनर सतरंगी ,पचलड़ हार !रसीलेनैनन में कचनार !अंग अंग अभिसार झरै, ठसकौरी दुलहन में ....कैसौ आयौ ..............उडे गालन पै लाल अबीर !हो गई पायलिया मंजीर !छनकती फिरै जमुन के तीर !... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:26pm 2 Feb 2009 #
Blogger: lalit mohan trivedi
नींदआती नहीं है ,ये क्या हो गया ?रातजाती नहीं है, ये क्या होगया ??प्रेमहो या कि हो हादसा आँख अब !छलछलातीनहीं है ,ये क्या हो गया !अबकिसी भी चरण पर कोई आस्था !सरझुकाती नहीं है, ये क्या हो गया !!वैसेकहने को तो रातरानी है ये ! गमगमातीनहीं है, ये क्या हो गया !!हमने पायल गढ़ाई ग़ज़ल बेचक... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:03pm 22 Dec 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
यह गीत उस उम्र का है जब किसी की राई जैसी उपेक्षा भी पर्वत से बड़ी महसूस होती है !विदा के क्षणों में आँखों का न डबडबाना भी फांस बनकर आंसने लगता है ! कच्चेपन का पक्का गीत ....... यदितेरे नत नयनों में भर आता नीर नमन का !तोइतना एहसास न होता एकाकी जीवन का !!अचक अचानक टूट गए क्यों अमर ने... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   1:57pm 16 Dec 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
नदी की धार चट्टानों पै जब आकर झरी होगी !तभी से आदमी ने बाँध की साजिश रची होगी !!तुझे देवी बनाया और पत्थर कर दिया तुझको !तरेगी भी अहिल्या तो चरण रज राम की होगी !!मरुस्थल में तुम्हारा हाल तो उस बूँद जैसा है !जिसे गुल पी गए होंगे जो काँटों से बची होगी !!कहीं पर निर्वसन है और निर... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   4:04pm 20 Oct 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
पावों में जंजीर, दौड़ की इच्छा मन भर दी !तूने भी ज्यादती बनाने वाले , मुझसे की !!जीवन में सब थोड़ा थोड़ाये संस्कार उमर भर ओढारस की बूँदें तो छलकायींलेकिन कसकर नहीं निचोडा मीरा की झांझर जैसा मन , व्यापारी सा जीवन !ऊपर से ढाई आखर की भाषा मन भर दी !!तूने भी ज्यादती ......................मौसम स... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   3:11pm 29 Sep 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
हम सभी कोई न कोई लबादा ओढे हुए हैं और धीरे धीरे यही लबादा हमें सत्य लगने लगता है ! हमारी वासनाएं छूटती नहीं हैं सिर्फ़ वेश बदल लेती हैं ,एक नया लबादा ओढ़ लेती हैं और इसी को हमारे अन्दर बैठा हुआ जोगी परम सत्य मानकर आत्म मुग्ध होता रहता है !इसी आत्म मुग्धता को तोड़ती एक रचना ..... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   4:03pm 20 Sep 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
आँख से अश्क भले ही न गिराया जाये !परमेरे गम को हँसी में न उड़ाया जाये !!तू समंदर है मगर मैं तो नहीं हूँ दरिया !किस तरह फ़िर तेरी देहलीज़ पै आया जाये !!दो कदम आप चलें तो मैं चलूँ चार कदम !मिल तो सकते हैं अगर ऐसे निभाया जाये !!मुझे पसंद है खिलता हुआ ,टहनी पै गुलाब !उसकी जिद है कि वो ,... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:41pm 4 Sep 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
लेखन से भी एक बड़ा गुण है ' लफ्फाजी ' किसी तरह की बाजी न होते हुए भी इसके अंत में 'जी 'लगा हुआ है जो इसके सम्माननीय होने का प्रमाण है !जो शब्द ख़ुद ही सम्माननीय हो तो उसे धारण करने वाला तो परम सम्माननीय स्वतःही हो जाता है !जैसे 'महागप्प' को साहित्य में' परिकल्पना 'कहते है,उसी प्... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   3:12pm 11 Aug 2008 #
Blogger: lalit mohan trivedi
छू गई साँसइक पाँखुरी , प्राण मन गमगमाने लगे !नैन में जबसे तुम आ बसे , स्वप्न भी झिलमिलाने लगे !!जब से काजल डिठौना हुआ , हो गया जो भी होना हुआ !झम झमाझम हुई देहरी , छम छमाछम बिछौना हुआबिन पखावज बिना पैंजनी , पाँव ख़ुद छन छनाने लगे !!नैन में जबसे ...............रस छलकते क्षणों का पिया , बूँद ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   12:56pm 7 Aug 2008 #
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