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Blog: दुनिया रंग रंगीली

Blogger: minakshi pant
हर बार कौडियों के भाव बिक जाता है उसका अनाज ...दिन - रात के खूबसूरत सपने पल भर में धाराशाही हो जाते हैं ...उसके कपडे से उठती वो मिटटी की गंधकही जाकर खो जाती है ...वो जीवित होकर भी एक जिन्दा लाशबन जाते हैं ...अपनी मेहनत का सही दाम न मिलानाउनके मंसूबें में पानी फेर देते हैंवो अपने ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   4:54pm 10 May 2012 #
Blogger: minakshi pant
 मुस्कान ही हमेशा कुछ नहीं कहती |आवाज से हर बात बयाँ नहीं होती |अहसास आंसूंओं से भी बयाँ होते हैं |उनकी भी अपनी एक जुबाँ होती है |मन को गुदगुदाती खुशी हो ...या हताश के हों पल |आशा की आहट हो या ...फिर आकांशा की हो धमक |भय से डरकर ...या सुख में रमकर ...हृदय की गोद से ...एक बूंद आँखों में आत... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   1:39pm 2 May 2012 #
Blogger: minakshi pant
कौन जाने , कब , कहाँ वो राह भूल जाएँ |अपनी उमीदों की शमां को जलाये रखिये |बारिशे तो आती है तूफ़ान गुजर जातें हैं |अपने पाँव को जमीं में जमा कर रखिये |घर की ये बात है निकले न घर से बाहर |आप बस खिड़की दरवाजों को बंद रखिये |बैठे रहे कोहनी टिकाये गाल पर कब तलक |इंतज़ार में दरवाजें की... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   9:11am 18 Apr 2012 #
Blogger: minakshi pant
आज फिर तुम्हे सपने में देखा मैंने ...इस बार भी तुम्हे छुने की ख्वाइश सी हुई |आज फिर बहुत मुश्किल से खुद को रोका |इस बीच हवस के सिवा कुछ भी नहीं |कभी मिलो जिस्म से अलग कही मुझे |जहाँ न तुम और न ही मैं रहूँ ...एक दूजे के अहसास का सिर्फ जल तरंग बजे |ये इजहारे और इकरारे वफा अच्छा हो... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:20am 14 Apr 2012 #
Blogger: minakshi pant
कई राहगीर गुजरे थे उस राह से ...खुले बदन भूख से वो ...कराहता था वहाँकुछ आह भरकर ,कुछ दीन - हिन कहकर आगे भी निकलते थे |पर रूककर हाल पूछने न कोई पास था गया |एक साया बढकर ...पलभर रुका जरुर था |जिसे देख बच्चे की आँखों में एक सपना था सजा ...सोचा चलो आज उसे अपनी भूख को जाहिर करने का जरिय... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   8:33am 20 Mar 2012 #
Blogger: minakshi pant
 बस छोटी सी एक इल्तजा है तुमसे ...कुछ देर पंछी बन...उड़ने की मोहलत मुझे दे दो |कभी चाँद में छुप जाऊ |कभी बादल में समा जाऊ |बस छोटी सी ये ख्वाइशपूरी मेरी कर दो |जो मैं रच दूँ कोई सरगमतो बेहिचक गीत रचने का होंसला मुझे दे दो |तपती रेत में जब जलने लगे पैर मेरे ...तो निरंतर बढते रहने क... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   8:47am 18 Mar 2012 #
Blogger: minakshi pant
बादलों में आज फिर एक शोर हुआ |बादल बारिश बन धरा से मिलने उतरी | रिमझिम बूंदों के कोमल स्पन्दन से ...धरा की कोख में फिर एक अंकुर फुटा |सुन्दर कोमल कली के जन्म के साथ ...माँ ने सुन्दर एक रचना को आकर दिया |प्यार , दुलार और संरक्षण पाकर |पौधे ने अब पेड़ का है रूप लिया  |फल , फूल छाया को ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   12:11pm 12 Mar 2012 #
Blogger: minakshi pant
रंगों कि फुहार हैबसंती रुत कि बहार है |कोयल भी देखो गा रहीरह - रहकर राग मल्हार है |दिशाओं से गूंज रहाता - ता थैया का ताल है |हर आलम  है थिरक रहाप्रभु कि लीलाओं का चमत्कार है |हिरणों कि मस्त छलांग मेंकस्तूरी पाने कि आस है |सूरज कि निश्छल किरणों में ,एक अपनेपन का अहसास है |झरनों ... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   12:54pm 6 Mar 2012 #
Blogger: minakshi pant
शामें गम अब और कटती नहीं है तेरे बिन |बज़्म में विरानियाँ लगने लगी है तेरे बिन |तन्हाइयों में भी अक्सर तेरा साथ है रहता |ख्यालों में हरपल हलचल रहती है तेरे बिन |मिलो फुर्सत से कि हम उदास हैं तेरे बिन |नहीं कटती अब ये तन्हां सी रात तेरे बिन |तेरे अहसास में अब पहली सी बात न रही |... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   7:16pm 24 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
आ उड़ा ले चल पवनफिर मुझे उस गलियारे |माँ कहते हैं जिसेउसका वो स्पर्श दिलवाने |वो रहती है जहाँउस देश का पता बतलाने  |मैं हो जाऊ  फनासिर्फ उस एक झलक के बहाने |अहसास है मुझेउसके हर अलग सी छुवन का |कभी काली , कभी दुर्गाकभी सरस्वती रूप था उसका |आज भी वो मेरेख्यालों कि नगरी में है ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   3:29am 23 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
पलपल दिल को अब करार आ रहा है |जमाना हमको हमसे मिलवा  रहा है |कश पे कश प्यार का चढ़ाए जा रहे हैं |दिल का गुबार धुएं में उडाये जा रहे हैं |कश्तियाँ खोल दी सबने अपने खेमें से |तूफानों से लड़ना उनको सिखला रहे हैं |कितनी भी गमगिनियाँ हो राहे वफा में |जश्ने जिंदगी अब सब मनाये जा रहे... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:22am 17 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
आलीशान  महलों कि चाहत मेंहम दीवारों से बातें करने लगे |मेज , कुर्सी का साथ पाकर हीखुद को धनवान समझने लगे |अपनों के साथ से थोड़े थके - थकेओरों से  दिल कि बात करने लगे |ये कैसी नई चाहत का दौर चलाकि  रिश्ते अब कमजोर पड़ने लगे |इतनी बैचेनियाँ क्यु भरे  खुद मेंकि जीना ही  मुहाल ल... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   4:11am 15 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
नदी चल रही है देखोसागर में समाने |कली खिल रही हैफिर से भवरों को रिझाने |सूरज ले रहा अंगडाईसुबह का भान करवाने  |काली रात ने ओडी चादरचांदनी के बहाने |बादल भी गरजा फिरसेइंसा कि प्यास बुझाने |खेत लहलहाए हर दिल किउम्मीद जगाने |मौन धडकने कुछ संभलीमाहोल  बनाने |कही चुप रहकरतो क... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   4:34am 13 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
हकीकत में सुकूने जिंदगी कैसी है होती ...भूखे बच्चे को एक निवाला खिलाकर देखो |न हो अगर दिल को फिर भी कोई अहसास ...टपकते उन आंसूंओं कोथोडा महसूस करके देखो |तन - मन में जो बस रहा हैएक मीठा सा सुकून ...अब खुदा कि रहमत कोखुद में बसाकर देखो |मंदिर मस्जिद में जाने किअब जरूरत कैसी ...बच्... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   6:25am 8 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
वीणा के सुमधुर झंकार पर |थरथराते लबों कि आवाज पर |                  एक गज़ल गा रही है जिंदगी |             सुनों न कुछ सुना रही है जिंदगी |चाँद अपनी चांदनी समेटता हुआ |सूरज भी किरणों को बिखेरता हुआ |                   एक दीप जला रही है जिंदगी |                   एक दीप बुझा रही है जिंदगी |सो रही है शाम जग... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   4:29am 2 Feb 2012 #
Blogger: minakshi pant
खुली आँखों से जब देखाजिंदगी भुरभुरा रेत काएक टीला सा लगी जो कभी बहुत गर्मतो कभी ठंडी हो जातीकभी लहरें बहा ले जातीतो कभी तेज आंधियांअपने संग उड़ा ले जातीउस  रेगिस्तान कि तरहजहां सिर्फ धसनाऔर सिर्फ धसना हैहरपल  हाथ से फिसलता हुआरिश्तों कि मजबूत डोरजिसे थामे रहतीलहरो... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   3:06am 30 Jan 2012 #
Blogger: minakshi pant
हर बज्म में बैठे और खुदको साबित भी कर लिया |फिर भी रही शिकायत की  हमको कुछ नहीं मिला |चोखट को अपनी छोड़कर अरमान दिल में ले चले |पर इतने बड़े जहां में भी कोई अपना सा न मिला |दिल थाम कश्ती को तूफान के हवाले था कर दिया |सागर के गर्भ में उतर कर भी हमें कुछ नहीं मिला |काली अँधेरी  रा... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:28am 27 Jan 2012 #
Blogger: minakshi pant
कब हुई विमुख मैं अपने किसी कर्तव्य से |बह रही हूँ आज भी कल - कल के उसी वेग से |बच - बच के आज भी चलती पत्थरों के प्रहार से ... |कर रही हूँ सबका पोषण आज भी उसी सम्मान से |ऊँचे - ऊँचे पर्वतों कोभेंद्ती में चल रही |कठिन रास्तो को पार कर आगे ही आगे बढ़ रही |कभी चंचल , कभी कलकल कभी भयावह र... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   2:26pm 7 Jan 2012 #
Blogger: minakshi pant
जानते थे वो न रहेगा साथमेरे इस छोटे से  घरोंदे मेंफिर भी उसकी खातिरदरवाजे थे खोल दिए मैंने |वो चलता रहा दूर तकअपनी ही खुमारी मेंलुटाता रहा खुद कोवक्त का रूप धर - धरकर |कर चूका था वादासफर में साथ चलने काबहुत रोया अहसासे जुदाई कोयाद करकर के  |हाँ था दिल में  प्यारइसलिए कुछ क... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   4:24am 31 Dec 2011 #
Blogger: minakshi pant
मौसम न जाने क्या , साजिश है कर रहा  |हर तरफ घनी रात का , दामन पसर रहा |चाँद की चांदनी भी ,  मध्यम है पड़ रही  |मानो कोहरे की , अब बारात निकल रही |आसमान में बादल ऐसे , बन - बिगड रहें |हमसे कोई बात कहने को हों वो तरस रहे |महसूस होने लगी वही , सिरहन की रात है |बारिशों के पाँव बंधी घुंघरुओं ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   5:43am 14 Dec 2011 #
Blogger: minakshi pant
आँगन की खोज थी मकान मिल गया |नया शहर तो बिन आँगन के बन गया |देखो घर कितनी जल्दी है सिमट गया |रिश्तों की गर्माहट को भी न सह सका |झरोखों से अब कोई यहाँ झांकता  नहीं |झत जैसी चीज़ का तो नामोनिशां नहीं |अपने - अपने जेल में सब कैद हुए है ऐसे |अपने गुनाह की सजा सब मंजूर हो जैसे |बाहर की ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   5:54am 12 Dec 2011 #
Blogger: minakshi pant
वो गुनगुनाती  गज़ल , वो मदहोश  रातें  |तेरे - मेरे मिलन की , वो दिलकश बातें   |न तुमने कहा और , न कुछ हम कह सके |ख़ामोशी में गुजरी , तमाम रगिन सदाएं  |सोचा था रात का , हर एक लम्हा चुरालूं  |उसको पिरोकर फिर , एक गजरा बनाऊं |तेरे गेसुओं को , महकते फूलों से सजाकर |हो जाऊं फ़िदा , फिर तेरी ह... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   3:26am 10 Dec 2011 #
Blogger: minakshi pant
बिन पानी मछली , तडपती है जैसे  |भूख से तडपती है वैसे , रूहे गरीबी  |इंसा की ,  इंसानियत को परखकर  ,डूबती नाव की आस , लगाती है गरीबी  |सागर में ज्वार जैसे , हिलोरे है लेता |वैसे पेट में आग , लगाती है गरीबी |जुबाँ तो हरदम उसके , साथ है रहती |पर जुबाँ से कुछ न , कह पाती गरीबी  |पेट की आग जब , ... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   5:11am 8 Dec 2011 #
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