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लालित्यम्

*               भ्रमण के लिये बाहर न जा पाऊँ तो साँझ घिरे ,अपने ही  बैकयार्ड में टहलना अच्छा लगता है . ड्राइव वे तक, मज़े से सवा-सौ  कदम हो जाते है दोनो ओर से ढाई सौ - काफ़ी है कुछ चक्कर लगाने के लिये.धुँधळका छाया होता है ,ऊपर आकाश में तारे ,या चाँद के बढ़ते-घटते टुकड़े...
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  July 13, 2018, 9:57 am
*अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं-  आपकी तारीफ़ ? भला कोई अपने मुँह से अपनी तारीफ़ करता है?अब क्या-क्या कहूँ अपने बारे में, मुझे तो शरम आती है.फिर भी बताना तो पड़ेगा ही  .लेकिन  तारीफ़ नहीं ,असलियत ही कुबूलूँगा.हाँ, मैं हरफ़नमौला आदमी हूँ .बहुत काम कर-कर के छोड़ चुका . कुछ पढ़ा...
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  May 19, 2018, 10:31 am
 कहाँ शक्कर और कहाँ गुड़ ! एक रिफ़ाइंड, सुन्दर, खिलखिलाकर बिखर-बिखर जाती, नवयौवना , देखने में ही संभ्रान्त, सजीली शक्कर और कहाँ गाँठ-गठीला, पुटलिया सा भेली बना गँवार अक्खड़  ठस जैसा गुड़?पर क्या किया जाय पहले उन्हीं बुढ़ऊ को याद करते हैं लोग. इस चिपकू बूढ़-पुरान के चक्...
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  May 14, 2018, 10:05 am
*कुछ दिन पहले 104 साल के बॉटनी और इकोलॉजी के प्रख्यात वैज्ञानिक डेविड गुडऑल ने ऑस्ट्रेलिया में अपने घर से विदा ली और अपनी ज़िंदगी ख़त्म करने के लिए दुनिया के दूसरे छोर के लिए रवाना हो गए.उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं है लेकिन वे अपने जीवन का सम्मानजनक अंत चाहते हैं. उनका कह...
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  May 5, 2018, 8:39 pm
शप्त मानवता के  विषम व्रण माथे पर लिये मैं,अश्वत्थामा ,युगान्तरों से  भटक रहा हूँ .चिर-संगिनी है  वह अहर्निश पीर जिसकी यंत्रणा से विकल ,मैं वहाँ से भागा था .कितना लंबा विरामहीन जीवन जी आया ,अनगिनती पीढ़ियों को  बनते-बिगड़ते देखा .कितने युगों का साक्षी  मेरा मौन अभ...
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  March 18, 2018, 7:13 am
*हिन्दी भाषा में परम्परा से चले आते कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका ,समय के प्रवाह और परिस्थितियों के फेर में , अपने पूर्व अर्थ से बहुत अपकर्ष हो चुका है.सामाजिक परिवर्तनों और सांस्कृतिक अवमूल्यन के कारण शब्द भी अपनी व्यञ्जना शक्ति और प्रभावशीलता खो कर सामान्य और रूढ़ हो जाते ह...
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  December 26, 2017, 7:11 am
भारतीय जन-मानस में श्रीकृष्ण की छवि ईश्वर का पूर्णावतार होने के साथ परम रसिक नायक एवं प्रेम तथा करुणा के आगार के रूप में विद्यमान है .अपनी रुचि के अनुसार उसे इन दोनों के अलग-अलग अनुपातों में ढाल लिया जाता है.इन्हीं दोनों का गहरा आवरण उनके कठोर चुनौतियों भरे जीवन की वास...
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  October 28, 2017, 8:34 am
*डॉ. प्रतिभा सक्सेना एक ऐसा नाम है जिनके नाम से जुड़े हैं उत्कृष्ट खण्ड-काव्य, लोक गीत, हास्य-व्यंग्य, निबंध, नाटक और जुड़ी हैं कहानियाँ, कविताएँ तथा बहुत सारी ब्लॉग रचनाएँ. विदेश में रहते हुए भी हिन्दी साहित्य की सेवा वर्षों से कर रही हैं. बल्कि यह कहना उचित होगा कि चुपचाप स...
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  October 2, 2017, 8:25 pm
श्री सलिल वर्मा द्वारा कृष्ण-सखी - एक प्रतिक्रिया ,पर मैं जो कहना चाहती हूँ -कृष्ण -सखी का यह मूल्यांकन ऐसा लगा जैसे पूरी तरह रचना के गहन में प्रविष्ट होकर सम्यक् दृष्टि को साक्षी बना कर क्रम-बद्ध आकलन किया गया हो .रचनाकार के साथ जुड़ कर अंतरंग का ,और सजग-सचेत मस्तिष्क से ब...
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  September 26, 2017, 9:44 pm

एक विज्ञापन -Shivna PrakashanAugust 24 at 9:08pm · वरिष्ठ प्रवासी कथाकार प्रतिभा सक्सेना द्वारा कृष्ण तथा द्रोपदी पर लिखा गया उपन्यास कृष्ण सखी शिवना प्रकाशन के जुलाई-अगस्त में प्रकाशित होने वाले सेट के अंतर्ग..वरिष्ठ प्रवासी कथाकार प्रतिभा सक्सेना द्वारा कृष्ण तथा द्रोपदी पर लिखा ग...
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  September 5, 2017, 9:56 pm
एक ज्ञापन -Shivna PrakashanAugust 24 at 9:08pm · वरिष्ठ प्रवासी कथाकार प्रतिभा सक्सेना द्वारा कृष्ण तथा द्रोपदी पर लिखा गया उपन्यास कृष्ण सखी शिवना प्रकाशन के जुलाई-अगस्त में प्रकाशित होने वाले सेट के अंतर्ग..वरिष्ठ प्रवासी कथाकार प्रतिभा सक्सेना द्वारा कृष्ण तथा द्रोपदी पर लिखा गया...
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  September 5, 2017, 9:56 pm
               *                 इंसानी कारस्तानियों से तो अब सारी दुनिया पनाह माँगने लगी है .एक छोटा सा उदाहरण अभी हाल ही में सामने आया है.अमेरिका का, अपनी विविधता के लिये विख्यात येलोस्टोन नेशनल पार्क , जो इतना विशाल है कि  तीन राज्यों में - मोंटाना,व्य...
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  August 15, 2017, 11:13 pm
Suryakant Madhav Karandikar की वाल से -*"उरुग्वे "* एक ऐसा देश है , जिसमे औसतन हर एक आदमी के पास 4 गायें हैं ... औरपूरे विश्व में वो खेती के मामले में नम्बर वन की पोजीशन में है ...सिर्फ 33 लाख लोगों का देश है और 1 करोड़ 20 लाख 🐄 गायें है ...हर एक 🐄 गाय के कान पर इलेक्ट्रॉनिक 📼 चिप लगा रखी है ......
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  August 8, 2017, 5:27 am
*रात्रि आधी से अधिक बीत चुकी थी ,हमलोगों को लौटने में बहुत देर हो गई थी ,उस कालोनी में अँधेरा पड़ा था.कारण बताया गया को कि रात्रि-चर और वन्य-प्राणी भ्रमित न हों इसलिये रोशनियाँ बंद कर दी गई हैं.मन आश्वस्त हुआ .पिछले दिनों एक समाचार बहुत सारे प्रश्न जगा गया था-  ऋतु-क्रम मे...
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  July 29, 2017, 11:34 pm
जन्म से लेकर मृत्यु तक हम वस्त्रों में ही लिपटे रहते हैं.वस्त्र-विन्यास का यह तीसरा युग है . पहला युग - प्राकृतिक उपादानों से निर्मित बाह्य तत्वो से शरीर के संरक्षण के लिये,दूसरा - फ़ैशन के लिये .परिधानों  का चयन - .रुचिपूर्ण ढंग से अच्छा लुक देकर सजाने,दिखाने के लिये .इसी...
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  July 20, 2017, 7:33 am
* बड़ी तेज़ गति से  चलते चले जाना  -  वांछित तोष तो मिलता नहीं ,ऊपर से मनः ऊर्जा का क्षय !तब लगता है क्यों न अपनी मौज में रमते हुये पग बढ़ायें ; वही यात्रा सुविधापूर्ण बन ,आत्मीय-संवादों के आनन्द में चलती रहे ......उस छोर की अनिवार गति और विदग्ध अति  से मोह-भंग के बाद ,सहृद...
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  July 8, 2017, 5:53 am
*बाहर लान में खुलनेवाली हमारी खिड़की के शेड तले एक भूरी चिड़िया ने घोंसला बनाया है.अब तो अंडों में से बच्चे निकल आये हैं .चिड़िया दूर तक उड़ कर उनके लिये चुग्गा लाती है और वे चारो उसके आते ही चीं-चीं कर अपनी चोंचें बा देते हैं.मैंने  थोड़ा दाना-पानी यहीं पास में रख दिया .प...
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  June 19, 2017, 10:46 am
*बाहर लान में खुलनेवाली हमारी खिड़की के शेड तले एक भूरी चिड़िया ने घोंसला बनाया है.अब तो अंडों में से बच्चे निकल आये हैं .चिड़िया दूर तक उड़ कर उनके लिये चुग्गा लाती है और वे चारो उसके आते ही चीं-चीं कर अपनी चोंचें बा देते हैं.मैंने  थोड़ा दाना-पानी यहीं पास में रख दिया .प...
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  June 19, 2017, 10:46 am
* बाह्य संसार से जब कोई परेशान हो जाता है, उबरने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता   तो उस झींकन के साथ  उसके अंतःचक्षु खुलने लगते हैं.नई-नई बातें सूझती हैं॒. अगर कहें सहज ज्ञान उत्पन्न होने लगता है तो भी गलत न होगा. नवोत्पन्न  ज्ञान बाह्य जगत की अनेक गर्म-ठंडी स्थितियों ...
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Tag :ग्राहिनी पतियाय.
  May 6, 2017, 9:32 am
*     हे अपार करुणामय अमिताभ बुद्ध ,क्षमा करना -मैं एक मंद-मति  नारी हूँ, जो नर के समान  सहज मानव के रूप में तुम्हें भी स्वीकार्य नहीं थी. तुम्हारा सद्धर्म  मेरे  लिये निषिद्ध रहा ,और जब महाप्रजापति गौतमी के आग्रह पर स्त्रियों को  प्रवेश दे कर इस धर्म ने जो कुठार...
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Tag :ऊर्ध्वीकरण
  March 20, 2017, 8:50 pm
  *बहुत समय बाद कबीर भारत आये  तो  देश में अंगरेजी की शान देख कर चकित हो गये  .गुण-गान सुनते रहे  .... कैसा साहित्य -कैसी अधिकारमयी, ज्ञन-विज्ञान के क्षेत्र में में सबसे बढ़ी-चढी दुनिया की निराली  भाषा - पढ़नेवाले का दिमाग़ भी झक्क कर देती है . जानने  की इच्छा बलवत...
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  January 30, 2017, 11:13 am
*शाम को जब भ्रमण पर निकलती हूँ तो  बहुत लोगआते-जाते मिल जाते हैं.अधिकतर फ़ोन कान से सटाये बोलते-सुनते चलते जाते हैं ,अपने आप में मग्न .सामना हो गया तो हल्का-सा हाय उछाल दिया या सिर हिलाने से ही काम चल जाता है . ऐसा भी  नहीं लगता कि जरूरत आ पड़ने पर अनायास चलती-फिरती बात हो ...
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  January 13, 2017, 11:32 am
*यहाँ अमेरिका में लोग जिस तरह अंग्रेज़ी बोलते हैं,कभी-कभी सिर के ऊपर से निकल जाती है. रोज़ शाम को टहलने निकलती हूँ.अड़ोस-पड़ोस में कोई साथ का नहीं ,अकेले जाती हूँ .बहुत लोग निकलते हैं . रोज़ राह चलते लोगों से साबका पड़ता है . अधिकतर उसी समय टहलने निकलनेवाले परिचित चेहरे -...
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  November 13, 2016, 6:58 am
  *'नानी ,काँ पे हो...?''कौन है ?'अनायास मेरे मुँह से निकला,महरी बोली,'आपकी नतनी ,और कौन ?'वैसे मैं जानती हूँ कौन आवाज़ लगा रहा है.और कौन हो सकता है इतना बेधड़क !पहले चिल्ला कर पूछती है ,पता लगते ही दौड़ कर चली आती है.नानी के हर काम में दखल देना जैसे उसका जन्म-सिद्ध अधिकार हो. सोच ...
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  October 15, 2016, 6:23 am
नवरात्र !कानों में गूँजने लगता है -'यो मां जयति संग्रामे, यो मे दर्प व्यपोहति ।यो मे प्रति-बलो लोके, स मे भर्त्ता भविष्यति ।।'- बात दैहिक क्षमता की  नहीं - देहधर्मी  तो पशु होता हैं ,पुरुष नहीं . साक्षात् महिषासुर ,देवों को जीतनेवाले सामर्थ्यशाली शुंभ-निशुंभ उस परम नारी...
लालित्यम्...
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  October 1, 2016, 9:12 pm
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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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