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Blog: शिप्रा की लहरें

Blogger: Pratibha Saksenas
*दूर-दूर तक जाएँ ,मेरी मंगल कामनाएँ! कोई जाने , न जाने -तरल तरंगों सी प्रतिध्वनि ,सब अपनो में जगाएँ !मौसमी हवाओं सँग मेरे सँदेसे शुभ ऊर्जा जगाते ,आनन्द-उछाह भरें, मन में उजास जगा, दूर करें मलिन छायाएँ!सदिच्छा के सूक्ष्म बीज नेह-गंधमय फसल उगाते ,हर बरस  चतुर्दिक् ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   2:59am 1 Jan 2020 #
Blogger: Pratibha Saksenas
बिलकुल नही सो पाती ,यों ही बिलखते ,कितने दिन हो गए ! झपकी आते ही चारों ओर  वही भयावह घिर आता है -नींद के अँधेरे में अटकी मैं,पिशााचों का घेरा  .  बस में खड़ी बेबस  झोंके खाती देह ,  आगे पीछे,इधऱ से उधर से ,उँगलियाँ कोंचते ज़हर भरी फुफकार छोड़ते बार-बार .सिमटती द... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   2:15am 2 Dec 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*यही है मेरा अपना देश ,विश्व में जिसका नाम विशेष,धार कर विविध रूप रँग वेष, महानायक यह भारत देश. सुदृढ़ स्कंध, सिंह सा ओज, सत्य से दीपित ऊँचा भाल,प्रेम-तप पूरित हृदय-अरण्य, बोधमय वाक्,रुचिर स्वरमाल.वनो में बिखरा जीवन-बोध,उद्भिजों का अनुपम संसार,धरा पर जीवन का विस्तार सभी ज... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   5:38pm 25 Sep 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*मु्क्त छंद सा जीवन ,अपनी लय  में  लीन , अपने तटों में बहता रहे स्वच्छंद .न दोहा, न चौपाई - बद्ध कुंड हैं जल के.कुंडलिया छप्पय? बिलकुल नहीं -ये हैं फैले ताल ,भरे हुए जहाँ के तहाँ , वैसे के वैसे .मैं ,धारा प्रवाह,छंद - प्रास - मात्रा प्रतिबंध से मुक्त,मनमाना बहतीतरल-सरल .कहीं ... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   12:53am 23 Sep 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*कैसा परचा थमा दिया  इस परीक्षा कक्ष में ला कर तुमने !प्रश्न ,सारे अनजाने  अजीब अनपहचाने, विकल्प कोई नहीं . नहीं पढ़़ा, यह कुछ पढ़़ा नहीं मैंने,उत्तर कहाँ से लाऊं?*प्रश्नपत्र आगे धरे बैठे रहना है कोरी कापी - कलम समेटे समय का घंटा बजने तक.*चक्कर खाता सिर क... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   9:56pm 1 Aug 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*श्रद्धाञ्जलि ?ओह -अंजलि भर फूल सिर झुका कर  गिरा देनामन का गुबार शब्दों में बहा  देना ,गंभीरता ओढ़ माथा झुका देना -  हो जाती है श्रद्धञ्जलि ?नहीं ,तुम्हारे प्रति मन-बचन -कर्म से  ,शब्दों में अर्पितयह ज्ञापन है ,हमारी  अंजलि में ,कि दायित्व सिर्फ़ तुम्हारा नहीं  ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   4:18am 18 Feb 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*नहीं ,आँसू नहीं ,आग है !धधक उठा अंतस् रह-रह उठती लपटें ,कराल क्रोध-जिह्वाएँ रक्तबीज-कुल का नाश,यही है संकल्प .बस !शान्ति नहीं ,चिर-शान्त करना है  सारा भस्मासुरी राग.यह रोग ,रोज़-रोज़ का चढ़ता बुख़ार ,यह विकार ,मिटाना है जड़-मूल से .नहीं मिलेगी शान्ति, कहीं नहीं ,जब तक ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:46pm 15 Feb 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
विसर्जन के फूल*फूल उतराते रहे दूर तक, महासागर के अथाह जल में.  समा गये संचित अवशेषकलश से बिखर हवाओं से टकराते,सर्पिल जल-जाल में विलीन हो गए .*अपार सिंधु कीउठती-गिरती लहरों मेंओर- छोरहीन,अनर्गल पलों में परिणत,बिंबित होते  बरस- बरस,जैसे अनायास पलटने लगेंएल्बम के पृष... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   1:27am 5 Feb 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*ब्लागर बंधु-बांधवियों को ,सादर-सप्रेम -ले अपना हिस्सा, निकल चुका है विगत वर्ष ,यह आगत लाये शान्ति और सौहार्द मित्र,इस विश्व पटल पर  मंगल-मंत्र उचार भरेंमानवता रच दे , जय-यात्रा के  भव्य-चित्र!हम-तुम, प्रसाद पायें  सुरम्य संसार रहे ,हिल्लोलित होता रहे  हृदय ले नवल हर्... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   3:34am 1 Jan 2019 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 *घर आँगन में चहकते,माटी की गंध सँजोयेवे महकते शब्द,कहाँ खो गये !सिर-चढ़े विदेशियों की भड़कीली भीड़ में , अपने जन कहाँ ग़ायब हो गये ! धरती के संस्कारों में रचे-बसे ,वे मस्त-मौलाकैसे चुपचाप गुम गये !*लौट आओ प्रिय शब्दों ,पीढ़ियों की निजता के वाहक,सहज अपनत्व भरे तुम,जो जो... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   12:54am 8 Dec 2018 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*बीतते जाते प्रहर निःशब्द ,नीरवनाम लेकर कौन अब आवाज़ देगा!खड़ी हूँ अब रास्ते पर मैं थकी सी पार कितनी दूरियाँ बाकी अभी हैं.बैठ जाऊँ बीच में थक कर अचानकअनिश्चय से भरी यह  मुश्किल घड़ी है.जब कि ढलती धूप का अंतिम प्रहर होकौन आकर साथ चलने को कहेगा.कंटकों के जाल- ओझल डगर ढूँ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   4:42am 15 Nov 2018 #
Blogger: Pratibha Saksenas
* बोला था नये साल से चलता हुआ वर्ष -जाते-जाते यह उचित लगा ओ मीत, तुम्हें कर दूँ सतर्क. मैं भी था अतिथि ,एक दिन तुम सा ही आदृत,ऐसे ही चाव कोलाहल-सँग पाया था मैंने भी स्वागतसत्कार-सँवार-उछाह देख मैं भी था मगन, परम पुलकित अपने आने  की धूम-धाम से कौन नहीं होता प्रमुदित,इतन... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   2:36pm 3 May 2018 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*      सबकी चीत भलाई प्यारे ,तेरा राम रखैया, कहाँ टिका जीवन का पानी लहर लहरती कहती,चलता आना-जाना उड़ते पत्ते उड़ते पत्ते नदिया बहती जड़-जंगम को नाच नचावे नटखट रास-रचैया .जो बीजा सो काटेगा रे  कह गये बूढ़ पुरनिया,चक्कर काटेगा कितने ही  यही रहेगी दुनिया. स्वारथ ह... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:30pm 9 Mar 2018 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*कृष्ण ,तुम्हारे श्री-चरणों में , मेरे  गुण औ दोष समर्पित !जनम भटकते बीता,अब बस इतना करो कि मिटें द्विधायें,यह गठरी अब  तुम्हीं सँभालो,  करो वही जो तुम्हें सुहाये ,किया-धरा सब तुम्हें सौप  हों जायें राग-विराग विसर्जित !क्षमता इतनी दो कि निभा जाऊं जो कुछ हिस्से में आया... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   6:08am 9 Feb 2018 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*जब नये साल से बोला चलता हुआ वर्ष -जाते-जाते यह उचित लगा ओ मीत, तुम्हें कर दूँ सतर्क - मैं भी था अतिथि ,एक दिन तुम सा ही आदृत,,ऐसे ही चाव कोलाहल सँग मैने भी पाया था स्वागतअपने आने के उत्सव में मैं भी था मगन परम पुलकित अपने आने पर की धूम-धाम से कौन नहीं होता प्रमुदित, सोचा थ... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   4:28pm 11 Jan 2018 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*    नया संवत्सर खड़ा है द्वार-देहरी ,एक शुभ संकल्प की आशा लगाये .अर्थ का विस्तार कर सर्वार्थ कर दोआत्म का घेरा बढ़ा परमार्थ कर दो,बूंद-बूंद भरे, कृतार्थ समष्टि -सागरत्रिक् वचन-मन-कर्मयुत संकल्प धर दो !दिग्भ्रमित मति ,नये मंगल-आचरण का भाष्य पाये !*- प्रतिभा. ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:35am 31 Dec 2017 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*हड्डी चिंचोड़ने की आदत अपने  बस में कहाँ  कुत्तों के .मांस देख ,मुँह से टपकाते लारवहीं मँडराते ,सूँघते .तप्त मांस-गंध से हड़कीलालसा रह-रह,आँखों में  लपलपाती , अाकुल पंजे रह-रह काँपते ,टूट पड़ते मौका देख . बाप ,भाई, फूफा, मामा ,चाचा ,रिश्ते ,बेकार सारे .बताओ ,बेटी-बहन ... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   3:51am 11 Dec 2017 #
Blogger: Pratibha Saksenas
( अपनी मित्र कल्पना की एक कविता यहाँ प्रस्तुत करने का लोभ नहीं संवरण कर पा रही हूँ. - प्रतिभा. )* मैं नहीं रोई , तुम्हारा दृष्टि भ्रम होगा.अचानक यों उमड़ कर क्यों  हृदय  आवेग धारेगा,किसी भी भावना के बस, उचित-अनुचित विचारेगामनस् की चल तरंगों का सरल उपक्रम रहा होगा. तुम्... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   5:15am 20 Aug 2017 #
Blogger: Pratibha Saksenas
.*चल रे हर सिंगार तुझे मैं साथ ले चलूँ. चंदन कुंकुंम धारे तरु डालों पर जगतीं दीप शिखाएँ  ,संध्या के रोशमी पटों में शीतल सुरभित श्वास समायेइस जीवन से माँग-जाँच कर थोड़ा-सा मधुमास ले चलूँयह उल्लास भरा उत्सव-क्रम मधुवर्षी लघुतम जीवन का किसी  प्रहर को रँग से भऱ  दे , उ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:29am 14 Aug 2017 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*कूड़े के ढेर परबिखरा पड़ा कितना सामान,किसी ज्योनार का फिंका खाना तमाम.जूठन लगी पेपर प्लेटें,पिचकी बोतलें, गिलास,पालिथीन की ,मुड़ी-चुड़ी थैलियाँ .और बहुत-कुछ एक  साथ.मक्खियों के संगमँडराती खट्टी-सी गंध.*दो बच्चे ,उम्र आठ-दस बरस ,कंधे पर झोली टाँगे ,छडी़ से मँझा रहे हैं... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   12:33am 1 Jul 2017 #ज्योनार
Blogger: Pratibha Saksenas
* थक गई है माँ , उम्र के उतार पर लड़खड़ाती, अब समय के साथ चल नही पाती . बेबस काया परबड़प्पन का बोझ लादे,झुकी जा रही है माँ. *त्याग के, गरिमा के ,पुल बाँधे,  चढाने बैठे हैं लोग पार नहीं पाती,  घिसी-गढ़ी मूरत देख अपनी जड़ सी हो जाती मा्ँ, दुनिया के रंग बूझती च... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   8:06pm 4 Jun 2017 #झुराती
Blogger: Pratibha Saksenas
हे ,भगवान  !तूने उसे माँ होने का वरदान दिया , अच्छा किया . सृष्टि का तारतम्य चला . तूने विशिष्ट बनाया  नारी को  यहीं से शुरू हो गया दोहन ,दाँव चढ़ गया सारा जीवन . * करती रही धर्म मान मातृत्व का निर्वहन. पलते-समर्थ होते पकड़ते अपनी राह . रह जाती ढलती - छीजती,&nbs... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   5:34am 17 May 2017 #
Blogger: Pratibha Saksenas
 बेटी ,माँ बनती है जबसमझ जाती है.अब तक,माँ से सिर्फ पाती रही थी -लाड़-चाव,रोक-टोक नेह के उपचार, विकस कर कली से फूल बन सके.देखती  व्यवहार, जीने के  ढंग ,माँ थोड़ी मीठी,थोड़ी खट्टी. समझदार हो जाती है बेटी ,माँ बन कर .बहुरूपिया है माँ ,कितने रूप धरती है, पढ़ लेती सबके मन ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   9:40pm 14 May 2017 #
Blogger: Pratibha Saksenas
*ब्राह्मी से उद्भव ले विकसे जो देवनागरी के आखऱ, अक्षर अक्षरशः सार्थक हैं, पीढ़ी-पीढ़ी का वैभव भर. यह परम-ज्ञान संचय की लिपि, रच आदि-काव्य गरिमा मंडित.ऋषि-मुनियों की संस्कृति संचित, हो विश्व निरामय संकल्पित.मानव वाणी का यह चित्रण, धारे सारे स्वर औ'व्यंजन , अवयव सम्मत ... Read more
clicks 180 View   Vote 0 Like   6:43pm 19 Apr 2017 #ग्रथित
Blogger: Pratibha Saksenas
*स्त्रियाँ भी रोग झेलती हैं ,बूढ़ी होती , मर जाती हैं .कुछ नहीं कहतीं;सब की सुख-सुविधा का दायित्व निभाते ,एक दिन ,चुपचाप संसार से बिदा हो जाती हैं.*सुहागिन मरी:बड़े भागोंवाली थी,(क्वाँरी के भागों सुहागिन मरती है न!)विधवा मरी: चलो छुट्टी हुई. कुँवारी मरी: अरे ,एक बोझ हटा सिर... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   6:31pm 8 Apr 2017 #भतार
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