मेरे मन की

एक गज़ल गिरीश पंकज जी के ब्लॉग सद्भावना दर्पण से सुनिए  ------------------..............इनके बारे मे पढियेइस ब्लॉग पर..........
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Tag :गिरीश पंकज
  July 28, 2013, 10:26 pm
हाँ,दो बूँद गिरी  मेरे शहर में भीगी थी जिसमेंमैं,खुशबू बसी है अब भी वहीमहसूस कर जिसे  बन्द होती हैं पलकें मेरी......
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Tag :
  July 27, 2013, 10:40 am
अच्छे मित्रों का साथ रहे तो बहुत कुछ अच्छा-अच्छा सीख सकते हैं हम ---ऐसे ही एक मित्र बने  -आशीष राय मुलाकात तो कभी हुई नहीं, हाँ देखा जरूर हैं, उनको मैंने और मुझे उन्होंने ...लखनऊ जाना हुआ था मेरा ,(हाँ उसी परिकल्पना सम्मान समारोह में, जिसकी रपट लिखना बाकि है)..:-) पर मुझे बहुत अच्...
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Tag :अर्चना
  June 22, 2013, 5:00 am
 (वत्सल का लिया एक चित्र) अगर आपके बच्चे स्कूल जा रहे हों या जाने वाले हों तो कॄपया ध्यान दें .......सुनें बच्चों व आपके हित में जारी पॉडकास्ट आपके लिए...."बस यूँ ही".......अमित: से स्कूल कैसा हो -द्वितीय भाग  ...
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Tag :अमित श्रीवास्तव
  June 16, 2013, 11:16 am
1-जाने वो कैसे लोग थे ---2-बड़ी सूनी-सूनी है ---3-कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन---...
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Tag :विडियो
  June 12, 2013, 9:37 pm
                                                             (वत्सल का लिया एक चित्र) अगर आपके बच्चे स्कूल जा रहे हों या जाने वाले हों तो कॄपया ध्यान दें .......सुनें बच्चों व आपके हित में जारी पॉडकास्ट आपके लिए...."बस यूँ ही".......अमित: से स्कूल कैसा हो? ----- प्रथम भाग ...
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Tag :अमित श्रीवास्तव
  June 11, 2013, 7:00 am
                                                             (वत्सल का लिया एक चित्र) अगर आपके बच्चे स्कूल जा रहे हों या जाने वाले हों तो कॄपया ध्यान दें .......सुनें बच्चों व आपके हित में जारी पॉडकास्ट आपके लिए...."बस यूँ ही".......अमित: से स्कूल कैसा हो? ----- प्रथम भाग ...
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Tag :अमित श्रीवास्तव
  June 11, 2013, 7:00 am
                                                         (चित्र गूगल से साभार)संस्मरण पढ़ते समय हर किसी को अपने पुराने दिन याद आने लगते हैं, .....और जैसा कॄष्ण कुमार मिश्रा जी ने लिखा है - बचपन की याद दिलाता है सबको , अपने खेत.... अपने बाबूजी ...अपना गाँव ....बचपन के साथी ...स्कूल...,तो अच्छा लगता है पढ़...
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Tag :कॄष्ण कुमार मिश्रा
  June 10, 2013, 3:41 pm
गर्मी की छुट्टियाँ आए और ननिहाल न जाएँ सम्भव नहीं होता ...हाँ बचपन खूब सजा होता है नानी के घर की यादों से ,फिर हम बड़े होते जाते हैं,स्कूल-कॉलेज और अपने कार्यों में व्यस्त होने लगते हैं, और ननिहाल जाना सिर्फ़ उत्सव, त्योहारों शादी-ब्याह तक सिमट जाता है ,और जब घर की लड़की हो तो व...
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Tag :संस्मरण
  June 9, 2013, 1:39 pm
सितारे भी सो गये चांद के संग मेंअंतर की चाँदनी टिमटिमाए अंग मेंचलो छुप जाएं हम मूँद के पलकेंदेख लें सपनों को जो होंगे कल केखोलेंगे जब पलकों को भोर में हलकेउनींदी आँखों से तुम्हें विदा देंगे चलकेफिर उदासी का वही अन्धड़ आयेगाचूर होगा गोरा बदन धूल में सन केदिन के उजाले मे...
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Tag :मै
  June 9, 2013, 9:30 am
सुबह गज़ब का नजारा देखाघूमने के समय अजब तमाशा देखागुलमोहर गुमसुम खड़ा थादूब खिलखिला रही थीबादल नंगे पाँव दौडे चले आ रहे थे हवा उनको पीछे से दौड़ा रही थीहम अपनी धुन में चले जा रहे थे प्रकॄति संग में गुनगुना रही थीगुलमोहर और दूब की छेड़छाड़ के बीचगुलमोहर के लाल फूल झड़े जा रहे ...
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Tag :प्रकृति
  June 5, 2013, 10:09 am
बदराया आकाश  सहमा-सा सूरजगुनगुना प्रकाशनहाई प्रकॄतिअठखेली करती पछुआमहकती फ़िजासिहरता मनकसमसाता यौवनखिलता चाँदठिठुरती रातसुहानी सुबह... ............
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Tag :अर्चना
  June 2, 2013, 7:14 pm
आज आपकी मुलाक़ात एक नए ब्लॉग से --पोस्ट यहाँ पढ़ सकते है आप - पहला साल सुन  है सकते है यहाँ --...
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Tag :अंशु
  May 25, 2013, 3:26 pm
शब्दों की तलाश में मेरी कविता निकल पडी है दूर तलक कालजयी होना है, कहा था उसने मुझसे समझी नहीं -मेरे समझाने पर भी बहुत रोका मैंने ये कहकर की कालजयी कविताएँ जा चुकी है काल के ही साथ . . . और ले गई है साथ अपने गूढ़ अर्थों वाले आलंकारिक शब्दों को भी जिन्होंने पकड़ रखा था हाथ ...
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Tag :अर्चना
  May 22, 2013, 9:01 am
अनूप जी की पोस्ट को यहाँ पढ़ सकते हैंआप ---और सुने यहाँ---...
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Tag :पॉडकास्ट
  May 19, 2013, 10:43 am
प्रवीण पाण्डेय जी का नाम खुद अपने आप में परिचय है उनका ---और उसी तरह उनके ब्लॉग का नाम-न दैन्यं न पलायनमभी ....प्रस्तुत है उनकी एक रचनालहरें -...
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Tag :पॉडकास्ट
  May 16, 2013, 1:20 am
एक परिचय शरद कुमार जी और उनके ब्लॉग से --कुछ शेर बेटी के नाम एक मासूम सा ख्वाबऔर माँये रचनाएं हैं शरद कुमार जी के ब्लॉग अहसासों के पंखसे .....
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Tag :पॉडकास्ट
  May 13, 2013, 11:03 pm
प्रकाश गोविन्द जीको तो आप सब जानते ही हैं ,परिचय देने की जरूरत नहीं है ...पहेलियों को हल करने की विशेष योग्यता रखते हैं .... गाते भी बहुत बढ़िया हैं.....एक बार इनसे बात हो रही थी मुझे अचानक  बैंक के काम से जाना पड़ा , मैंने मेसेज लिखा-बैंक होकर आती हूं ...जबाब आया -वाह! आनन्द आ गया !...कि...
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Tag :पॉडकास्ट
  May 10, 2013, 11:41 pm
लघुकथा- टेक्नोलॉजी के युग में भगवान ने टेब ऑन किया , मेरा मुस्कुराता चेहरा प्रोफ़ाईल में देखकर खुश हो गए ...मेरी वॉल पर स्टेटस लिखा-वरदान माँग...मैंने मौके की नज़ाकत को समझा और वरदान में अन्तिम ईच्छा लिख दी - मेरी मौत की खबर या फोटो फ़ेसबुक पर शेअर न की जाए.... अगर कहीं गलती से किस...
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Tag :लघुकथा
  May 9, 2013, 12:44 am
जिन्दगी ---जिन्दगी एक पड़ाव - न शहर न कोई गाँव...जिन्दगी एक बहाव -जिसमें डगमगाती नाव...जिन्दगी एक बिछाव -जिसपे लगता हर दाँव...जिन्दगी एक झुकाव -संभलकर रखो अपने पाँव...जिन्दगी है तो अनमोल -पर हर वक्त बे-भाव...जिन्दगी एक दरख़्त - ढूँढता हर कोई यहाँ ठांव... -अर्चना...
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Tag :अर्चना
  May 7, 2013, 10:12 pm
तन की तल्लिनता को तौल कर मत निहारमन की मलिनता को मौन हो मत स्वीकारघन की घनिष्ठता का सुन तू घोर घर्षण छन-छन छनकती पायल का मत रख आकर्षणधन की धौंस से न धर धीमे से गतिरोध जन की जड़ता का कर पुरजोर विरोध.......
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Tag :अर्चना
  May 4, 2013, 7:01 pm
आज प्रमोद ताम्बट जी के ब्लॉग से एक व्यंग्य रचना --मेरे गहरे साहित्यप्रेमी दोस्त और मैंजब पॉडकास्ट बनाने के लिए कहानियों की खोज में थी तो फ़ेसबुक पर स्टेटस लिखा ---"मैं कुछ अच्छी कहानियों की खोज में हूं, जिनका पॉडकास्ट बना सकूं, १० से १५ मिनट की ... अगर लिंक खोजती हूं और अनुमति...
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Tag :प्रमोद ताम्बट
  April 23, 2013, 2:16 pm
पिछले कुछ दिनों से मन स्थिर नहीं है ..कुछ पन्ने पलटे कुछ ड्राफ़्ट में कुछ पंक्तियां मिली ऐसे ही कुछ पलों की साथी.... और ये गीत/गज़ल..... और ये आवाजें ... शिद्दत से चाहा, फ़िर भी हम चूकेवक्त और मन, किसके रोके रूके... वक्त फ़िर जाने क्यों खुद को दोहराता हैमन भला कब वापस लौट कर आता है...वक...
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Tag :अर्चना
  April 21, 2013, 4:49 pm
 ये है वीनू ..... मैसूर मे वत्सल के घर वाली  गली का आम कुत्ता एक दिन बाहर से कूं -कूं की आवाज आने पर वत्सल ने बाहर जा कर देखा (आम तौर पर उसका आने का समय दस- साढ़े दस बजे का रहता है ) ये ही आवाज कर रहे थे वत्सल ने ब्रेड ले जाकर दी ,पहली ब्रेड को मुंह मे दबाकर वो भागते हुए गली के दूसरे छ...
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Tag :वत्सल
  April 19, 2013, 12:41 am
नीरज गोस्वामी जी (इनके बारे मे जानिए यहाँ भी )की एक गजल को आवाज देने की कोशिश की थी -बहुत समय पहले "मिसफिट सीधीबात" के लिए पोस्ट भी किया था,अब वहाँ divshare की लिंक काम नहीं कर रही तो यहाँ साझा कर रही हूँ ,सुनना चाहें अगर ---...
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Tag :ताऊ
  April 18, 2013, 11:44 am
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  गूगल के द्वारा अपनी रीडर सेवा बंद करने के कारण हमारीवाणी की सभी कोडिंग दुबारा की गई है। हमारीवाणी "क्...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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