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Blog: कुछ इधर की, कुछ उधर की

Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
यह बात तो हर कोई जानता है कि माँस कैसे प्राप्त किया जाता है. जीवन हर जीव को उतना ही प्रिय है, जितना कि हम सब को. अपनी खुशी से कोई पशु मरना नहीं चाहता. अत: उसे मारने से पूर्व अनेक क्रूर और अमानुषिक यातनाएं दी जाती हैं. जब वह वध स्थान पर खडा किया जाता है तो उसकी करूण पुकार से दिल ... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   3:22pm 16 Jun 2012 #आहार प्रकृति
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
एक ओर जयचन्दी इरादे हैं, तो दूसरी ओर दिलोदिमाग में ढेर सारी चिन्ताएं और गुस्सा लिए एक आम इन्सान की आम जिन्दगी. इस समय जो कुछ हो रहा है, वही एकमात्र सच है और जिस ढंग से हो रहा है, शायद वही आज की नैतिकता भी है. आज के इस युग में 'सत्य' और 'नैतिकता' न तो आईने की तरह ही रहे हैं और न ही ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:34pm 25 Jul 2011 #मूल्य
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
मनुज प्रकृति से शाकाहारी माँस उसे अनुकूल नहीं है !पशु भी मानव जैसे प्राणीवे मेवा फल फूल नहीं हैं !!वे जीते हैं अपने श्रम पर होती उनके नहीं दुकानेंमोती देते उन्हे न सागर हीरे देती उन्हे न खानेंनहीं उन्हे हैं आय कहीं से और न उनके कोष कहीं हैंकेवल तृण से क्षुधा शान्त कर वे स... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   2:16pm 16 Jul 2011 #निरामिष
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
पुनर्जन्म----एक ऎसा विचार जिसे हिन्दू धर्म की सभी शाखाओं द्वारा स्वीकृत किया गया है. भगवतगीता का कहना है कि जिसका जन्म होता है, उसकी मृत्यु होती है और जिसकी मृत्यु होती है उसका जन्म भी होना निश्चित है. लेकिन जन्म अन्त समय के संस्कार और इच्छाओं के अनुरूप होता है.  भारतीय ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   11:12am 27 Jun 2011 #दर्शन
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
श्रीमद्भगवद गीतामें भगवान कृष्ण कहते हैं----"सर्वभूत हिते रत्ता"अर्थात सम्पूर्ण भूत प्राणियों के हित में रत और सम्पूर्ण प्राणियों का सुह्रद रहो. जो शुभफल प्राणियों पर दया करने से होता है, वह फल न तो वेदों से, समस्त यज्ञों के करने से और न ही किसी तीर्थ, वन्दन अथवा स्नान-दा... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   10:45am 24 Jun 2011 #धर्म
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
आचार और विचार की शुद्धता भारतीय सभ्यता का मूलमन्त्र रहा है. मनुष्यता सदैव आचरण और व्यवहार से पहचानी जाती है; पैसा, पद अथवा उपाधि से नहीं. हर युग, हर देश और यहाँ तक कि हर धर्म में मानव-जीवन की मर्यादा के एक-से सिद्धान्त स्वीकृत हैं. वे हैं---कर्तव्य-परायणता, सत्यनिष्ठा, नि:स्... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:38pm 16 Jun 2011 #
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
माँसाहार को अगर "अशान्ति का घर" कहा जाये, तो शायद कुछ गलत नहीं होगा. डा. राजेन्द्र प्रसाद जी नें एक बार कहा था कि "अगर संसार में शान्ति कायम करनी है तो उसके लिए दुनिया से माँसाहार को समाप्त करना होगा. बिना माँसाहार पर अंकुश लगाये ये संसार सदैव अशान्ति का घर ही बना रहेगा".डा. ... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   8:35am 31 Mar 2011 #शाकाहार
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
किसी पश्चिमी विद्वान नें शान्ती की परिभाषा करते हुए लिखा है, कि " एक युद्ध की सामप्ति और दूसरे युद्ध की तैयारी---इन दोनों के बीच के अन्तराल को शान्ति कहते हैं". आज हकीकत में हमारे स्वास्थय का भी कुछ ऎसा ही हाल है. "जहाँ एक बीमारी को दबा दिया गया हो और द्सरी होने की तैयारी में ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   9:10am 20 Mar 2011 #स्वास्थ्य
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
शिक्षा प्रणाली और बाजार व्यवस्था दोनों नें मिलकर आज बच्चों से उनका बचपन पूरी तरह से छीन लिया है. दोनों ही बच्चों को उम्र से कहीं पहले बढा कर देना चाहते हैं. आज की पीढी में बारह-तेरह साल के बच्चे जिन्हे हम किशोर समझने की भूल कर बैठते हैं, जब कि वे मानसिक रूप से युवा हो चुके ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   11:03am 17 Mar 2011 #बालविकास
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
हालाँकि इस समय मुझे उनका नाम तो स्मरण नहीं हो पा रहा. उर्दू के एक मुसलमान कवि थे, जिन्होने अपने भावों को निम्न प्रकार से प्रकट करते हुए निर्दोष, मूक प्राणियो पर दया करने की ये अपील की है :--- पशुओं की हडियों को अब न तबर से तोडोचिडियों को देख उडती, छर्रे न इन पे छोडो !!मजलूम जिस... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   7:50am 4 Mar 2011 #
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
पशु,पक्षी,कीट, पतंगे आदि संसार में जितने भी प्रकार के प्राणी हैं, सब के सब अपने-अपने स्वाभाविक भोजन को भलीभाँती जानते तथा पहचानते हैं. अपने भोजन को छोडकर दूसरे पदार्थों को सर्वदा अभक्ष्य समझते हैं, उनको देखते, सूँघते तक नहीं. अत: अपने आपको सब प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ स... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   12:51pm 2 Mar 2011 #
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
भारतीय संस्कृति, जिसके विभिन्न स्वरूपों के साथ देश,काल आदि भौगोलिक एवं वैज्ञानिक चिन्तन जुडा हुआ है. जिसके प्रत्येक आचार-विचार के मूल में विज्ञान विराजमान रहा है.भारतीय सदाचार शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक विकास के लिए वैज्ञानिक उपयोगिता पर आधारित है. 'आचार प्रभवो ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   2:15pm 27 Feb 2011 #धर्म
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
इन्सान पर हावी होने वाले भूत-प्रेतों को उतारने के लिए तो ओझाओं-गुनियों, तान्त्रिक, पीर-फकीरों, बाबाओं वगैरह को बुलाना पडता है. लेकिन आज के इस वैज्ञानिक युग में कईं भूत ऎसे भी हैं जिनका किसी के पास कोई इलाज नजर नहीं आ रहा. इन्ही में एक भूत है---प्रोटीन का, जिसने सारे डाक्टरो... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   9:01am 2 Feb 2011 #प्रोटीन
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
राजकुमार गौतम उद्यान में सैर कर रहे थे कि अकस्मात उनके पाँवों के पास एक पक्षी आकर गिरा. राजकुमार नें देखा कि उसके परों में एक तीर चुभा है और वह बडी बेचैनी से छटपटा रहा है. दयाद्र होकर गौतम नें पक्षी को उठाया और वे बडे यत्न से रक्त में भीगे हुए तीर को निकालने लगे, ताकि किसी ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   9:27am 30 Jan 2011 #अधिकार
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
कहते हैं कि इन्सान को सदैव सात्विक आहार का ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि प्राकृतिक नियम के अनुसार मानव का भोजन फलाहार और शाकाहार ही है.जो कि शारीरिक निरोगता, शक्तिवर्द्धन और दीर्घायुष्य जैसी सतोगुणी शक्तियों की प्राप्ति का एकमात्र स्त्रोत है. लेकिन अब सवाल ये उठता है क... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   2:06pm 22 Jan 2011 #सात्विक
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
मनुष्य आज जो कुछ है, उसके निर्माण में समाज की अहम भूमिका है.हर इन्सान अपने तात्कालिक परिवेश, रीति-रिवाज, मान्यताओं, सामाजिक नियमों से तो सीखता-समझता ही है, वह परम्परा प्राप्त ज्ञान, ऎतिहासिक घटनाओं, महापुरूषों की जीवनियों एवं धर्मशास्त्रों से भी बहुत कुछ सीखता है और उन... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   11:36am 17 Jan 2011 #तर्क
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
 संसार में उसी व्यक्ति को पूर्ण रूप से सुखी कहा जा सकता है, जो कि शरीर से निरोगी हो. ओर निरोगी रहने के लिए यह आवश्यक है कि बच्चों को उनकी बाल्यावस्था ही से स्वस्थ रखने का ध्यान रखा जाए, उनको संयमी बनाया जाए, उनको ऎसी शिक्षा दी जाए, जिससे कि वे स्वस्थ रहने की ओर अपना विशेष ध... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   8:56am 8 Jan 2011 #स्वास्थय
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
आज बहुत दिनों के बाद मन्दिर जाना हुआ.कोई पूजा-पाठ करने के विचार से नहीं---बस यूँ ही, टहलने निकले तो खुद-ब-खुद कदम उधर को उठ पडे. गया तो क्या देखता हूँ---भिखारियों, व्यापारियों और खुशामदी पिट्ठुओं की रेलमपेल मची हुई है. बाप रे! इतनी भीड! अमीर-गरीब, औरत-मर्द, विद्यार्थी, व्यापारी... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   8:58am 19 Dec 2010 #
Blogger: पं.डी.के.शर्मा "वत्स"
उस रोज देखा कि सडक के किनारे धूप में एक आदमी पडा हुआ है. हड्डियों का मात्र ढाँचा रह गया है और बस कुछेक देर का मेहमान है. चलती सडक----बहुत से लोग आ-जा रहे थे. राहगीर उसकी तरफ देखते, थोडा ठहरते और फिर आगे बढ जाते. उसने भी क्षणभर के लिए ठहरकर उसकी तरफ देखा और आगे बढ गया.वो अभी महज च... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   1:31pm 12 Dec 2010 #दया
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