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Blog: बाल-मन

Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
बंदर ने देखा ये सपना -राजीव राय   बंदर ने देखा ये सपना  लैपटॉप है उसका अपना।  वो गूगल में खोज रहा था  राम नाम है कैसे जपना।  बेटा बोला पापा छोड़ो  फेसबूक में खाता खोलो  सारा जंगल होगा अपना।  तभी बंदरिया डंडा लाई  लैपटॉप की करी पिटाई  बोली ये दुष्मन है अपना।  सब पेड़ों ... Read more
clicks 322 View   Vote 3 Like   12:15pm 28 Dec 2013 #Baalgeet
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
- डॉ0 मधुसूदन साहा -  अपनी भाषा हिन्‍दी है हर माथे की बिन्‍दी है। जरा बोलकर देखो तु कितनी सरस सुहानी है, मां की लोरी-सी कोमल रोचक नई कहानी है, राधा के पग की पायल, कान्‍हा की कालिन्‍दी है। इसे राष्‍ट्र ने मान दिया संविधान में अपनाकर, अब दायित्‍व निभाना है इसका पूरा स... Read more
clicks 337 View   Vote 4 Like   3:22pm 13 Sep 2013 #डॉ0 मधुसूदन साहा
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
पप्पू का पत्र धनसिंह मेहता ‘अनजान’ पापा तुम लड़ना सीमा पर, बाकी चिन्ता मत करना। देश बड़ा है जान है छोटी, जाँ की चिन्ता मत करना।। नजरें तुम सीमा पर रखना, दुश्मन छिपा शिखर पर है। तुम विचलित बिलकुल मत होना, देश तुम्हीं पर निर्भर है। मम्मी कहतीं- लिख पापा को, माँ की चिन्ता म... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   7:43am 19 Feb 2013 #धनसिंह मेहता अनजान
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
मेरे गाँव से -धन सिंह मेहता ‘अनजान’ राजा तेरे राजमहल का, रस्‍ता मेरे गाँव से। है छोटा पदचिन्‍ह तुम्‍हारा राजा मेरे गाँव से।। पीठ हमारी, कोड़ा तेरा, राह हमारी रोड़ा तेरा। चना हमारा, घोड़ा तेरा, खाता मेरे गाँव से।। बाग हमारे, फूल तुम्‍हारे, पाँव हमारे, शूल तुम्‍हारे। नद... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   2:40pm 12 Feb 2013 #
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
प्रिय पाठक, ब्‍लॉग पर पधारने का शुक्रिया। आपको हम अवगत कराना चाहते हैं कि तकनीकी कारणों से 'बालमन' ब्‍लॉग नए डो‍मेनपर शिफ्ट हो गया है। यदि 5 सेकेण्‍ड में परिवर्तित पते वाला पृष्‍ठ स्‍वत:नहीं खुलता है, तो कृपया यहां परक्लिक करें। आशा है इस कष्‍ट को आप अन्‍यथा नहीं लेंगे ... Read more
clicks 308 View   Vote 0 Like   3:35pm 9 Feb 2013 #
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
मेरा सपना कितना अच्‍छा -रजनीकांत शुक्‍ल- मेरा सपना कितना अच्‍छा, हे ईश्‍वर हो जाए सच्‍चा। बिना पढ़े ही इम्‍तहान में, आएं नंबर सबसे ज्‍यादा। रोज के मेरे खेलकूद में, कोई नहीं पहुंचाए बाधा। सभी कहीं मुझे प्‍यारा बच्‍चा। मेरा सपना कितना अच्‍छा। मेरी कभी किसी गलती पर, म... Read more
clicks 297 View   Vote 0 Like   6:59am 6 Jan 2013 #Rajnikant Shukla
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
आंनद विश्‍वास की बाल कहानी चिड़िया फुर्र...अभी दो चार दिनों से देवम के घर के बरामदे में चिड़ियों की आवाजाही कुछ ज्यादा ही हो गई थी। चिड़ियाँ तिनके ले कर आती, उन्हें  ऊपर रखतीं और फिर चली जातीं दुबारा, तिनके लेने के लिये।लगातार ऐसा ही होता, कुछ तिनके नीचे गिर जाते तो फर्श ग... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   5:46am 6 Dec 2012 #Anand Vishwas
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 स्‍कूल की वैन डॉ. रामनिवास मानव वैन स्‍कूल की जब भी आती, बच्‍चों में हलचल मच जाती। भाग-दौड़ करते हैं बच्‍चे, देरी से डरते हैं बच्‍चे।  लगे रमन को बस्‍ता भारी, बस में चढ़ने की लाचारी। भूला नवल टिफिन ही लाना, जूतों की पॉलिश करवाना।  मोनू की ढ़ीली है टाई, कैसे काम चलेगा भाई।... Read more
clicks 323 View   Vote 0 Like   1:14am 31 Oct 2012 #Balkavita
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
चाह हमारी... प्रभात गुप्‍त छोटी एक पहाड़ी होती, झरना एक वहां पर होता उसी पहाड़ी के ढ़लान पर काश हमारा घर भी होता।  बगिया होती जहां मनोहर खिलते जिसमें सुंदर फूल बड़ा मजा आता जो होता वहीं कहीं अपना स्‍कूल।झरनों के शीतल पानी में घंटो खूब नहाया करते नदी पहाड़ों झोपडि़यों ... Read more
clicks 312 View   Vote 0 Like   12:32am 19 Oct 2012 #.बालगीत
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 आया राखी का त्‍यौहार डॉ0 देशबंधु शाहजहाँपुरी खुशियों का लेकर उपहार आया राखी का त्‍यौहार। जूही ने गेंदा, गुलाब के, तिलक लगा आशीष दिया। तब तक खुश्‍बू बिखराना तुम, जब तक चली न जाए बहार। होठों पर मुस्‍कान बिछाकर, बहनें बाँध रहीं राखी। नहीं चाहिए उनको कुछ भी, केवल माँगें... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   2:21am 2 Aug 2012 #.बालगीत
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clicks 314 View   Vote 0 Like   12:50am 9 Jun 2012 #.बालगीत
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 उनका मौसमदेवेन्‍द्र कुमारगर्मी को पानी से धोएँबारिश को हम खूब सुखाएँजाड़े को फिर सेंक धूप सेअपनी दादी को खिलवाएँ।कैसा भी मौसम हो जाएउनको सदा शिकायत रहतीइससे तो अच्‍छा यह होगाउनका मौसम नया बनाएँ।काम दिखता है, दाँत नहीं है,पैरों से भी चल न पातींबैठी-बैठी रटती रहतींन... Read more
clicks 319 View   Vote 0 Like   2:12am 20 May 2012 #Devendra Kumar
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 क्‍यों पसंद हैं हरदम तुमको फूलों के ही साये ? अश्‍वनी कुमार पाठक क्‍यों पसंद हैं हरदम तुमको फूलों के ही साये ? किस अलबेले चित्रकार से, तुमने पंख रंगाये ? क्‍यों कहते हैं बच्‍चे तुमको, तितली, तितली रानी? क्‍यों लगती तुम उनको इतनी, प्‍यारी और सुहानी? तुम्‍हें देखकर मुन्‍... Read more
clicks 298 View   Vote 0 Like   12:16pm 24 Apr 2012 #Balkavita
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
बातें हैं रंगीन देवेन्‍द्र कुमार बाबा के हैं बाल सफेद पर उनकी बातें रंगीन। सुबह टहलने रोज निकलते अपने काम सभी खुद करते छत पर उनकी कसरत का तो मजेदार होता है सीन। हरदम कुछ-कुछ करते रहते दादी से बिन बात झगड़ते नकली दाँत दिखाकर पूँछे मुँह में दाँत बचे क्‍यों तीन। रोज कह... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   3:49pm 11 Apr 2012 #Devendra Kumar
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 हालत मेरी खस्‍ता है-सूर्य कुमार पाण्‍डेयटीचर जी, ओ टीचर जी,हालत मेरी खस्‍ता है।के जी टू में पढ़ती हूँ,टू केजी का बस्‍ता है।चलूँ सड़क पर रिक्‍शा वाला,मुझे देख कर हँसता है।एक सवारी और लाद लो,ताने मुझपर कसता है।बोझ किताबों का कम करिए,बड़ी दूर का रस्‍ता है।नन्‍हें फूलों प... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   5:09am 25 Mar 2012 #Bal Ghazal
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clicks 337 View   Vote 0 Like   2:19am 5 Mar 2012 #Krishneshvar Deengar
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
मूस जी मुसटन्‍डा-कृष्‍णेश्‍वर डींगर  मूस ही मुस्‍टंडा, लिये हाथ में डंडा।  बिल्‍ली बोली म्‍याऊँ, किस चूहे को खाऊँ।  मूस ही मुस्‍टंडा, गिरा हाथ से डंडा।  बिल्‍ली जी के आगे, पूँछ दबाकर भागे।  मूस ही मुस्‍टंडा, रह गया बाहर डंडा।  घुस गये जाकर बिल में, चूहों की महफिल में।... Read more
clicks 307 View   Vote 0 Like   1:07am 29 Feb 2012 #Krishneshvar Deengar
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
 गिरगिटान के भाई। -कृष्‍णेश्‍वर डींगर कभी पहनते कुर्ता टोपी, कभी सूट नेक टाई। रंग बदलने में मोटू जी, गिरगिटान के भाई। कभी हमारी टीम पकड़ कर, बैट्स मैन बन जाते। कभी हमारे ही विरोध में, बॉलर बन कर आते। कोई उनको कहता मोटू, कोई कहता बबलू। कोई उनको कहता गोलू, मैं कहता दल-बद... Read more
clicks 292 View   Vote 0 Like   1:54am 23 Feb 2012 #Krishneshvar Deengar
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clicks 304 View   Vote 0 Like   12:29pm 11 Feb 2012 #प्रत्‍यूष गुलेरी
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 301 View   Vote 0 Like   1:55am 27 Jan 2012 #Bal Ghazal
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 237 View   Vote 0 Like   3:12pm 30 Nov 2011 #.बालगीत
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
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clicks 279 View   Vote 0 Like   1:58am 24 Nov 2011 #Balkavita
Blogger: ज़ाकिर अली ‘रजनीश’
छोटा होना बहुत बुरा है-अश्‍वनी कुमार पाठकभैया कहता मुझको पिन्‍ना। दीदी कहती कितना घिन्‍ना।साथी मुझे बनाते घोड़ा, और लगाते कसकर कोड़ा।क‍हते कितना मरियल-अडि़यल, सरपट चलता नहीं निगोड़ा।गोलू, भोलू सदा पीठ पर, करते रहते ता-ता धिन्‍ना।मुझको कहते सभी अनाड़ी, खुद को मानें ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   12:48am 19 Nov 2011 #.बालगीत
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