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नीरज

("इस ब्लॉग से आप सब के प्यार का नतीजा है ये 301 वीं पोस्ट" )*********जागती आँखों ही से सोती रहती हूँ मैं पलकों में ख़्वाब पिरोती रहती हूँ तेजाबी बारिश के नक्श नहीं मिटते मैं अश्कों से आँगन धोती रहती हूँ मैं खुशबू की कद्र नहीं जब कर पाती फूलों से शर्मिंदा होती रहती हूँ जब से गह...
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  June 17, 2013, 10:05 am
हो खफा हमसे वो रोते जा रहे हैं और हम रुमाल होते जा रहे हैं नीम के ये पेड़ इक दिन आम देंगे  सोच कर रिश्तों को ढोते जा रहे हैं पत्थरों से दोस्ती कर ली है जब से आईने पहचान खोते जा रहे हैं कब तलक दें फूल उनको ये बताओ जो हमें कांटे चुभोते जा रहे हैंरहनुमा मक्खन का वादा करके दे...
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  June 3, 2013, 10:05 am
कहती है ज़िन्दगी कि मुझे अम्न चाहिए ओ' वक्त कह रहा है मुझे इन्कलाब दो इस युग में दोस्ती की, मुहब्बत की आरज़ू जैसे कोई बबूल से मांगे गुलाब दो जो मानते हैं आज की ग़ज़लों को बेअसर पढने के वास्ते उन्हें मेरी किताब दो आज हमारी किताबों की दुनिया श्रृंखला में हम उसी किताब "ख...
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  May 20, 2013, 10:05 am
चाय की जब तेरे साथ लीं चुस्कियां ग़म हवा हो गए छा गयीं मस्तियाँ दौड़ती ज़िन्दगी को जरा रोक कर पीसते हैं चलो ताश की गड्डियां  जब तलक झांकती आंख पीछे न हो क्या फरक बंद हैं या खुली खिडकियां  जान ले लो कहा जिसने भी, उसको जब आजमाया लगा काटने कन्नियाँ जिनमें पत्थर उठाने की हि...
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  May 6, 2013, 10:05 am
आप में से बहुत से दिल्ली तो जरूर गए होंगे लेकिन शायद कुछ लोग ही महरौली गए हों, महरौली जो क़ुतुब मीनार के पीछे है और जहाँ की भूल भुलैय्याँ , जो अब सरकार द्वारा बंद कर दी गयीं हैं, बहुत प्रसिद्द हैं, सुना है इन भूल भुलैय्यों में जाने के बाद बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है । उ...
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  April 22, 2013, 10:05 am
होली के बारे में आम धारणा ये है कि ये एक उमंगों भरा त्योंहार है जो साल में एक बार आता है, ये बात सही है लेकिन मेरा मानना है की होली आनंद की एक अवस्था है जो जब आपके मन में उत्पन्न हो होली हो जाती है। इसी आशय को मैंने अपनी एक ग़ज़ल में ढाला है , उम्मीद है आपको भी मेरी बात पसंद आए...
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  April 8, 2013, 10:05 am
जयपुर से मुंबई आना जाना आजकल महीने में दो बार होने लगा है, जयपुर एयरपोर्ट पर जो किताबों की दूकान है उसका मैनेजर अब मुझे पहचानने लगा है। अब वो मेरे दुकान में दाखिल होने पर पहले ही बता देता है के शायरी की कोई नयी किताब आई है या नहीं। आई होती है तो उसकी मुस्कान चौड़ी हो जाती ह...
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  March 25, 2013, 10:05 am
गुरुदेव पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर इस बार बसंत पंचमी के अवसर पर हुए मुशायरे में अद्भुत ग़ज़लें पढने को मिलीं। सम सामयिक विषयों पर शायरों ने खूब शेर कहे। उसी तरही, जिसका मिसरा था " ये कैदे बा-मशक्कत जो तूने की अता है " , में भेजी खाकसार ग़ज़ल यहाँ भी पढ़िए :ये कैदे बा-मशक्क्त ...
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  March 11, 2013, 10:05 am
लोग फिर भी घर बना लेते हैं भीगी रेत परजानते हैं बस्तियां कितनी समंदर ले गया उस ने देखे थे कभी इक पेड़ पर पकते समर साथ अपने एक दिन कितने ही पत्थर ले गया समर: फल रुत बदलने तक मुझे रहना पड़ेगा मुन्तजिर क्या हुआ पत्ते अगर सारे दिसंबर ले गया मुन्तजिर: इंतज़ार में आप इन शेरों ...
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  February 18, 2013, 10:05 am
मुश्किलों की यही हैं बड़ी मुश्किलें आप जब चाहें कम हों, तभी ये बढ़ें अब कोई दूसरा रास्ता ही नहीं याद तुझको करें और जिंदा रहें बस इसी सोच से, झूठ कायम रहा बोल कर सच भला हम बुरे क्यूँ बनें  डालियों पे फुदकने से जो मिल गयी उस ख़ुशी के लिए क्यूँ फलक पर उड़ें हम दरिन्दे नहीं ग...
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  February 4, 2013, 10:05 am
शायरी और समंदर में एक गहरा रिश्ता है इनमें जितना डूबेंगे उतना आनंद आएगा। उथली शायरी और उथले  समंदर में कोई ख़ास बात नज़र नहीं आती लेकिन जरा गहरी डुबकी लगायें, आपको किसी और ही दुनिया में चले जाने का अहसास होगा। गहराई में आपको वो रंग नज़र आयेंगे जो सतह पर नहीं दिखाई देते। ...
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  January 21, 2013, 10:05 am
सभी पाठकों को नव वर्ष की शुभकामनाएंसांप, रस्सी को समझ डरते रहे और सारी ज़िन्दगी मरते रहे खार जैसे रह गए हम डाल पर आप फूलों की तरह झरते रहे थाम लेंगे वो हमें ये था यकीं इसलिए बेख़ौफ़ हो गिरते रहे तिश्नगी बढ़ने लगी दरिया से जब तब से शबनम पर ही लब धरते रहे छांव में रहना था ...
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  January 7, 2013, 10:05 am
नए प्रोजेक्ट के सिलसिले में इन दिनों लगभग हर महीने दो तीन दिनों के लिए गाजिआबाद और दिल्ली जाना पड़ रहा है. ज़िन्दगी अभी मुंबई -जयपुर और दिल्ली के बीच घूम रही है. अटैची पूरी तरह खुलती भी नहीं के फिर से पैक करने का समय हो जाता है. उम्र के इस मोड़ पर भागदौड़ का अपना मज़ा है लेक...
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  December 24, 2012, 10:05 am
इस बार दिवाली के शुभ अवसर पर गुरुदेव पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर तरही मुशायरा आयोजित किया गया. तरही का मिसरा था "घना जो अन्धकार हो तो हो रहे तो हो रहे" इस मिसरे के साथ शिरकत करने वाले शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से अचंभित कर दिया. मुशायरे का पूरा मज़ा तो आप गुरुदेव के ब्...
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  December 10, 2012, 10:05 am
उनकी ये जिद कि वो इंसान न होंगे, हरगिज़ मुझको ये फ़िक्र, कहीं मैं न फ़रिश्ता हो जाऊं भूल बैठा हूँ तेरी याद में रफ़्तार अपनी मुझको छू दे कि मैं बहता हुआ झरना हो जाऊं बंद कमरे में तेरी याद की खुशबू लेकर एक झोंका भी जो आ जाय तो ताज़ा हो जाऊं फरिश्तों की तरह पाक, बहते झरनों की ...
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  November 26, 2012, 10:05 am
आप सब को दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं हर बात पे अगर वो बैठेंगे मुंह फुला कर रूठे हुओं को कब तक लायेंगे हम मना कर सच बोल कर सदा यूँ दिल खुश हुआ हमारा जैसे की कोई बच्चा हँसता हो खिलखिलाकर अपने रकीब को जब देखा वहां तो जाना रुसवा किया गया है हमको तो घर बुला कर पहले दिए हज...
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  November 12, 2012, 10:05 am
आज के युग में ये बात बहुत आम हो गयी है के लोग अपनी असलियत छुपा कर जो वो नहीं हैं उसे दिखाने की कोशिश करते हैं और ऐसे मौकों पर मुझे साहिर साहब द्वारा फिल्म इज्ज़त के लिए लिखा और रफ़ी साहब द्वारा गाया एक गाना " क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे, नकली चेहरा सामने आय...
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  October 29, 2012, 10:05 am
सिर्फ यादों के सहारे रात दिनपूछ मत कैसे गुज़ारे रात दिन साथ तेरे थे शहद से, आज वो हो गए रो-रो के खारे रात दिन कूद जा, बेकार लहरें गिन रहाबैठ कर दरिया किनारे रात दिन बांसुरी जब भी सुने वो श्याम कीतब कहां राधा विचारे रात, दिन आपके बिन जिंदगी बेरंग थी अब धनक के रंग सारे रात द...
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  October 15, 2012, 10:05 am
हर शायर की तमन्ना होती है के वो कुछ ऐसे शेर कह जाय जिसे दुनिया उसके जाने के बाद भी याद रखे...लेकिन...मैंने देखा है बहुत अच्छे शायरों की ये तमन्ना भी तमन्ना ही रह जाती है...शायरी की किताबों पे किताबें और दीवान लिखने वाले शायर भी ऐसे किसी एक शेर की तलाश में ज़िन्दगी गुज़ार देते...
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  October 1, 2012, 10:05 am
( आपके सहयोग और प्यार के कारण इस ब्लॉग ने पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं. 5 सितम्बर 2007 से अब तक याने इन पांच वर्षों में उपलब्धि के नाम पर 285 पोस्ट,11000 से अधिक टिप्पणियां, एक लाख चौबीस हज़ार से अधिक बार देखे गए पेज और 435 सदस्य नहीं है बल्कि वो अद्भुत अटूट रिश्ते हैं जो इस ब्लॉग के कारण ह...
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  September 17, 2012, 10:05 am
श्री अवनीश कुमारजी की किताब "पत्तों पर पाजेब", जिसकी चर्चा आज हम इस श्रृंखला में करेंगे, की भूमिका के आरम्भ में दी गयी इन पंक्तियों ने मुझे इस किताब को खरीद कर पढने के लिए प्रेरित किया. “कविता एक कोशिश करती है-जीवन का चित्र बनाने की, यथार्थ और उस से कुछ बेहतर...रंग वही हैं जो...
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  September 3, 2012, 10:05 am
मैं राजी तू राज़ी हैपर ग़ुस्‍से में क़ाज़ी हैआंखें करती हैं बातेंमुंह करता लफ्फाजी हैजीतो हारो फर्क नहींये तो दिल की बाज़ी हैतुम बिन मेरे इस दिल कोदुनिया से नाराजी हैकड़वा मीठा हम सब काअपना अपना माजी हैसब में रब दिखता जिसकोवो ही सच्चा हाजी हैदर्द अभी कम है ‘नीरज’चोट...
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  August 20, 2012, 10:05 am
छोटे गाँव कस्बों की तो बात ही छोड़ दें बड़े बड़े शहरों में भी अच्छी शायरी की किताब खोजना रेगिस्तान में पानी खोजने से भी कठिन काम है. सस्ती शायरी के संस्करण भले की रेलवे की बुक स्टाल या एक आध दुकान पर मिल जाएँ लेकिन अगर आप वाकई उम्दा शायरी के शौकीन हैं तो ऐसी किताब को खोजन...
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  August 6, 2012, 10:05 am
नजाकत है न खुश्बू औ’ न कोई दिलकशी ही हैगुलों के साथ फिर भी खार को रब ने जगह दी हैकिसी की याद चुपके से चली आती है जब दिल में कभी घुँघरू से बजते हैं, कभी तलवार चलती हैवही करते हैं दावा आग नफरत की बुझाने काकि जिनके हाथ में जलती हुई माचिस की तीली है हटो, करने दो अपने मन की भी इन नौ...
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  July 23, 2012, 10:05 am
उस ज़माने में भी ,जब मोबाइल नहीं हुआ करता था, चैट की सुविधा नहीं थी और तो और टेलीफोन भी नहीं था , लोग एक दूसरे से खूब बातें किया करते थे. अब जब बात करने की बहुत सी सुविधाएँ हो गयीं हैं जैसे मोबाइल आदि तो लोग हर जगह हर समय बात करते दिखाई देते हैं लेकिन अब की और तब की बातचीत में फ...
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  July 9, 2012, 10:05 am
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