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रजनीश का ब्लॉग : View Blog Posts
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रजनीश का ब्लॉग

तोड़कर भारी चट्टानें  बनाया घर रोककर धार नदियों की बनाया बांध काटकर ऊंचे पहाड़बनाया रास्ताछेद कर पातालबनाया कुआंपार कर क्षितिजरखा कदम चांद परनकली बादलों सेजमीं पर बरसाया पानीबंजर जमीन को सींचबोया कृत्रिम अंकुरक्या क्या नहीं किया ?नदियों की धाराएँ मोड़ींहरे भरे...
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Tag :जलजला
  June 26, 2013, 11:22 pm
तय है कि,धरती का सूरज निकले है पूरब सेपर मेरा भी सूरज,पूरब से निकले ये तय नहीं.... तय है कि,रात के बाद आती है एक सुबह पर हर रात की ,एक सुबह हो,ये तय नहीं.... तय है कि,पानी भाप होकर बन जाता है बादल पर उमड़-घुमड़ कर यहीं आ बरसे  ये तय नहीं....तय है कि,बिन आँखों के नज़ारा दिख नहीं सकता पर आ...
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Tag :प्यार
  June 20, 2013, 1:00 am
मुझे याद हैवो सुलगती हुईएक सुनसान दोपहरजब मैं मुखातिब था उस पेड़ सेजो झुलसा हुआ सूखा-सूखाखड़ा हुआ था राह किनारेअपनी ज़िंदगी की डोर थामेपत्तियों ने भी छोड़ दिया था उसका साथवीरानी का घर बस गया थाउसकी डालों  परऔर झलकती थीप्यास हर सिरे से ,मै पास खड़ा कुछ तलाश रहा था उसमे...
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Tag :बारिश
  June 16, 2013, 8:02 pm
1. कार्बन फुट-प्रिंट आगे बढ़ने का नाम है ज़िंदगी  एक रास्ते पर चलने का सिलसिलाहर कदम पर एक नई चुनौतीहर मील के पत्थर पर लिखी एक दास्तानबढ़ते कदम छोडते हैंधूल की चादर परएक इतिहासएक छापजंगलों को काटते हुएजब से बनाया है रास्ताबन रही है मेरे हर कदम पर  एक काली जहरीली छापएक अ...
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Tag :
  June 6, 2013, 9:56 am
सूरज की श्वेत किरणों में समाये हैं सब रंग किरणों के अभाव में है काला भयावह अंधेरा श्वेत और काले आयामों के बीच सांस लेती है एक खूबसूरत तस्वीर सूरज चलाता है ब्रश मिला सब रंगों को इक संग श्वेत किरणें बरसती धरती के कैनवास पर और सांस लेते रंग चहुं ओर बिखेरते इंद्रधनुषी छटा ए...
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Tag :सुर
  May 27, 2013, 8:14 pm
एक पलवैसा ही थाजैसे और भी पल थेपर वो था बिलकुल कालाबाकी श्वेत धवल थेउस पल का चेहराकितना घिनौनाकितना वीभत्सकितना डरावनान सुनी किसी नेउस पल की आहटन आया  नज़र घात लगाए कतार मेंना भाँप सकाकोई आता हुआ संकटपल छुपा रहाफिर फट पड़ाएक भारी पलधमाके  संग गिराशोलों में बिखरफट ग...
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Tag :इंसानियत
  May 21, 2013, 8:38 pm
तपती धरा  सुलगी दुपहरीरूठे बदरा झुलसाती लू  घने पेड़ों का साया माँ का पल्लू लू के थपेड़े मीलों का है फासला जीने की राहें उगले धुआँ प्रदूषित समाज जलता जहाँ रिश्तों की आगझुलसता है दिल गर्मी की आससूखते  चश्मे  ज़िंदगी की तपिश भाप होते जज़्बात   गर्मी के दिन वर्षा का ...
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Tag :गर्मी
  May 19, 2013, 6:05 pm
एक हुआ करती थी लाइब्रेरी,होता था अपना जाना सुकूँ से बैठ किताबों संग,जब भी होता वक्त बिताना पर कितनी बदल गयी दुनिया,बदल गए सबके हाल जहां होती थी लाइब्रेरी,आजकल वहाँ है इक मॉल हुई किताबें सब ऑनलाइन,जब से आया अंतर्जाल घर बैठे “ज्ञान” गुगलियाते,बदल गई अपनी चालसंचार और सूचन...
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Tag :मोबाइल
  May 17, 2013, 7:41 am
अपने अरमानों जैसेऊंचे पर्वत की तलहटी मेंघास के बिछौने परप्रेम से औंधे  लेटकरअपने हाथ फैलाए हुएदेखता हूँ अनगिनत तारों कोजमीन के एक कण के रूप मेंजमीन से जुड़े होने का एहसासअथाह ब्रह्मांड के विस्मयकारी दृश्य संगउस असीमित को पा लेनेघास के तिनके सा हृदय आंदोलित होता है ...
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Tag :सूक्ष्म
  May 11, 2013, 3:04 pm
सृजन की शुरुआत वजूद बनाए रखने की चेष्टा विपरीत परिस्थितियों को झेलते हुए ,समय ,किस्मत से संघर्ष के उपरांत अंततः बीजरूप बन गई प्रकृति ने दिया था उसे एक छोटा सा आवरण  जो बचा सके जीवन की आशा विनाश के चंगुल से ,हवा के संग सूक्ष्म संभावना धरती के पास पहुंची  अपनी कोख में धरती ...
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Tag :जीवन
  May 8, 2013, 8:48 am
दर्पण झूठ ना बोले,पर दर्पण सच भी तो ना बोले दिखाता है दर्पण,सच का उतना ही छोर जो हो दर्पण के सामने,और हो दर्पण की ओर पर दाएँ की जगह बायाँ,और बाएँ की जगह दायाँदिखता है कुछ उल्टा , ये है दर्पण की माया दर्पण के पीछे का सच,क्या कभी दर्पण दिखाता हैइसके पीछे चले जाने से,सामने का क्...
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Tag :महाभारत
  May 3, 2013, 8:35 am
( साल भर पुरानी कविता पुन: पोस्ट कर रहा हूँ )बहता है पसीनातब सिंचती है धरती जहां फूटते है अंकुर और फसल आती है बहता है पसीना तब बनता है ताज जिसे देखती है दुनियाऔर ग़ज़ल गाती है बहता है पसीना तब टूटते है पत्थर चीर पर्वत का सीना राह निकल आती हैबहता है पसीना तब बनता है मंदि...
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Tag :उम्र
  May 1, 2013, 1:16 pm
इस दिन ना हो चाकरी,ना हो कोई काम Iसंडे के दिन बैठ कर,घर पर करो आराम II1II छह दिन चक्की पीसते,ज्यों कोल्हू का बैल Iखटते थकपक जात हैं,निकल जात है तेल II2II  छह दिन भागमभाग है,घटता जाता है जोश । संडे कब हैं पूछते,हो जाते हैं बेहोश II3IIहर हफ्ते में एक बार,पल आनंद का आय Iसंडे आंखे खोल जब,नज़र ...
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Tag :संडे
  April 28, 2013, 7:52 am
सेब जब भी  पेड़ से टूटकर गिरासबने उसे स्वीकारा वो हर बार जमीं पर मिला  पर ये देख एक हुआ बेहालउसने सेब से किया सवाल तुम नीचे ही क्यों हो आते  तुम ऊपर क्यूँ नहीं जाते    सेब का उत्तर था कमालहल हो गया था बड़ा सवालउस शख्स की सेब पर नज़र क्या गईसेब फिर भी गिरते रहे पर दुनिया बदल ग...
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Tag :सवाल
  April 26, 2013, 2:56 am
हवा में हरदम ऊंचा उड़ता  है कभी जमीं पर चलकर देख,फूलों का हार पहन इतराता है कभी कांटे सर  रखकर देख,दौलत और दावतें उड़ाता  है कभी जूठन चखकर देख,बस पाने की जुगत ही करता है कभी कुछ अपना  खोकर देख,अपनी जीत के लिए  खेलता हैकभी औरों के लिए हारकर देख,  जो  नहीं उसके लिए ही रोता है ...
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Tag :रास्ता
  April 24, 2013, 7:00 am
तेरी पायल की छन छन से खिल जाती हर शाम तेरी ज़ुल्फों के साये में रंगीन हो जाती हर शाम वक़्त भी करता दुआ कुछ पल थम जाने की तेरे यहाँ होने पर सुरमई हो जाती हर शाम .....रजनीश ( 21.04.2013)...
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Tag :दुआ
  April 21, 2013, 3:59 pm
पहाड़ों से निकलकर पानीजमीन पर पूरा नहीं पहुंचता नीचे आते-आते पी जाती पानी जड़ें पेड़ों की कुछऔर फंसी हुई टीस की तरह रहता जमा गड्ढों में कुछबोया पूरा वो नहीं है मिलता चुग जाती है चिड़िया कुछ तपती दुपहरी ख़्वाब अधूरेखिलता हुआ सूख जाता कुछ  हर बीज नहीं बनता है पौधा मरतीं ...
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Tag :प्यार
  April 1, 2013, 11:01 pm
है सूरज निकल पूरब से जाता हर रोज़ पश्चिम की ओरपानी लिए नदियां हर पलहैं मिलती रहती सागर मेंबादल बरस बरस करकरते रहते हैं वापसजो धरती से लिया,हर साल हरी हरी चादरेंढँक लेती है धरती को इक बारएक नृत्य हर वक्तचलता रहता हैसंगीत की लहरों पर बदलते रहते हैं पत्तेऔर बदलते पेड़ भी...
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Tag :खुशबू
  March 13, 2013, 11:04 pm
राह तो बस राह है उसे आसां या मुश्किल बनाना  इंसान का खेल है तकदीर तो बस तकदीर  है उसे बिगाड़ना या  बनाना इंसान का खेल हैपत्थर  तो बस पत्थर  है पत्थर को भगवान बनाना इंसान का खेल है फूल तो बस फूल है फूल  सेज़ या सिर पर चढ़ाना  इंसान  का खेल है यार तो बस यार हैं यार को जात  रं...
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Tag :प्यार
  March 3, 2013, 8:53 pm
सपनों की फेहरिस्त लिए रोज़ चली आती है रात गुजार देते है उसे, ढूंढते फेहरिस्त में अपना सपना कुछ तारों को तोड़ रात कल सोये साथ लेकर हम  गुम हुए सुबह की धूप में जैसे गया था बचपन अपना हर गली से गुजरते जाते हैं  लिए हाथों में तस्वीर अपनी अपनों के इस वीरान शहर में बस ढूंढते ...
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Tag :रास्ता
  February 26, 2013, 11:32 pm
सवाल....इस बात का है किहर बात पर क्यूँ है एक सवालसवाल ....ये बड़ा है किक्या है सबसे बड़ा सवालसवाल ....ये उठता है किसब क्यों उठाते हैं सवालसवाल ....ये पैदा होता है किक्यूँ पैदा होता है सवालसवाल ....ये है किजवाब में क्यूँ होते हैं सवालसवाल ....ये बनता है किखत्म क्यूँ  नहीं होते सवालसव...
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Tag :सवाल
  February 19, 2013, 8:30 am
क्या बस कहने से आ जाएगा इंकलाब क्या मोमबत्तियों में कहीं छुपा है इंकलाब क्या एक जगह जुट जाने से आ जाएगा क्या बाज़ार में मिलती कोई चीज़ है इंकलाब क्या किसी घर में छुपा है इंकलाब क्या चंद लोगों का गुलाम है इंकलाब क्या सब कुछ तोड़ देने पर मिल जाएगा क्या बस चेहरा बदल लेना है ...
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Tag :इंकलाब
  January 22, 2013, 9:53 pm
हे सूर्य ! तुम्हारी किरणों से,दूर हो तम अब, करूँ पुकार ।बहुत हो गया कलुषित जीवन,अब करो धवल  ऊर्जा संचार ।सुबह, दुपहरी हो या साँझ,फैला है हरदम अंधकार ।रात्रि ही छाई रहती है,नींद में जीता है संसार ।तामसिक ही दिखते हैं सब,दिशाहीन  प्रवास सभी ।आंखे बंद किए फिरते हैं...निशाचरी व...
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Tag :
  January 13, 2013, 9:00 pm
एक रोशनी बुझते बुझते एक आग दे गई दरिंदगी से लड़ती एक आवाज़ दे गई खो गई कहीं आसमां मेंइक राह दे गईहैवानियत ख़त्म करने की एक चाह दे गईजूझती रही बिना थके दुनिया हिला गई अत्याचार से लड़ने कई दिल मिला गई ना खत्म हो ये जज़्बा ये सैलाब रुक ना जाए इक शहादत से जली ये मशाल बुझ न पाए......
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Tag :मशाल
  January 5, 2013, 9:49 pm
बस जाने वाला है इक सालबस आने वाला है इक सालचढ़ गई एक और परतवक़्त की हर तरफ़कुछ सूख गए पेड़ों औरकुछ नई लटकती बेलों मेंबस कुछ खट्टी मीठी यादेंबाकी सब , पहले जैसा ही  हालबस जाने वाला है इक सालबस आने वाला है इक सालएक बारिश सुकून कीधो गई कुछ ज़ख़्म इस बरसकुछ अरमान ठिठुरते रहे...
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Tag :सवाल
  December 16, 2012, 11:05 am
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