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हिन्दी काव्य मंच

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प्रदीप मानोरिया
Tag :
  March 15, 2013, 9:10 pm
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प्रदीप मानोरिया
Tag :
  May 4, 2011, 6:57 pm
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प्रदीप मानोरिया
Tag :asharan bhavna
  March 31, 2011, 12:32 pm
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प्रदीप मानोरिया
Tag :barah bhavna
  March 29, 2011, 6:50 pm
रंग की फुहार है , गीत की बहार है / बॉंटता जो प्यार है , होली का त्यौहार है /  धूम ही मचायेंगे , होली यूं मनायेंगे / यारों की टोली में , गॉंव की होलीमें /  हाथों में रंग लिये , पिचकारी संग लिये /  झूमझूम गायेंगे . होली यूं मनायेंगे / गॉंव की जो गोरियॉं , भाभी और छोरियां /  देख रंग हाथों ...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :holi fagun
  March 18, 2011, 4:12 pm
राष्ट्र का गौरव बडा है या कि यह दुर्भाग्य है ।ताज पहने आज भी बैठा हुआ धृतराष्ट्र है ॥इटेलियन संजय हुई या गांधारी कौन है ।इसके जबाब में जनता रही क्यों मौन है ॥कृष्ण ने रक्षा करी थी द्रोपदी की लाज की ।कौन अब रक्षा करेगा ये द्रोपदी(*) जो आज की ॥(*) द्रोपदी= जनता,देश प्रदीप मानो...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :
  February 17, 2011, 1:43 pm
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प्रदीप मानोरिया
Tag :patang
  January 14, 2011, 11:54 am
समर्थ दीपक ज्योति है चिर काल का हर ले तिमिर ।हो उदित अब ज्ञान ज्योति हर सके जग का भंवर ॥निर्वाण श्री प्रभु वीर का यह दे रहा संदेश है ।समृद्ध हो निज ज्ञान वैभव लक्ष्मी बसी निज देश है ॥मंगलमय दीपावली ========== प्रदीप मानोरिया ...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :nirvaan
  November 6, 2010, 10:01 am
कोई ना कोई तो ऐसी सूरत है जिससे ये हेंड वाश जरूरत है हाथ धोना सफाई की एक आदत है हाथ धो कर पीछे पढ़ना एक कहावत है भले लोगों में ये हो न हो हाथ धोने की आदत किंतु चरितार्थ खूब होती है हाथ धोकर पीछे पड़ने की कहावत मंदी शेयर बाज़ार के पीछे हाथ धोकर पडी है मंहगाई भी हाथ धोकर आसमान...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :handwash handwash day
  October 15, 2010, 9:58 am
आपकी रगों में दौडता लहू किसी के जीवन की आस हो सकता है जीवन मृत्यु के इम्तिहान में वह व्यक्ति पास हो सकता है मज़हब दिल औ दिमाग का संकुचन होता है पर लहू तो सब इंसान का अकिंचन होता है आइये हम भी इस अकिंचन लहू का कुछ दान करें मौत के संघर्ष में लडते इंसान के लिये रक्‍तदान करें=प...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :blood donation
  October 2, 2010, 10:02 am
मज़हब वतन में कोई मोहब्बत से बडा नहीं है इश्क इंसानी से बढकर इबादत कोई नहीं है सियासत के ठेकेदार लडाते मज़हब के नाम पर है इश्क अगर दिल में बस बात ये सही है क्या फ़ैसला जमीं ये है राम या अल्ला कीदिल को मिला ले उससे जिससे तेरी लगी है बंदा तू राम का या अल्ला का बन्दा तू है सां...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :hindu
  September 30, 2010, 9:51 am
गहरे और घने मेघों की सौगात धरा पर आई हैवन उपवन आँगन के गमले सब हरियाली छाई हैजहाँ अवनि पर कण माटी के बिछी पूर हरियाली हैऔर गगन पर रवि लोप है घटा खूब ही काली हैप्रदीप मानोरियाचित्र साभार श्रीमति किरन नितिला राज पुरोहित...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :greenry
  August 6, 2010, 9:20 am
पान सो पदारथ सब जहान को सुधारत, दिमाग को बढावत जामें चूना चौकसाई है ।सुपारिन के साथ साथ मसाला मिले भांत भांत, जामे कत्थे की रत्ती भर थोडी सी ललाई है ॥बैठे हैं सभा मांहि बात करे भांत भांत,थूकन जात बार बार जाने की बडाई है ।कहें कवि किशोर दास चतुरन चतुराई साथ, पान में तमाखू क...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :pan
  August 5, 2010, 9:51 am
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प्रदीप मानोरिया
Tag :janmdin
  June 28, 2010, 9:44 am
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प्रदीप मानोरिया
Tag :janmdin
  June 26, 2010, 7:23 pm
हिन्दी काव्य मंच: कब आओगे मेघ और फिर कब बरसोगे...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :
  June 23, 2010, 11:34 am
अफ़साने कुछ अनजाने से गीत पुराने लाया हूँ |तेरी महफ़िल में बातों से लफ़्ज़ चुराने आया हूँ ||लव खामोश और बन्द निगाहें स्याह अंधेरा छाया है |तेरी सांसो की आवाज़ें सुर मैं मिलाने आया हूँ ||खाली सागर फ़ैले पैमाने महफ़िल उजडी उजडी है |बेसुध रिंदो के आलम में दो घूँट मैं पाने आय...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :dil
  June 21, 2010, 11:52 am
आज अर्जुन दिख रहा क्यों कौरवों के वेश में । क्यों दिशा से रहित वायु बह रही इस देश में ॥ श्मसान सा भोपाल को जिनने बनाया था कभी । अब भी उनको पालते अर्जुन हमारे देश में ॥ कौन है जो डस गया और सपेरा कौन है। हर कोई सच जानता अब हमारे देश में ॥ घट गया वह बुरा था सच उजागर आज है। मौन कठप...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :state plane
  June 15, 2010, 7:35 pm
पानी की कमी जो सर्वत्र ही छाई है ।स्वंयसेवी संस्थायें चिंता से घबराई हैं ॥एक संस्था ने पानी की बचत पर सेमिनार कराया ।भांति भांति के लोगों को सुनने सुनाने बुलाया ॥बहुत लोग माइक पाकर खुशी से फ़ूले ।सुनाये जल बचत के अपने फ़ार्मूले ॥एक बोलेबार बार गिलास धोने में पानी व्य...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :save water
  May 18, 2010, 8:04 pm
ज़िन्दगी में जब कोई अवसाद आता है ।माँ तेरी ममता का आँचल याद आता है ॥वक्‍त है बीता बहुत तेरे बिन रह्ते हुये ।किन्तु सर पे माँ तेरा ही हाथ आता है ॥रहगुज़र में धूप भारी पर नहीं कुम्हला सका ।साया ममता का सदा ही साथ आता है ।। भूल हो जाये कोई फ़िर बोध हो अपराध का । डाँटना समझाना तेर...
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प्रदीप मानोरिया
Tag :mamta aanchal
  May 10, 2010, 11:54 am
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