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दुनिया रंग रंगीली

हर बार कौडियों के भाव बिक जाता है उसका अनाज ...दिन - रात के खूबसूरत सपने पल भर में धाराशाही हो जाते हैं ...उसके कपडे से उठती वो मिटटी की गंधकही जाकर खो जाती है ...वो जीवित होकर भी एक जिन्दा लाशबन जाते हैं ...अपनी मेहनत का सही दाम न मिलानाउनके मंसूबें में पानी फेर देते हैंवो अपने ...
दुनिया रंग रंगीली...
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  May 10, 2012, 10:24 pm
 मुस्कान ही हमेशा कुछ नहीं कहती |आवाज से हर बात बयाँ नहीं होती |अहसास आंसूंओं से भी बयाँ होते हैं |उनकी भी अपनी एक जुबाँ होती है |मन को गुदगुदाती खुशी हो ...या हताश के हों पल |आशा की आहट हो या ...फिर आकांशा की हो धमक |भय से डरकर ...या सुख में रमकर ...हृदय की गोद से ...एक बूंद आँखों में आत...
दुनिया रंग रंगीली...
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  May 2, 2012, 7:09 pm
कौन जाने , कब , कहाँ वो राह भूल जाएँ |अपनी उमीदों की शमां को जलाये रखिये |बारिशे तो आती है तूफ़ान गुजर जातें हैं |अपने पाँव को जमीं में जमा कर रखिये |घर की ये बात है निकले न घर से बाहर |आप बस खिड़की दरवाजों को बंद रखिये |बैठे रहे कोहनी टिकाये गाल पर कब तलक |इंतज़ार में दरवाजें की...
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  April 18, 2012, 2:41 pm
आज फिर तुम्हे सपने में देखा मैंने ...इस बार भी तुम्हे छुने की ख्वाइश सी हुई |आज फिर बहुत मुश्किल से खुद को रोका |इस बीच हवस के सिवा कुछ भी नहीं |कभी मिलो जिस्म से अलग कही मुझे |जहाँ न तुम और न ही मैं रहूँ ...एक दूजे के अहसास का सिर्फ जल तरंग बजे |ये इजहारे और इकरारे वफा अच्छा हो...
दुनिया रंग रंगीली...
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  April 14, 2012, 3:50 pm
कई राहगीर गुजरे थे उस राह से ...खुले बदन भूख से वो ...कराहता था वहाँकुछ आह भरकर ,कुछ दीन - हिन कहकर आगे भी निकलते थे |पर रूककर हाल पूछने न कोई पास था गया |एक साया बढकर ...पलभर रुका जरुर था |जिसे देख बच्चे की आँखों में एक सपना था सजा ...सोचा चलो आज उसे अपनी भूख को जाहिर करने का जरिय...
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  March 20, 2012, 2:03 pm
 बस छोटी सी एक इल्तजा है तुमसे ...कुछ देर पंछी बन...उड़ने की मोहलत मुझे दे दो |कभी चाँद में छुप जाऊ |कभी बादल में समा जाऊ |बस छोटी सी ये ख्वाइशपूरी मेरी कर दो |जो मैं रच दूँ कोई सरगमतो बेहिचक गीत रचने का होंसला मुझे दे दो |तपती रेत में जब जलने लगे पैर मेरे ...तो निरंतर बढते रहने क...
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  March 18, 2012, 2:17 pm
बादलों में आज फिर एक शोर हुआ |बादल बारिश बन धरा से मिलने उतरी | रिमझिम बूंदों के कोमल स्पन्दन से ...धरा की कोख में फिर एक अंकुर फुटा |सुन्दर कोमल कली के जन्म के साथ ...माँ ने सुन्दर एक रचना को आकर दिया |प्यार , दुलार और संरक्षण पाकर |पौधे ने अब पेड़ का है रूप लिया  |फल , फूल छाया को ...
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  March 12, 2012, 5:41 pm
रंगों कि फुहार हैबसंती रुत कि बहार है |कोयल भी देखो गा रहीरह - रहकर राग मल्हार है |दिशाओं से गूंज रहाता - ता थैया का ताल है |हर आलम  है थिरक रहाप्रभु कि लीलाओं का चमत्कार है |हिरणों कि मस्त छलांग मेंकस्तूरी पाने कि आस है |सूरज कि निश्छल किरणों में ,एक अपनेपन का अहसास है |झरनों ...
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  March 6, 2012, 6:24 pm
शामें गम अब और कटती नहीं है तेरे बिन |बज़्म में विरानियाँ लगने लगी है तेरे बिन |तन्हाइयों में भी अक्सर तेरा साथ है रहता |ख्यालों में हरपल हलचल रहती है तेरे बिन |मिलो फुर्सत से कि हम उदास हैं तेरे बिन |नहीं कटती अब ये तन्हां सी रात तेरे बिन |तेरे अहसास में अब पहली सी बात न रही |...
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  February 25, 2012, 12:46 am
आ उड़ा ले चल पवनफिर मुझे उस गलियारे |माँ कहते हैं जिसेउसका वो स्पर्श दिलवाने |वो रहती है जहाँउस देश का पता बतलाने  |मैं हो जाऊ  फनासिर्फ उस एक झलक के बहाने |अहसास है मुझेउसके हर अलग सी छुवन का |कभी काली , कभी दुर्गाकभी सरस्वती रूप था उसका |आज भी वो मेरेख्यालों कि नगरी में है ...
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  February 23, 2012, 8:59 am
पलपल दिल को अब करार आ रहा है |जमाना हमको हमसे मिलवा  रहा है |कश पे कश प्यार का चढ़ाए जा रहे हैं |दिल का गुबार धुएं में उडाये जा रहे हैं |कश्तियाँ खोल दी सबने अपने खेमें से |तूफानों से लड़ना उनको सिखला रहे हैं |कितनी भी गमगिनियाँ हो राहे वफा में |जश्ने जिंदगी अब सब मनाये जा रहे...
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  February 17, 2012, 10:52 am
आलीशान  महलों कि चाहत मेंहम दीवारों से बातें करने लगे |मेज , कुर्सी का साथ पाकर हीखुद को धनवान समझने लगे |अपनों के साथ से थोड़े थके - थकेओरों से  दिल कि बात करने लगे |ये कैसी नई चाहत का दौर चलाकि  रिश्ते अब कमजोर पड़ने लगे |इतनी बैचेनियाँ क्यु भरे  खुद मेंकि जीना ही  मुहाल ल...
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  February 15, 2012, 9:41 am
नदी चल रही है देखोसागर में समाने |कली खिल रही हैफिर से भवरों को रिझाने |सूरज ले रहा अंगडाईसुबह का भान करवाने  |काली रात ने ओडी चादरचांदनी के बहाने |बादल भी गरजा फिरसेइंसा कि प्यास बुझाने |खेत लहलहाए हर दिल किउम्मीद जगाने |मौन धडकने कुछ संभलीमाहोल  बनाने |कही चुप रहकरतो क...
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  February 13, 2012, 10:04 am
हकीकत में सुकूने जिंदगी कैसी है होती ...भूखे बच्चे को एक निवाला खिलाकर देखो |न हो अगर दिल को फिर भी कोई अहसास ...टपकते उन आंसूंओं कोथोडा महसूस करके देखो |तन - मन में जो बस रहा हैएक मीठा सा सुकून ...अब खुदा कि रहमत कोखुद में बसाकर देखो |मंदिर मस्जिद में जाने किअब जरूरत कैसी ...बच्...
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  February 8, 2012, 11:55 am
वीणा के सुमधुर झंकार पर |थरथराते लबों कि आवाज पर |                  एक गज़ल गा रही है जिंदगी |             सुनों न कुछ सुना रही है जिंदगी |चाँद अपनी चांदनी समेटता हुआ |सूरज भी किरणों को बिखेरता हुआ |                   एक दीप जला रही है जिंदगी |                   एक दीप बुझा रही है जिंदगी |सो रही है शाम जग...
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  February 2, 2012, 9:59 am
खुली आँखों से जब देखाजिंदगी भुरभुरा रेत काएक टीला सा लगी जो कभी बहुत गर्मतो कभी ठंडी हो जातीकभी लहरें बहा ले जातीतो कभी तेज आंधियांअपने संग उड़ा ले जातीउस  रेगिस्तान कि तरहजहां सिर्फ धसनाऔर सिर्फ धसना हैहरपल  हाथ से फिसलता हुआरिश्तों कि मजबूत डोरजिसे थामे रहतीलहरो...
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  January 30, 2012, 8:36 am
हर बज्म में बैठे और खुदको साबित भी कर लिया |फिर भी रही शिकायत की  हमको कुछ नहीं मिला |चोखट को अपनी छोड़कर अरमान दिल में ले चले |पर इतने बड़े जहां में भी कोई अपना सा न मिला |दिल थाम कश्ती को तूफान के हवाले था कर दिया |सागर के गर्भ में उतर कर भी हमें कुछ नहीं मिला |काली अँधेरी  रा...
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  January 27, 2012, 10:58 am
कब हुई विमुख मैं अपने किसी कर्तव्य से |बह रही हूँ आज भी कल - कल के उसी वेग से |बच - बच के आज भी चलती पत्थरों के प्रहार से ... |कर रही हूँ सबका पोषण आज भी उसी सम्मान से |ऊँचे - ऊँचे पर्वतों कोभेंद्ती में चल रही |कठिन रास्तो को पार कर आगे ही आगे बढ़ रही |कभी चंचल , कभी कलकल कभी भयावह र...
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  January 7, 2012, 7:56 pm
जानते थे वो न रहेगा साथमेरे इस छोटे से  घरोंदे मेंफिर भी उसकी खातिरदरवाजे थे खोल दिए मैंने |वो चलता रहा दूर तकअपनी ही खुमारी मेंलुटाता रहा खुद कोवक्त का रूप धर - धरकर |कर चूका था वादासफर में साथ चलने काबहुत रोया अहसासे जुदाई कोयाद करकर के  |हाँ था दिल में  प्यारइसलिए कुछ क...
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  December 31, 2011, 9:54 am
मौसम न जाने क्या , साजिश है कर रहा  |हर तरफ घनी रात का , दामन पसर रहा |चाँद की चांदनी भी ,  मध्यम है पड़ रही  |मानो कोहरे की , अब बारात निकल रही |आसमान में बादल ऐसे , बन - बिगड रहें |हमसे कोई बात कहने को हों वो तरस रहे |महसूस होने लगी वही , सिरहन की रात है |बारिशों के पाँव बंधी घुंघरुओं ...
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  December 14, 2011, 11:13 am
आँगन की खोज थी मकान मिल गया |नया शहर तो बिन आँगन के बन गया |देखो घर कितनी जल्दी है सिमट गया |रिश्तों की गर्माहट को भी न सह सका |झरोखों से अब कोई यहाँ झांकता  नहीं |झत जैसी चीज़ का तो नामोनिशां नहीं |अपने - अपने जेल में सब कैद हुए है ऐसे |अपने गुनाह की सजा सब मंजूर हो जैसे |बाहर की ...
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  December 12, 2011, 11:24 am
वो गुनगुनाती  गज़ल , वो मदहोश  रातें  |तेरे - मेरे मिलन की , वो दिलकश बातें   |न तुमने कहा और , न कुछ हम कह सके |ख़ामोशी में गुजरी , तमाम रगिन सदाएं  |सोचा था रात का , हर एक लम्हा चुरालूं  |उसको पिरोकर फिर , एक गजरा बनाऊं |तेरे गेसुओं को , महकते फूलों से सजाकर |हो जाऊं फ़िदा , फिर तेरी ह...
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  December 10, 2011, 8:56 am
बिन पानी मछली , तडपती है जैसे  |भूख से तडपती है वैसे , रूहे गरीबी  |इंसा की ,  इंसानियत को परखकर  ,डूबती नाव की आस , लगाती है गरीबी  |सागर में ज्वार जैसे , हिलोरे है लेता |वैसे पेट में आग , लगाती है गरीबी |जुबाँ तो हरदम उसके , साथ है रहती |पर जुबाँ से कुछ न , कह पाती गरीबी  |पेट की आग जब , ...
दुनिया रंग रंगीली...
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  December 8, 2011, 10:41 am
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