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जनाज़े अपने हिस्से में उधर बारात का मौसमरहेगा कितने दिन इस बेतुकी सी बात का मौसम दिये की एक मद्धम लौ के आगे थरथराता है ये आंधी का ये अंधड़ का ये झंझावात का मौसमजिन्हें मदहोश कर देती हैं सावन की फुहारें वे टपकती छत के नीचे देख लें बरसात का मौसमसुबह कब आयेगी जब आयेगी त...
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  September 30, 2015, 9:16 am
आंख  के आकाश पर बदली तो छाई है ज़रूर हो न हो कल फिर किसी की याद आई है ज़रूरउड़ चला जिस पल परिंदा कुछ न बोली चुप रही डाल बूढ़े नीम की पर थरथराई है ज़रूर मयकशों ने तो संभल कर ही रखे अपने क़दम वाइज़ों की चाल अक्सर डगमगाई है ज़रूर लोग मीलों दूर जा कर फूंक आये बस्तिय...
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  September 4, 2012, 11:03 am
उनकी महफ़िल है फ़क़त हंसने हंसाने के लियेकौन जाये दर्द की गाथा सुनाने के लियेजेब में मुस्कान रख कर घूमता है आदमीजब जहां जैसी ज़रूरत हो दिखाने के लियेले गये कमज़र्फ हंस हंस कर वफ़ाओं की सनदहम सरीखे ही बचे हैं आज़माने के लियेगाँव में क्या था कि रुकते खेत घर सब बिक चुके...
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  July 23, 2012, 12:25 pm
दर्द आँखों में नहींदर्द आँखों में नहीं दिल में दबाये रखना  इस खजाने को ज़माने से छुपाये रखना  हमने बोये हैं अंधेरों में सदा धूप  के बीजहमको आता है उमीदों को जगाये रखना आज के ख़त ये कबूतर ही तो पहुंचाएंगे कल इन परिंदों को धमाकों से बचाए रखना सारे रिश्तो...
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  May 2, 2012, 9:20 pm

दर्द आँखों में नहीं दर्द आँखों में नहीं दिल में दबाए रखनाइस ख़ज़ाने को ज़माने से छुपाए रखनाहमने बोये हैं अंधेरों में सदा धूप के बीजहमको आता है उमीदों को जगाए रखनाआज के ख़त ये कबूतर ही तो पहुंचाएंगे कलइन परिंदों को धमाकों से बचाए रखना सारे रिश्तों की हक़ीक़त न पर...
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  April 30, 2012, 10:33 am
दर्द आँखों में नहीं दर्द आँखों में नहीं दिल में दबाए रखनाइस ख़ज़ाने को ज़माने से छुपाए रखनाहमने बोये हैं अंधेरों में सदा धूप के बीजहमको आता है उमीदों को जगाए रखनाआज के ख़त ये कबूतर ही तो ले जायेंगे कलइन परिंदों को धमाकों से बचाए रखना सारे रिश्तों की हक़ीक़त न परखने ल...
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  April 30, 2012, 10:33 am
किसे अजनबी कहें किसे अनजाना मनजब हर शख्स लगे जाना-पहचाना  मनपता   पूछते   हैं   भोले  बस्ती   वालेबंजारों का कैसा  ठौर-ठिकाना    मन   सुख आया दो पल ठहरा फिर लौट गया  दुःख ने ही सीखा है साथ निभाना   मनजिस मूरत को छुआ वही पत्थर निकलीधीरे-धीरे   टूटा   भर...
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  August 8, 2011, 9:44 am
कितने दिन दुस्वप्न सरीखे लौट-लौट कर आओगेओ अभिशप्त अतीत भला कब वर्तमान से जाओगेतिरस्कार और उपहासों से हमको तो चुप कर दोगे पर अपने मन की सोचो उसको कैसे बहलाओगे   पार उतर कर तुमने अपनी नाव जला तो डाली हैकभी लौटना पड़ा अगर तो सोचो कैसे आओगेबूढ़ी आँखें रास्ता तकते-तकत...
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  January 15, 2011, 2:04 pm
जीवन में संबंधों का कुछ अजब विरोधाभास रहाहर घनिष्ठता में शामिल एक दूरी का एहसास रहा कोई पुराना प्यारा चेहरा, कोई पुरानी याद न थीबचपन की गलियों में जाकर भी मन बहुत उदास रहाजनम-जनम का अपना नाता, हम-तुम कभी न बिछड़ेंगेतुम भी यूं ही कहते थे, हमको भी कब विश्वास रहा रामकथा ...
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  January 4, 2011, 10:54 am
दर्द पर अंकुश लगाना है कठिन इन दिनों हंसना-हंसाना है कठिनदूर रहने में कोई उलझन न थीपास आकर दूर जाना है कठिनआंख में आकाश के सपने लियेउम्र पिंजरे में बिताना है कठिनसीप तो सन्तुष्ट है एक बूंद सेप्यास सागर की बुझाना है कठिनदुश्मनों की क्या कहें इस दौर मेंदोस्तों से पार पा...
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  November 26, 2010, 2:31 pm
रात की रानी से भीगी सी हवा लाया है कौनचल के देखो तो तुम्हारे द्वार पर आया है कौनगीत हों मधुमास के, या पतझरों की बात होदेखना होगा खिला है कौन, मुरझाया है कौनकिसका पेशा बन गया था बेचना सूरज के स्वप्नसुबह की पहली किरन झरते ही घबराया है कौनछेड़िये चर्चा कभी संघर्ष की, बलिदान ...
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  October 23, 2010, 6:42 pm
जीवन भर पछताए कौन ऐसी लगन लगाए कौनबैद  नहीं उपचार नहींफिर ये रोग लगाए कौन तू आयेगा - झूठी बात पर मन को समझाए कौनउस नगरी में सारे सुखउस नगरी में जाए कौनमन ही मन का बैरी है और भला भरमाये कौन ...
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  September 6, 2010, 3:04 pm
यों तो सम्बन्ध सहज से ही ज़माने से रहेमन में अकुलाते मगर प्रश्न पुराने से रहेद्वारिका जा के ही मिल आओ अगर मिलना हैअब किशन लौट के गोकुल में तो आने से रहेबावरा बैजू भी शामिल हुआ नौरतनों में और फिर सारी उम्र होश ठिकाने से रहेप्यासे खेतों की पुकारों में असर हो शायदमानसून...
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  August 11, 2010, 7:44 am
गेहूं,चने,ज्वार मेरे तुम काट ले गयेअब मैनें सपने बोये हैं;- क्या कर लोगे ?पण्डित जी, पैलाग, चलो बस रस्ता नापोहोरी अब गोदान नहीं, कुछ और करेगाभेद खुल चुका धरम-करम और पुन्य-पाप काजो करना है –आज,अभी, इस ठौर करेगा।लेखपाल जी, मेरे सारे खेत बिक गयेअब बोलो मेरा कैसे नुकसान करोगे?म...
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  June 4, 2010, 6:02 pm
हों  ॠचायें वेद की  या आयतें  क़ुरआन  कीखो गई इन जंगलों में अस्मिता इन्सान कीकैसी  तनहाई!  मेरे घर  महफ़िलें  सजती  हैं रोज़सूर, तुलसी, मीर,ग़ालिब, जायसी, रसखान कीकितने होटल, मॉल,मल्टीप्लेक्स उग आये यहांकल तलक उगती थीं इन खेतों में फ़सलें धान कीइस कठिन बनवास में मीलों भट...
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  May 13, 2010, 6:39 pm
बंजरों  में  बहार  कैसे  होऐसे मौसम में प्यार कैसे होज़िन्दगी  जेठ  का  महीना  हैइसमें रिमझिम फुहार कैसे होकोई वादा कोई उमीद तो होबेसबब  इन्तज़ार  कैसे  होआप बोलें तो फूल झरते हैंआपका  ऐतबार  कैसे  होजिनका सब कुछ इसी किनारे है ये  नदी  उनसे  पार  कैसे  हो। ...
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  April 18, 2010, 11:42 am
लम्बी-चौड़ी ताने मतहमें बावला  जाने मत हमें आज की बात बताकिस्से सुना पुराने मत रोटी का जुगाड़ बतलावेद-पुरान बखाने  मत चाकर ही तो है उनकाख़ुद को मालिक माने मत तू भी तो हम जैसा हैआज भले पहचाने मत...
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  February 20, 2010, 11:16 am
अपनी धरती के साथ रहता हूंउसके सब धूप-ताप सहता हूंपूस जैसा कभी ठिठुरता हूंऔर कभी जेठ जैसा दहता हूं सब परिन्दों के साथ उड़ता हूंसारी नदियों के साथ बहता हूं जागता हूं सुबह को सूरज साशाम को खण्डहर सा ढहता हूं  इसमें तुम भी हो और ज़माना भीयूं तो मैं अपनी बात कहता हूं...
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  February 9, 2010, 10:32 am
बीन का रागिनी से रिश्ता होसाँस का ज़िन्दगी से रिश्ता होऐसी बस्ती बसाइये जिसमेंसबका सबकी ख़ुशी से रिश्ता होअपनी गिनती है देवताओं मेंकिस लिये आदमी से रिश्ता होये दुमहले गिरें तो अपना भीधूप से, रौशनी से रिश्ता होअब तो राजा हैं द्वारिका के किशनक्यों भला बाँसुरी से रिश्...
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  January 27, 2010, 8:21 pm
जो गयासो गया बीज कुछबो गया जो रहारो गया तू कहांखो गया जो हुआहो गया  ...
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  January 11, 2010, 6:21 pm
रास्ता ही भूल जाओ एक दिनआओ मेरे घर भी आओ एक दिन बासी रोटी से ज़रा आगे बढ़ोउसको टॉफ़ी भी खिलाओ एक दिन क्या मिलेगा ऐसे गुमसुम बैठ कर,साथ मेरे गुनगुनाओ एक दिन  बर्फ़ सम्बन्धों की पिघलेगी ज़रूरधूप जैसे मुस्कराओ एक दिन घर के सन्नाटे में गुम हो जाओगेदौड़ती सड़कों पे आओ एक द...
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  January 6, 2010, 11:47 am
चाहता हूं मगर नहीं लगतामेरा घर मेरा घर नहीं लगता जिसके साये में दो घड़ी दम लूंऐसा कोई शजर नहीं लगता अजनबी लोग, अजनबी चेहरेये शहर वो शहर नहीं लगता ये महावर,ये मेंहदियां, ये पाँवतू मेरा हमसफ़र नहीं लगता ये धमाके तो रोज़ होते हैंअब परिन्दों को डर नहीं लगता दिल को लगते हैं...
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  November 6, 2009, 6:36 pm
कब तक धूप चुरायेंगेये बादल छँट    जायेंगेआज तुम्हारा दौर सहीअपने दिन भी आयेंगेये परेड के फ़ौजी हैंलड़ने से कतरायेंगेफूल यहीं पर सूखेगापंछी तो उड़ जायेंगेदर्द थमा तो चल देंगेदर्द बढ़ा तो  गायेंगे...
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  October 20, 2009, 5:33 pm
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