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माँ भारती

सफर ...आज कल परसों में बरसों बीत गए, वो बचपन का खेल अल्हड जवानी अर्सों बीत गए|नयी निक्कर जो पहनी वो कल चुस्त हो गयी,कमबख्त चलती घडी भी सुस्त हो गयी ।याद किया तो वो काफी पहले का वाकया था,आधी नींद में जो घडी देखी वो दुरुस्त नहीं थी ।वो बूढा पलंग जिस पे सोता हूँ अब भी,घुटने में ...
माँ भारती...
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  February 27, 2017, 11:02 pm
"इस सदी के कबीर को मेरी भावभीनी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि"अधर से टुटा जो तारा वो सबका ही दुलारा थाक्या मुल्ला वो क्या पंडित सारे जग से न्यारा था ।न उसका धर्म था कोई न उसकी कोई जाती थीकिया जो कर्म उसने हर तरफ उसकी ही ख्याति थी ।हुनर उसके यूँ सर चढ़कर कुछ इस कदर बोलेकी सारा विश...
माँ भारती...
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  July 29, 2015, 2:07 pm
 माँ - मुन्नवर राणासुख देती हुई माओं को गिनती नहीं आतीपीपल की घनी छायों को गिनती नहीं आती।लबों पर उसके कभी बददुआ नहीं होती,बस एक माँ है जो कभी खफ़ा नहीं होती।इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती हैमाँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।मैंने रोते हुए पोछे थे किसी दिन आँस...
माँ भारती...
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  March 10, 2013, 1:30 pm
देश की हालत इस कदर बदल गई,दिल भी दुखी, मन भी दुखी |दिल बोले कुछ कर पगले,देश तुम्हारा है,मन कहे छोड़ यार, ये किसको गवारा है |दिल बोले, सिस्टम बदल डाल, कुछ कर डाल,मन बोले वाह जिस पर पड़ी है सिस्टम की मार,वह बोले प्यारे सिस्टम बदल डाल |दिल बोले, कुछ कर,कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठा रहेगा,...
माँ भारती...
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  September 22, 2012, 11:17 am
बरसों का बिछड़ा प्यार...बेजान पड़ी सुखी टहनी भी हरी भरी हो जाती है,बारिश की पहली बूँद कापुरजोर असर होता है |बरसों का बिछडा प्यार मिलेतो यार गजब होता है |ओस की वो बूँद, कोहरे की वो धुंध;सब नया नया लगता है |वही पुराना चाँद फिर आँखों में जँचता है |बरसों का बिछड़ा प्यार मिलेतो या...
माँ भारती...
Tag :कविता
  October 20, 2011, 4:25 pm
आदमी...दुनिया मैं बादशा है, सो है वो भी आदमीऔर मुफलिस ओ गदा है, सो है वो भी आदमीज़रदार बे नवा है, सो है वो भी आदमीनेमत जो खा रहा है, सो है वो भी आदमीटुकड़े जो मांगता है, सो है वो भी आदमीअब्दाल ओ कुतब ओ गौस ओ वली, आदमी हुएमुन्कर भी आदमी हुए, और कुफ्र से भरेक्या क्या करिश्मे कश्फ़ ...
माँ भारती...
Tag :कविता
  October 4, 2011, 12:15 pm
सब ठाट पड़ा रह जायेगा जब लाद चलेगा बंजारा...टुक हर्स-ओ-हवा को छोड़ मियाँ, मत देस बिदेस फिरे माराकज्ज़ाक अजल का लूटे है दिन रात, बजा कर नक्काराक्या बुधिया, भैंसा, बैल, शुतुर, क्या गौएं, पल्ला, सर भाराक्या गेहूं, चावल, मूठ, मटर, क्या आग, धुआं, क्या अंगारासब ठाट पड़ा रह जाएगा, जब ला...
माँ भारती...
Tag :कविता
  September 29, 2011, 3:26 pm
हिंदी की कहानी हिंदी की जुबानी सर्वश्व हम लुटा चुके,पुकारता ये छंद है,की ६४ बसंत खर्चकर भी मुंह क्यों बंद है ?माना निकम्मी सरकार कम्बख्क्त कर्जखोर है,हिंद की भाषा का क्या बस यही मोल है ??या हिंद के बेटों का अब वो खून न है खौलता,जिसको देखे मात्र से वनराज भी था बोलता |हिंदी क...
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Tag :कविता
  September 14, 2011, 3:03 pm
संहार... हृदय करे चीत्कार,प्रभु अब शुरू करो संहार,बहुत हो चुका इक्का-दुक्का हो अब धुवांधार |सांप सपोले बहुत हो गए जगह नहीं अब शेष,दूध पिलायें इनको कितना बहुत खा चुके ठेस |जिसको अपना समझ के पाला हाय रे मेरे देश,लज्जित करके तुमको दिखाया अपना पापी भेष |इनको जब तक माफ करोगे,सब ...
माँ भारती...
Tag :कविता
  July 20, 2011, 3:08 pm
यह आग कब बुझेगी...थकती आँखों ने मेरी वो सारा मंजर देखा है,इसी बदन ने मेरे वो सारा तड़पन झेला है,कुछ गोली थी बंदूकों की चुभने वाले खंजर भी थे,बेरहम कुछ बम के गोले और चंद बहुत आतंकी थे,इसी सड़क पर उनलोगों ने बहुतों को हलकान किया,मत पूछो इस कातिल ने कितनों को लहूलुहान किया,यह व...
माँ भारती...
Tag :कविता
  July 15, 2011, 4:54 pm
गर्दिश में सितारे बहुतों के होंगें,चमन में बहुत से हमारे भी होंगें,हमारे कुछ अपने बहारों में होंगें,बहारों के अपने नज़ारे भी होंगें,नजारों में टूटी हवेली भी होगी,हवेली में फैली दरारे भी होंगीं,दरारों में फैली वो मकड़ी के जाले,वो मकड़ी किसी के सहारे ही होगी,सहारों की अ...
माँ भारती...
Tag :कविता
  April 26, 2011, 1:33 am
thought1:-किसी को प्यार करना तो कोई बात ही नहीं,किसी का प्यार पा लेना कुछ बड़ी बात है,किसी प्यार से वही प्यार पा लेना,क्या बात है?उसी प्यार को अंत तक निभा देना बातें तमाम है|thought2:-उम्रे तमाम पढता रहा दोस्तों की मानवता एक चीज़ है,एक एहसास सीने की,जीने का फ़लसफा,एक तहजीब है,कसम खुदा ...
माँ भारती...
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  April 26, 2011, 1:27 am
माँ भारती: हिमालय की जुबानी...: "लाल खून से सना हिमालय फिर इतिहास बताता है, छोटी आँखों के पीछे फैला षड़यंत्र आज सुनाता है, हिंदी-चीनी भाई-भाई,फिर शुरू वहाँ संग्राम हुआ, तुम..."...
माँ भारती...
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  April 22, 2011, 9:15 am
लाल खून से सना हिमालय फिर इतिहास बताता है,छोटी आँखों के पीछे फैला षड़यंत्र आज सुनाता है,हिंदी-चीनी भाई-भाई,फिर शुरू वहाँ संग्राम हुआ,तुम ही बताओ मुल्क का मेरे कैसा वो अंजाम हुआ,फिजा में फिर से वही हवाएं बहने चारों और लगी,खबरदार में करता हूँ की चिता हमारी सजने लगी |मेरी छ...
माँ भारती...
Tag :कविता
  April 21, 2011, 11:53 pm
ज़िन्दगी की धुप में जब पाँव जलने लगते हैं,अंतर आग में जब हम झुलसने लगते हैं,हर तरफ विरानगी तन्हायाँ ही दिखती हैं,करवटों में रात दिन सिसकियों में सोता है,एक ही आवाज़ आती "ऐसा क्यों होता है"|जब अपने लोग बेगानों में दिखने लगते हैं,रिश्तेदारों की गली अनचाहा रस्ता लगता है,दोस...
माँ भारती...
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  March 24, 2011, 12:23 pm
रे होलिया रे होलिया होली है....गाँव का सारा लोग लुगाई लगा दू प्रेम का गुलालभंग भंग भंग पिलो पचा के चंग (2)रे होलिया मैं उड़ा रे गुलालकइयो रे  मंगेतर सेहोलिया मैं उड़े रे गुलालकइयो रे मंगेतर सेम्हारी ये मंगेतर चुडला वाली  (2)घड़िया वालो रे नवाब कइयो रे मंगेतर से (2)होलिया मैं ...
माँ भारती...
Tag :holi geet
  March 18, 2011, 7:02 pm
मिट्टी की सौंधी खुशबू का कोई मोल नहीं होता,क्षण में जो मिल जाये यूँ ही वह अनमोल नहीं होता |छोटा बिम्ब हिमालय का सूरज का तेज बताता है,किन्तु हिमालय की चोटी को हर कोई भेद नहीं पाता |द्रोणाचार्य धरा पर यारों देखो यहाँ वहाँ मिलता,पर कमबख्त दुहाई देखो कोई कर्ण नहीं मिलता |श्रे...
माँ भारती...
Tag :कविता
  February 28, 2011, 10:02 pm
वर दे, वीणावादिनि वर दे !प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव        भारत में भर दे !काट अंध-उर के बंधन-स्तरबहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर        जगमग जग कर दे !नव गति, नव लय, ताल-छंद नवनवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;नव नभ के नव विहग-वृंद को        नव पर, नव स्वर दे !वर दे, वीण...
माँ भारती...
Tag :कविता
  February 8, 2011, 12:14 pm
धरती के ऐसे लाल कहाँ दुनिया में ऐसे मिलते हैं,बस एक तिरंगे की खातिर सर्वश्व समर्पण करते हैं |न कोई तिलक न कोई सुभाष दुनिया को मिल पाया है,स्वर्श्व समर्पण करने को कोई भगत नहीं आया है |माँ भारती तेरा अहो भाग्य ऐसे सपूत कण-कण में हैं,दिल-ओ-जान लुटाने का जज्बा तेरे बेटे लिये नय...
माँ भारती...
Tag :कविता
  January 26, 2011, 10:11 pm
बड़े अरमान इस दिल में चाहे तुम हो या की हम,जो शिद्दत से मिला था यार वो मुड़ जाये क्या होगा ?मय्यसर नहीं सबको वो सारे ख्वाब वो सपने ,कोई प्यासा नदी के सामने मर जाये क्या होगा ?इन्ही नज़रों से ए साथी समझना सबको पड़ता है,जो होठों से कहा जाये तो वो ज़ज्बात क्या होगा ?जुब़ा महसूस ...
माँ भारती...
Tag :कविता
  January 11, 2011, 2:07 am
माँ भारती: कल का इंतज़ार: "ग़र गर्दिश में हो सितारा तो गम न कर, अपने आप पर जुल्मो-सितम न कर , कल सवेरा होगा,सूरज भी निकलेगा, कुछ न कर बस कल का इंतज़ार तो कर | जब होगा ..."...
माँ भारती...
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  January 3, 2011, 2:05 pm
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