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Blog: लालित्यम्

Blogger: Pratibha Saksenas
राग-विराग 15."भौजी, भौजी हो . . . कहाँ गईं? . . देखो तो तुम्हारे लिये क्या आया है?"साड़ी के पल्ले से भीगे हाथ पोंछती रत्नावली आते-आते बोली, "बड़े उछाह में हो देवर जी, ऐसा क्या ले आये हो?"देखा, दुआरे नन्ददास खड़े, दोनों हाथों में ग्रंथ सँभाले, रत्ना की गति में वेग आ गया, "तैय्यार हो गई! व... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   11:03pm 11 Jul 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 *जब भी नन्ददास का इधर चक्कर लगता है, भौजी के हाल-चाल लेना नहीं भूलते. जानते हैं दद्दू के समाचार पाने को वे भी व्याकुल होंगी. देवर होने का अपना फ़र्ज़ बख़ूबी निभा रहे हैं. यही चाहते हैं उनकी कुछ सहायता कर सकें.इस बार उन्होंने रत्नावली के पीहर की बात छेड़ दी. पूछा, "अच्छा भौज... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   10:04pm 12 Jun 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
जीवन की लंबी यात्रा कर  वे रामबोला से तुलसी(दास) और तुलसी से गोस्वामी तुलसीदास तक की दूरी तय कर चुके थे .अनेक ग्रंथों का प्रणयन कर लोक में प्रसिद्धि पा चुके थे. उनका व्यक्तित्व यों भी प्रभावशाली था ,गौरवर्ण ,सुगठित लंबी काया अनोखा पाण्डित्य और समर्थ अभिव्यक्ति! वे मितभ... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   5:12pm 23 May 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 राग-विराग - 11.अनेकों अवान्तर कथाओं द्वारा रोचकता बढ़ाने के साथ नई-नई जानकारियां देते हुए तुलसीदास का  कथा-क्रम चलने लगा था. बीच-बीच में गाये जानेवाली उनकी स्वरचित स्तुतियाँ और आत्म-निवेदन सुन कर श्रोतागण मुग्ध हो जाते. उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी.लोक ने उन्हें स... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   1:13am 8 May 2021 #
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*                  उस दिन हड़बड़ा कर तुलसीदास बड़े भिनसारे ही काशी से निकल पड़े थे. अंतर्मन से पुकार उठ रही थी - 'हे राम , अपनी शरण में ले लो!' 'अपने ऊपर बस नहीं रह गया. कुछ सोचना चाहता हूँ कुछ ध्यान में चला आता है. मन थिर नहीं होता, कहाँ-कहाँ भटक जाता है .'ऐसा उचाट मन ले ... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   3:32am 29 Apr 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*वापसी में रत्ना बहुत चुप-चुप थी . नन्ददास बत करने का प्रयत्न करते, तो हाँ,हूँ में उत्तर दे देती.वे उसकी मनस्थिति समझ रहे थे..कुछ देर चुप रह कर उन्होंने नया विषय छेड़ा -'क्यों भौजी,तुम्हारे पिता ने तुम्हारी शिक्षा पर खूब ध्यान दिया?'रत्नावली उनकी ओर देखने लगी'वैसे तो लोग ल... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   2:46am 7 Apr 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
राग-विराग - 8.*उस दिन रत्नावली ने कहा था ,'मै हूँ न तुम्हारे साथ.' 'हाँ, तुम मेरे साथ हो.'पर यहाँ आकर वे हार जाते हैं .अपनी बात कैसे कहें? नहीं, नहीं कह सकते.रत्नावली से किसी तरह नहीं कह सकते मन में बड़े वेग से उमड़ता है - 'यहाँ मैं कुछ नहीं कर सकता .मैं नितान्त लाचार हूँ. जिस ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   3:33am 25 Mar 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*जब से रत्ना ने तुलसी का सन्देश पाया है,मनस्थिति बदल गई है.कागज़ पर सुन्दर हस्तलिपि में अंकित वे गहरे नीले अक्षर जितनी बार देखती है. हर बार नये से लगते हैं .'रतन समुझि जिन विलग मोहि ..'  -,नन्हा-सा सन्देश  रत्ना के मानस में उछाह भर देता है, मन ही मन दोहराती है.  फिर-फिर पढ़त... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   12:42am 9 Mar 2021 #
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6..नन्ददास तुलसी से काशी में प्रायः ही भेंट करते रहते थे.'कुछ दिन टिक  कर एक स्थान पर रहो दद्दू, आराम रहेगा और लिखने-पढ़ने में भी सुविधा रहेगी.''समाज की वास्तविक दशा को जाने बिना लिखना उद्देश्यपूर्ण कैसे हो सकता है नन्दू? तीर्थयात्रा करता ही इसलिये  हूँ कि देश के सुद... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   6:15pm 24 Feb 2021 #
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 छोटे मियाँ सुभान अल्लाह. बचपन  में मेरा बेटा कुछ ज़्यादा ही अक्लमन्द था..बाल की खाल निकाल देता था. एक बार उसकी एक चप्पल कहीं इधर-उधर हो गई ,वह एक ही चपप्ल पहने खड़ा था.मैने देखा तो कहा अच्छा एक ही पहने हो दूसरी खो गई ? और हमलोग इधऱ-उधर डूंढने लगे.उसके पापा ने आवाज़ लगाई , '... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   1:08am 23 Feb 2021 #
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 *हिमाचल-पुत्री गंगा, शिखरों से उतर उमँगती हुई सागर से मिलने चल पड़ती है. लंबी यात्रा के बीच मायके की याद आती है तो मानस लहरियाँ उस ओर घूम जाती हैं.  इस स्थान पर आकर उन्होंने दक्षिण से उत्तर की ओर  प्राय: चार मील का घुमाव लिया है. परम पुनीता, उत्तरमुखी सुसरिता के इसी उमड... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   6:13pm 9 Feb 2021 #
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* जब श्रीराम लंका विजय कर अयोध्या लौट रहे थे, उनके प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे, भरत जी ने सोचा कि उनका राज्य उन्हें अर्पण कर अब यथाशीघ्र भार-मुक्त हो जाऊं. गुरु वशिष्ठ की सहमति से , वे राम जी के राज्याभिषेक की व्यवस्था मे लग गए.भरत जी ने गुरु से उस अवसर पर सभी देवी-देव... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   9:22pm 30 Jan 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
['मोइ दीनों संदेस पिय, अनुज नंद के हाथ।रतन समुझि जनि पृथक मोहि, जो सुमिरत रघुनाथ।।'                              - रत्नावली]*      *     *      *     *     *     *'कैसी अद्भुत जोड़ी!'विवाह समय सब ने कहा था कैसी अद्भुत जोड़ी- जैसे वर-कन्या के वेष में स्व... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   6:13pm 8 Jan 2021 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 विरागजिस राह को उतावली में पार कर तुलसी रत्नावली से मिलने उसके पीहर जा पहुँचे थे, उसी पर ग्लानि-ग्रस्त,यंत्र-चलित से पग बढ़ाते  लौटे जा रहे हैं. अपने आप से पूछते हैं-  कोरी आसक्ति थी ?    एक दिन उसे नहीं देखा तो बिना सोचे -विचारे अधीर-आकुल सा  दौड़ा चला गया. क्या कहत... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   2:25am 10 Dec 2020 #
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 विरागजिस राह को उतावली में पार कर तुलसी रत्नावली से मिलने उसके पीहर जा पहुँचे थे, उसी पर ग्लानि-ग्रस्त,यंत्र-चलित से पग बढ़ाते  लौटे जा रहे हैं. अपने आप से पूछते हैं-  कोरी आसक्ति थी ?    एक दिन उसे नहीं देखा तो बिना सोचे -विचारे अधीर-आकुल सा  दौड़ा चला गया. क्या कहत... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   2:25am 10 Dec 2020 #
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  हमारी नातिन बड़ी सफ़ाई पसन्द है . एक बार की बात है मेरा कंघा नहीं मिल रहा था.वह बोली,'नानी मेरा ले लीजिये .' 'ढूँढ रही हूँ.अभी मिल जायेगा,जायेगा कहाँ !' 'मुझे पता है आप किसी के कंघे से बाल नहीं काढतीं .मेरा बिल्कुल साफ़ रखा है .आपने उस दिन ब्रश से साफ़ किया था ,तब से वैसा ह... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   4:11am 19 Nov 2020 #
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                इधर क्लोनिंग के विषय में बहुत कुछ सुनने में आ रहा है .वनस्पतियाँ तो थीं ही अब ,जीव-जन्तुओं पर भी प्रयोग हो रहे हैं और सफलता भी मिल रही है. क्लोनिंग की बात से मन में कुछ उत्सुकता और कुछ शंकायें उत्पन्न होने लगीं . एक कोशिका से संपूर्ण का निर्माण? शरीर ... Read more
clicks 193 View   Vote 0 Like   6:02am 15 Nov 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 एक समाचार(बात पुरानी है ) - 'आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने परीक्षा में नकल करने के आरोप में पांच जजों को निलंबित कर दिया है. वारंगल जिला स्थित काकतीय विश्वविद्यालय के आर्ट कॉलेज में 24 अगस्त को मास्टर ऑफ लॉ [एलएलएम] की परीक्षा के दौरान अजीतसिम्हा राव, विजेंदर रेड्डी, एम. किस... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   4:29am 8 Nov 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 (पिछली पोस्ट 'व्यामोह'के तारतम्य में -) मनस्विनी रत्ना ,जिस सुहाग पर मायके में इठलाती थी,उसकी विलक्षण विद्वत्ता-वाग्मिता,का दम भरती थी उसके कथा-वाचन के अर्थ-गांभीर्य पर गर्व करती थी, आदर्शवाद पर फूलती थी,जिसे मान्य-पुरुष मान कर निश्चिंत थी आज वही  सारी मर्यादायें त... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   12:43am 28 Oct 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 *पहले एक पहेली बूझिये फिर आगे की बात -'कोठे से उतरीं, बरोठे में फूली खड़ीं.'इन फूलनेवाली महोदया का तो कहना ही क्या!(इन पर एक पूरा पैराग्राफ़ लिखना अभी बाकी है).  बीत गए वे दिन जब घरों में भोजन बनाना जैसे कोई नित्य का आयोजन होता था.किसी विशेष अवसर पर तो अनुष्ठान जैसा. सुर... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   3:29am 15 Oct 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*       तमसाकार रात्रि . घनघोर मेघों से घिरा आकाश, दिशाएँ धूसर, रह रह कर मेघों की  गड़गड़ाहट और गर्जना के साथ,बिजलियों की चमकार. वर्षा की झड़ियाँ बार-बार छूटी पड़ रही हैं. जल-सिक्त तीव्र हवाएँ रह-रहकर कुटिया का द्वार भड़भडा देती हैं.   अचानक बिजली चमकी और घोर गर्जन... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   12:25am 9 Oct 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
इन कोरोनाकुल दिनों में, में मुझे क्रोचे की बड़ी याद आ रही है. कितने हल्के-फुल्के लिया था हमने इस महान् आत्मवादी दार्शनिक को! पर अब पग-पग पर इसके अभिव्यंजनावाद की महिमा देख रही हूँ.यों भी इस कोरोना-काल जब व्यक्ति अपने आप में सिमट-सा गया है, उसकी आत्मानुभूति प्रखर होती जा र... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:15pm 29 Sep 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
इन कोरोनाकुल दिनों में मुझे क्रोचे की बड़ी याद आ रही है. कितने हल्के-फुल्के लिया था हमने इस महान् आत्मवादी दार्शनिक को! पर अब पग-पग पर मुझे क्रोचे की बड़ी याद आ रही है. कितने हल्के-फुल्के लिया था हमने इस महान् आत्मवादी दार्शनिक को! पर अब पग-पग पर इसके अभिव्यंजनावाद की महि... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   11:37pm 22 Sep 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
* खुले आकाश की झरती रोशनी में नहाए, ये कृतार्थ क्षण और मेरा कृतज्ञ मन - लगता है नारी-जीवन का प्रसाद पा लिया मैंने!कितनी नई फ़सलें फूली-फलीं मेरे आगे ,पुत्री में  पहली बार अपना अक्स  पाया था.आज, वही मातामही बन गई - और  नवांकुर को दुलराने का प्रसाद पा लिया मैंने.अपनी नि... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   9:03pm 1 Jul 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
* खुले आकाश की झरती रोशनी में नहाए, ये कृतार्थता  के क्षण और मेरा कृतज्ञ मन - लगता है नारी-जीवन का प्रसाद पा लिया मैंने!कितनी नई फ़सलें फूली-फलीं मेरे आगे ,पुत्री में  पहली बार अपना अक्स  पाया था.आज, वही मातामही बन गई - और  नवांकुर को दुलराने का सुख तन्मय मानस में सम... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   9:03pm 1 Jul 2020 #
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