Hamarivani.com

जज़्बात

 यही तो गड़बड़झाला है दाल में सब काला है .ओहदे पर तो होगा ही   वो जब उसका साला है .कैसे कहें जो कहना है मुंह पर लगा ताला है .शायद किस्मत साथ दे सिक्का दुबारा उछाला है .शब्दों के बगावती तेवर परेशानी में वर्णमाला है .किरदार समझने लगे हैं दुनिया एक रंगशाला है .जख्मों ने मेरे जिस्...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  July 5, 2012, 9:21 pm
चिठिया लिख के पठावा हो अम्मा गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा टुबेलवा क पानी आयल की नाही धनवा क बेहन रोपायल की नाही झुराय गयल होई अबकी त पोखरी परोरा* क खेतवा निरायल की नाही अपने नजरिया से दिखावा हो अम्मा गऊंआ क तूं हाल बतावा हो अम्मा छोटकी बछियवा बियायल त होईपटीदारी में इन्...
जज़्बात...
Tag :गीत
  June 29, 2012, 8:48 am
मेरा रहबर हर कदम पर मुझको पहाड़ देता हैसूरज के कहर से बचाने के लिए ताड़ देता है.आशियाना बनाने में वह इस कदर मशगूल हैन जाने कितनों का वह छप्पर उजाड़ देता है.हालात बयाँ करने के लिए जब भी खत लिखापता देखकर बिना पढ़े बेरहमी से फाड़ देता है.नयन नीर से सिंचित ज़ज्बाती इन पौधे को देखा उ...
जज़्बात...
Tag :
  June 22, 2012, 10:13 am
तुम पहाड़ पर चढ़ोहम तुम्हारी सफलता के लिए दुआएं करेंगे; तुम जमीन खोदकर पाताल में उतर जाओ, जब तक तुम बाहर नहीं आ जाते हम तुम्हारे लिए फिक्रमंद रहेंगे.हम लड़ रहे हैं; लड़ते रहेंगे तुम्हारे लिए.तुम चिलचिलाती धूप मेंरेतीली जमीन पार कर उस पार जब पहुंचोगे, हवाई मार्ग से पहुंचकर ह...
जज़्बात...
Tag :कविता
  June 3, 2012, 9:28 pm
छत्तीस का आकड़ा हैक़दमों में पर पड़ा है .आंसुओं को छुपा लेगाजी का बहुत कड़ा है.उंगलियां उठें तो कैसे?कद उनका बहुत बड़ा है .लहुलुहान तो होगा ही पत्थरों से वह लड़ा है .कब का मर चुका हैवह जो सामने खड़ा है.खाद बना पाया खुद को महीनों तक जब सड़ा है.कल सर उठाएगा बीजआज धरती में गड़ा है...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  May 23, 2012, 8:44 pm
आज वह एक बार फिर मरा हैपर यह कोई खबर नहीं है वैसे भी, उसके मरने की खबर किसी खबरनवीस के लिए खबर की बू नहीं देती, क्योंकि खबर तभी खबर बन पाती है जब उसमें पंचातारे की नजाकत हो; या फिर बिकने की ताकत हो. .यूं तो यह विषय है अनुसन्धान का कि वह पहली बार कब मरा ?स्वयं यह प्रश्न खुद के अस्...
जज़्बात...
Tag :कविता
  May 17, 2012, 8:10 pm
खाना नहीं, बिजली और पानी नहीं है इस नगर में और कोई परेशानी नहीं है . चूहों ने कुतर डाले हैं कान आदमी के शायद इस शहर में चूहेदानी नहीं है  . चहलकदमी भी है, सरगोशियाँ भी हैं मंज़र मगर फिर भी तूफानी नहीं है . आये दिन लुट जाती है अस्मत यहाँ कौन कहता है यह राजधानी नहीं है . अपनों ...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  May 8, 2012, 9:55 pm
जिस्म को बेइंतिहाँ उछाला मैंनेबिखरकर खुद को संभाला मैंने.बेदर्द का दिया दर्द सह नहीं पायापत्थर का एक ‘वजूद’ ढाला मैंने.किरदार छुपा लेते हैं एहसासों कोखुद को बना डाला रंगशाला मैंने.एहसास उनके रूबरू ही नही होतेन जाने कितनी बार खंगाला मैंने .अब क्या दिखेंगे जख्म के निश...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  May 2, 2012, 7:03 pm
शातिर ये शिकारी हैं ‘कृपा’ के व्यापारी हैं.बीमारी दूर करेंगे क्याखुद ये तो बीमारी हैं .इनके सफ़ेद वस्त्रों मेंजेब नहीं आलमारी हैं .रिश्तों को किश्तों में बेचने वाले पंसारी हैं .घुटनों के बल रेंग रहे फिर भी क्रांतिकारी हैं .जोड़कर माया-स्विश बनते ये अवतारी हैं .धन-साधन यु...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  April 26, 2012, 9:28 pm
मैं शांत और सरल दिखना चाहता हूँ; मैं एक प्रेम गीत लिखना चाहता हूँ,ऐसा भी नहीं कि शब्द नहीं हैं मेरे पास शब्दकोष से मैंने चुन रखा है स्पर्श, आलिंगन और मनुहार जैसे शब्द, जो प्रेमगीत में अवगुंठित हो निश्चय ही,करेंगे सबको निःशब्द.पर इससे पहले कि मैं कुछ लिख पाऊँ सहसा दिख जाते...
जज़्बात...
Tag :कविता
  April 22, 2012, 3:32 pm
आज वह मर गया; ऐसा नहीं कि पहली बार मरा है अपने जन्म से मृत्यु तक होता रहा तार-तार; और मरता रहा हर दिन कई-कई बार, उसके लिए रचे जाते रहे चक्रव्यूह, और फिर यह जानते हुए भी कि वह दक्ष नहीं है - चक्रव्यूह भेदनकला में, उसे ही कर्तव्यबोध कराया गया; और उतारा गया बारम्बार समर में, ह...
जज़्बात...
Tag :कविता
  April 15, 2012, 8:47 pm
कभी हतप्रभ तो कभी हताश ढूढता है वह अपना आकाश. यूं तो वह अत्यंत सहनशील है; पथप्रदर्शकों (?) द्वारा बताए मार्ग पर निरंतर गतिशील है, कोल्हू के बैल सा वृत्ताकार मार्ग के मार्ग-दोष से बेखबर चलता ही जा रहा है; या शायद बेबस और लाचार खुद को छलता ही जा रहा है. कदाचित उसे पता ही न...
जज़्बात...
Tag :कविता
  April 2, 2012, 9:23 pm
चेहरे इतने पीले क्यूं हैं ? नयन कोर गीले क्यूं हैं ? . माना अपनी मौत मरे हैं इनके शरीर नीले क्यूं हैं ? . तुम जहां जश्न मना रहे आसमान में चीलें क्यूं हैं ? . जो राह मुहैया की तुमने वे इतने पथरीले क्यूं हैं ? . शांति सन्देशा लेकर आये नज़रों में पर कीलें क्यूं हैं ? . गमगीनी के इस...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  March 28, 2012, 7:58 am
रंग बदलती दुनिया में, खुद को बदल न पाये हम उलझी हुई उलझनों को और अधिक उलझाये हम भैस बराबर अक्षर फिर भी है वह ज्ञाता रिश्तों के देहरी पर अनुबंधों का तांता भ्रमित करने के चक्कर में, खुद ही को भरमाये हम उलझी हुई उलझनों को और अधिक उलझाये हम नौ-नब्बे के चक्कर में जम कर हुई उग...
जज़्बात...
Tag :गीत
  March 18, 2012, 7:12 pm
माना कि ये रक्तपान करते हैं पर हर रोज गंगास्नान करते हैं . शक के दायरे से बचने के लिए खुद ही को लहुलुहान करते हैं . लूटते हैं जब भी काफिले को मुक्तहस्त से फिर दान करते हैं . हादसे जब होकर गुजर जाते हैं शिद्दत से ये सावधान करते हैं . मुर्दों से इनकी जान पहचान है कब्रिस्ता...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  February 28, 2012, 12:29 pm
अपनी बेगुनाही का हरपाल गवाह रखियेखुद पर खुद ही ख़ुफ़िया निगाह रखिये.दस्तूरन ‘सच’ जब शक के दायरे में होहो सके तो ‘झूठ’ को गुमराह रखिये.बचना चाहो जो बेवजह के ‘सलाहों’ से औरों को लिए आप भी सलाह रखिये . ‘मौत’ की खबर आम हो इससे पहले ही सुगबुगा कर जिंदगी की अफवाह रखिये. माना कि क...
जज़्बात...
Tag :गज़ल
  February 19, 2012, 1:42 pm
भीड़ में होते हैंअनगिनत पाँव पर नहीं होता है भीड़ का अपना पाँव. भीड़ देखती हैअनगिन आँखों से पर नहीं होती हैं भीड़ की अपनी आँखें. भीड़ अक्सर नारे लगाती हैपर नहीं होता है भीड़ का अपना कोई नारा. भीड़ को देखकर भीड़ मुड़ जाती है क्योंकि भीड़,भीड़ से कतराती है. उजाड देती है पल मेंआशियाना, न...
जज़्बात...
Tag :नज़रिया
  February 7, 2012, 8:36 pm
आईने के सामने बैठ खुद को पहचानने की कोशिश मेंरूबरू हो गए मेरे समस्त अन्तर्निहित और अनाहूत किरदार.मेरे वजूद की धज्जियाँ उड़ाते कुछ थे रंगदार; तो कुछ स्वयम्भू सरदार, कोई धारदार हथियारों से लैस था;तो किसी की निगाहों मेंबेवजह तैस था, कुछ न जाने क्या गा रहे थे;तो कुछ लगातार ख...
जज़्बात...
Tag :एहसास
  January 6, 2012, 3:58 pm
चुप रहिएवे कुछ बोलने जा रहे हैंउपलब्धियों को वे तौलने जा रहे हैंभाइयों और बहनोंहमारा देश स्मूथली 'रन' कर रहा हैदेखते नहीं कितनी आसानी से अपना काम'गन' कर रहा हैक्या कहा ?बलात्कार बहुत ज्यादा हुआ हैअरे! इतना भी नहीं पताउम्मीद से बिल्कुल आधा हुआ हैघोटाले-घोटाले क्यूँ चिल...
जज़्बात...
Tag :पुनर्प्रस्तुत
  December 30, 2011, 11:58 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3701) कुल पोस्ट (170753)