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प्रवाह

तेरी गली से होकर गुजरने लगा है आईनातेरी हर आहट पर संवरने लगा है आईना.लटें संवार कर वह चली गयी पल भर मेंजाने क्या सोचकर उछलने लगा है आईना.जाने कब, कहाँ, किस राह से तुम गुजरो हर राह में बेसब्र बिखरने लगा है आईना .उकेरता नहीं किसी और का प्रतिबिम्ब यहरात ढलते ही देखिये कहरने ल...
प्रवाह...
Tag :ग़ज़ल
  June 26, 2012, 9:34 am
आईनों के चेहरेपीले हो गए जब से पत्थर इतने रंगीले हो गए .आईना टूटकर बिखर जाता है जब भी खुद को आईने के सामने पाता है .आईना उनकी आँखों के ‘आईने’ में खुद को निहारता है,वे संवरने आयें इससे पहले ही खुद को संवारता है ...
प्रवाह...
Tag :क्षणिकाएं
  May 11, 2012, 8:32 pm
नजर मिलीनजर झुकीकथोपकथन हो गया मन बावरान जाने किन ख्वाबों में खो गया.‘पत्थर’ ने पत्थर माराचोट लगी ‘पत्थर’ कोपत्थरमय फिर आसमान हो गया‘पत्थर’ भी भागेघर को . जुल्म को कभीसह मत गलत न हो कभी सहमत . ...
प्रवाह...
Tag :शब्द चित्र
  April 29, 2012, 12:59 pm
चलो मान लिया कि तुम नहींदृष्टिहीन हो, पर फायदा क्या जब तुम्हारे अंदरदृष्टि ही न हो *************बिछा रखा था जिसके लियेहर राह में आईनाआस टूटने लगी है अब तक तो वोआई ना ***************ओ री सखी !अब तो शुरू कर देसजना आ ही रहे होंगे तुम्हारेसजना ...
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Tag :शब्द चित्र
  April 16, 2012, 8:45 pm
धूप में भूखा-प्यासा जलता रहा सूरजफिर भी पूरे दिन चलता रहा सूरज .तुम्हारी चुप्पी केउस कथन को सुनता रहा मैं. सुन न पाया तदुपरांत जो कुछ कहती रही तुम. .कार्यालय के पिछली गेट से निकल गएपार्टी प्रवर्तकमुख्य द्वार पर ठगे से खड़े रह गएसम अर्थक ...
प्रवाह...
Tag :शब्द चित्र
  April 7, 2012, 10:21 pm
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