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अनुरक्ति

आईनायूँ   मुझे , बरगलातारहा !दाहिनेको वोबाँयादिखातारहा !!दुश्मनीकीअदादेखियेतोसही !करकेएहसान, हरदमजतातारहा !!तारखींचाऔ ' फिरछोड़कर,चलदिया !मैंबरसदरबरसझनझनातारहा !!उसनेकोईशिकायतकभीभीनकी !इसतरहसेमुझेवोसतातारहा !!मुझकोमालूमथाएकपत्थरहैवो !आदतनपरमैंसरकोझुकाता...
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  March 21, 2012, 9:54 pm
---- गीत ----थमनातुमकोस्वीकारनथा , रफ़्तारनरासमुझेआई !तुमनेचाहाविस्तारऔर , मैंनेचाहीथीगहराई!!उड़नेकीचाह नथीमुझको , तुमरहेडूबनेसेडरते!धरतीही अपनेबीचनथी , बतलाओपाँवकहाँधरते !पानीपरलिक्खेसमझौतोंकी, उम्रभलाकितनीहोती ,कैसेनिभपातीसाथसाथ , मेरीजिदतेरीनिठुरा...
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  January 15, 2011, 9:38 pm
दियालेकर, भरीबरसातमें, उसपारजानाहै !उधरपानी, इधरहैआग, दौनोंसेनिभानाहै !!करोकुछबातगीलीसी , ग़ज़लछेड़ोपढोकविता !किसीकोयादकरनेका , बहुतअच्छाबहानाहै !!मेराआईनाभीमेरी, बहुततारीफकरताहै !मुझेलगताहैसोनेसे, इसेभीमुंहमढानाहै !!मुहब्बतकीडगरसीधी , मगरदस्तूरउलटेहै !अगरचाह...
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  September 19, 2010, 7:03 pm
मैंनेहीक्याकियाकिसीकीलटउलझीसुलझानेको !क्योंकोईजुल्फेंबिखराता , मेरीधूपबचानेको !!बांधबनाकरयेजलधाराजिसनेसाधीनहींकभी !दौनोंहाथजोड़करजिसने , अँजुरीबाँधीनहींकभी !कोईनदियारुकीनहींहै , उसकीप्यासबुझानेको !!क्योंकोईजुल्फेंबिखरातामेरीधूपबचानेको !!जोलगतेथेनम...
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  June 1, 2010, 9:52 pm
टूट पायेंगे नहीं पत्थर, ज़रा सी चोट से !ये उड़ाने ही पड़ेंगे, भूमिगत विस्फोट से !!जो ' विचारों ' का मसीहा था 'बिचारा ' हो गया है !जिसको होना था भँवर ,वो ही किनारा हो गया है !हम धरा को कोसते हैं, अंकुरण देती नहीं ,क्यों नहीं कहते कि ये बादल नकारा हो गया है !यदि ज़मीं को खोदकर पानी निका...
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  October 14, 2009, 7:34 pm
ग़ज़ल -----------है बिलाशक ये दरिया ,चमन के लिए !चन्द बूँदें तो रखलो तपन के लिए !!बदमिज़ाजी न बादल की सह पाऊंगा !मुझको मंज़ूर है प्यास मन के लिए !!वो तगाफुल नहीं मुझसे कर पाएंगे !चाहिए आहुती भी हवन के लिए !!याद रखता है इतिहास केवल उन्हैं !जो कफन ओढ़ पाते हैं फ़न के लिए !!हम भरे...
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  September 12, 2009, 5:23 pm
ग़ज़ल ..........( भूली बिसरी .....)ढोतेढोतेउजलेचेहरे, हमनेकाटीबहुतउमर !अबतोएकगुनाहकरेंगे ,पछतालेंगेजीवनभर !!वोरेशमसेपश्मोंवाला, थातोसचमुचजादूगर !मोरपंखसेकाटलेगया , वोमेरेलोहेकेपर !!उसकोअगरदेखनाहो तो , आंखोंसेकुछदूररखो !कुछभीनहींदिखाईदेगा , आंखोंमेंपड़गयाअगर !!प्यासतुम...
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  July 15, 2009, 11:50 pm
ग़ज़ल ..........................वहींतकपाँवहैंमेरे ,जहाँतकहैदरीमेरी !इसीमेंसबसमेटाहै ,यहीजादूगरीमेरी !!हमेंनिस्बतगुलाबोंसे , वोहैगुलकंदकाहामी !बचेगीपाँखुरीकैसे ,किताबोंमेंधरीमेरी ?खरीतोसुननहींसकते ,किताबोंसेदबेचहरे !यहाँपरकामआजाएगी ,शायदमसखरीमेरी !!निशानाजोतेराब...
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  June 14, 2009, 8:36 pm
थोड़ी फुर्सत हो तो ही पढियेगा ,आग्रह है मेरा !इस आपाधापी और प्रतिस्पर्धा के युग में" हम जीवन कैसे जीते हैं और कैसे जीना चाहिए "के बीच सेतु तलाशती एक रचना !गीतखूबपताथावोसागरहैखारापानीहै !फिरभीप्यासबुझानेपहुंचेयेहैरानीहै !!बहुतदूरतकसन्नाटोंनेराहनहींछोड़ीलेकिनहमनेम...
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  May 9, 2009, 10:27 pm
तुम्हारी रसवंती चितवन !और मदिर हो गई चाँदनी घूंघट से छन छन !!झरे मकरंद ,छंद, सिंगार ,अलस ,मद,मान और मनुहारहो गया चकाचौंध दरपन !तुम्हारी .................चुभी तो नयन नीर भर गईझुकी तो पीर पीर कर गईउठी तो तार तार था मनतुम्हारी ................सजीली ज्यों काशी की भोरहठीली हुई बनी चित्तौरऔर गीली त...
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  April 1, 2009, 7:29 pm
( रसिया )कैसौ आयौ नवल बसंत सखी री मोरे आंगन में !पोर पोर में आस , प्यास भर गयौ उसाँसन में !!धरा नें ऐसौ करौ सिंगार !चुनर सतरंगी ,पचलड़ हार !रसीलेनैनन में कचनार !अंग अंग अभिसार झरै, ठसकौरी दुलहन में ....कैसौ आयौ ..............उडे गालन पै लाल अबीर !हो गई पायलिया मंजीर !छनकती फिरै जमुन के तीर !...
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  February 2, 2009, 9:56 pm
नींदआती नहीं है ,ये क्या हो गया ?रातजाती नहीं है, ये क्या होगया ??प्रेमहो या कि हो हादसा आँख अब !छलछलातीनहीं है ,ये क्या हो गया !अबकिसी भी चरण पर कोई आस्था !सरझुकाती नहीं है, ये क्या हो गया !!वैसेकहने को तो रातरानी है ये ! गमगमातीनहीं है, ये क्या हो गया !!हमने पायल गढ़ाई ग़ज़ल बेचक...
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  December 22, 2008, 10:33 pm
यह गीत उस उम्र का है जब किसी की राई जैसी उपेक्षा भी पर्वत से बड़ी महसूस होती है !विदा के क्षणों में आँखों का न डबडबाना भी फांस बनकर आंसने लगता है ! कच्चेपन का पक्का गीत ....... यदितेरे नत नयनों में भर आता नीर नमन का !तोइतना एहसास न होता एकाकी जीवन का !!अचक अचानक टूट गए क्यों अमर ने...
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  December 16, 2008, 7:27 pm
नदी की धार चट्टानों पै जब आकर झरी होगी !तभी से आदमी ने बाँध की साजिश रची होगी !!तुझे देवी बनाया और पत्थर कर दिया तुझको !तरेगी भी अहिल्या तो चरण रज राम की होगी !!मरुस्थल में तुम्हारा हाल तो उस बूँद जैसा है !जिसे गुल पी गए होंगे जो काँटों से बची होगी !!कहीं पर निर्वसन है और निर...
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  October 20, 2008, 9:34 pm
पावों में जंजीर, दौड़ की इच्छा मन भर दी !तूने भी ज्यादती बनाने वाले , मुझसे की !!जीवन में सब थोड़ा थोड़ाये संस्कार उमर भर ओढारस की बूँदें तो छलकायींलेकिन कसकर नहीं निचोडा मीरा की झांझर जैसा मन , व्यापारी सा जीवन !ऊपर से ढाई आखर की भाषा मन भर दी !!तूने भी ज्यादती ......................मौसम स...
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  September 29, 2008, 8:41 pm
हम सभी कोई न कोई लबादा ओढे हुए हैं और धीरे धीरे यही लबादा हमें सत्य लगने लगता है ! हमारी वासनाएं छूटती नहीं हैं सिर्फ़ वेश बदल लेती हैं ,एक नया लबादा ओढ़ लेती हैं और इसी को हमारे अन्दर बैठा हुआ जोगी परम सत्य मानकर आत्म मुग्ध होता रहता है !इसी आत्म मुग्धता को तोड़ती एक रचना .....
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  September 20, 2008, 9:33 pm
आँख से अश्क भले ही न गिराया जाये !परमेरे गम को हँसी में न उड़ाया जाये !!तू समंदर है मगर मैं तो नहीं हूँ दरिया !किस तरह फ़िर तेरी देहलीज़ पै आया जाये !!दो कदम आप चलें तो मैं चलूँ चार कदम !मिल तो सकते हैं अगर ऐसे निभाया जाये !!मुझे पसंद है खिलता हुआ ,टहनी पै गुलाब !उसकी जिद है कि वो ,...
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  September 4, 2008, 9:11 pm
लेखन से भी एक बड़ा गुण है ' लफ्फाजी ' किसी तरह की बाजी न होते हुए भी इसके अंत में 'जी 'लगा हुआ है जो इसके सम्माननीय होने का प्रमाण है !जो शब्द ख़ुद ही सम्माननीय हो तो उसे धारण करने वाला तो परम सम्माननीय स्वतःही हो जाता है !जैसे 'महागप्प' को साहित्य में' परिकल्पना 'कहते है,उसी प्...
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  August 11, 2008, 8:42 pm
छू गई साँसइक पाँखुरी , प्राण मन गमगमाने लगे !नैन में जबसे तुम आ बसे , स्वप्न भी झिलमिलाने लगे !!जब से काजल डिठौना हुआ , हो गया जो भी होना हुआ !झम झमाझम हुई देहरी , छम छमाछम बिछौना हुआबिन पखावज बिना पैंजनी , पाँव ख़ुद छन छनाने लगे !!नैन में जबसे ...............रस छलकते क्षणों का पिया , बूँद ...
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  August 7, 2008, 6:26 pm
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