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Blog: तीन पत्ती

Blogger: मिसिर
पलीता पटाखे से पहले जल जाता है वह नहीं जान पाता --कितनी आवाज़ हुई,कितना धुआँ उठा,कितनी चिंगारियाँ उड़ी ,और कितनी रोशनी हुई ,वह धमाके के बाद के जश्न में शामिल नहीं होता ,मध्यवर्गीय पलीता दिल में रखता है एक शौक़-ए -नज्जारा !!वह तय करता है --कि अबसे पटाखे कोबाहर से समर्थन देगा ... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   5:17am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
Saturday, October 6, 2012इतनी कड़ी  रोटी थीकि निवाला तोड़ने मेंमेरे नाखून टूट गएऔर चबाने में दांत ,जुबान तो इतना डर गईकि जोड़ दिए हाँथ औरकरने लगी प्रार्थना ,दिमाग ने कर लिया समझौताऔर अब वह लालटेन की लौ कोनीची रखने पर राजी है ,लकड़ियों ने भी मान लिया है  कितेज़ आँच  में रोटी कड़ी  हो जात... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   5:16am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
जेबें तो सब उनकी ही हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वेहमारे कपड़ों में सिली हैं !... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:14am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
प्यार मुर्दों के बस का नहीं उनके ठन्डे बदन ज़रा देर को भी नहीं टिका पाते थोड़ी सी कुनकुनाहट वे रखते हैं अपना फर्श हरदम साफ़ वे किताबें नहीं झाडू पढ़ते हैं !... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:13am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
मैं आपके सामने आना चाहता हूँ लेकिन अपनी रूचि और नाप के कपड़ों में आपकी दीउतरनो  में नहीं !... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   5:12am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
हम  कायर बने रहनापसंद करते हैं,जब तक कि हमारा सिर  शेर के जबड़े मेंन हो !... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   5:11am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
देर से उठा सूरज हड़बड़ा कर  उसी आकाश  में निकल आता है    जिसमें कल डूबा   था !... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:10am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
पर्व की बधाई न दे सकूँगा  उन्हें जो इसे नहीं मना सकेंगे ,न उन्हें जो इसे उनके बिना मनाएंगे ।... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   5:09am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
Saturday, November 17, 2012वह पत्थरगोल तो नहीं थालेकिन एक लम्बी ढलान परदेर तक लुढ़कने के बादगोल हो गया !अब एक हलकी -सी ठोकरउसे दूर तक लुढ़का देती है |लेकिन एक और पत्थर भी हैउससे भी ज्यादा गोल और चिकना--उसका प्रतिरोध ,जब लुढ़कता हैउससे भी आगे जाता है |... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   5:09am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
नदी के बहते पानी की तरहनहीं होता है परिवर्तन, वह होता है --जैसे सीढ़ियों पर रखे हों बर्तन ,पहले एक भरेफिर उससे होकर दूसरे में गिरने लगे  पानी तब तक तीसराइंतज़ार करे......................................................तुम किस बर्तन में होजानते हो ? ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   5:07am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
जुल्म और अन्याय के खिलाफ तुम्हारा नारे लगानासमझ में आता है लेकिन  बिलकुल समझ में नहीं आता सिर्फ नारे लगाना और हर बार हक पाए  बिना खाली हाथ लौट आना !... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   5:06am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
यह लोहे की फ़ुटबाल है !!इससे लोहे के पैर वाले खेलते हैं बाक़ी इस पर पैरों को लोहा बनाने  का अभ्यास करते हैं !2-मेरा घर ही मेरा देश है उसके चारों  और एक बाज़ार है और उसके आगेदूर-दूर तक फैला हुआ  हुआ अखबार है |... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:03am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
यह लोहे की फ़ुटबाल है !!इससे लोहे के पैर वाले खेलते हैं बाक़ी इस पर पैरों को लोहा बनाने  का अभ्यास करते हैं !2-मेरा घर ही मेरा देश है उसके चारों  और एक बाज़ार है और उसके आगेदूर-दूर तक फैला हुआ  हुआ अखबार है |... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   5:01am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
१.मैं खोल देना चाहता हूँ नदियों के तटबन्ध ताकि वे बहक जाएँ  और किसी दिन किसी दरार के रास्ते मेरे घर में सरक  आयें झूठ मूठ मेरे न न करने पर भीमुझे भिगो दे ,नहला दें और ठंडा कर देंऔर वापस चली जाएँनाली के रास्ते | २.वे मेरी आँखें नहीं धो पातीं मेरे नहा चुकने के बाद वे नदियाँ ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:00am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
अब वह चिड़िया मछली बन गई है ! कल तक जो  अचानक फुर्र से आकर मेरी जाँघों या कन्धों पर बैठ जाया करती थी और एक सुन्दर ,सुकोमल ,रंगीन पंख मेरे लिए छोड़ जाया करती थी ढेर सारे  पंख हो गए थे मेरे पास जिन्हें मैं सबको दिखाता उनकी  आँखों में पंखों के लिए प्रशंसा होती और मेरे लिए ईर्... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   4:59am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
मैं पुरुष हूँ और यह मेरा चुनाव नहीं ,मुझे इसका कोई पछतावा नहीं और न ही कोई शर्मिंदगी मैंने तो नहीं दिखाई कभी किसी स्त्री के प्रति दरिंदगी न ही अपने बाहुबल से रौंदा उसकी कोमलता को बल्कि उसे संभाला है, सहेजा  है ,संवारा है ,प्रेम किया है उसे !हाँ ,मैं पुरुष हूँ देह से और  म... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   4:57am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
जरूरी चीजें हमलावर होती हैं !वे अपनी अपरिहार्यता का पाश लिए हमारी तरफ बढ़ती हैं और हमें जकड़ लेती हैं !बचाव में हमें करना होता है उन्हें निरस्त्र या निरंतर तिरस्कार सेउनकी धार को कुंद !वे हमारे सिर पर सवार न हो जाएँ हम उन्हें जमीन पर अपने बराबर रखने  की जगह एक गहरे गड्... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:55am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
१--छाती तक चढ़ीमँहगाई की नदी का पूरा दबाव हैआदमी परकि वह मछली बन जाएऔर सिर्फ चारा देखेचारे में छिपा काँटा न देख पाए !२--मंहगाई नेचौकी को और छोटा कर दिया ,जो रिश्ते किनारे बैठे थेजमीन पर गिर पड़े !... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   4:54am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
वह मान बैठी है --अस्तित्व ही उसकी व्याधि है ,जिससे मुक्ति के लिए ढलानों की तलाश में बल खाती हुई वह अपना जिस्म तोड़ती रहती है, वह हर गड्ढे में उतर कर नापती  है अपने समां जाने भर की जगह,वह हर उस नदी के साथ हो लेती है  जिसके पास किसी समंदर  का पता है ,वह नहीं जानती कि पीछे आने वा... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   4:53am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
इतना भर गया था फ़ोड़ाकि कभी भी लाल पड़ सकता था ।पहले चीरे सेखूब सारा मवाद निकलागाढ़ा और गरम ।दूसरे चीरे सेथोड़ा बदबूदार पानी और ।सर्जन ने रिपोर्ट लगा दी है -" दुबारा अभीइतनी जल्दी नहीं भरेगा फोड़ा ,खतरा टल गया है फिलहाल ,बिल साथ लगा रहा हूँ  "।बच्चा अब मोबाइल पर गान... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   4:47am 22 Jan 2013 #
Blogger: मिसिर
जनपक्ष: भारत में विज्ञान का इतिहास और भौतिकवाद: इधर मार्क्सवाद सम्बन्धी लेखमाला के तहत दर्शन से आरम्भ करने के कारण कई लोगों को भ्रम हुआ कि मैं भारतीय दर्शन पर कोई लेखमाला लिख रहा ह...... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   5:17am 3 Dec 2012 #
Blogger: मिसिर
पढ़ते-पढ़ते: अरुंधती राय : केजरीवाल के खुलासे: पिछले साल अगस्त में अन्ना हजारे के आन्दोलन पर कई महत्वपूर्ण सवालों को उठाते हुए अरुंधती राय ने एक लेख लिखा था. तबसे गंगा में काफी पानी बह ...... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   4:59am 1 Dec 2012 #
Blogger: मिसिर
YOUNG AZAMGARH: समाजवाद क्यों ? - एल्बर्ट आइंस्टीन: समाजवाद क्यों ? - एल्बर्ट आइंस्टीन, 1949 क्या ये उचित है कि जो आर्थिक और सामजिक मुद्दों का विशेषज्ञ नहीं है, समाजवाद के विषय पर विचा...... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   2:57pm 9 Sep 2012 #
Blogger: मिसिर
Monday, July 2, 2012बादल हैं या हवा के जाल फँसी ह्वेल  मछलियाँ हैं ,घसीटता मछुआरा  ले जाता खैंच पश्चिमी बाज़ार अरे ! क्या इनको भीडालेगा बेंच ??... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   4:51am 11 Jul 2012 #
Blogger: मिसिर
ऐसे भागा जैसे गलत पते पर बरस गया हो ,अपने उस भाई से जो सूरज ढके हुए था हटने को बोल गया ताकि बरसा हुआ पानी जल्दी सूख जाए और इस तरह उसने अपनी गलती काकोई सुबूत नहीं छोड़ा !... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   4:49am 11 Jul 2012 #
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