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Blog: जनपद

Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
दिवंगत कवि त्रिलोचन का काव्य-व्यक्तित्व पचास वषों से भी ज्यादा लंबे समय तक फैला हुआ है। त्रिलोचन जी को अपना काव्यगुरू मानने वाले वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह का कहना है- त्रिलोचन एक खास अर्थ में आधुनिक हैं और सबसे आश्चर्यजनक तो यह है कि वे आधुनिकता के सारे प्रचलित सांचों ... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   3:56pm 18 Oct 2012 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
दर्द का अपना इक मकान भी था श्याम सखा श्याम कवि और कथाकार-उपन्यासकार श्याम सखा श्याम ने बुनियादी तौर पर तो इलाज वाली डाक्टरी की पढ़ाई की है और वे एमबीबीएस, एफसीजीपी हैं, लेकिन उन्होंने रचनाकर्म पर पीएच.डी. और चार एम.फिल शोधकार्य भी किए हैं। उनके लेखन का क्षेत्र व्यापक है औ... Read more
clicks 205 View   Vote 0 Like   5:01pm 15 May 2012 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
धरती की सतह पर नाम से अदम गोंडवी की गजलों की किताब दिल्ली के किताबघर से अभी-अभी छपी है। जाहिर है, गजलें नई तो नहीं हैं लेकिन इन्हें बार-बार पढ़ा जा सकता है और यह किताब अपने संग्रह में रखी जा सकती है। पढि.ए इसी संग्रह की दो गजलें- ॥ एक॥ टीवी से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो फि... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   4:39pm 13 May 2012 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
अनिल यादव पेशे से पत्रकार हैं। घुमक्कड़ हैं। गजब के गद्यकार हैं। उनकी कहानियों की पुस्तक नगरबधुएं अखबार नहीं पढ़तींऔर यात्रा पुस्तक वह भी कोई देस है महराजअंतिका प्रकाशन से छपकर आई हैं। दोनों पुस्तकों की खूब चर्चा रही है और सबसे बड़ी बात है कि पाठकों ने इन्हें हाथो-हाथ ल... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   5:36pm 17 Apr 2012 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
यात्रा बुक्स, दिल्ली से छपी है कवाफी की कविताओं की किताब, जिसका नाम माशूक है। उनकी कविताओं का बहुत ही शानदार अनुवाद किया है पीयूष दईया ने। पीयूष स्वयं एक अच्छे कवि हैं।॥ जहां तक हो सके॥कवाफीजैसा चाहो वैसातो कम से कम इतना करो उसे बिगाड़ो मत...बैर मत काढ़ो यूं खुद से...सब के इत... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   4:06pm 14 Apr 2012 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
गिर्दा कैसा हो स्कूल हमारा! जहां न बस्ता कन्धा तोड़े, ऐसा हो स्कूल हमाराजहां न पटरी माथा फोड़े, ऐसा हो स्कूल हमारा जहां न अक्षर कान उघाड़े, ऐसा हो स्कूल हमाराजहां न भाषा जख्म उखारे, ऐसा हो स्कूल हमाराकैसा हो स्कूल हमारा!जहां अंक सच-सच बतलाए, ऐसा हो स्कूल हमाराजहां प्रश्न हल ... Read more
clicks 233 View   Vote 0 Like   5:16pm 13 Apr 2012 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
वीरेन डंगवाल बहुत प्यारे कवि और अपनी ही धज की कविताएं लिखने वाले वीरेन डंगवाल की कविताओं के लिए उनके मुरीदों को हमेशा इंतजार और उत्सुकता रहती है। उनकी कविता पुस्तकें दुष्चक्र में स्रष्टाऔर स्याही तालबहुतों के लिए धरोहर सरीखी हैं। पढि.ए इस मौसम की यह कविता... आ गई हरी स... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:36pm 23 Oct 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
दुष्यंत कुमारनई कविता आंदोलन के प्रतिष्ठित कवि दुष्यंत कुमार को सबसे ज्यादा उनकी गजलों के लिए जाना गया। यहां पेश हैं उनकी गजलों की किताब साये में धूप से तीन गजलें...॥ एक ॥मत कहो, आकाश में कुहरा घना है।यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है॥सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,क्या क... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:06pm 22 Oct 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
बोधिसत्वबहुचर्चित कवि बोधिसत्व की यह कविता हाल ही किसी ब्लॉग पर पढ़ी थी। रामलीला के इस मौसम में आप भी पढि.ए, यह कविता बहुत-कुछ सोचने पर विवश करेगी आपको। दशरथ की एक बेटी थी शान्तालोग बताते हैंजब वह पैदा हुईअयोध्या में अकाल पड़ाबारह वषों तकधरती धूल हो गयी!चिन्तित राजा को स... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   3:51pm 7 Oct 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
कवि संजय चतुर्वेदी की लोक रंग में रंगी और व्यंग्य के रस में  पगी ये कवितायेँ आज की वस्तुस्थितियों पर गजब की टिपण्णी करती हैं. इन कविताओं में जो विकट उत्पात है, क्या यह आज के बाजारवादी वक्त का उत्पात  नहीं है ?॥ अलप काल बिद्या सब आई॥ऐसी परगति नि... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:22pm 12 Sep 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
संवेदनशील लेखक-पत्रकार रत्नेश कुमाररहने वाले बिहार के हैं और नौकरी गुवाहाटी में करते हैं। नेकदिल इंसान हैं और गहरी सामाजिक समझ है उनके पास। उन्होंने अपने ढंग की विधा विकसित की है- संवाद कथा। ये संवाद कथाएं लगभग सूक्तियों जैसा असर छोड़ती हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ संव... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   2:35pm 6 Sep 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
संवेदनशील लेखक-पत्रकार रत्नेश कुमार रहने वाले बिहार के हैं और नौकरी गुवाहाटी में करते हैं। नेकदिल इंसान हैं और गहरी सामाजिक समझ है उनके पास। उन्होंने अपने ढंग की विधा विकसित की है- संवाद कथा। ये संवाद कथाएं लगभग सूक्तियों जैसा असर छोड़ती हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ सं... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   3:46pm 4 Sep 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
1988 में छपी ज्ञानप्रकाश विवेककी दो गजलें यहां पेश हैं। इन्हें पढ़कर आप खुद सोच सकते हैं कि दुनिया चाहे जितनी तेजी से बदल रही हो, मगर आज लगभग 23 साल बाद भी ये अहसास कितने ताजा हैं और कतई बासी नहीं हुए हैं... एक       ये कारवाने वक्त कसक छोड़ जाएगा   हर रास्ते पर अपने ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   4:57pm 31 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
नागार्जुन 1974 में शुरू हुआ बिहार का छात्र-युवा आंदोलन लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में देखते ही देखते देशव्यापी संपूर्ण क्रांति में बदल गया था। लेकिन अंतत: उसकी परिणति व्यवस्था परिवर्तन न होकर महज सत्ता परिवर्तन बन कर रह गई और जेपी का मकसद पूरा नहीं हो सका। बाबा न... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   2:24pm 27 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
नागार्जुन किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है?कौन यहां सुखी है, कौन यहां मस्त है?सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू हैगालियां भी सुनता है, भारी थूक-चाटू हैचोर है, डाकू है, झूठा-मक्कार हैकातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार हैजैसे भी टिकट मिला, जहां भी टिकट मिलाशासन के घोड़े पर वह भी सवार है... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   3:02pm 20 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
शहरों में कहां देखने को मिलेगी गीले भादों की तिमिराच्छन्न अमावस की रात? वह रात, जिसे उत्तराखंड के जंगल में बाबा नागार्जुन ने न सिर्फ देखा था, बल्कि भरपूर जिया भी था। आप भी देखिए, वह रात, जो टीवी के परदे पर नहीं दिख सकती...जान भर रहे हैं जंगल में/ नागार्जुनगीली भादोंरैन अमाव... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   4:06pm 18 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर पढि.ए इंसान और इंसानियत की जंग लड़ने वाली सबसे ताकतवर कलम से निकली एक शानदार नज्म- जी हां, फैज अहमद फैजकी...मोती हो के शीशा जाम के दुरजो टूट गया, सो टूट गयाकब अश्कों से जुड़ सकता हैजो टूट गया, सो टूट गयातुम नाहक टुकड़े चुन-चुनकरदामन में छुपाए ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   3:29pm 14 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
जब भी कोई जवान या सिपाही छत्तीसगढ़ में या कहीं और मारा जाता है तो अनायास फैज अहमद फैज की यह नज्म याद आ जाती है। इसे आप भी पढ़ लीजिए...सिपाही का मर्सिया/ फैज अहमद फैज उटूठो अब माटी से उटूठोजागो मेरे लालअब जागो मेरे लालतुम्हारी सेज सजावन कारनदेखो आई रैन अंधियारननीले शाल-दोशा... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   2:46pm 11 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
देश-विदेश में खूब घूम चुके और नौकरी भर परदेस में रहे हिंदी-मैथिली के प्रतिष्ठित कवि कीर्ति नारायण मिश्र सेवा निवृत्ति के बाद आजकल अपने पुश्तैनी परिवेश में बिहार के बरौनी जिलांतर्गत शोकहरा में रहते हैं। साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कीर्ति नारायण जी की कविता और गद्य की ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   3:46pm 7 Aug 2011 #
Blogger: अरविन्द चतुर्वेद
दिवंगत कवि श्रीकांत वर्मा का आखिरी कविता संग्रह मगध 1984 में छपा था। इसकी तमाम कविताओं में ऐतिहासिक पात्र और स्थान आते हैं, लेकिन ये कविताएं इतिहास की नहीं, वर्तमान की हैं। पढि.ए यह कविता...चिल्लाता कपिलवस्तु/श्रीकांत वर्मामहाराज! लौट चलें-उज्जयिनी पर शासन की इच्छामेरी ... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   3:10pm 5 Aug 2011 #
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