![]() अधिकार सार्वभौमिक सत्ता सर्वत्र प्रभुत्व सदा विजय सबके द्वारा अनुमोदन मेरी अधीनता सब हो मात्र मेरा कर्तव्य गुलामी दायित्व ही दायित्व झुका शीश हो मात्र तुम्हारा मेरे हर अधीन ... Read more |
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May 20, 2013, 12:26 am |
![]() डॉगी और कुत्ते में के फरक होवे है- लघु कथा मिश्रा साहब के बंगले पर माली का काम करने वाला बुद्धू पौधों की सिचाई कर रहा था .आज उसके साथ उसका पांच वर्षीय बेटा दीपू भी आया था .दीपू बगीचे के ... Read more |
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May 19, 2013, 10:44 pm |
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May 19, 2013, 8:45 pm |
![]() प्यारे मित्रो नमस्कार कल रात अहमदाबाद का कवि-सम्मेलन बहुत ही शानदार तरीके से संपन्नहो गया . जैन समाज के इस विशेष मंच पर मेरे साथी कवि अब्दुल गफ्फार,अशोक चारण, प्रकाश नागौरी और मन... Read more |
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May 19, 2013, 6:07 pm |
![]() प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,प्रणाम !बेहद गर्मी पड़ने लगी है अभी जब बुलेटिन लगाने बैठा तो डेशबोर्ड गर्मी के मारे तप रहा था ... इस लिए सोचा क्यों न थोड़ा किंछाव किए देता हूँ ... कम से कम आज की बुलेटि... Read more |
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May 19, 2013, 5:48 pm |
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सिर्फ किसानों, मजदूरोंऔर ग़रीबों के बस की हैयह प्रचण्ड धूप !यह तन झुलसाती लू और गर्म हवाएं ...!क्योंकि वे जानते हैं धूप का तीखापन संकेत हैभरपूर बारिश का ....बारिश का पर्... Read more |
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May 19, 2013, 5:03 pm |
![]() एक स्त्री अपने होने की जंग से कहीं ज्यादा लड़ती है, आदमी के लिए और उसके अस्तित्व को बचाए रखने की जद्दोजहद में अपनी पहचान को खो देती है, दरअसल जो सहअस्तित्व का भाव है वो दांपत्य के बोझ मे... Read more |
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May 19, 2013, 5:00 pm |
![]() फंसा बुकी जाल में हूँ,खिलाड़ी कमाल मै हूँ, पिच पे की घिचपिच ,घोटाला विराट है हरे हरे फील्ड पर ,कमाने को हरे नोट , हारने को किये फिक्स ,थोड़े स्पॉट है फेंक कर के नो बाल ,रन दो तो म... Read more |
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May 19, 2013, 4:56 pm |
![]() इश्क़-नाहक़ है मेरे ख़ाक़ में मिलने का सबबइक पतंगे की तरह आग में जलने का सबबतू कहे या न कहे कौन न समझेगा ये:तर्क-ए-उल्फ़त है तेरे रंग बदलने का सबबरात भर सो न ... Read more |
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May 19, 2013, 4:28 pm |
![]() मित्रों...! आज अपनी एक पुरानी बाल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ! जब गरमी की ऋतु आती है!लू तन-मन को झुलसाती है!!तब आता तरबूज सुहाना!ठण्डक देता इसको खाना!! यह बाजारों में बिकते हैं!फुटबॉलों जैस... Read more |
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May 19, 2013, 4:24 pm |
![]() दहेज़ की भयानक प्रथा के कारण भाशंवाज़ी के युग में बेटी को बोझ माँ कर उतनी सुविधा नहीं जितनी बेटे को | बेटे की हज़ार गलतियाँ माफ |बेटी को प्रताडना | निर्धन परिवार में तो बेटी होते ही शोक ... Read more |
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May 19, 2013, 4:12 pm |
![]() No ‘Assembly’ For WomenOnce again, Karnataka has an Assembly that has no women. What are the implications for legislation?By Christina Daniels May 9, 2013 6:14PMThe 2013 Assembly elections in Karnataka have generated tremendous national interest, not least of all because the first ever BJP government in South India was shown the door. But the elections that had a record 70.23% voter turnout, brought only six woman MLAs into the Assembly. And five of them are first-... Read more |
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May 19, 2013, 1:26 pm |
![]() "ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 26दो दोहे-व्याकुल मन माँ वसुंधरा ,करें करुण पुकार ,पर्यावरण के शोषण का ,बंद कर दो व्यापार .निसर्ग नियम पर ध्यान दे ,निसंशय मिले निस्तार ,मेरा जीवन ह... Read more |
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May 19, 2013, 1:12 pm |
![]() जाने कौन से उसूल लिये जा रहा हूँ मैं,अपनी खताओ को दोहरा रहा हूँ मैं ....सारी ख्वाहिशे सपने तमाम जाया हुये ,अपने ही फैसलों से पछता रहा हूँ मैं ...उस मासूम होठो की हँसी रोकती हैं कदम ,सदियों ... Read more |
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May 19, 2013, 12:54 pm |
![]() बहुत दिन हो गये। यों कह लीजिए एक लंबा अरसा, नन्हीं शुभी से कोई मुलाकात नहीं हुई। उसकी शरारतें भला कैसे भूली जा सकती हैं। उस दिन मिली तो छोटी सी मुस्कान बिखेर कर बोली कि कहां से आ रहे है... Read more |
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May 19, 2013, 12:45 pm |
![]() -डॉ. रुक्म त्रिपाठीमृग मरीचिका जल सदृश,लहर-लहर लहराय।हरिण भागता ही रहे,किंतु बूंद नहिं पाय।।पशु, पक्षी व्याकुल फिरें,नही जलाशय पास।चहुंदिशि सूखा ही दिखे,कैसे बुझेगी प्यास।।सिंह और... Read more |
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May 19, 2013, 12:35 pm |
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May 19, 2013, 12:10 pm |
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तीन दिन पहले समाचार था की एक महिला ने ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिये ब्रेस्ट की सर्जरी करवा ली . उस महिला की माँ को कैंसर था और महिला BRCA1 gene defect को अपने अन्दर रखती थी . इस दिफेक्टिवे जीन से क... Read more |
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May 19, 2013, 12:06 pm |
![]() डाइबिटीज अथवा शुगर एक ऐसी बीमारी है जो किसी को एक बार हो जाए तो लगातार एलोपेथिक दवाइयां लेनी पड़ती है और उसके बाद भी उससे छुटकारा दिला पाने में ये दवाइयां नाकाम रहती है ! आज में आपके सा... Read more |
![]() नहीं जानती कविता का अर्थशास्त्र गणित या भूगोल क्योंकि ना कभी समकालीनों को पढ़ा ना ही कभी भूत कालीनों को गुना फिर कैसे जान सकती हूँ उस व्याकरण को जहाँ भाषा में शिल्प हो सौन्दर्य हो... Read more |
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May 19, 2013, 10:54 am |
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