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Blog: Patali

Blogger: K. R. Joshi
                  बर्लिन विश्वविध्यालय ने शंख ध्वनि का अनुसंधान  कर के यह सिद्ध कर दिया कि शंख-ध्वनिकी शब्द-लहरें बैक्टीरिया को नष्ट करनेके लिए उत्तम एवं सस्ती औषधि है। प्रति सेकेण्ड सत्ताईस घन फुट वायु-शक्तिके जोर से बजाय हुआ शंख 1200 फुट दूरी के बैक्टीरिया को नष्ट कर डालत... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:47am 24 Jun 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
             किसी शहर में एक सेठ रहता था। सेठ  का एक बेटा था। सेठ  के बेटे की दोस्ती कुछ ऐसे लड़कों से थी जिनकी आदत ख़राब थी। बुरी संगत में रहते थे। सेठ को ये सब अच्छा नहीं लगता था। सेठ ने अपने बेटे को समझाने की बहुत कोशिस की पर कामयाब नहीं हुआ। जब भी सेठ उसको समझाने की कोशिस ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   3:10am 29 May 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
              किसी जंगल में एक भील रहता था| वह बहुत साहसी,वीर और श्रेष्ट धनुर्धर था| वह नित्य प्रति बन्य जीव जन्तुओं का शिकार करता था और उस से अपनी आजीविका चलता था तथा अपने परिवार का भरण पोषण करता था| एक दिन वह बन में शिकार करने गया हुआ था तो उसे काले रंग  का एक विशालकाय जंगली ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   5:00am 13 May 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
                     बहुत समय पहले की बात है| किसी जंगल में एक गाय रहती थी| जो जंगल में घास चर कर अपना पेट भरती थी| इसी जंगल में एक शेर भी रहता था जो जंगली जानवरों का शिकार किया करता था| समय आने पर गाय ने एक बछड़े को जन्म दिया| बछड़े को जंगली जानवरों से बचाने के लिए गाय ने एक सुरक्ष... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   12:34pm 3 Apr 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
   विक्रम संवत का आरम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है, जो इस वर्ष २३ मार्च को है| भारत में कालगणना  इसी दिन से प्रारंभ हुई| ऋतु मास  तिथि एवं पक्ष आदि की गणना भी यही से शुरू होती है| विक्रमी संवत के मासों के नाम आकाशीय नक्षत्रों के उदय अस्त से सम्बन्ध रखते हैं| वे सूर्य च... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:01am 23 Mar 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
              पहले  समय मे एक  प्रदेश मे  एक राजा राज्य  करते थे उन का नाम था जयेंदर उन का राज्य काफी दूर दूर तक फैला हुआ था .राजा  दयालु  थे और अपनी  परजा से काफी प्यार करते थे. परजा भी राजा को बहुत चाहती थी | राजा  का  एक बेटा था, जो काफी चतुर  और होनहार युवराज था, वह राजा के साथ र... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   7:58am 10 Mar 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
हरि खेल रहे हैं होली,देबा तेरे द्वारे में।टेसू के रंग में रंगे कपोल हैं, चार दिशा दिशा फाग के बोल हैं, उड़त अबीर गुलाल, देबा तेरे द्वारे में। हरि खेल ...हाथ लिए कंचन पिचकारी, गावत खेलत सब नर नारी, भीग रहे होल्यार,  देबा तेरे द्वारे में।हरि खेल ...भाग कि मार पड़ी उसके सर,कौन अभाग... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:27am 5 Mar 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
          यह  एक कुमाऊ  की पुरानी लोक कथा है| किसी गांव मे  एक गरीब परिवार रहता था | परिवार क्या था एक माँ थी एक बेटी थी| बेटी का नाम पुतइ  था| दोनों माँ बेटी जंगल से फल फूल तोड़  कर उन्हें बेच कर अपना गुजारा चलाती थीं| एक दिन माँ जंगल मे फल फूल तोड़ने गई |बेटी को घर की रखवाली के लिए ... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   5:12am 29 Feb 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
                किसी गांव में  एक गरीब ब्राह्मण  रहता था | ब्राह्मण  गरीब होते हुए भी सच्चा और इमानदार था| परमात्मा में  आस्था रखने वाला था | वह रोज सवेरे उठ कर गंगा में  नहाने जाया करता था| नहा धो कर पूजा पाठ किया करता था| रोज की  तरह वह एक दिन गंगा में  नहाने गया नहा कर जब वापस आ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   7:25am 21 Feb 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
                                   नास्ति  विद्यासमं  चक्षुर्नास्ति  सत्यसमं  तप:|                                   नास्ति रागसमं दुखं नास्ति त्यागसमं  सुखम||                                   उत्थातव्यं  जाग्रतव्यं  योक्तव्यं  भूति  कर्मसु |                                   भविष्यतीत्येव   मन:  क... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   6:14pm 6 Feb 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
शक्यो वारयितुं जलेन हुतभुक छत्रेन सुर्यातपो                           नागेन्द्रो निशितान्कुशेन संदो दण्डेन गोगर्दभौ। व्याधिर्भेषजसंग्रहैश्र्च विविधैर्मन्त्रप्रयोगैर्विष                सर्वस्यौषधमस्ती शास्त्रविहितं मूर्खस्य नास्त्यौषधम।।        जैसे आग को पानी से ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   9:41am 26 Jan 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
                 वेदों में उसी स्त्री को नारी कहा है जो पतिवल्लभा तथा पति का अनुगमन करने वाली है। ऐसी नारी ही सद-गृहिणी कहलाती है और ऐसी गृहिणी से संपन्न घर ही गृह कहलाता है। लकड़ी पत्थर आदि से निर्मित स्थान गृह नहीं कहलाता, वह तो गृह होते हुए भी शून्य के समान है। कदाचित गृह ... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:59pm 20 Jan 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
              कुमाऊ में मनाए जाने वाले घुघुतिया त्यौहार की अलग ही पहिचान है| त्यौहार का मुख्य आकर्षण कौवा है| बच्चे इस दिन बनाए गए घुघुते कौवे  को खिलते हैं| और कहते हैं "काले कावा काले घुघुति मावा खाले"|  बात उनदिनों की है जब कुमाऊ में चन्द्र वंश के राजा राज करते थे| राजा ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   5:20pm 12 Jan 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
छू लेने दो इन नन्हे हाथों को आसमान          वरना चार किताबें पढके हम जैसे हो जाएँगेजी लेने दो खुशियों में चार पल इन्हेंवरना दुनियां में फस कर गम जैसे हो जाएँगेनाच लेने दो इन्हें आज अपने कदमों परवरना हाथों में नाचने वाली रम जैसे हो जाएँगेछोड़ दो आजाद इन्हें आज जीने कोवरना ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   11:19am 3 Jan 2012 #
Blogger: K. R. Joshi
                साल 2011 कुछ ही घंटों का मेहमान है, कुछ ही घंटों बाद साल 2012 आ  जायेगा| नया  साल 2012 आप लोगों के लिए खुशियों भरा हो मंगलमय हो भगवान आप सब की मनोकामना पूर्ण करे और आप सब नए साल 2012 में दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की  करें| यह मेरी आप सब के लिए हार्दिक शुभकामना है| कल नए साल ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   2:07pm 31 Dec 2011 #
Blogger: K. R. Joshi
               बहुत समय पहले की बात है| किसी गांव में एक किसान रहता था| गांव में ही  खेती का काम करके अपना और अपने परिवार का पेट पलता था| किसान अपने खेतों में बहुत मेहनत से काम करता था, परन्तु इसमें उसे कभी लाभ नहीं होता था| एक दिन दोपहर में धूप से पीड़ित होकर वह अपने खेत के पास ए... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   6:20am 23 Dec 2011 #
Blogger: K. R. Joshi
              पादौ तौ सफलौ पुंसां यू विष्णु  गृह्गामिनौ|   तौ करौ  सफलौ ज्ञेयौ  विष्णुपुजापरौ तू यौ||              ते  नेत्रे  सफले पुंसां पश्यतो ये जनार्दनम|  सा जिह्वा  प्रोच्यते    सभ्दिर्हरीनामपरा तू या ||              सत्यं सत्यं पुन: सत्यामुदधृत्य भुजमुच्यते|   तत्वं गुरुस... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   1:42pm 9 Dec 2011 #
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