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Blog: रजनीश का ब्लॉग

Blogger: rajneesh
तोड़कर भारी चट्टानें  बनाया घर रोककर धार नदियों की बनाया बांध काटकर ऊंचे पहाड़बनाया रास्ताछेद कर पातालबनाया कुआंपार कर क्षितिजरखा कदम चांद परनकली बादलों सेजमीं पर बरसाया पानीबंजर जमीन को सींचबोया कृत्रिम अंकुरक्या क्या नहीं किया ?नदियों की धाराएँ मोड़ींहरे भरे... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   5:52pm 26 Jun 2013 #जलजला
Blogger: rajneesh
तय है कि,धरती का सूरज निकले है पूरब सेपर मेरा भी सूरज,पूरब से निकले ये तय नहीं.... तय है कि,रात के बाद आती है एक सुबह पर हर रात की ,एक सुबह हो,ये तय नहीं.... तय है कि,पानी भाप होकर बन जाता है बादल पर उमड़-घुमड़ कर यहीं आ बरसे  ये तय नहीं....तय है कि,बिन आँखों के नज़ारा दिख नहीं सकता पर आ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   7:30pm 19 Jun 2013 #प्यार
Blogger: rajneesh
मुझे याद हैवो सुलगती हुईएक सुनसान दोपहरजब मैं मुखातिब था उस पेड़ सेजो झुलसा हुआ सूखा-सूखाखड़ा हुआ था राह किनारेअपनी ज़िंदगी की डोर थामेपत्तियों ने भी छोड़ दिया था उसका साथवीरानी का घर बस गया थाउसकी डालों  परऔर झलकती थीप्यास हर सिरे से ,मै पास खड़ा कुछ तलाश रहा था उसमे... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   2:32pm 16 Jun 2013 #बारिश
Blogger: rajneesh
1. कार्बन फुट-प्रिंट आगे बढ़ने का नाम है ज़िंदगी  एक रास्ते पर चलने का सिलसिलाहर कदम पर एक नई चुनौतीहर मील के पत्थर पर लिखी एक दास्तानबढ़ते कदम छोडते हैंधूल की चादर परएक इतिहासएक छापजंगलों को काटते हुएजब से बनाया है रास्ताबन रही है मेरे हर कदम पर  एक काली जहरीली छापएक अ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   4:26am 6 Jun 2013 #
Blogger: rajneesh
सूरज की श्वेत किरणों में समाये हैं सब रंग किरणों के अभाव में है काला भयावह अंधेरा श्वेत और काले आयामों के बीच सांस लेती है एक खूबसूरत तस्वीर सूरज चलाता है ब्रश मिला सब रंगों को इक संग श्वेत किरणें बरसती धरती के कैनवास पर और सांस लेते रंग चहुं ओर बिखेरते इंद्रधनुषी छटा ए... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   2:44pm 27 May 2013 #सुर
Blogger: rajneesh
एक पलवैसा ही थाजैसे और भी पल थेपर वो था बिलकुल कालाबाकी श्वेत धवल थेउस पल का चेहराकितना घिनौनाकितना वीभत्सकितना डरावनान सुनी किसी नेउस पल की आहटन आया  नज़र घात लगाए कतार मेंना भाँप सकाकोई आता हुआ संकटपल छुपा रहाफिर फट पड़ाएक भारी पलधमाके  संग गिराशोलों में बिखरफट ग... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   3:08pm 21 May 2013 #इंसानियत
Blogger: rajneesh
तपती धरा  सुलगी दुपहरीरूठे बदरा झुलसाती लू  घने पेड़ों का साया माँ का पल्लू लू के थपेड़े मीलों का है फासला जीने की राहें उगले धुआँ प्रदूषित समाज जलता जहाँ रिश्तों की आगझुलसता है दिल गर्मी की आससूखते  चश्मे  ज़िंदगी की तपिश भाप होते जज़्बात   गर्मी के दिन वर्षा का ... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   12:35pm 19 May 2013 #गर्मी
Blogger: rajneesh
एक हुआ करती थी लाइब्रेरी,होता था अपना जाना सुकूँ से बैठ किताबों संग,जब भी होता वक्त बिताना पर कितनी बदल गयी दुनिया,बदल गए सबके हाल जहां होती थी लाइब्रेरी,आजकल वहाँ है इक मॉल हुई किताबें सब ऑनलाइन,जब से आया अंतर्जाल घर बैठे “ज्ञान” गुगलियाते,बदल गई अपनी चालसंचार और सूचन... Read more
clicks 291 View   Vote 0 Like   2:11am 17 May 2013 #मोबाइल
Blogger: rajneesh
अपने अरमानों जैसेऊंचे पर्वत की तलहटी मेंघास के बिछौने परप्रेम से औंधे  लेटकरअपने हाथ फैलाए हुएदेखता हूँ अनगिनत तारों कोजमीन के एक कण के रूप मेंजमीन से जुड़े होने का एहसासअथाह ब्रह्मांड के विस्मयकारी दृश्य संगउस असीमित को पा लेनेघास के तिनके सा हृदय आंदोलित होता है ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   9:34am 11 May 2013 #सूक्ष्म
Blogger: rajneesh
सृजन की शुरुआत वजूद बनाए रखने की चेष्टा विपरीत परिस्थितियों को झेलते हुए ,समय ,किस्मत से संघर्ष के उपरांत अंततः बीजरूप बन गई प्रकृति ने दिया था उसे एक छोटा सा आवरण  जो बचा सके जीवन की आशा विनाश के चंगुल से ,हवा के संग सूक्ष्म संभावना धरती के पास पहुंची  अपनी कोख में धरती ... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   3:18am 8 May 2013 #जीवन
Blogger: rajneesh
दर्पण झूठ ना बोले,पर दर्पण सच भी तो ना बोले दिखाता है दर्पण,सच का उतना ही छोर जो हो दर्पण के सामने,और हो दर्पण की ओर पर दाएँ की जगह बायाँ,और बाएँ की जगह दायाँदिखता है कुछ उल्टा , ये है दर्पण की माया दर्पण के पीछे का सच,क्या कभी दर्पण दिखाता हैइसके पीछे चले जाने से,सामने का क्... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   3:05am 3 May 2013 #महाभारत
Blogger: rajneesh
( साल भर पुरानी कविता पुन: पोस्ट कर रहा हूँ )बहता है पसीनातब सिंचती है धरती जहां फूटते है अंकुर और फसल आती है बहता है पसीना तब बनता है ताज जिसे देखती है दुनियाऔर ग़ज़ल गाती है बहता है पसीना तब टूटते है पत्थर चीर पर्वत का सीना राह निकल आती हैबहता है पसीना तब बनता है मंदि... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   7:46am 1 May 2013 #उम्र
Blogger: rajneesh
इस दिन ना हो चाकरी,ना हो कोई काम Iसंडे के दिन बैठ कर,घर पर करो आराम II1II छह दिन चक्की पीसते,ज्यों कोल्हू का बैल Iखटते थकपक जात हैं,निकल जात है तेल II2II  छह दिन भागमभाग है,घटता जाता है जोश । संडे कब हैं पूछते,हो जाते हैं बेहोश II3IIहर हफ्ते में एक बार,पल आनंद का आय Iसंडे आंखे खोल जब,नज़र ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   2:22am 28 Apr 2013 #संडे
Blogger: rajneesh
सेब जब भी  पेड़ से टूटकर गिरासबने उसे स्वीकारा वो हर बार जमीं पर मिला  पर ये देख एक हुआ बेहालउसने सेब से किया सवाल तुम नीचे ही क्यों हो आते  तुम ऊपर क्यूँ नहीं जाते    सेब का उत्तर था कमालहल हो गया था बड़ा सवालउस शख्स की सेब पर नज़र क्या गईसेब फिर भी गिरते रहे पर दुनिया बदल ग... Read more
clicks 198 View   Vote 0 Like   9:26pm 25 Apr 2013 #सवाल
Blogger: rajneesh
हवा में हरदम ऊंचा उड़ता  है कभी जमीं पर चलकर देख,फूलों का हार पहन इतराता है कभी कांटे सर  रखकर देख,दौलत और दावतें उड़ाता  है कभी जूठन चखकर देख,बस पाने की जुगत ही करता है कभी कुछ अपना  खोकर देख,अपनी जीत के लिए  खेलता हैकभी औरों के लिए हारकर देख,  जो  नहीं उसके लिए ही रोता है ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   1:30am 24 Apr 2013 #रास्ता
Blogger: rajneesh
तेरी पायल की छन छन से खिल जाती हर शाम तेरी ज़ुल्फों के साये में रंगीन हो जाती हर शाम वक़्त भी करता दुआ कुछ पल थम जाने की तेरे यहाँ होने पर सुरमई हो जाती हर शाम .....रजनीश ( 21.04.2013)... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   10:29am 21 Apr 2013 #दुआ
Blogger: rajneesh
पहाड़ों से निकलकर पानीजमीन पर पूरा नहीं पहुंचता नीचे आते-आते पी जाती पानी जड़ें पेड़ों की कुछऔर फंसी हुई टीस की तरह रहता जमा गड्ढों में कुछबोया पूरा वो नहीं है मिलता चुग जाती है चिड़िया कुछ तपती दुपहरी ख़्वाब अधूरेखिलता हुआ सूख जाता कुछ  हर बीज नहीं बनता है पौधा मरतीं ... Read more
clicks 221 View   Vote 0 Like   5:31pm 1 Apr 2013 #प्यार
Blogger: rajneesh
है सूरज निकल पूरब से जाता हर रोज़ पश्चिम की ओरपानी लिए नदियां हर पलहैं मिलती रहती सागर मेंबादल बरस बरस करकरते रहते हैं वापसजो धरती से लिया,हर साल हरी हरी चादरेंढँक लेती है धरती को इक बारएक नृत्य हर वक्तचलता रहता हैसंगीत की लहरों पर बदलते रहते हैं पत्तेऔर बदलते पेड़ भी... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   5:34pm 13 Mar 2013 #खुशबू
Blogger: rajneesh
राह तो बस राह है उसे आसां या मुश्किल बनाना  इंसान का खेल है तकदीर तो बस तकदीर  है उसे बिगाड़ना या  बनाना इंसान का खेल हैपत्थर  तो बस पत्थर  है पत्थर को भगवान बनाना इंसान का खेल है फूल तो बस फूल है फूल  सेज़ या सिर पर चढ़ाना  इंसान  का खेल है यार तो बस यार हैं यार को जात  रं... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   3:23pm 3 Mar 2013 #प्यार
Blogger: rajneesh
सपनों की फेहरिस्त लिए रोज़ चली आती है रात गुजार देते है उसे, ढूंढते फेहरिस्त में अपना सपना कुछ तारों को तोड़ रात कल सोये साथ लेकर हम  गुम हुए सुबह की धूप में जैसे गया था बचपन अपना हर गली से गुजरते जाते हैं  लिए हाथों में तस्वीर अपनी अपनों के इस वीरान शहर में बस ढूंढते ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:02pm 26 Feb 2013 #रास्ता
Blogger: rajneesh
सवाल....इस बात का है किहर बात पर क्यूँ है एक सवालसवाल ....ये बड़ा है किक्या है सबसे बड़ा सवालसवाल ....ये उठता है किसब क्यों उठाते हैं सवालसवाल ....ये पैदा होता है किक्यूँ पैदा होता है सवालसवाल ....ये है किजवाब में क्यूँ होते हैं सवालसवाल ....ये बनता है किखत्म क्यूँ  नहीं होते सवालसव... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   3:00am 19 Feb 2013 #सवाल
Blogger: rajneesh
क्या बस कहने से आ जाएगा इंकलाब क्या मोमबत्तियों में कहीं छुपा है इंकलाब क्या एक जगह जुट जाने से आ जाएगा क्या बाज़ार में मिलती कोई चीज़ है इंकलाब क्या किसी घर में छुपा है इंकलाब क्या चंद लोगों का गुलाम है इंकलाब क्या सब कुछ तोड़ देने पर मिल जाएगा क्या बस चेहरा बदल लेना है ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:23pm 22 Jan 2013 #इंकलाब
Blogger: rajneesh
हे सूर्य ! तुम्हारी किरणों से,दूर हो तम अब, करूँ पुकार ।बहुत हो गया कलुषित जीवन,अब करो धवल  ऊर्जा संचार ।सुबह, दुपहरी हो या साँझ,फैला है हरदम अंधकार ।रात्रि ही छाई रहती है,नींद में जीता है संसार ।तामसिक ही दिखते हैं सब,दिशाहीन  प्रवास सभी ।आंखे बंद किए फिरते हैं...निशाचरी व... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:30pm 13 Jan 2013 #
Blogger: rajneesh
एक रोशनी बुझते बुझते एक आग दे गई दरिंदगी से लड़ती एक आवाज़ दे गई खो गई कहीं आसमां मेंइक राह दे गईहैवानियत ख़त्म करने की एक चाह दे गईजूझती रही बिना थके दुनिया हिला गई अत्याचार से लड़ने कई दिल मिला गई ना खत्म हो ये जज़्बा ये सैलाब रुक ना जाए इक शहादत से जली ये मशाल बुझ न पाए...... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   4:19pm 5 Jan 2013 #मशाल
Blogger: rajneesh
बस जाने वाला है इक सालबस आने वाला है इक सालचढ़ गई एक और परतवक़्त की हर तरफ़कुछ सूख गए पेड़ों औरकुछ नई लटकती बेलों मेंबस कुछ खट्टी मीठी यादेंबाकी सब , पहले जैसा ही  हालबस जाने वाला है इक सालबस आने वाला है इक सालएक बारिश सुकून कीधो गई कुछ ज़ख़्म इस बरसकुछ अरमान ठिठुरते रहे... Read more
clicks 206 View   Vote 0 Like   5:35am 16 Dec 2012 #सवाल
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