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Blog: हमराही

Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
-गिरीश पंकज- बहुत हो गया ऊंचा रावण, बौना होता राम। मेरे देश की उत्‍सव-प्रेमी जनता तुझे प्रणाम।। नाचो गाओ मौज मनाओ कहां जा रहा देश मत सोचो काहे की चिंता व्‍यर्थ न पालो क्‍लेश हर बस्‍ती में है इक रावण, उसी का है अब नाम। नैतिकता-सीता बेचारी, करती चीख पुकार देखो मुझे हर लिया, ... Read more
clicks 239 View   Vote 5 Like   2:52pm 13 Oct 2013 #Girish pankaj
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
-डॉ0 ओमप्रकाश सिंह - भ्रष्‍टाचार आज बैठा है सिर पर ताज धरे। कई हजारे अन्‍ना चीखें रामदेव चिल्‍लायें गांधीवादी हथियारों से लड़ने को मुंह बायें अनुत्‍तरित प्रश्‍नों के आगे पथ पर गाज गिरे। चटक रहीं सीमाएं मन की क्षुब्धित है परिवेश सच के द्वार झूठ बैठा है लगती संधि ि‍वश... Read more
clicks 296 View   Vote 4 Like   2:45pm 13 Sep 2013 #.नवगीत
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
वह आजादी कहाँ मिली?रजनीकांत शुक्लजैसी तुम कहते थे साथी, वह आजादी कहाँ मिली?जनगण के मन की अभिलाषा, आखिर जाकर कहाँ फली?आज द्रौपदी नग्न हो रही भीड़ भरे चौराहों पर,तोड़े जंघा दुर्योधन की, कहाँ भीम से महाबली?बीते दशक मगर अब तक, जंजीर होंठ पर भाषा की,राष्ट्र अभी तक मूक, राष्ट्र ... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   8:13am 19 Feb 2013 #Rajnikant Shukla
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
एक सदी शोषण की जी ली...-रामेन्‍द्र त्रिपाठीएक सदी शोषण की जी ली, अगली फिर जीनी है डर की।दोहरे मापदण्‍ड जीवन के, फूल गाँव के, गंध नगर की।।चक्रवृद्धि का ब्‍याज चुकाकर सचमुच सस्‍ते छूटे,बाहर बाहर ही हम साबुत, भीतर-भीतर टूटे।वैसे ही फिर याद आ गई, अपने कच्‍चे घर की।।झूठे धनुष, ब... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   2:31pm 12 Feb 2013 #.गीत
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
प्रिय पाठक, ब्‍लॉग पर पधारने का शुक्रिया। आपको हम अवगत कराना चाहते हैं कि तकनीकी कारणों से 'हमराही' ब्‍लॉग नए डो‍मेनपर शिफ्ट हो गया है। यदि 5 सेकेण्‍ड में परिवर्तित पते वाला पृष्‍ठ स्‍वत:नहीं खुलता है, तो कृपया यहां परक्लिक करें। आशा है इस कष्‍ट को आप अन्‍यथा नहीं लेंग... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   3:31pm 9 Feb 2013 #
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
लुटेरे आए हैं... -रजनीकांत शुक्‍लजागो पहरेदार, लुटेरे आए हैं।हाथ करो हथियार, लुटेरे आए हैं।बहुत सो लिए कुंभकर की निद्रा में,अब न करो तुम प्‍यार लुटेरे आए हैं।दो रंगा है खून, दोमुंही बातें हैं,बनकर रंगे सियार, लुटेरे आए हैं।मौसम में दलाव, बदौलत इनकी है,फाश हो रहे राज, लुटे... Read more
clicks 272 View   Vote 1 Like   6:41am 6 Jan 2013 #Rajnikant Shukla
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
जज़्बात कोई खेल दिखाने का फ़न नहीं -रमेश तैलंगदुःख दर्द की मिठास को खारा नहीं बना.खामोशी को ज़ुबान दे, नारा नहीं बना.जिसने जमीन से लिया है खाद औ’ पानीउस ख्वाब को फ़लक का सितारा नहीं बना.वो बेज़ुबां है पर तेरी जागीर तो नहीं,उसको, शिकार के लिए, चारा नहीं बना.घुटने ही टेक दे ... Read more
clicks 243 View   Vote 0 Like   9:11am 1 Dec 2012 #.ग़ज़ल
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 नाम बड़े दर्शन छोटे-काका हाथरसी नाम-रूप के भेद पर कभी किया है गौर?नाम मिला कुछ और तो, शक्ल-अक्ल कुछ औरशक्ल-अक्ल कुछ और, नैनसुख देखेकानेबाबू सुंदरलाल बनाए ऐंचेतानेकहँ‘काका’ कवि, दयाराम जी मारें मच्छरविद्याधर को भैंस बराबर काला अक्षरमुंशी चंदालाल का तारकोल-सा रूपश्या... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   2:54am 2 Aug 2012 #काका हाथरसी
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 286 View   Vote 0 Like   12:08am 9 Jun 2012 #हास्‍य व्‍यंग्‍य
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
हुई खिन्‍नताव्‍यक्ति-व्‍यक्ति में देखभेद-भिन्‍नता।भू पे आकरपढ़े कबीर सिर्फढ़ाई आखर।पाते ही मौकाइंसान ने त्‍वरितदिया है धोखा।रहा है बेलचकले पे आदमीदिमागी रोटी।वृक्ष हो गईजो पीढि़यां गल केकुछ बो गई।बदला वक्‍तसब से सस्‍ता हुआइंसानी रक्‍त।गाढ़ी कमाईदेश के कमेरो... Read more
clicks 281 View   Vote 1 Like   1:42am 20 May 2012 #सुरेश उजाला
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
वंदना का अर्थ चाँटे-अवश्‍नी कुमार पाठकदिन नहीं कट रहे काटे,कौन है जो दर्द बाँटे ?शीश पर बन कर शिलाएँ, टूट पड़ती आपदाएँ।थपकियाँ देती रहीं जो, हो गई बागी हवाएँ।बन गए हैं फूल काँटे।फेर लेते लोग आँखें, हृदय में चुभती शलाखें।नीम सी कड़वी हुई हैं, जिंदगी की मधुर दाखें।जहाँ दे... Read more
clicks 306 View   Vote 0 Like   12:02pm 24 Apr 2012 #गीत
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
मक्‍कारी के बदले क्‍या मिलती है कभी दया?-शिव भजन ‘कमलेश’पछताने की नहीं जरूरत, जो कुछ निकल गया।दिल-दिमाग से अब जुटना है ले उत्‍साह नया। अपनी-अपनी करें समीक्षा, क्‍या गलती की हैकाम किया है मन से या केवल मस्‍ती की हैमक्‍कारी के बदले क्‍या मिलती है कभी दया। करना होंगा हंसकर... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   3:30pm 11 Apr 2012 #Shivbhajan Kamlesh
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 265 View   Vote 0 Like   7:23am 24 Mar 2012 #Hindi kavita
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 280 View   Vote 0 Like   2:09am 5 Mar 2012 #Zaheer Quraisi
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
कभी मैं रह के भी घर पर नहीं हूँ-बाबूलाल शर्मा ‘प्रेम’कभी में रह के भी घर पर नहीं हूँ,जहाँ मैं हूँ वहाँ अक्‍सर नहीं हूँ।किसी को ठेस क्‍या मुझसे लगेगी,किसी की राह का पत्‍थर नहीं हूँ।गुलों से है मेरा रिश्‍ता पुराना,बहारों का भले शायर नहीं हूँ।तुम्‍हारे दर्द का अहसास हूँ म... Read more
clicks 264 View   Vote 0 Like   12:56am 29 Feb 2012 #Ghazal
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
अभी जेब में कुछ पैसे बचे हैं -उग्रनाथ नागरिकमेरी पत्‍नी मुझसे प्‍यार करती हैमेरी प्रेमिका मुझसे प्‍यार करती हैमेरे बच्‍चे मुझसे प्‍यार करते हैंऔर नाते-रिश्‍तेदार, दोस्‍त अहबाब भीअभी मेरी जेब में,कुछ पैसे बचे हैं। मेरा घर पूरा हिन्‍दुस्‍तान -उग्रनाथ नागरिकजब कोई क... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   1:39am 23 Feb 2012 #उग्रनाथ नागरिक
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clicks 271 View   Vote 1 Like   12:19pm 11 Feb 2012 #Raghuvir Sahay
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
अदम गोंडवी  आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को।मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको।जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर,मर गई फुलिया बिचारी कि कुएँ में डूब कर।है सधी सिर पर बिनौली कंडियों की टोकरी,आ रही है सामने से हरखुआ की छोकरी।चल रही है छंद के आयाम को देती दिशा,मैं इसे ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   1:57am 27 Jan 2012 #Ghazal
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clicks 248 View   Vote 0 Like   1:57am 27 Jan 2012 #Ghazal
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clicks 287 View   Vote 0 Like   1:54am 8 Jan 2012 #Chand Sheri
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clicks 285 View   Vote 0 Like   2:35am 18 Dec 2011 #Adam Gondvi
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 तुम्हें छूकर लौट आया दिन। -डॉ0 प्रेम शंकर तुम्हें छूकर लौट आया दिन।अनमना-सा हो गया-ये इन्द्रधनुषी मन।कुछ दरारें बन गईं जो जुड़ नहीं पायीं कुछ नयी दीवार हैं जो हट नहीं पायीं अब दूर तक अंधी गुफाओं में,ढूंढता,झख मारता है मन।फैशन अधुनातन नहीं,बाज़ार सी आँखें अब नहीं म... Read more
clicks 238 View   Vote 0 Like   1:52am 6 Dec 2011 #Dr. Prem Shankar
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 नवगीतडॉ0 प्रेम शंकर आ गया है चैत,सोने-सी पकी फसलें। दो घड़ी हम आम तरु की छाँह में हंस लें।पोखरे का जल गंदीला मछलियाँ प्यासी ये किसानी आँख मानो,अनधुली बासी कह रही ज्यों हम कहाँ,किस ठौर जा बस लें।लादकर गट्ठर समय का एक युग बीता आदमी ने मौत को अब तक नहीं जीता इसलिए हम हाथ में ... Read more
clicks 215 View   Vote 0 Like   2:44pm 26 Nov 2011 #Dr. Prem Shankar
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 231 View   Vote 0 Like   1:01am 19 Nov 2011 #Ranjana Jaiswal
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 271 View   Vote 0 Like   12:44am 9 Nov 2011 #Neha Sefali
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