| आज प्रमोद ताम्बट जी के ब्लॉग से एक व्यंग्य रचना --मेरे गहरे साहित्यप्रेमी दोस्त और मैंजब पॉडकास्ट बनाने के लिए कहानियों की खोज में थी तो फ़ेसबुक पर स्टेटस लिखा ---"मैं कुछ अच्छी कहानियों की खोज में हूं, जिनका पॉडकास्ट बना सकूं, १० से १५ मिनट की ... अगर लिंक खोजती हूं और अनुमति... |
| पिछले कुछ दिनों से मन स्थिर नहीं है ..कुछ पन्ने पलटे कुछ ड्राफ़्ट में कुछ पंक्तियां मिली ऐसे ही कुछ पलों की साथी.... और ये गीत/गज़ल..... और ये आवाजें ... शिद्दत से चाहा, फ़िर भी हम चूकेवक्त और मन, किसके रोके रूके... वक्त फ़िर जाने क्यों खुद को दोहराता हैमन भला कब वापस लौट कर आता है...वक... |
| ये है वीनू ..... मैसूर मे वत्सल के घर वाली गली का आम कुत्ता एक दिन बाहर से कूं -कूं की आवाज आने पर वत्सल ने बाहर जा कर देखा (आम तौर पर उसका आने का समय दस- साढ़े दस बजे का रहता है ) ये ही आवाज कर रहे थे वत्सल ने ब्रेड ले जाकर दी ,पहली ब्रेड को मुंह मे दबाकर वो भागते हुए गली के दूसरे छ... |
| नीरज गोस्वामी जी (इनके बारे मे जानिए यहाँ भी )की एक गजल को आवाज देने की कोशिश की थी -बहुत समय पहले "मिसफिट सीधीबात" के लिए पोस्ट भी किया था,अब वहाँ divshare की लिंक काम नहीं कर रही तो यहाँ साझा कर रही हूँ ,सुनना चाहें अगर ---... |
| एक कहानी नन्हें पंछियों की जुबानी ....जीना तो है उसी का जिसने ये राज जाना -है काम आदमी का औरों के काम आना ...........मैसूर के कारंजी लेक में वत्सल के साथ घूमते हुए जब एक बैंच पर बैठी तो सामने ये पंछी बैठा दिखा किसी के इंतजार में , और फिर जो देखा वही कैद किया वत्सल ने केमरे के साथ ... प्र... |
| इन दिनों वत्सल के पास मैसूर आई हुई हूँ ... कहते है खाली दिमाग शैतान का घर होता है :-) --- खुद को काम में इतना झौंक दो की दिमाग कभी खाली ही न रहे , साथ ही दादी की सुनाई एक कहानी याद आ रही है --एक दयालू सेठजी थे ,कोई बाला-बच्चा नहीं था सेठानी के साथ मिलकर दाना-पुण्य का काम किया करते ,एक ... |
| "काव्यालय" ग्रुप के मित्र ने इसे पढ़कर कमेन्ट में लिखा - "समर्पण-अर्चना "... शीर्षक पसंद आया --आभार उनका "समर्पण-अर्चना ".मैं बनूँ खुशबू पारिजात कीमहकी-महकी खुली पात कीसाँसों में तेरी समाई रहूँख्वाबों में तेरे छाई रहूँआज मैं बनूँ खूशबू चमेली कीमहकूं अध-खुली कल... |
| मैं तो चाहती हूँ,हर वो बच्चा जो मेहनत करता है -बुलन्दी को छुए-अपनी जिम्मेदारियाँ अच्छी तरह से निभाए-हमेशा अपने काम में सफ़लता पाए-खुद भी खुश रहे और सबको खुश रखे-कभी गुस्सा न करे...अपना वक्त जाया न करे-अपना नाम रोशन करे ताकि सबको उस पर फख्र हो...-हर कोई कह सके कि हाँ मैं उसे ज... |
| कुछ तो है नितिश कु. सिंग के ब्लॉग से उनके दिल कि बात ...... |
| मौन में हुंकार भरते, यही मेरे आगाज हैंमुआफ कर दें वो सभी, जो हुए नाराज हैंरंग भरती थीं खुशी से, जिन्दगी में जो मेरीतितलियाँ वो आज देखो फूल की मोहताज हैंधड़कनों को तुम मेरी न छीनना मुझसे कभीगीत मेरे बज सकें उसका वो ही एक साज हैंएक जुगनू था दिखाता मंजिलें मुझको कभीउसके खोन... |
| सोनल रस्तोगी जी की लिखी कहानी अधूरी .....सुनिए -... |
| वो अब हमेशा के लिए मौन रहता हैथोड़े ही वक्त में मेरी भाषा सीख गया.. मुझसे रुकने को कह चल पड़ा अकेले सितारों की दुनिया में जा छिपा कहीं ...वादा किया था उससे -कहा मानूंगीरह गई हूँ अकेले,अब तक खड़ीवहीं... चलो चलें सपनों की ओर दूर जा चुके अपनों की ओर ...... |
| सुबह से खोज रही हूँ तुमकोएक बार भी न दिखी मुझकोमुझको है तुम संग फ़ुदकनाचीं-चीं करते तुमसा ठुमकनादाना अब तक रखा हुआ हैपानी - कटोरा भरा हुआ हैबोलो कि अब कल आओगीमिले बिना न कल जाओगी .... -अर्चना... |
| काव्यांजलिब्लॉग से धीरेन्द्र सिंह भदौरिया जी का लिखा एक गीत -- ... |
| रात की चौखट पर,शाम के रस्ते ही, सन्नाटे को चीर, उदासी पहुँच जाया करती हैजाने क्यों,रात के घर मेंउजेला नहीं हुआ करता,स्वागत में बत्तियाँ बुझ जाया करती है...जैसे कल शामचल कर आ गई थी उदासी रात की चौखट पर और नींद बतियाती रही थीउसके आने परबत्तियाँ बुझा कर...नम तकिये पर...आज नींद ब... |
| अहसासों को कलम में उतारना आसां तो नहीं हैमगर कलम को बोलते सुनना अच्छा लगता है ... आज कलम बोल रही हैआशीष राय जीकी -- रात:,संध्या, सूर्य, चन्द्रमा, भूधर,सिन्धू, नदी, नालाजल,थल, नभ क्या है? न जानता वर्षा,आंधी, हिम ज्वालाविश्व नियंता कभी न देखा, पर इतना कह सकता हूँजिसने विश्व रचा ह... |
| माँ-----कब याद नहीं आती ?.....हर पल,हर दिन .....मेरे साथ रहती है .....मुझसे बातें करती है ....मुझे छोड कर कहीं नहीं जाती है .....आज भी आयेगी .....औरमेरे साथ केक खाएगी.... माँ को ७५ वें जन्मदिन की शुभकामनाएँ ... |
| आनन्द --- १ ....तब से लेकर अब तक आनन्द से सम्पर्क बना हुआ है ... सुख दु:ख के पल साझा करते हैं आपस में मैं और आनन्द ...जब उसे पता चला कि मेरे पैर में फ़्रेक्चर हुआ है ,तब उसने मेरे लिये तीन किताबें और एक बी. पी.मॉनिटर गिफ़्ट में भेज दिया था...अब जब कभी तबियत पूछता है, तो उसे बी.पी. चेक करके ... |
| महिला दिवस पर विशेष :- जीवन में, सुखों और दुखों के बीच बिताए सुहाने पलों की खुमारी वाईन की खुमारी से बेहतर है,ऐसा नशा - किहोश ही नहीं रहता ...कभी देखें हैं तुमनेजीवन के इंद्र धनुषी रंग...इनसे बिछड़ कर जीने का मन नहीं होता कभी..सारी रंगीन तसवीरें ..साफ़ जो होती है ..आईने की तरह....चमक... |
| अभी तो कुछ लिखा ही नहीं है इस लड़के ने ...कहता हैफिर कभी लिखेगा ... जाने कब लिखेगा और क्या लिखेगा भगवान ही जाने ! ... :-) मैं तो सोच रही हूँ ये जब लिखेगा -वो दिन कैसा होगा ? ... |
| आज रेडक्रास से जुड़ी -अंजना दयाल जी से मिलते हैं--ब्लॉग है -रंगबिरंगीएकताअंजना दयाल जी की एक रचना ... |
| एक पोस्ट समीर लाल जी की उनके ब्लॉग "उड़नतश्तरी"से . .. कई दिन ....बल्कि साल कहूँ तो भी ठीक होगा से पढ़ रही हूँ ,महीना पंद्रह दिन में याद आती रही है,कई बार कोशिश की रिकार्ड करने की पर मेरी आवाज में कभी अच्छी नहीं लगी मुझे , पोस्ट ही ऐसी है कि पुरूष स्वर में ही अच्छी लगेगी हमेशा ऐसा ही... |
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